Tuesday, 28 January 2014

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office health


आफिस स्‍वास्‍थ्‍य
संगीत, व्‍यायाम और योग कामकाजी महिलाओं को रखता है तनाव से दूर
    नैंपिंग के फायदे
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     नींद के अलावा उंघना भी सेहत के लिए अच्‍छा होता है। क्‍या आप जानते हैं कि कुछ मिनट के लिए उंघने से आप तरोताज़ा महसूस करते हैं और यह बात वैज्ञानिक तौर पर सिद्ध हो चुकी है। कुछ देर झपकियां लेने के बाद, आप पूरे दिन के लिए रीचार्ज भी हो सकेंगे।

        आंखों से संबंधी भ्रम और तथ्‍य
 कंप्‍यूटर का इस्तेमाल करने का एक और अच्छा तरीका है कि आप हर एक घण्टे पर अपनी आंखों को थोड़ा आराम दें।

    कंप्‍यूटर प्रयोग और स्‍वास्‍थ्‍य
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आज की बदलती जीवनशैली में कंप्यूटर या लैपटाप का प्रयोग हमारी आवश्‍यकता है, इस बात को नकारा नहीं जा सकता।

    आंखों की सेहत जानें

    आंखों की सेहत के लिए खाने में ज्यादा नमक नहीं खाना चाहिए क्योंकि इससे आंखें कमजोर होती हैं।
    लोहे, तांबे व कांच के बर्तन में भोजन करने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।
    खाने में रोजाना शुद्ध घी का प्रयोग करना चाहिए। यह आंखों के लिए लाभकारी होता है।
    सुबह-सुबह मुंह में पानी भरकर बंद आंखों पर 20-25 बार ठंडे पानी के छींटे मारें। याद रखें, मुंह पर छींटे मारते समय या चेहरे को पानी से धोते समय मुंह में पानी भरा होना चाहिए।
    ऑफिस में लगातार कंप्यूटर पर नहीं बैठें बीच में थोड़ा ब्रेक लेकर 1-2 बार आंखें बंद कर, आंखों पर हल्के दबाव के साथ हथेलियों को रखकर आंखों को आराम देते रहें।
    शरीर पर तेल मालिश खासकर पैर के तलवे में मालिश से आंखों की रोशनी बढ़ती है।
    धूप से आने के तुरंत बाद चेहरे पर ठंडा पानी नहीं डालें। शरीर का तापमान सामान्य होने के बाद ही चेहरा धोएं। आंखों को गर्म पानी से नहीं धोना चाहिए।
    धूप में बाहर निकलने से पहले चश्‍मा जरूर लगाएं। इससे सूर्य की अल्ट्रावॉयलेट किरणें आंखों तक नहीं पहुंच पाती है।
    बहुत देर तक कम रोशनी में पढाई लिखाई नहीं करनी चाहिए। यह आंखों की सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। 
    रात को देर तक नहीं जगें और सूर्योदय के बाद देर तक सोना आंखों के लिए हानिकारक होता है। अगर आपको काम की वजह से देर रात तक जागना पड़े तो आधे-आधे घंटे में एक गिलास ठंडा पानी पी लेना चाहिए।
    अगर आपको नींद आ रही और आंखे बोझिल हो रहीं है तो ऐसे में देर तक नहीं जगें तुरंत सो जाएं।
    शरीर के दूसरे अंगों की तरह आंखों के लिए भी नियमित व्यायाम करें।
    आंखों के मेकअप के लिए सौंदर्य प्रसाधनों को चुनते समय हमेशा सावधानी बरतें।
    समय-समय पर आंखों के डॉक्टर से आंखों की जांच करवाते रहें।

आईए जानें कुछ ऐसे टिप्स जिनसे आप अपनी आंखों को सेहतमंद और खूबसूरत बनाए रख सकें।

    स्वच्छ और किटाणुरहित कार्यस्थल
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कार्यस्थल को खुला और हवादार बनाने के लिए कदम उठाने चाहिए क्योंकि यह ताज़ी हवा का स्त्रोत बनाए रखने में मदद करता है । स्वच्छ और किटाणुरहित कार्यस्थल के लिए निम्नलिखित बातों का समावेश होना चाहिए।

    आफिस में बैठने का सही तरीका
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आफिस एरगोनामिक्स आपको काम के आरामदायक तरीके समझने में मदद करती है । इससे तनाव, काम के दौरान घाव या असहज स्थिति की सम्भातवना कम होती  है ।

    की-बोर्ड भी बना सकता है बीमार
की बोर्ड का इस्‍तेमाल हम सब करते हैं, लेकिन क्‍या आप जानते हैं यही की-बोर्ड आपको बीमार भी बना सकता है। जानिये कैसे...

     लैपटॉप-टैबलेट न बन जाएं दर्द का सामान
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टेबलेट पर लंबे समय तो नजर गड़ाए रखने से आपकी गर्दन, सिर और कंधे प्रभावित होते है, जैसे-जैसे आपकी गर्दन नीचे झुकती जाती है, वैसे-वैसे तकलीफ़ बढ़ती जाती

    खान-पान में पौष्टिक आहार की कमी के कारण तनाव होना लाजमी है।
    ऑफिस जाने की तैयारी कर रही हैं तो ब्रेकफास्‍ट करना बिलकुल न भूलें।
    दिमाग को आराम देने के लिए एक घंटे में 10 मिनट का ब्रेक लीजिए।
    संगीत सुनने से आपके दिमाग को आराम मिलेगा और तनाव नहीं होगा।

कामकाजी महिलाओं की संख्‍या बढ़ रही हैं और वे नये कीर्तिमान भी स्‍थापित कर रही हैं। लेकिन महिलायें ऑफिस और घरवालों की देखरेख में खुद के स्‍वास्‍थ्‍य के प्रति लापरवाह भी हो जाती हैं। कार्यालय में काम के बोझ के कारण तनाव ज्‍यादा होता है।

लाइफस्‍टाइल का नकारात्‍मक असर सबसे ज्‍यादा स्‍वास्‍थ्‍य पर पड़ता है। खान-पान में पौष्टिक आहार की कमी के कारण तनाव होना लाजमी है। यदि आप नियमित दिनचर्या का पालन कर रही हैं तो काम के दौरान तनाव होने की संभावना कम होती है। इसके लिए जरूरी है मॉर्निंग वॉक और सुबह का नाश्‍ता। यदि आप इन तरीकों का पालन कर रही हैं तो ऑफिस में तनाव होने की संभावना भी कम होगी और आप फिट भी रहेंगी। आइए हम आपको ऑफिस में तनाव दूर करने के कुछ टिप्‍स बताते हैं।
ऑफिस में तनाव दूर करने के टिप्‍स

 ब्रेकफास्‍ट करके जायें
ऑफिस जाने की तैयारी कर रही हैं तो ब्रेकफास्‍ट करना बिलकुल न भूलें। सुबह का नाश्‍ता न केवल आपका पहला आहार होता है बल्कि यह आपको पूरे दिन ऊर्जावान रखता है। सुबह के नाश्ते में पूड़ी, पराठा न लें, इससे आलस्य आता है। नाश्ते में दूध के साथ ब्राउन ब्रेड, जैम या थोड़ा-सा मक्खन, मैंगो शेक, स्प्राउट, दलिया, ब्रेड-अंडा, सैंडविच के साथ 1 कप काफी आदि ले सकते हैं।

 काम के बीच ब्रेक
लगातार काम करने से बचें, काम के दौरान बीच में ब्रेक बहुत जरूरी है। लगभग 1 घंटे के बाद 10-15 मिनट का ब्रेक लीजिए। ब्रेक लेने से आपके दिमाग को आराम मिलता है और दोबारा काम करने के दौरान आलस नहीं आता। इसके अलावा यह आपको तनाव से भी बचाता है। इसलिए काम के बीच में ब्रेक बहुत जरूरी है।

 थोड़ा सा टहलें
कुर्सी पर ज्‍यादा देर तक बैठने से आपको तनाव या सिरदर्द हो रहा है तो कुर्सी छोड़क थोड़ी देर टहलें। इस दौरान आप अपने ऑफिस के कैफीटीरिया, अपने कैबिन या फिर सहकर्मी के की सीट तक टहल सकते हैं। टहलने से शरीर रक्‍त का संचार सुचारु तरीके से होता है। टहलने से आप एनर्जेटिक रह सकते हैं। काम के बीच में टहलने का समय निकालें।

 संगीत सुनें
कार्यालय में यदि लगातार काम करने से आपको तनाव हो गया है तो कुछ देर तक आप अपना मनपसंद संगीत सुन सकते हैं। संगीत सुनने से आपके दिमाग को आराम मिलेगा और तनाव नहीं होगा। काम के दौरान संगीत सुनने से सकारात्‍मक ऊर्जा मिलती है जिससे दिमाग एकाग्र होता है। एकाग्र दिमाग से व्‍यक्ति अच्‍छा काम कर सकता है।

 योग और व्‍यायाम
यह जरूरी नहीं कि आप योग और एक्‍सरसाइज सुबह या शाम के समय ही कर सकते हैं। सारा दिन कुर्सी पर बैठकर काम करने से शरीर की मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है और इससे तनाव भी हो सकता है। जब भी आप बोर हों या थकान महसूस करें तो स्ट्रेचिंग व्यायाम कर ताजगी ला सकते हैं। इसके लिए अपनी कुर्सी से पांच-दस बार उठ बैठ सकते हैं। खड़े-खड़े दोनों हाथ ऊपर उठाकर पंजों के बल खड़े हो सकते हैं, कमर से दाएं-बाएं बाजुओं को घुमा सकते हैं।

थोड़ा फन भी
ऑफिस में गंभीर मुद्रा में काम न करें, हंसते और मुस्‍कराते रहें, इससे आपका तनाव कम होगा साथ ही आपके साथियों का मूड भी अच्‍छा रहेगा। काम करते वक्त अपना चेहरा मुस्कराते हुए रखें। बीच में अपने मित्र के साथ चैट कर लें, फनी वीडियोज देख लें, जोक्स आदि पढ़ लें। इससे आपका मूड अच्छा रहेगा और काम करने का मन भी करेगा क्योंकि ये सब चीजें तनाव दूर करती हैं।

 पानी खूब पियें
पानी पीना स्‍वास्‍थ्‍य के लिए सबसे ज्‍यादा फायदेमंद है, इससे शरीर फिट रहता है कई बीमारियां नहीं होती हैं। सिरदर्द और तनाव दूर करने के लिए खूब सारा पानी पीजिए। अधिकतर आफिस एसी वाले होते हैं, एसी हमारे शरीर से नेचुरल नमी को चुराते हैं। उस नमी को बरकरार रखने के लिए दिन में थोड़ी-थोड़ी देर बाद पानी पीते रहें और दो-तीन बार ठंडे पानी से चेहरा धो लें।
ऑफिस में फिट रहने के लिए भरपूर आराम भी जरूरी है, इसलिए ऑफिस का काम वहीं निपटाइये और 7-8 घंटे की नींद के बाद सुबह व्‍यायाम कीजिए। इन सबसे भी आपका तनाव दूर न हो रहा हो तो चिकित्‍सक की सलाह लीजिए।

तनाव का मुकाबला करने की स्किल सीखें

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भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव होना लाजमी है। ऐसे में इससे भागने की बजाय इसका मुकाबला करने की कोशिश कीजिए।
अगर आप तनाव से जितना बचने की कोशिश करेंगे उतनी ही मानसिक पीड़ा होगी। कई प्रकार की मानसिक बीमारियां आपको अपना शिकार बना लेंगी। आइए हम आपको तनाव से बचने के कुछ टिप्‍स के बारे में बताते हैं।

 तनाव से लड़ने के कुछ टिप्स:
अपनी सोच पर ध्यान दें :
 ध्यान रखें जहां निगेटिव और फियरफुल सोच से तनाव और परेशानी बढ़ जाती है वहीं बुरी से बुरी परिस्थिति में भी पाज़िटिव सोचने से तनाव कम होता है।

 कल्पना करना सीखें:
ऐसी कल्पना करें कि आप जीवन में क्या चाहते हैं।

 रोज़ व्यायाम करें:
शारीरिक श्रम करने से हमारे शरीर से बिना कारण की चिन्ता खत्म हो जाती है और शरीर ठीक प्रकार से काम करता है ा व्यायाम करने से हमें चिन्ता से भी राहत मिलती है।

 आराम करना सीखें:
 हर दिन कुछ समय आराम करें, इससे हमें बुरी स्थितियों का सामना करने की ताकत मिलती है ा आराम करना भी एक स्किल है। ऐसी किताबें पढ़ें जिससे आपका आत्मबल बढ़े । अपना मनपसंद गाना सुनें ।

 तनाव के बारे में बात करें:
अपने किसी प्रिय मित्र या किसी पारिवारिक सदस्य से अपनी बातें शेयर करें। ऐसा करने से तनाव कम होता है।
अपने रोज़मर्रा के काम को प्लान कर लें :
हर दिन का प्लान करने से आप अपने समय का मूल्यांकन कर सकेंगे और तनाव से बच सकेंगे। ऐसा करके आप अपने काम के साथ साथ मनोरंजन का भी समय निकाल सकते हैं । आप अपने परिवार या मित्रों के लिए भी समय निकाल पायेंगे और अपने काम को भी ठीक प्रकार से कर सकेंगे ।

यथार्थवादी गोल बनायें :
 वो लोग जो अपनी क्षमता से कहीं ज़्यादा की इच्छा करते हैं वो अकसर निराशा के शिकार को जाते हैं ा इसलिए अपनी क्षमता को देखते हुए अपने गोल बनायें ।

अपना मनोरंजन भी करें :
हर रोज़ अपने मनोरंजन के लिए थोड़ा समय भी निकालें। अपने आपको हर रोज़ ऐसे कामों में लगायें जिन्हें आप इन्जाय कर सकें ।

तनाव दूर करने का सबसे आसान तरीका है मनोरंजन ।

रेगुलर फीज़िकल चेक अप करायें:
फीज़िशियन भी आपको तनाव से बचा सकते हैं और स्वस्थ्य रह कर भी तनाव से बचा जा सकता है। इसलिए हेल्थ चेक अप कराते रहें ।

कैसे बचें तनाव से 

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तनाव और परेशानी आज हमारे जीवन का एक आम हिस्सा बन कर रह गया है। कभी-कभी इन तनाव भरी स्थितियों का और अपनी ज़िम्मेदारियों का प्रबंधन करना बहुत मुश्किल हो जाता है।
हर रोज़ के काम और तनाव की स्थिति के बाद अगर हम कुछ समय अपने आप को दें तो शायद हमें तनाव से बचने के कुछ रास्ते मिल जायें। अगर आप रोजमर्रा के तनाव और परेशानियों से परेशान हो जाते हैं तो इसका अर्थ है कि आपको तनाव कम करने की ज़रूरत है।

तनाव से बचने के कुछ तरीके जिनसे आप अपने आपको थोड़ा आराम दे सकते हैं

मनोरंजन
मनोरंजन करने वाली गतिविधियों को अपनाकर आप अपने जीवन को रोचक और खुशनुमा बना सकते हैं। व्यायाम करना, पेंटिंग करना, खाना बनाना या नाच गाने में कुछ समय व्यतीत करके आप अपना मनोरंजन कर सकते हैं।
    किसी पर्सनल नोट पर ऐसा लिखें कि मैं हर दिन इस तरह की दो एक्टिविटी करूंगा। इससे आप खुद को तरोताजा़ महसूस करेंगे।
    आज हर उम्र के लोग डांस क्लास जाइन कर सकते हैं। डांस से आपका थोड़ा व्यायाम भी हो जाता है और इससे आप तनाव मुक्त भी अनुभव करेंगे।

 स्पा और मसाज थेरेपी
शोधों से ऐसा पता चलता है कि पैरों की मसाज करने से पूरे शरीर का तनाव कम हो जाता है। इस तरह की मसाज थेरेपी को आयुर्वेदिक सेन्टर पर भी सीखा जा सकता है। आज मसाज थेरेपी को कई भागों में बांटा गया है जैसे स्वेडिश मसाज थेरेपी, अरोमाथेरेपी, रिफ्लेक्सालाजी, स्पोर्टस मसाज और डीप टिश्यु मसाज।

    ऐसा पाया गया है कि रिफ्लेक्सालाजी से बहुत आराम मिलता है क्योंकि इससे तनाव बहुत ही जल्दी चला जाता है। बहुत से माल आज फिश थेरेपी करा रहे हैं, इस थेरेपी में आपको अपने पैर एक्वेरियम में डालने होते हैं और मछलियां आपकी डेड स्किन को खा लेती हैं। इस प्रकार की थेरेपी का खर्च आधे घंटे में लगभग 300 से 400 तक आता है।

 एम्यूज़मेंट पार्क
 पूरे परिवार के साथ एम्यूज़मेंट पार्क जैसी जगह पर जाने का मज़ा ही कुछ और होता है। ऐसे वातावरण में आप अपने आपको रिलैक्सड महसूस कर सकते हैं और इससे आपके मूड पर भी अच्छा प्रभाव पड़ता है।
    वाटर राइड या रेन डांस को इन्जाय करके आप पूरी तरह से फ्रेश महसूस कर सकते हैं। इसका खर्च लगभग 500 से 1000 रूपये तक आयेगा।

 योगा
योगा से हमारा शरीर और दिमाग संतुलित रहता है इसलिए लम्बे समय तक कुछ आसन करके आप तनाव मुक्त हो सकते हैं। हर रोज़ कुछ समय तक योगा करें और हफ्ते भर में आप फर्क महसूस करेंगे। योगा क्लास जाइन करके आप 10 से 30 पोज़ सीख सकते हैं जैसे शवासन या शिर्षासन जो कि बहुत मुश्किल माने जाते हैं। अगर आप घर पर योगा करते हैं तो आपका खर्च भी बच सकता है।

 लाफ्टर सेशन
यह एक बहुत पुराना कथन है कि हंसी सबसे अच्छी दवा है और आज शोधकर्ताओं ने यह सिद्ध भी कर दिया है। वो लोग जो तनाव की स्थितियों में भी अच्छे मूड में रहते हैं उनका इम्यून सिस्टम ठीक रहता है। अपने आसपास के पार्क में अपने परिवारजनों या मित्रों के साथ जाकर हंसें या फिर कामेडी मूवी देखने जायें।

नौकरी मन की न हो तो तन पर पड़ता है बुरा असर

यदि आप अपनी नौकरी से असंतुष्ट हैं, तो इसका आपके स्वास्थ पर खराब असर पड़ सकता है। खास तौर पर, मानसिक स्वास्थ्य पर। एक नए अध्ययन में यह बात कही गई है।
अध्ययन ऑस्ट्रेलियाई राष्ट्रीय विश्र्वविद्यालय के डॉ. लियाना लीच के नेतृत्व में किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि मन की नौकरी न होना तनाव पैदा करता है। अध्ययन के अनुसार नौकरी होने का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि इससे स्वास्थ्य बेहतर रहेगा। वास्तव में, कई बार लोग अनिच्छा वाली नौकरी में बेरोजगारी की अपेक्षा ज्यादा अवसाद में जीते हैं।
डॉ. लीच के अनुसार, पूर्ववर्ती शोधों के परिणाम बताते हैं कि काम का दबाव लोगों के सामाजिक-आर्थिक, स्वास्थ्य और निजी हालातों को सुधारने में मदद करता है। वह कहती हैं कि यह शोध लोगों को सलाह देता है कि 'कोई भी' नौकरी मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद नहीं कर सकती। इसके बजाय लोगों को बेहतर जिंदगी बिताने के लिए ऐसे काम करने की जरूरत है, जो उनके मन के हों और जिनमें उनका विकास हो। यह नियोक्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए माहौल पर तय करता है।

महिला बास
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सदियों से महिलाओं की आलोचना होती आ रही है और उन्हें पुरूषवर्ग से कम समझा गया है। लेकिन पिछली कई सदी में महिला बास का समर्थन भी हुआ है।

आपका प्रमोशन होता है और आपको महिला बास के आधीन काम करना पड़ता है। ऐसे में जब लोग आपको बधाइयां देते हैं तो आपको खुशी से ज़्यादा यह चिन्ता होती है कि आप महिला बास के आधीन कैसे काम करेंगे। महिला बास की महान स्थिति किसी ऐयाश पुरूष की तरह है जो कि अपने अनुसार एक हाट सेक्रेटरी रखता है या बहुत से मज़ाक का शिकार होता है। आइये यह जानने की कोशिश करें कि इस पुरानी सोच ने नया रूप कैसे लिया कि एक महिला बास का रूप सभी पुरूषों को डरा देता है।
गुड़गांव के एम एन सी में काम करने वाली 26 वर्षीय अदिल चक्रवर्ती का कहना है कि मैंने पुरूष और महिला बास दोनों के साथ काम किया है लेकिन महिला बास के साथ काम करने में ज़्यादा सावधानी बरतनी पड़ती है क्योंकि आपको पता नहीं होता कि वो क्या सोच रही हैं । अगर उनका काम उनके अनुसार नहीं हुआ तो आप अपने आपको किसी कटघरे में खड़ा महसूस करेंगे ।

 क्‍या है वजह महिला बास के रूखेपन की
महिलाएं पुरूषों की तुलना में अधिक भावुक होती हैं और इसलिए उन्हें काम में और वास्तविक जीवन में सम्पर्क बनाने में समय लग जाता है । उन्हें यह समझाना थोड़ा मुश्किल होता है कि यह बिज़नेस है पर्सनल नहीं है।
    वो महिलाएं जो बोर्डरूम के बाहर बातें नहीं करतीं वो भी एक साथ खाना पसन्द करती हैं लेकिन क्या आपने किसी पुरूष प्रतिद्वंदी को साथ में खाना खाते देखा है।
    पुरूष ज़्यादा काम्पटीटिव होते हैं और इसलिए वो लम्बे समय तक नहीं सोच पाते और अपने पुराने प्रतिद्वंदी पर विश्वास नहीं करते चाहे वो उसी टीम में हों ।
    अच्छा तो यह है लिंग असहमति। लेकिन ऐसा देखा गया है कि पुरूषों की तुलना में महिलाए एक ही समय में कई काम करने में सक्षम हैं और वो असानी से किसी भी समस्या का समाधान निकालने में समर्थ हैं।

 महिला बास के व्‍यवहार पर पुरूषों की राय
कुछ पुरूष कर्मचारियों का मानना है कि वास्तव में महिलाएं पुरूषों की तुलना में अधिक कठोर होती हैं। कुछ पुरूष इस बात से असहमत हैं कि महिलाएं ऐसे मानक स्थापित कर रही हैं जो पुरूषों के लिए सम्भव नहीं है। बल्कि उनका मानना है कि
महिलाएं कितना काम और कितने अच्छे से काम करती हैं इस बात से ज़्यादा यह बात महत्व रखती है कि वह अपने काम पर कितना ध्यान दे पाती हैं।
एक पुरूष इस बात से सन्तुष्ट हो सकता है कि उसने बहुत ज़्यादा या समय पर काम किया है लेकिन एक महिला आपसे शिष्टाचार की भी उम्मीद करेगी।

    पब्लीशिंग हाउस के मार्केटिंग मैनेजर 32 वर्षीय रईज़ मिश्रा एक हास्यजनक घटना को याद करते हैं। उनकी महिला बास किसी भी प्रेज़ेंटेशन के दौरान अपनी नौकरानी से फोन पर बातें करती रहती थी कि उनके बच्चे को कैसे चुप करायें, कैसे सुलाए, कैसे खाना दे । हम सभी ने सोचा कि अब यह बहुत हो गया। वो प्रेज़ेंटेशन पर बिलकुल ध्यान नहीं देती थी और हमलोग अपनी प्रोडक्शन से बहुत नीचे जा चुके थे। इसके बाद भी वो 75 प्रतिशत हमारी गलतियां निकालती थीं।

    क्या महिलाएं मल्टिटास्क हो सकती हैं।

    क्या यह आदतें पुरूषों को डरा सकती हैं। सिन्हा ने दूसरी बात कही कि पुरूषों की तुलना में महिलाएं दोतरफा जीवन जीती हैं। घर पर वह पत्नी और मां होती हैं ।  काम पर आते समय उनके दिमाग में यह बातें होती हैं कि उनके बच्चे ने खाना खाया है या नहीं ।  नौकरानी ने रात के डिनर की तैयारी की है या नहीं।
    अगर घर पर काम करने की जगह कम हुई तो उन्हें प्रज़ेंटेशन का काम दो दिन में करना पड़ेगा।
    हर भूमिका में वो अपने जीवन के दूसरे पहलू पर ज़ोर देती है और दूसरी भूमिका के लिए ताकत जुटाती है।
    चाहे वह 21वीं सदी में रहने वाली भारतीय महिला हो उसे पुरूषों की तुलना में ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
    अगर महिला कोई टास्कमास्टर नहीं है तो उसे हर समय काम से निकाले जाने का डर रहता है।

 हृदय के लिए तनावमुक्त कार्यस्‍थल
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हृदय स्वास्‍थ्‍य की बात करें, तो सबसे पहले उस स्थान का जि़क्र होता है, जहां पर आप अपने जीवन का अधिकतर समय बिताते हैं। वह स्थान है ‘आपका आफिस’। जी हां, अपने जीवन का आधे से ज्यादा समय आप अपने आफिस में बिताते हैं। आपका ‘आफिस स्वास्‍थ्‍य’ कहीं ना कहीं आपके ‘हृदय स्वास्‍थ्‍य ’ को भी प्रभावित करता है। अगर आप भी आफिस का तनाव घर लाने वालों में से हैं, तो संभल जायें क्योंकि हाइपरटेंशन, उच्च  रक्त चाप जैसी समस्याएं आपको भी हो सकती हैं। अगर आप स्वस्थ कर्मचारी बनना चाहते हैं, तो अपने काम के साथ-साथ अपने स्वास्‍थ्‍य पर भी ध्यान दें। 

मेदांता मेडिसिटी के इंटरवेंशनल कार्डियोलाजी विभाग के अध्यक्ष डाक्टर प्रवीन चंद्रा की मानें तो हमारा हृदय स्वास्‍थ्‍य  हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्‍थ्‍य पर निर्भर करता है। अगर आपको भी लगता है कि आपके आफिस में बहुत अधिक तनाव है, तो देर ना करें, अपने एच आर विभाग में बात करें।

डाक्टर प्रवीन चंद्रा के अनुसार आफिस में इन बातों का रखें ख्याल:
•    हर आफिस के(एच आर) मानव संसाधन विभाग की यह जि़म्मेदारी होनी चाहिए कि वह कार्यकर्ताओं पर अतिरिक्त  दबाव पड़ने की स्थिति में इसका समाधान निकाले।
•    बास व कर्मचारियों के बीच होने वाले तनाव का आपके काम पर ही नहीं बल्कि आपके स्वास्‍थ्‍य पर भी असर होता है।
•    काम के साथ-साथ प्रतिदिन 30 मिनट का व्यायाम भी ज़रूरी है।
आवश्यक निर्देश: अगर आपको सीने में दर्द हो रहा है, जकड़न महसूस हो रही है, तो देर ना करें तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
भारत में अभी भी बहुत सी ऐसी कंपनियां हैं, जहां कि लोग इन बातों पर ध्यारन नहीं देते। लेकिन स्वास्‍थ्‍य की दृष्टि से यह आवश्यक है कि आप तनावमुक्त कार्यस्थल की पहल करें और लोगों में जागरूकता फैलायें।

जब सताए काम का बोझ
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आफिस में लगातार काम और टेंशन। ऐसे में थकान का होना लाजिमी है। थकान दूर कर खुद को तरोताजा बनाने के लिए जरूरी है कि काम से आप कुछ दिनों का ब्रेक लें।

इसके अलावा खुद को रिफ्रेश करने के लिए आप ये नुस्खे भी अपना सकते हैं :- आफिस में काम के दौरान थोड़ा धूप में टहल आएं। सूर्य की किरणों से मिलने वाला विटामिन डी शरीर में सेरेटोनिन नामक रसायन का स्तर बढ़ाता है। सेरेटोनिन अच्छी नींद लाने में मददगार होता है।
    अगर आपका आफिस दूसरी या तीसरी मंजिल पर है तो लिफ्ट की जगह सीढि़यों का प्रयोग करें। इससे न केवल आपकी कसरत की जरूरत पूरी होगी बल्कि शरीर में ऊर्जा का स्तर भी बढ़ेगा।
    मानसिक थकान होने की स्थिति में कोई क्रासवर्ड या पजल हल करें। इससे आप रिलैक्स महसूस करेंगे। थकावट होने पर दिमाग पर जोर डालने की बात भले ही अजीब लगे, लेकिन ट्राई जरूर करें।
    लगातार काम के बीच में कुछ मिनट अपनी पसंद की कोई किताब पढ़ें। इससे भी आपका मूड फ्रेश होगा।
    पैदल चलने से बेहतर कोई व्यायाम नहीं है। इससे आप तरोताजा और ऊर्जावान महसूस करेंगे।
    अधिक लाभ के लिए आप एरोमाथेरेपी का भी प्रयोग कर सकते हैं।

कार्यस्थल पर आपका मनोबल बढ़ा सकते हैं ताने


कार्यस्थल पर तानें, गुस्सा और समान रूप से व्यंग्यात्मक मुंहतोड़ जवाब के लिए खोज का कारण होते है। इस विषय पर किये गये नए अध्ययन अब यह सुझाव दे रहे हैं कि तानों का सामना करना पड़ने से आप अपना सर्वश्रेष्ठ कार्यप्रदर्शन दे सकते हैं। इन अध्ययनों में यह पाया गया है, कि जिन कर्मचारियों को व्यंग्यात्मक सहयोगियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ डाल दिया जाता है, वह ऐसी स्थितियों का सामना नही कर रहे कर्मचारीयों की तुलना में अधिक रचनात्मक रुप से कार्य करते हैं।

कार्यालय के अधिक तनावमुक्त और परवाह करने वाले वातावरण की तुलना में, एक मालिक या सहकर्मी से व्यंग्यात्मक टिप्पणी, एक व्यक्ति को कठोर मेहनत करने, और काम को तेजी से अधिक से अधिक रचनात्मकता से काम करने को बाध्य कर देती हैं।

शोधकर्ताओं ने कहा कि तानें सुनने पडने पर, अधिक 'संज्ञानात्मक जटिलता' की या चीजों को एक से अधिक कोण से देखने की क्षमता होने की जरुरी होती हैं।

जिस मर्यादा तक एक व्यक्ति या संगठन एक घटना पर भेद–भाव और एकीकरण करते हैं, उस हद को संज्ञानात्मक जटिलता संदर्भित करती हैं। जिन  व्यक्तियों की संज्ञानात्मक जटिलता उच्च होती हैं, वह एक स्थिति का उसके घटक तत्वों में विश्लेषण करने में सक्षम होते हैं और उनकी सोच बहुआयामी होती है और वह किसी एक समाधान पर अधिक तेजी से पहुँचते हैं। संज्ञानात्मक जटिलता कम होने वालें लोगों को एक विशिष्ट संदर्भ के लिए इन लाइनों में सोचने को सिखाया जा सकता है, लेकिन उच्च जटिलता वाले लोग नई स्थितियों में नाविन्यपूर्ण समाधान ढूँढने में सक्षम होते हैं।

प्रबंधकों को कार्यस्थल पर लोगों से अपेक्षित काम करवाने के लिए उपयोगी हो सकने वाले जटिलता के अध्ययन, निम्नलिखित निष्कर्ष तक पहुँच चुके हैं:

    सूचना: जटिल लोग नई जानकारी को प्राप्त करने लिए और अधिक खुले होते हैं, वे संबंधित श्रेणियों में अधिक जानकारी की तलाश करते हैं और कम जटिल व्यक्तियों की तुलना में हर तरह से अच्छा प्रभाव निर्माण करने के लिए प्रेरित होते हैं।
    आकर्षण: उच्च जटिलता वालें लोग एक दूसरे की ओर आकर्षित होते हैं और उनके समान दृष्टिकोण से वह किसी विशिष्ठ समाधान पर पहुंचने के लिए आपस में विचारों का आदानप्रदान करते हैं, जो कम जटिलता वाले व्यक्तियों में काम नहीं करता। कम जटिल व्यक्ति अपनी तरह के व्यक्तियों को आकर्षित करते हैं, और एक रचनात्मक समाधान ढुंढ निकालने के लिए कम सक्षम होते हैं।
    लचीलापनः जटील व्यक्तियों की सोच भी अधिक लचीली और अधिक रचनात्मक होती हैं। जल्दी समाधान तक पहुंचना उन्हें जटिल समस्याओं के लिए नए समाधान खोजने में आगे प्रेरित करता हैं। इसके विपरीत परिस्थिती कम जटिल व्यक्तियों के साथ होती हैं।
    समस्या को सुलझानाः जटील व्यक्ति की, विभिन्न प्रकार की जानकारी खोजने की प्रवृत्ती होती है, जो उन्हें एक समाधान खोजने के लिए प्रेरित करती हैं, जबकि कम जटिल दिमाग के साथ लोग फलस्वरूप समस्या को सुलझाने में कम प्रभावी होते हैं।
    कूटनीतिक योजनाः जटील व्यक्ति बेहतर रणनीतिक नियोजक होते हैं और विभिन्न विकल्पों को उपलब्ध बनाने के लिए कई दृष्टिकोण से जानकारी जुटाने, लंबी अवधि के लक्ष्यों को निर्धारित करने के लिए, खुद को प्रेरित करते हैं जबकि कम जटिल व्यक्ति ऐसा करने में असमर्थ होते हैं।

ताने के अभिप्रेरण प्रभाव के प्रभाव को विस्तृत करने के लिए, इस्राएल के बॅन इलान विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने इंजीनियरिंग के 350 छात्रों से कहाँ कि वह कल्पना करे कि वे ग्राहक सेवा प्रतिनिधि हैं। उनको क्रोधित व्यंग्यात्मक फोन कॉल आये। छात्रों की, आगे कि आपत्ती से बचने के लिए उनके गुस्से को शांत करके उनकी तत्काल चिंताओं को कम करने की प्रतिक्रिया थी।

ताने के प्रभाव से उच्च स्तर की सोच को और दो वास्तविकताओं पर एक साथ प्रक्रिया करने की क्षमता को प्रोत्साहित किया था, तानों के स्तर जितने उच्च थे, उतनी प्रेरणा उच्च थी। एप्लाइड मनोविज्ञान के जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार गुस्से और ताना के उच्च स्तर पर रचनात्मकता बहुत उन्नत थी।


कुर्सी से चिपके रहेंगे, तो सेहत को होगा नुकसान

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लगातार कुर्सी पर बैठे रहना आपके लिए जानलेवा भी साबित हो सकता है। काम के दबाव के चलते लोग कई-कई घंटे एक ही जगह और एक ही कुर्सी पर बैठकर काम करते रहते हैं। लेकिन ऐसा करना न सिर्फ उनकी सेहत के लिए नुकसानदायक होता है, बल्कि साथ ही इससे उनकी जान पर भी बन सकती है। ताजा अध्‍ययन बताते हैं कि जो लोग 11 घंटे या उससे ज्यादा देर तक लगातार कुर्सी पर बैठकर काम करते रहते हैं उनके अगले तीन वर्षों में मौत की संभावना बढ जाती है। भले ही हम कितना ही सक्रिय क्‍यों न रहते हों। यहां तक कि व्‍यायाम और योगा भी इसके दुष्‍प्रभाव को कम नहीं कर सकते।
अध्ययन के अनुसार –
ऑस्ट्रेलिया के सिडनी विश्वविद्यालय में हुए शोध के अनुसार जो लोग तक आधे दिन तक कुर्सी पर बैठे रहते हैं उनमें 40 प्रतिशत तक मौत का खतरा बढ जाता है। शोध में पाया गया कि लगातार बैठकर काम करने वालों लोगों में 3 वर्षों में मौत की संभावना दुगनी हो गई थी। लोगों की शारीरिक सक्रियता और वजन का इसके कोई संबंध नहीं है।

देर तक बैठने से दिल को खतरा
 लंबे समय तक बैठकर काम करते रहने से बचना चाहिए। छोटी या‍त्रा के दौरान बैठने से अच्छा है कि खड़े होकर यात्रा किया जाए, इससे वजन कम होता है।
    बैठकर काम करने से शारीरिक निष्क्रियता बढती है। बैठने से शरीर में रक्त-संचार सही तरीके से से नहीं होता जिससे दिल का दौरा पड़ने का ज्यादा संभावना बढ़ती है।

कुर्सी पर क्यों बैठते हैं लोग –
ऑफिस का काम ज्यादा होने से कामकाजी लोगों को ज्यादा देर तक कुर्सी पर बैठना होता है। काम का प्रेशर होने के कारण लोग अपना काम पूरा करना चाहते हैं जिसके कारण कुर्सी पर बैठना पड़ता है। कंप्यूटर पर गेम खेलने और टीबी देखने के कारण भी लोग कई घंटों तक कुर्सी पर बैठते हैं। दिन में लंबी यात्रा के दौरान या लंबी हवाई यात्रा बैठकर ही करते हैं। खाली लोग जो सोने से ऊब जाते हैं वे अपना समय घर में बैठकर या पार्कों में बैठकर बिताते हैं।

कुर्सी पर बैठने से बचने के‍ लिए
लगातार कई घंटे तक कुर्सी पर बैठने से बचिए। अगर काम ज्यादा है तो भी थोड़े-थोड़े वक्‍त के बाद ब्रेक लेते रहिए। ऑफिस में काम के दौरान बीच-बीच में टहलते रहना चाहिए। ऑफिस में अपने केबिन में चाय या काफी मंगाने के बजाय कैफीटीरिया में खुद जाकर कॉफी लीजिए। शाम को मॉर्केट जाते समय भी कार या बाइक की बजाए पैदल जाना ही बेहतर रहेगा। अगर आप दिन में लंबी यात्रा कर रहे हैं तो अपनी सीट पर बैठने के बजाय लेटकर यात्रा कीजिए। लंबी यात्रा के दौरान अपनी सीट से उठकर बीच-बीच में टहलते रहिए। 
ज्यादा देर तक बैठने से शरीर की कई समस्याएं शुरू हो जाती हैं। लगातार कुर्सी पर कई घंटे तक बैठने से बैक पेन की समस्या शुरू हो सकती है। आपको कुर्सी पर बैठने के दौरान अगर कोई समस्‍या हो तो अपने चिकित्सक से सलाह अवश्य लीजिए।

ऑफिस में लीजिए सेहत की झपकी
 ऑफिस में काम के दौरान झपकी लेना, भले ही आप इसे काम के प्रति लापरवाही से जोड़कर देखें, लेकिन जनाब ऐसा बिल्‍कुल भी नहीं है। दरअसल, इससे आपकी कार्यक्षमता पर सकारात्‍मक असर पड़ता है। कैसे, आइए जानें हमारे साथ...
जानकार कहते हैं‍ कि कुछ देर की झपकी लंबे समय तक काम करने के कारण होने वाली शारीरिक और मानसिक थकान को दूर करती है। इसका व्यक्ति की याददाश्त, सोचने-समझने की शक्ति और कार्यक्षमता पर काफी अच्छा प्रभाव पड़ता है।

तनाव से रखती है दूर
काम के लगातार दबाव के चलते तनाव और परेशानी आम हो चली है। इसके चलते मस्तिष्‍क अक्‍सर थका-थका रहता है। अपनी शक्ति और ऊर्जा वापस पाने के लिए इसे आराम की दरकार होती है। पावर नैप अपने मस्तिष्‍क को तनाव से दूर रखने का एक बढि़या तरीका है। जब कभी भी आप तनाव में या थके हुए महसूस करें तो बस अपने टेबल पर सिर टिकाइए और जरा सी देर के लिए एक झपकी लें। इसके बाद आप ऊर्जावान, एकाग्र, रिलेक्‍स और सजग महसूस करेंगे।

आपको रखती है सजग
बीती रात आपकी नींद पूरी नहीं हुयी। तो जाहिर तौर पर ऑफिस में आपके काम पर इसका असर नजर आएगा। अपने काम के बीच में जरा सी झपकी आपको सावधान और सजग रखने में मदद करेगी। साथ ही यह आपके एनर्जी लेवल को बनाए रखने में भी मदद करती है और साथ ही आपको रखती है रिफ्रेश। 

याद्दश्‍त पर पड़ता है सकारात्‍मक प्रभाव
थके हुए दिमाग की स्‍मरण शक्ति भी कमजोर रहती है। दिमाग आसानी से कुछ भी नहीं सीख पाता। पावर नैप मस्तिष्‍क की कोशिकाओं और मांसपेशियों को आराम पहुंचाती है। थका हुआ दिमाग विषाक्‍त पदार्थ का निर्माण करने लगता है, जिससे मस्तिष्‍क की कार्यक्षमता पर नकारात्‍मक प्रभाव पड़ता है। इससे आप थके-थके और सुस्‍त रहने लगते हैं। थोड़ी देर की एक झपकी मस्तिष्‍क की मांसपेशियों को राहत पहुंचाती है और आपको रखती है 'टेंशन फ्री'। इसके साथ ही यह मस्तिष्‍क को विषाक्‍त पदार्थ बनाने से भी रोकती है।
दिल के लिए है बेहतर

एक थके हुए मन और शरीर का नकारात्‍मक प्रभाव आपके दिल पर भी पड़ता है। एक झपकी हृदय पर पड़ने वाले अतिरिक्‍त दबाव को दूर करती है। यह दिल की धड़कन को भी नियंत्रित करती है और साथ ही रक्‍तचाप भी सामान्‍य रखती है। जिन लोगों को उच्‍च रक्‍तचाप की शिकायत होती है उन्‍हें हमेशा नैप लेने की सलाह दी जाती है। इससे उनका रक्‍तचाप सामान्‍य बनाए रखने में मदद मिलती है। इस झपकी से दिल अधिक आराम से अपना काम करता है। 

 मूड रहता है फ्रेश
कुछ देर की झपकी आपके मूड को भी ताजा बनाए रखती है। यह उन लोगों के लिए खासतौर पर मददगार है जो अधिक दबाव में काम करते हैं। नाइट शिफ्ट में काम करने वाले, विद्यार्थी और मीडियाकर्मियों के लिए खासतौर पर मददगार होता है। आमतौर पर इन लोगों में नींद को लेकर समस्‍याएं पायी जाती हैं, ऐसे में पावर नैप इनके मन और शरीर को शांत रखने में मदद करती है।

कितनी देर की झपकी का कितना असर
10 से 20 सेकेंड की झपकी : इसे ‘नैनो नैप’ कहते हैं। ‘नैनो नैप’ लेने से कंघों पर पड़ने वाले तनाव से राहत मिलती है।
2 से 5 मिनट की झपकी : इसे माइक्रो नैप कहते हैं। इस आलस दूर होता है और बने रहते हैं तरोताजा।
5 से 18 मिनट की झपकी : इसे मिनी नैप कहते हैं। मिनी नैप लेने से व्यक्ति की सतर्कता, कार्य करने की क्षमता पर अच्‍छा असर पड़ता है। और साथ ही याद्दश्‍त भी दुरुस्‍त रहती है।
20 मिनट की झपकी : इसे पावर नैप कहते हैं। पावर नैप लेने से व्यक्ति को माइक्रा और मिनी दोनों नैप्स के फायदे मिलते हैं। इसके साथ ही मांसपेशियों को लंबे समय तक कार्य करने, याददाश्त तेज करने और मस्तिष्क को थकान से दूर रखने में काफी फायदेमंद साबित होती है।

सुबह का नाश्ता गोल करना मतलब दिल की बीमारियां
 भले ही आप बहुत व्यस्त हों, लेकिन सुबह का नाश्ता अवश्य करें। एक वैज्ञानिक शोध में यह सलाह दी गई है। शोध के मुताबिक सुबह के नाश्ते की लगातार उपेक्षा करने से दिल की बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है।
यूनिवर्सिटी ऑफ तस्मानिया के शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन किया है। उन्होंने पाया कि जो लोग सुबह खाली पेट घर से निकलते हैं, वे मोटापा, पेट पर चर्बी बढ़ने के साथ कॉलेस्ट्राल बढ़ने के शिकार हो सकते हैं। ये तीनों ही दिल की बीमारियों को जन्म देते हैं।
ब्रिटिश अखबार डेली मेल में छपे शोध के मुताबिक खाली पेट रहने से खून में इंसुलिन का स्तर भी बढ़ जाता है जो मधुमेह के खतरे की घंटी है। वैसे, इससे पहले हुए अध्ययन बता चुके हैं कि दिल के लिए सुबह का नाश्ता फायदेमंद है। नाश्ता नहीं करने के खतरों को बताने वाला यह पहला शोध है।
शोध के अनुसार, बचपन में नाश्ते से जी चुराने वाले लोग 20 की उम्र के बाद दिल की बीमारी से ग्रस्त हो सकते हैं। इस शोध को अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रिशन में प्रकाशित किया गया है।

सुबह की जल्दी और नाश्‍ता  
 सुबह की जल्दी किसी बवंडर से कम नहीं होती जब एक सम्पूर्ण आहार लेना बहुत  मुश्‍किल होता है । ऐसे में हमें किसी स्वस्थ विकल्प वाले आहार को चुनना चाहिए ।

 मुख्य सामग्री
2 अण्डे, पूरे गेहूं वाला टारटिला बेस ।
अण्डे को आमलेट की तरह तल कर इसे गरम टारटिला बेस के ऊपर रखें । इसे और मज़ेदार बनाने के लिए इसपर सालसा सास डालें और रोल करें ।

 न्यूट्री चेक
टारटिला और अण्डे में प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट अधिक मात्रा में होती है जिससे आप दिन की अच्छी शुरूवात कर सकते हैं ।

आफिस स्‍वास्‍थ्‍य के नुस्‍खे
 
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कार्यालय में सही खान पान
ऐसी बहुत सी बातें हैं जो कि आपके करियर की वृद्वि को प्रभावित करती हैं । काम करने से लेकर उत्पादकता और मक्खनबाजी का कौशल,लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आप जिस प्रकार का आहार लेते हैं उसका प्रभाव आपके करियर की वृद्वि में भी हो सकता है। आइये इस बारे में जानकारी इकट्ठी करें।

 काम के स्थान पर आपकी सही खान पान की आदतें आपके शिष्टाचार को दर्शाती हैं । ऐसे बहुत से आहार हो सकते हैं जो कि आपके स्वाद से लेकर आपके ज्ञान और पोषण सम्बन्धी लाभ को भी दर्शाते हैं । कम शब्दों में यह कह सकते हैं कि सही खाने का प्रभाव हमारे काम पर भी पड़ता है । इससे सिर्फ आपका स्वास्‍थ्‍य ही नहीं अच्छा रहता बल्कि आपके मेहनती और सूक्ष्म कार्यकर्ता होने का भी पता चलता है ।

 उचित समय पर सही खाना
हम सभी जानते हैं कि स्वस्थ आहार का अर्थ है सही मात्रा में सही आहार । लेकिन खाने के बारे में बहुत सूक्ष्म अध्ययन आपको उत्तेजित भी कर सकता है । जब आपको मीटिंग में जाना हो या दूसरे काम हो ऐसे में खाने के बारे में सोचना कोई स्वस्थ संकेत भी नहीं । ध्यान रखें कि आपकी प्राथमिकता आफिस का काम है आहार नहीं । आफिस में लिए जाने वाले आहार कुछ ऐसे हो सकते हैं जो कि ताकत देने वाले आहार हों। ऐसे आहार बिलकुल नहीं लेने चाहिए जिनसे आपको नींद आये।

 जब थोड़ा आहार ही पर्याप्त हो
आफिस में खाना खाते समय अपनी प्लेट को पूरी तरह से ना भर लें । सही मात्रा में सम्पूर्ण आहार लेने का प्रयास करें । अपने आहारे के बीच स्नैक्स भी कुछ इसी प्रकार के लें । चाहे बिस्किट खाने की बात हो या सूखे स्नैक्स।

 काम करने के दौरान दिन का खाना
ध्यान रखें कि आप उस ग्रुप का भाग हैं जिसके लिए खाना मंगाया गया है। वही खायें जो आसानी से मिल सके। खाने को लेकर बहुत तुनुकमिज़ाजी ना दिखायें जब तक कि आपको किसी खास प्रकार के आहार से एलर्जी ना हो।

 तुनुकमिज़ाज होना
अगर आप ऊंचे औदे पर हैं तो यह बिलकुल सही है कि आपके कलीग्स को पता होना चाहिए आपको किस प्रकार के आहार नहीं लेने चाहिए । लेकिन अगर आप कार्यकर्ता हैं तो खाना मंगाने के समय आपको थोड़ा लचीला रवैया अपनाना चाहिए।  अंत में अगर आप वास्तविक फूडी हैं और आपका मनपसंद खाना देखकर आपके चेहरे पर मुस्का़न तैर जाती है तो अपने आहार के बारे में अपने आसपास वालों से बातें करें ।  

 आफिस में स्‍नैक्‍स से दूर रहने के नुस्‍खे
पूरा दिन बिना स्नैक्स के आफिस में समय काटना हम सब के लिए मुश्किल हो सकता है। वास्तविकता जो हम सब जानते हैं वो यह है कि स्नैक्स हमारे स्वास्‍थ्‍य के लिए अच्छे नहीं होते । गुड़गांव की एम एन सी में कार्यरत संजय शर्मा का मानना है कि आफिस में जब चबाने के लिए स्नैक्स नहीं होते तो काम करना भी थोड़ा मुश्किल हो जाता है। आफिस की आलमारी से स्नैक्स दूर रखने के लिए क्या करना चाहिए । आफिस में ऐसे आहार ना लेने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप भारी मात्रा में ब्रेकफास्ट करें।

नयी दिल्ली की चिकित्सक अंजली भार्गवा के अनुसार अगर ब्रेकफास्टा के बाद आपका पेट भर गया है और आप अधिक नहीं खाना चाहते तो सुबह भर पेट बिना तेल वाला स्वस्थ आहार लें और आपको लंच के समय तक कुछ भी खाने की आवश्यकता नहीं होगी ।

लेकिन फिर भी अगर आप स्नै‍क्स लेना चाहते हैं तो थोड़ा टहल लें। इससे ना केवल आपका ध्यान स्नै‍क्स से हटेगा बल्कि आपको व्यायाम करने का मौका भी‍ मिल जायेगा ।

चिकित्सक भार्गवा के अनुसार कभी कभी हमारा शरीर भूख और प्यास की आवश्यकता को गलत तरीके से पढ़ लेता है । यह एक अच्छा विकल्प है कि आफिस में खूब पानी पीयें । तो पानी के कूलर की ओर चलने के कई फायदे हैं । यह आपको स्नैक्स से दूर रखता है, इस बहाने आपका व्यायाम होता है और आपके शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा भी होती है।

 काम के दौरान आहार को स्किप करना कोई अच्छा विकल्प नहीं है । इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप आफिस में ब्रेकफास्ट कर रहे हैं, लंच कर रहे हैं या डिनर कर रहे हैं बस आपको आहार स्किप नहीं करना चाहिए । समय पर आहार स्किप करना भी एक बड़ा कारण है जिससे लोग पूरा दिन खाने के बारे में सोचते रहते हैं । इसलिए स्वस्थ और अच्छा खायें । कैफेटेरिया से खाना मंगाने के बजाय आप घर से खाना पैक करके भी ला सकते हैं । इससे ना केवल आप जंक फूड खाने से बचेंगे बल्कि इससे आपको स्वस्थ रह...

सुबह का नाश्ता गोल करना मतलब दिल की बीमारियां
भले ही आप बहुत व्यस्त हों, लेकिन सुबह का नाश्ता अवश्य करें। एक वैज्ञानिक शोध में यह सलाह दी गई है। शोध के मुताबिक सुबह के नाश्ते की लगातार उपेक्षा करने से दिल की बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है। यूनिवर्सिटी ऑफ तस्मानिया के शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन किया है। उन्होंने पाया कि जो लोग सुबह खाली पेट घर से निकलते हैं, वे मोटापा, पेट पर चर्बी बढ़ने के साथ कॉलेस्ट्राल बढ़ने के शिकार हो सकते हैं। ये तीनों ही दिल की बीमारियों को जन्म देते हैं।
ब्रिटिश अखबार डेली मेल में छपे शोध के मुताबिक खाली पेट रहने से खून में इंसुलिन का स्तर भी बढ़ जाता है जो मधुमेह के खतरे की घंटी है। वैसे, इससे पहले हुए अध्ययन बता चुके हैं कि दिल के लिए सुबह का नाश्ता फायदेमंद है। नाश्ता नहीं करने के खतरों को बताने वाला यह पहला शोध है।
शोध के अनुसार, बचपन में नाश्ते से जी चुराने वाले लोग 20 की उम्र के बाद दिल की बीमारी से ग्रस्त हो सकते हैं। इस शोध को अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रिशन में प्रकाशित किया गया है।


नाश्ता तय करता है आपका दिन भर का मूड
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क्या आप सुबह भरपूर नाश्ता लेते हैं। यदि नहीं तो निश्चित मानिए कि अपने स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। पुराने समय में गांवों में सुबह भर पेट कलेवा यानी नाश्ता करने की अवधारणा को अब वैज्ञानिक भी सही मानने लगे हैं और उनका कहना है कि यदि नाश्ता ठीक से नहीं किया जाए तो शरीर में कई तरह की विकृतियां पैदा हो सकती हैं। और तो और नाश्ता किसी भी व्यक्ति के दिन भर का मिजाज और व्यवहार भी तय करता है।

मुंबई के एसएनडीटी विश्वविद्यालय में खाद्य विज्ञान एवं पोषण के प्रोफेसर रामास्वामी और के मिस्त्री ने अपने ताजा निष्कर्ष में यह खुलासा किया। उनका कहना है कि सुबह भर पेट अच्छा नाश्ता करने से शरीर की कई जरूरतें पूरी होती हैं। नाश्ता नहीं करने की प्रवृत्ति काफी घातक है क्योंकि बाद में कितना भी अच्छा भोजन ग्रहण क्यों न किया जाए, सुबह के नाश्ते से शरीर को जो आवश्यक विटामिन, कार्बोहाइड्रेट, लौह तत्व और प्रोटीन मिलता है, उसकी कमी को न तो लंच और न डिनर पूरा कर सकता है। उन्होंने बताया कि भारत में 60 प्रतिशत आबादी शाकाहारी है लेकिन परेशानी की बात यह है कि अधिकतर लोगों के सुबह के नाश्ते में  लौह तत्व पर्याप्त नहीं होता जो शरीर के विकास के लिए अनिवार्य तत्व है।

 उन्होंने कहा कि सुबह का नाश्ता दिन का सबसे महत्वपूर्ण भोजन है। इसके जरिए लौह और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों की दिन भर की 25 प्रतिशत पूर्ति होती है। विशेषज्ञों ने बताया कि नाश्ते से बच्चों, वयस्कों और बुजुर्गो की प्रतिरोधक क्षमता में सुधार आता है। व्यक्ति दिन भर सक्रिय बना रहता है और उसके शरीर में विशेष तौर पर लौह तत्व की मात्रा में काफी उल्लेखनीय सुधार होता है। सुबह का नाश्ता गोल करने से व्यक्ति के व्यवहार पर खासा असर पड़ता है। उन्होंने बताया कि नाश्ते में मिक्स्ड वेज, पोहा, कार्नफ्लेक्स, रोटी दाल, चावल, मेथी भाजी, पालक भाजी ,सब्जी ,उपमा, आलू पराठा और दही  इडली सांभर, बे्रड आमलेट, ब्रेड बटर आदि खाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि मोटे अनाज से 7.4 मिग्रा, पोहा से 6.7 मिग्रा, आलू पराठा और दही से 2. 4 मिलीग्राम लौह तत्व मिलता है।

रामास्वामी और मिस्त्री के मुताबिक लौह तत्व की कमी से होने वाली बीमारी एनीमिया की चपेट में शहरी आबादी का बड़ा हिस्सा आ चुका है और अब यह बीमारी मध्यम वर्ग के साथ साथ उच्च वर्ग को भी सताने लगी है। सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं बच्चे, महिलाएं और किशोरियां। भारतीय जो खाना खाते हैं उनमें लौह तत्व पर्याप्त मात्रा नहीं होता। उनका कहना है कि  दोपहर और रात के भोजन में भले ही लौह तत्व वाले खाद्य पदार्थ क्यों न हों लेकिन सुबह के नाश्ते में यदि पर्याप्त  पोषण वाला भोजन ले लिया जाए तो दिन भर किसी तरह की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।









































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