Tuesday, 28 January 2014

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डायबिटीज

 डायबिटीज में कैसे करें देखभाल :-


अधिकतर अधिक उम्र के डायबिटीज मरीज नहीं रख पाते पैरों का ध्‍यान।
अंग-विच्‍छेदन से बचने के लिए पैरों की सही देखभाल करते रहना है जरूरी।
पैरों को साफ रखें और कट व अन्‍य खतरों से बचने के लिए नाखून छोटे रखें।
किसी भी प्रकार की समस्‍या होने पर बिना देर किये अपने डॉक्‍टर से संपर्क करें।

डायबिटीज में पैरों की देखभाल काफी जरूरी होता है। इससे पैरों को होने वाली अन्य गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है। डायबिटीज के मरीज अपने पैरों की सही देखभाल करें, तो वे अंग-विच्छेदन से भी बच सकते हैं।

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अधिक उम्र में पैरों की देखभाल करना कई बार मुश्किलों भरा हो सकता है और ऐसे में उन्हें अन्य लोगों की मदद लेनी पड़ सकती है। 1992 में इस विषय पर हुए एक विशेष शोध में यह बात सामने आई कि 86 प्रतिशत प्रतिभागी स्वयं से अपने पैरों की देखभाल करने में सक्षम नहीं थे।
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस में छपा यह शोध डायबिटीज से पीडि़त बुजुर्गों में पैरों की होने वाली समस्याओं की एक बड़ी तस्वीर पेश करता है। इस शोध में यह भी बताया गया था कि कैसे पीडि़त के परिजन अथवा उनकी देखभाल करने वाले उन्हें पैरों में होने वाली समस्याओं से बचा सकते हैं। इसके लिए उन्हें उनके पैरों का नियमित परीक्षण करना चाहिए। आइए जानें डायबिटीज से पीडि़त बुजुर्गों में पैरों की देखभाल कैसे की जा सकती है।

ब्लड ग्लूकोज का स्तर
सबसे जरूरी बात है कि अपने रक्त में ग्लूकोज का स्तर सामान्य बनाए रखने का प्रयास करें। इसके लिए सही समय पर दवाओं का सेवन करना भी जरूरी है। इसके साथ ही अपने आहार को भी नियंत्रित रखें। इससे आप पैरों की मांसपेशियों और उत्तकों को होने वाले नुकसान से बच सकते हैं। डायबिटीज के मरीज यदि अपने रक्त में ग्लूकोज का स्तर सामान्य बनाये रखें, तो वह स्वयं को कई प्रकार की परेशानियों से बचाये रख सकते हैं।

रोजाना करें पैरों की देखभाल
डायबिटीज के मरीज के पैरों का रोजाना परीक्षण किया जाना जरूरी है। अल्सर, फफोले, घावों, कट और सूजन होने के किसी भी लक्षण पर पूरी नजर रखी जानी चाहिए। पैरों की सफाई का समय परीक्षण के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। पैरों को रोज साफ करें। इसके लिए गुनगुना पानी और माइल्ड सोप का इस्तेमाल करना बेहतर रहेगा। पानी का तापमान अधिक गर्म न हो। आमतौर पर डायबिटीज के कारण पैरों में असंवेदनशीलता पैदा हो जाती है, जिसके कारण मरीज को तापमान का सही अंदाजा नहीं लग पाता। लेकिन, अधिक गर्म पानी पैरों को नुकसान जरूर पहुंचा सकता है। पैरों को धोने के बाद साफ और सूखे तौलिये से उन्हें अच्छी तरह साफ कर लें। इसके बाद पैरों पर लोशन लगायें। याद रखिये, आपको पैरों की उंगलियों के बीच लोशन नहीं लगाना है, क्योंकि इससे फंगल इंफेक्शेन होने का खतरा बढ़ जाता है।

पैरों की उंगलियों के नाखून
अपने पैरों की उंगलियों के नाखूनों को छोटा ही रखें। बड़े नाखून कट अथवा किसी अन्य समस्या का कारण भी बन सकते हैं। नाखूनों को सीधा ही काटें। टेढ़ा-मेढ़ा काटने से आसपास का मांस भी कट सकता है, जिसके कारण काफी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आपको अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है। नाखूनों को काटने के बाद उन्हें स्मूथ भी कर दें।

जूते-चप्प‍ल हो सही
डायबिटीज के मरीजों को अपने पैरों को गर्म और सुरक्षित रखने की जरूरत होती है। ऐसे लोगों को चाहिए कि अपने पैरों में हमेशा जुराबें पहनकर रखें। बैक्टीरिया और फंगल इंफेक्शजन से बचने के लिए जुराबों को रोजाना बदलना जरूरी है। घर से बाहर जाते समय डायबिटीज के मरीजों को जूते पहनना बहुत जरूरी है। इसके साथ ही इस बात का ध्यान रखना भी जरूरी है कि आप किस प्रकार के जूते पहनते हैं। जूते आरामदेह और‍ फिट होने चाहिए। उसमें आपके पैरों पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ना चाहिए। अपने पास कम से कम दो जोड़ी ऐसे जूते अवश्य रखें। ताकि आपको रोजाना एक ही जोड़ी जूते न पहनने पड़ें।

जूतों को वैकल्पिक दिनों में पहनने से उन्हें पूरी तरह सूखने का वक्त मिल जाएगा और ऐसे में जूतों में फंगस होने की आशंका भी खत्म हो जाएगी। जूतों में पैर डालते समय एक बार उसे जांच लें कि कहीं गलती से उनके भीतर कोई कंकड़ अथवा पैरों को नुकसान पहुंचाने वाली कोई अन्य  चीज न हो। कई बार असंवेदनशीलता के कारण डायबिटीज के मरीजों को पैर में कुछ चुभने का अहसास ही नहीं हो पाता। और ऐसे में उनके पैरों के लिए खतरा और बढ़ जाता है।

नियमित मेडिकल जांच
डायबिटीज के मरीजों को नियमित रूप से डॉक्टर के पास जांच के लिए जाना चाहिए। यह जांच पैरों को किसी भी प्रकार के संभावित खतरे से बचाने में मददगार हो सकती है। इसके साथ ही अल्सर, पैरों की उंगलियों के नाखूनों का अंदर की ओर बढ़ना अथवा पैरों में दर्द आदि की समस्या होने पर भी बिना देर किये डॉक्टर से संपर्क किया जाना चाहिए। समय रहते अगर पैरों की समस्या का पता लगाया जा सके, तो अंग-विच्छेदन से बचा जा सकता है।

इन सब बातों का खयाल कर अधिक उम्र के डायबिटीज पीडि़त लोग अपने पैरों की उचित देखभाल कर सकते हैं।

डायबिटीज आहार से संबंधित दस मिथ
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ये गलत है कि डायबिटीज होने पर आप अपना पसंदीदा भोजन नहीं कर सकते।
 सच्‍चाई तो यह है कि 'डायबिटिक आहार' जैसी कोई चीज नहीं होती है।
 इनसुलिन के बाद भी रखें आहार का ध्यान ।
 वही आहार चुनें जो रोजमर्रा की शार‍ीरिक गतिविधियों से मिलता हो।

डायबिटीज डायट का नाम सुनते ही आपके जेहन में बेस्‍वाद खाना आता है। लेकिन, क्‍या यह पूरी तरह सच है। डायबिटीज के आहार को लेकर आपके जेहन में कई ऐसी बातें हैं, जो शायद पूरी तरह सच नहीं हैं। इनमें कई बातें या तो आपने किसी से सुनी हैं या कहीं पढ़ी हैं। लेकिन, इन बातों के पीछे की पूरी हकीकत शायद आप नहीं जानते।

पहला मिथ - अधिक चीनी खाने से हो सकती है डायबिटीज
हम यही मानते हैं कि अधिक चीनी खाने से डा‍यबिटीज होती है, लेकिन यह बात पूरी तरह सच नहीं है। जब आपके शरीर में आहार को ऊर्जा में बदलने की क्षमता कम हो जाती है, तब डायबिटीज होती है। डायबिटीज को जानने के लिए इस प्रक्रिया को समझें। आप जो भी खाते हैं, आपका शरीर उसे ग्‍लूकोज में बदल देता है। यह शुगर का एक प्रकार है, जो आपकी कोशिकाओं को शक्ति देता है। पेनक्रियाज में मौजूद हार्मोन इनसुलिन शरीर को इस ग्‍लूकोज को ऊर्जा में बदलने में मदद करता है।

डायबिटीज के प्रमुख प्रका

टाइप वन डायबिटीज
इस परिस्थिति में पेनक्रियाज इनसुलिन का निर्माण नहीं करता। इनसुलिन के बिना रक्‍त में शक्‍कर की मात्रा बढ़ जाती है। आमतौर पर यह बच्‍चों और नौजवानों में देखी जाती है। जानकारों की राय में इम्‍यून सिस्‍टम में कमजोरी इसकी सबसे बड़ी वजह होती है।

टाइप टू डायबिटीज
यह तब होता है जब पेनक्रियाज पर्याप्‍त मात्रा में इनसुलिन नहीं बनाता या इनसुलिन सही प्रकार से इस्‍तेमाल नहीं हो पाता, अथवा दोनों ही कारण हों। अधिक वजन टाइप टू डायबिटीज का सबसे बड़ा कारण होता है। यह किसी भी उम्र में हो सकती है।

गर्भावधि मधुमेह
गर्भावस्‍था के दौरान कुछ महिलाओं में यह समस्‍या होती है। गर्भावस्‍था के दौरान हार्मोन्‍स में बदलाव के कारण इनसुलिन सही प्रकार से काम नहीं कर पाता। गर्भावधि मधुमेह से पीडि़त महिला को अक्‍सर इनसुलिन लेना पड़ता है। बच्‍चे के जन्‍म के बाद यह समस्‍या अपने आप ठीक हो सकती है।

मिथ -2 डायबिटीज आहार में नियमों का अंबार
डायबिटीज डायट में बहुत सारे नियम नहीं होते। इसका मूल नियम यही है कि आप ऐसा आहार चुनें जो आपकी रोजमर्रा की शार‍ीरिक गतिविधियों से मेल खाता हो और इसके साथ ही दवायें जो आपके रक्‍त में शर्करा की मात्रा को संतुलित कर सके। क्‍या आपको अपने आहार में बदलाव लाने की जरूरत है ? शायद हां, लेकिन उस हद तक नहीं जितना कि आप सोचते हैं।

मिथ -3 डायबिटीज में कार्बोहाइड्रेट बहुत बुरा होता है
वास्‍तव‍िकता में कार्बोहाइड्रेट डायबिटीज में बहुत अच्‍छा होता है। ये एक स्‍वस्‍थ डायबिटीज आहार अथवा किसी भी आहार का आधार होता है। रक्‍त में शर्करा की मात्रा पर कार्बोहाइड्रेट का सीधा असर पड़ता है, इसलिए डायबिटीज आहार लेते समय आपसे कार्बोहाइड्रेट के सेवन पर नजर रखने की सलाह दी जाती है। हालांकि, कार्बोहाइड्रेट आहार में कई जरूरी पोषक तत्‍व जैसे, विटामिन, मिनरल और फाइबर आदि भी होते हैं। तो, ऐसे में समझदारी इसी बात में है कि आप साबुत अनाज और उच्‍च फाइबर युक्‍त फल और सब्जियों का सेवन करना चाहिए। आप आहार विशेषज्ञ से मिलकर अपने लिए सर्वश्रेष्‍ठ आहार चुन सकते हैं।

मिथ 4 डायबिटीज में प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट से बेहतर होता है
कार्बोहाइड्रेट रक्‍त में शर्करा की मात्रा पर तेजी से असर डालता है, इसलिए डायबिटीज से ग्रस्‍त कुछ लोग प्रोटीन युक्‍त आहार का रुख कर लेते हैं। लेकिन अधिक प्रोटीन लेना आपकी समस्‍याओं को बढ़ा सकता है। प्रोटीन युक्‍त अधिकतर आहारों जैसे मीट आदि में सैचुरेटेड फैट भी काफी मात्रा में होता है। इनका अधिक सेवन आपको दिल की बीमारियां दे सकता है। आपकी कुल कैलोरी का 15 से 20 फीसदी हिस्‍सा ही प्रोटीन होना चाहिए।

मिथ -5 दवा से सब बराबर हो जाता है
अगर आप इनसुलिन लेने के बाद यह सोचते हैं कि आप कुछ भी खा सकते हैं, तो यह आपकी गलती है। आपको इनसुलिन का इंजेक्‍शन लेने के साथ ही खाने का नया तरीका भी सीखना होगा। यह नहीं कि आप कितना भी खा लें और फिर इनसुलिन की मात्रा बढ़ा दें। अपने डॉक्‍टर की सलाह के बिना दवा और आहार में बदलाव करने से परहेज करें। डायबिटीज की दवा तभी अधिक कारगर साबित होती है, जब वह डॉक्‍टर की सलाह से ली जाती है।

मिथ 6 अपना पसंदीदा भोजन छोड़ना होगा
ऐसा नहीं है कि डायबिटीज होने पर आप अपना पसंदीदा भोजन नहीं कर सकते। आपको उसे पकाने का तरीका बदलना होगा। इसके साथ ही अन्‍य आहार के साथ उसे खाने के तरीके में भी जरा बदलाव लाना होगा। अपने पसंदीदा भोजन में प्रोटीन की मात्रा कम करनी होगी। इसके साथ ही अगर आप अपनी आहार योजना पर टिके रहते हैं, तो खुद को अपने पसंदीदा भोजन के रूप में ईनाम दें। आप इसके लिए आहार-विशेषज्ञ की मदद ले सकते हैं।

मिथ -7- अगर आपको डायबिटीज है, तो आपको मीठा छोड़ना होगा
सच नहीं है- आप अपने डायबिटीज आहार में मीठा शामिल कर सकते हैं। किसी स्‍वीट डिश में आप कृत्रिम चीनी का उपयोग कर सकते हो। मीठे की मात्रा कम कर दें। उदहारण के लिए अगर पहले आप दो आइसक्रीम खाते थे, तो तब एक खाएं। मीठे को अपने लिए ईनाम मान लें। यदि आप अपनी आहार-योजना पर टिके रहते हैं, तो खुद को ईनाम के तौर पर मीठा खाने को दें। आप चाहें तो अपने मीठे को पौष्टिक भी बना सकते हैं। आप यह मीठा बनाते समय साबुत अनाज, ताजा फल और वेजिटेबल ऑयल इस्‍तेमाल कर सकते हैं। आप आइसक्रीम, पाई अथवा केक के स्‍थान पर फल और ओटमील बिस्‍कुट आदि खा सकते हैं।

मिथ -8 कृत्रिम चीनी भी डायबिटीज के मरीजों के लिए नुकसानदेह होती है  
कृत्रिम चीनी सामान्‍य चीनी के मुकाबले अधिक मीठी होती है, तो आपको उतने ही मीठे के लिए कम चीनी डालने की जरूरत होती है। इससे आप कम कैलोरी का सेवन करते हैं। जो लोग अपना वजन काबू करने की कोशिश कर रहे हैं, उनके लिए भी ये स्‍वीटनर काफी मददगार हो सकते हैं, लेकिन इनकी मात्रा के बारे में आपको जरा ध्‍यान रखने की जरूरत है। इस मामले में आप आहार-विशेषज्ञ की मदद ले सकते हैं।

मिथ -9 आपको डायबिटीज का खास आहार खाना पड़ेगा
सच्‍चाई तो यह है कि 'डायबिटिक आहार' जैसी कोई चीज नहीं होती। जो आहार डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद है, वह आहार सभी लोगों के लिए फायदेमंद होता है। वास्‍तव में डायबिटीज के लिए कोई खास आहार तैयार करने की जरूरत नहीं है। डायबिटीज के शिकार किसी व्‍यक्ति को अपने आहार पर और गहरी नजर रखने की जरूरत होती है। इसमें कुल खायी गयी कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट के प्रकार का भी ध्‍यान रखना पड़ता है। आपका डॉक्‍टर अथवा डायटिशियन आपकी मदद कर सकता है।

मिथ -10 डायट आहार डायबिटीज के लिए सबसे उत्तम आहार होता है
सिर्फ 'डायट' का तमगा लगा होने से कोई आहार डायबिटीज के लिए फायदेमंद नहीं हो जाता। डायट फूड सामान्‍य से महंगे भी होते हैं, तो सेहत को इनका कोई विशेष लाभ भी नहीं पहुंचता। तो किसी भी आहार को चुनने से पहले उसमें मौजूद पोषक तत्‍वों व अन्‍य सामग्री की जानकारी जरूर ले लें। इसके लिए भी आप अपने डॉक्‍टर की मदद ले सकते हैं।
अब आपको डायबिटीज के बारे में तथ्‍यों की जानकारी है, तो अब आपको अपने लिए बेहतर आहार चुनने में आसानी होगी। इसके साथ ही व्‍यायाम और दवाओं का मेल आपको एक सेहतमंद जिंदगी जीने में मदद करेगा। इससे आपकी रक्‍त-शर्करा मात्रा नियंत्रित रहेगी।

बार्डरलाइन डायबिटीज के बारे में जानें
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    बॉर्डरलाइन डायबिटीज में रक्त में ग्लूकोज का स्तर सामान्य से अधिक होता है।
    संतुलित आहार आपको प्रीडायबिटीज से डायबिटीज तक जाने से रोकता है।
    हर रोज व्यायाम की मदद से आप इस समस्या से बच सकते हैं।
    स्वस्थ जीवशैली अपनाएं, जल्दी सोएं और जल्दी उठें।

बॉर्डरलाइन डायबिटीज अथवा प्री-डायबिटीज उस स्थिति को कहा जाता है जब रक्‍त में ग्‍लूकोज का स्‍तर सामान्‍य से अधिक होता है, पर इतना अधिक नहीं होता कि उसे डायबिटीज कहा जा सके। बॉर्डरलाइन डायबिटीज से ग्रस्‍त अधिकतर लोगों में किसी प्रकार के लक्षण नजर नहीं आते, लेकिन उन्‍हें हृदय रोग होने का खतरा काफी अधिक होता है।

हमारा शरीर इनसुलिन हार्मोन का स्राव करता है, जो भोजन में पाये जाने वाली ऊर्जा (ग्‍लूकोज) को इस्‍तेमाल करने में मदद करता है। डायबिटीज में या तो शरीर पर्याप्‍त मात्रा में इनसुलिन का निर्माण नहीं कर पाता या फिर निर्मित हो रहे इनसुलिन का पर्याप्‍त इस्‍तेमाल नहीं कर पाता। जब रक्‍त में ग्‍लूकोज की मात्रा अधिक हो जाती है, तो यह किडनी, हृदय, आंखों और नर्वस सिस्‍टम में मौजूद रक्‍तवा‍हिनियों को नुकसान पहुंचा सकता है।
कुछ तो गड़बड़ है
प्री-डायबिटीज में ग्‍लूकोज और इनसुलिन का संतुलन हलका सा बिगड़ जाता है। पेनक्रियाज ग्रंथि पर्याप्‍त मात्रा में इनसुलिन का निर्माण नहीं कर पाती जिससे रक्‍त से ग्‍लूकोज की अतिरिक्‍त मात्रा को 'हटा पाना' संभव नहीं हो पाता। या कोशिकायें इनसुलिन रोधी हो जाती हैं। जब कोशिकायें इनसुलिन रोधी हो जाती हैं, वे इनसुलिन को रक्‍त में से ग्‍लूकोज  ले जाने से रोकने लगती हैं। रक्‍त में बहुत अधिक शर्करा हो जाने को हाई ब्‍लड शुगर अथवा हायपेरग्‍लासिमा कहा जाता है, लो ब्‍लड शुगर को हायपोग्‍लासिमा कहा जाता है।

बढ़ जाता है हृदय रोग का खतरा
अगर आप प्रीडायबिटीज की श्रेणी में आ चुके हैं, तो आपको टाइप टू डायबिटीज होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसके साथ ही आपको कई अन्‍य गंभीर चिकित्‍सीय परेशानियां भी हो सकती हैं, जिनमें ह्रदय रोग और स्‍ट्रोक आदि शामिल हैं। प्री डायबिटीज के साथ आपको सामान्‍य लोगों की अपेक्षा हृदय रोग और स्‍ट्रोक होने का खतरा 50 फीसदी बढ़ जाता है।

कैसे होता है निदान
यह पता लगाने के लिए कि क्‍या आपका प्रीडायबिटीज है, आपका डॉक्‍टर कई प्रकार की रक्‍त जांच कर सकता है। फास्टिंग प्‍लाजमा ग्‍लूकोज जांच, ओरल ग्‍लूकोज टोलरेंस टेस्‍ट अथवा हीमोग्‍लोबिन ए1सी (एवेरज ब्‍लड शुगर) जांच आदि।

कितना सामान्‍य है प्री-डायबिटीज
एक अनुमान के अनुसार अकेले अमेरिका में 20 वर्ष की आयु से ऊपर के करीब आठ करोड़ लोग प्रीडायबिटीज के शिकार हैं। प्री डायबिटीज को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह आने वाली गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है। यह आपके दिल, किडनी, आंखों, नर्वस सिस्‍टम और आंखों को होने वाले संभावित नुकसान का इशारा हो सकता है।

कैसे लाएं जीवन में बदलाव
जीवनशैली में जरूरी बदलाव लाकर आप प्री‍डायबिटीज के खतरे को टाल सकते हैं और यहां तक कि डायबिटीज होने के खतरे को भी रोक सकते हैं। डायबिटीज के खतरे को कम करने के लिए आपको सबसे पहले अपने वजन को काबू में रखना चाहिए। इसके साथ ही रोजाना व्‍यायाम और संतुलित आहार भी आपकी दिनचर्या का हिस्‍सा होना चाहिए।

डायबिटीज प्रिवेंशन प्रोग्राम के तहत यदि आप अपनी जीवनशैली में इस प्रकार का बदलाव लेकर आते हैं, तो आपको तीन वर्षों में डायबिटीज का खतरा 58 फीसदी कम हो जाता है। 60 वर्ष की आयु से ऊपर के लोगों में को 71 फीसदी से भी अधिक लाभ‍ मिलता है।

वजन काबू
मोटे और अधिक वजन वाले लोगों में प्रीडायबिटीज के डायबिटीज में बदलने का खतरार काफी अधिक होता है। कुछ अतिरिक्‍त वजन को घटाकर आप टाइप टू डायबिटीज होने की आशंका को काफी कम कर सकते हैं। केवल पांच से दस फीसदी वजन कम करना भी डायबिटीज से बचे रहने में आपकी मदद कर सकता है।

व्‍यायाम
शोध इस बात की पुष्टि करते हैं कि रोजाना महज 30 मिनट का मद्धम व्‍यायाम, जैसे साइक्लिंग, तैराकी और तेज चलना आदि भी डायबिटीज से बचाने अथवा उसे नियंत्रित करने में मददगार हो सकता है। एरोबिक्‍स व्‍यायाम भी आपके दिल की धड़कनों को संतुलित रख आपको टाइप टू डायबिटीज से बचाने में सहायता प्रदान करता है। साथ ही आपकी प्रीडायबिटीज को टाइप टू डायबिटीज में बदलने से भी रोकता है। एक्‍सरसाइज प्‍लान अपनाने और अपनी शार‍ीरिक गतिविधियां बढ़ाने से पहले एक बार अपने डॉक्‍टर से जरूर बात कर लें।

आहार
संतुलित आहार आपको प्रीडायबिटीज से डायबिटीज तक जाने से रोकता है। एक संतुलित आहार में लो-फैट प्रोटीन, सब्जियां और साबुत अनाज शामिल होते हैं, जो प्रीडायबिटीज को डायबिटीज के स्‍तर तक नहीं जाने देते। अपने आहार में कैलोरी की मात्रा कम कर, प्रोटीन और लो शुगर खाद्य पदार्थों की मात्रा बढ़ाकर और लो कॉर्बोहाइड्रेट युक्‍त आहार का संतुलित मेल आपके लिए सही रहेगा। आपको पर्याप्‍त मात्रा में फाइबर का सेवन भी करना चाहिए।

इन उपायों को आजमाकर आप स्‍वयं को हृदय रोग, उच्‍च रक्‍तचाप और स्‍ट्रोक के खतरे से बचा सकते हैं। आमतौर पर डायबिटीज और प्रीडायबिटीज के मरीजों में उच्‍च रक्‍तचाप  कीशिकायत होती है।

इसके साथ ही आपको हाई कोलेस्‍ट्रॉल की मात्रा कम करने के लिए धूम्रपान भी नहीं करना चाहिए। यह आपके दिल की सेहत के लिए अच्‍छा नहीं होता।

आप एक सेहतमंद जीवनशैली अपनाकर प्रीडायबिटीज को नियंत्रित कर सकते हैं। अगर प्री‍डायबिटीज, टाइप टू डायबिटीज में बदल जाए, तो वजन कम करना, व्‍यायाम करना, पोषण युक्‍त आहार लेना और रक्‍तचाप को नियंत्रित करके आप डायबिटीज  के साथ भी स्‍वस्‍थ जीवन जी सकते हैं। एक स्‍वस्‍थ जीवनशैली दवाओं और इनसुलिन पर आपकी निर्भरता को भी कम और नियंत्रित करती है।

बच्चों में डायबिटीज के लक्षणों को पहचानें

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    मधुमेह बच्चों को भी अपनी चपेट में ले सकता है।
    शुरुआती अवस्था मधुमेह का पता लगने पर इलाज में आसानी हो सकती है।
    बच्चों को बार-बार पेशाब आना एक गंभीर समस्या है।
    बच्चों के वजन में अचानक होने वाली गिरावट चिंताजनक है।

डायबिटीज को अक्‍सर अधिक उम्र के साथ जोड़कर देखा जाता है। लेकिन, अब यह रोग बच्‍चों में भी फैलता जा रहा है। हालांकि, माता-पिता बच्‍चों में इस रोग को लेकर गंभीर नहीं होते, इसलिए वे इसके लक्षणों की ओर ध्‍यान भी नहीं देते। लेकिन, ऐसा करना बच्‍चों की सेहत के साथ खिलवाड़ हो सकता है।

माता-पिता के लिए बच्‍चों में डायबिटीज के लक्षणों को समय रहते पहचानना बहुत जरूरी है, अन्‍यथा इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। डायबिटीज के कारण शरीर में होने वाले बदलाव काफी धीमे और सूक्ष्‍म होते हैं, इसलिए जब तक बच्‍चा काफी बीमार नहीं होता, तब तक इस बीमारी को पकड़ पाना आसान नहीं होता। आमतौर पर वह किसी अन्‍य बीमारी के संयोजन से बीमार होता है, लेकिन जांच में डायबिटीज का होना सामने आता है। 

तो माता-पिता को कैसे पता चले कि उनके बच्‍चे को डायबिटीज है। इसके लिए जरूरी है कि आप अपने बच्‍चे की सेहत पर नजर रखें और इन लक्षणों को अनदेखा न करें-

पेशाब अधिक आना
डायबिटीज के दौरान ग्‍लूकोज कोशिकाओं तक नहीं पहुंच पाता, इसलिए रक्‍त में ग्‍लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है। नतीजा यह होता है कि किडनी अतिरिक्‍त शर्करा को फिल्‍टर करने लगती है। इससे पेशाब की मात्रा बढ़ जाती है। इसलिए आपका बच्‍चा पहले से अधिक बार पेशाब करने जाने लगता है। यह बच्‍चों में डायबिटीज होने का सबसे सामान्‍य लक्षण है।

अधिक प्‍यास लगना
अब क्‍योंकि आपका बच्‍चा अधिक बार पेशाब करने जाने लगता है, इसलिए उसे पहले से अधिक प्‍यास लगती है। आमतौर पर माता-पिता यह सोचते हैं कि क्‍योंकि बच्‍चा अधिक पानी पी रहा है, इसलिए अधिक पेशाब कर रहा है, लेकिन हकीकत इससे उल्‍टी होती है।

भूख बढ़ना
डायबिटीज से पीडि़त बच्‍चे हमेशा भूख लगने की शिकायत करते हैं। इसके पीछे सीधा सा कारण है, क्‍योंकि ग्‍लूकोज शरीर की कोशिकाओं में नहीं पहुंच रहा होता, इसलिए उसे हमेशा भूख का अहसास होता रहता है।

वजन कम होना
आमतौर पर लोग वजन बढ़ने को डायबिटीज के साथ जोड़कर देखते हैं। टाइप टू डायबिटीज में, अधिक मोटे व्‍यक्ति को डायबिटीज होने का खतरा अधिक होता है। टाइप वन अथवा बच्‍चों को होने वाली डायबिटीज इससे अलग होती है। अगर बच्‍चों में डायबिटीज का इलाज न करवाया जाए, तो उनका वजन कम होने लगता है। क्‍योंकि शरीर को पर्याप्‍त मात्रा में ग्‍लूकोज नहीं मिलता, इसलिए भी वजन घटने लगता है।

अगर आपको अपने बच्‍चे में इनमें से किसी भी प्रकार का लक्षण नजर आए, तो उसे फौरन डॉक्‍टर के पास ले जाएं क्‍योंकि ये लक्षण डायबिटीज के अलावा अन्‍य कारणों से भी हो सकते हैं। अगर डॉक्‍टर को संशय हो कि आपके बच्‍चे को डायबिटीज है, तो वह रक्‍त जांच से इस बात की पुष्टि कर सकता है। एक बार जब डायबिटीज की पुष्टि हो जाती है, तो माता-पिता को इस बात का अहसास होता है कि वे काफी समय से इन लक्षणों को देखकर अनदेखा कर रहे थे।

अगर डायबिटीज का इलाज न करवाया जाए, तो यह बच्‍चों को जीवनभर की परेशानियां दे सकती है। इसके लघुगामी प्रभावों में हाई ब्‍लड शुगर, लो ब्‍लड शुगर, डायबिटीज केटोएसिडोसिस (पेशाब में किटोन्‍स की मात्रा बढ़ना) ओर कोमा आदि शामिल हैं। वहीं दीर्घगामी प्रभावों में मुख्‍य संवहिनी और तंत्रिका प्रणाली को नुकसान होना, जिससे आंखों की रोशनी भी जा सकती है, किडनी फैल्‍योर, अंग-विच्‍छेदन और हृदयाघात अथवा स्‍ट्रोक का खतरा बढ़ना आदि शामिल हैं।

अब क्‍योंकि बच्‍चे इस बीमारी के दीर्घगामी प्रभावों को नहीं समझ सकते, लेकिन यह माता-पिता की जिम्‍मेदारी है कि वे बच्‍चों का पूरा खयाल रखें। तकनीक और इलाज की उन्‍नत पद्धतियों का होने के कारण डायबिटीज से पीडि़त बच्‍चे अब स्‍वस्‍थ और लंबा जीवन जी सकते हैं।



    शिफ्ट में काम करने से मधुमेह का खतरा
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    शिफ्ट में काम करने से मधुमेह का खतरा: जानिए शिफ्ट में काम करने से मधुमेह का खतरा कैसे बढ़ सकता है।

   डायबीटिज से बचाव के प्राकृतिक उपचार
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    ड़ायबीटिज एक बहुत हीं खतरनाक बीमारी है लेकिन अगर आप प्राकृतिक उपायों से इस पर नियंत्रण कर  सके तो मधुमेह से आपको घबराने की जरुरत नहीं है। निम्न कुछ प्राकृतिक उपचार से आप ड़ायबीटिज पर नियंत्रण पा सकते हैं।

    डायबिटिक नेफरोपैथी के लंबे समय तक रहने वाले प्रभाव
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    डायबिटिक नेफरोपैथी एक प्रकार का किडनी रोग है। जानें इस बीमारी से पैदा होने वाली अन्य समस्याओं के बारे में।

       कैसे जियें डायबिटीज के साथ

    डायबिटीज को पूर्ण रूप से दूर नहीं कर सकते, लेकिन नियंत्रण में रखकर स्वस्थ एवं सामान्य जीवन बीता सकते है।

     धूम्रपान से मधुमेह का खतरा
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    मधुमेह और धूम्रपान की जुगलबंदी से गुर्दे की बीमारी का खतरा बढ जाता है।

      डायबिटीज़ 1 में इंसुलिन थेरेपी
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    डायबिटीज की समस्या आज महानगरों में आम बात हैं। डायबिटीज के लिए ओवरईटिंग घातक होती है। डायबिटीज की मात्रा कम करने के लिए इंसुलिन थेरेपी दी जाती है। डायबिटीज बढ़ने से डायबिटीज के मरीज के खून में शर्करा की मात्रा अधिक बढ़ जाती है। आइए जानें डायबिटीज 1 में इंसुलिन थेरेपी कितनी कारगार साबित होती है।

       किशोरावस्‍था मधुमेह में होती है थकान, कमजोरी और त्‍वचा रोग जैसी समस्‍यायें
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    किशोर डायबिटीज के इस प्रकार के लक्षण यदि आपके बच्‍चे को दिखें तो इसे बिलकुल भी नजरअंदाज न करें।

       डायबिटिक्स में इंसुलिन के अतिरिक्त प्रभाव
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    आइए जानें डायबिटिक्स में इंसुलिन के अतिरक्त प्रभावों के बारे में।

   

    मधुमेह रोगियों पर धूम्रपान का प्रभाव
धूम्रपान के बारे में अक्सर कहा जाता है कि यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।  इसके बावजूद जिन्हें धूम्रपान की लत लग जाती है वे इसे नहीं छोड़ते। यूँ तो धूम्रपान किसी के लिए भी अच्‍छा नहीं होता, लेकिन अगर आपको मधुमेह है और अगर आपको अपनी जिन्दगी से जरा भी प्यार है तो जितनी जल्दी हो सके, धूम्रपान छोड़ दें क्योकि यह आपके लिए जानलेवा सिद्ध हो सकता है।

आइये जानते हैं कि मधुमेह के मरीजों के लिए धूम्रपान कितना और क्‍यों खतरनाक हो सकता है।
नर्वस सिस्‍टम पर धूम्रपान का असर: धूम्रपान तंत्रिका तंत्र पर बहुत बुरा असर डालता है। यह तंत्रिका तंत्र को बहुत हीं कमजोर कर देता है जिसकी वजह से इंसान ढ़ेर सारी समस्याओं का शिकार हो जाता है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति मधुमेह का शिकार है और वह धूम्रपान करता है तो यह उसकी तंत्रिका तंत्र को बहुत हीं क्षति पहुंचाता है। धूम्रपान करने से मधुमेह के मरीजों में मधुमेह के अलावा दिल की बीमारी, यौन समस्या इत्यादि भी होने लगती है।
गुर्दे होते हैं प्रभावित: मधुमेह वैसे हीं गुर्दों पर बुरा असर डालता है, लेकिन धूम्रपान करने वाले व्यक्ति पर इसका प्रभाव चौगुना या उससे भी ज्यादा होता है। धूम्रपान करने से उस व्यक्ति के गुर्दे ख़राब होने लगते हैं।  इससे मरीज की स्‍थिति और भी गंभीर हो जाती है।
धूम्रपान का आँखों पर प्रभाव: हमारी आँखों पर भी मधुमेह का असर होता है। धूम्रपान करने वाले डायबिटीज़ रोगियों को कम समय में ही आंखों की समस्‍याएं भी होने लगती हैं।
धूम्रपान का रक्त वाहिनियों पर असर : मधुमेह में ग्‍लूकोज़ का स्‍तर प्रभावित होता है और रक्‍त वाहीनियां भी प्रभावित होती है। लेकिन जो लोग मधुमेह के मरीज होते हुए भी धूम्रपान करते रहते हैं उनकी रक्त वाहिनियों की अंदरूनी दीवारों पर प्लेक जमने लगता है जिससे रक्त संचार इस कदर बाधित होने लगता है कि रोगी को हार्ट एटेक आ जाता है।  कुछ मरीजों को स्ट्रोक मार देता है अथवा उन्हें जिन्दगी भर के लिए कोमा की स्थिति में भेज देता है।
    धूम्रपान किसी के लिए भी अच्‍छा नहीं होता, लेकिन अगर आपको मधुमेह है तो यह आपके लिए जानलेवा सिद्ध हो सकता है।

 
    डायबीटिज के लिए व्यायाम
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    डायबीटिज किसी भी अन्य गंभीर बीमारी की तरह खतरनाक है। आइए जानें डायबिटीज के लिए व्‍यायाम के बारे में।

  आहारीय मैग्नेशियम करे डाइबिटीज़ से बचाव
भोजन में मैग्नीशियम की पर्याप्त मात्रा आपको डायबिटिज के खतरे से बचाती है।

 मधुमेह रोगियों के लिए आहार
मधुमेह रोगियों के लिए आहार: आपको यह जानकार आश्चर्य हो सकता है कि ऐसा कोई आहार नहीं होता जिसे सिर्फ मधुमेह आहार कहा जाये, मधुमेह आहार के बारे मैं अधिक जानकरी के लिए पूरा लेख पड़ें.

 मधुमेह से संबंधी दस तथ्य
 डब्यूएचओ ने व्यापक रूप से फैल रही डायबिटीज की बीमारी से जुडे 10 तथ्यों को इकट्ठा किया।

डायबिटीज़ रोगियों के लिए इंसुलिन पंप
डायबिटीज़ रोगियों के लिए इंसुलिन पंप: अब डायबिटीज के मरीज बिना किसी दर्द के भी इनसुलिन दवा ग्रहण कर सकते हैं।

घर पर ब्लड शुगर टेस्ट कैसे करें
ग्लूकोज को नापने के लिए निरंतर ग्लूकोज मॉनिटरिंग सिस्टम का भी विकास किया गया।

पुरूषों में मधुमेह के लक्षण
आइए जानते हैं आखिर पुरूषों में मधुमेह के लक्षण क्या होते हैं और महिलाओं में पाए जाने वाले लक्षणों से वे कितने भिन्न हैं।

मधुमेह से बचाव के तरीके
मधुमेह एक खतरनाक बीमारी है। लेकिन अगर इसका मरीज अपना पूरा ख्याल रखे और व्यायाम करने के साथ साथ उचित खाद्य पदार्थों का सेवन करे तो इस रोग पर काबू पाया जा सकता है और इस रोग से होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है।

शुगर के स्‍तर पर नियंत्रण ही डायबिटिक नेफरोपैथी से बचने का बेहतर उपाय
डायबिटिक नेफरोपैथी गुर्दे से संबंधित एक गंभीर बीमारी है, इससे बचने के लिए ये तरीके आपके लिए कारगर हो सकते हैं।

ब्लड शुगर में रखें सावधानी
काम के प्रेशर व दिनभर भागदौड़ के कारण लोग अपने खाने पर ध्यान नहीं देते हैं। ऐसे में सभी के लिए रक्त में शर्करा का संतुलन बनाए रखना बहुत जरूरी है।

मधुमेह रोगी हल्दी का सेवन करें
हल्दी में वातनाशक गुण होते हैं जिससे मधुमेह की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। आइए जानें मधुमेह रोगियों के लिए हल्दी का सेवन कैसे लाभदायक है।




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