Tuesday, 28 January 2014

Sports and Fitness

खेल और फिटनेस:-

मसल्स बढाने के लिए सही वर्कआउट का चुनाव होता है जरूरी
क्‍या स्‍ट्रेंथ ट्रेनिंग से बढ़ता है वजन


    मसल्स बढ़ाने के लिए सही वर्कआउट करना बेहद जरूरी है।
    मसल्स बढ़ाने के लिए शरीर से अतिरिक्त चर्बी को करें कम।
    बाइसेप्स मसल्स के लिए बारबेल कर्ल से बेहतर कुछ नहीं।
    सिक्स पैक बनाने हैं तो बाइसिकल क्रंच करना है जरूरी।

आज-कल जिसे देखो वह बॉडी बना कर सबसे फिट दिखना चाहता है। बेहतर दिखने के लिए लोग अपना वजन तो कम कर ही रहे हैं लेकिन उसकी दुगनी तादाद में लोग अपनी मसल्‍स बिल्‍ड करने के लिए आतुर रहते हैं। फिट रहने और दिखने में कोई बुराई नहीं, बल्कि यह सेहत के लिए जरूरी भी है। लेकिन फिट रहने और मसल्स बढाने के लिए सही वर्कआउट करना बेहद जरूरी है। आइये हम आपको बताते हैं मसल्स बढाने के जिम जाने वाले लोग कई तरह की एक्सरसाइज करते हैं, तरह-तरह की डाइट प्लान फॉलो करते हैं। पर हर चीज हर इनसान को सूट नहीं करती। मसल्स बढाने के लिए आपको ऐसे वर्कआउट शेड्यूल का चुनाव करना चाहिए जो अपने आप में कंप्लीट हो। यानी जिसमें पावर, शेप और साइज तीनों ही हों।  मसल बिल्डिंग करने के लिए सबसे पहले शरीर से अतिरिक्त चर्बी को कम करना पड़ता है। एक बार शरीर से चर्बी खतम हो जाए, तब मसल बिल्डिंग के लिए मसल्‍स को टोन करने की जरुरत पड़ती है। साथ ही गठीले शरीर और अच्छी मसल्स के लिए सिर्फ जिम ही काफी नहीं होती। इसके लिए डाइट प्लान भी बहुत अहमियत रखता है। वर्कआउट के साथ सही मात्रा में एनर्जी वाली डाइट और खूब सारा पानी पीना चाहिए। चलिए बात करते हैं मसल्स बढाने वाली कुछ एक्सरसाइज पर।

 चेस्ट के लिए वर्कआउटचेस्ट
 को सही शेप देने और मसल्स सेट्रोंग बनाने के लिए फ्लैट डंबल प्रेस अच्छी एक्सरसाइज है। यह फ्लैट बेंच से बेहतर है, और वो इसलिए क्योंकि फ्लैट बेंच एक्सरसाइज करते समय हाथ एक सीमा से नीचे नहीं आते। बेंच करते समय जैसे ही रॉड आपके चेस्ट से छुलती है, उसे ऊपर की ओर धकेलना पड़ता है। वहीं डंबल प्रेस में ऐसा नहीं होता। जितना आप डंबल को नीचे ले जाते हैं, उतना ही प्रेशर आपके चेस्ट पर बनता है।


बाइसेप्स मसल्स के लिए वर्कआउट
कसरत तो कई प्रकार की हैं लेकिन बाइसेप्स मसल्स बनाने के लिए बारबेल कर्ल से बेहतर कुछ नहीं। जैसे स्क्वेट पैरों की एक कंप्लीट एक्सरसाइज है, उसी तरह बारबेल कर्ल बाइसेप्स के लिए एक मुकम्मल एक्सरसाइज है।

ट्राइसेप्स के लिए वर्कआउट
आर्म में 30 प्रतिशत भागीदारी बाइसेप्स और 70 प्रतिशत ट्राइसेप्स की होती है। यदि आप बड़े आर्म्स और मजबूत मसल्स चाहते हैं तो बाइसेप्स की बजाय ट्राइसेप्स पर अधिक ध्यान दें। बाइसेप्स की तरह ट्राइसेप्स के भी तीन हिस्से होते हैं और बेंच डिप्स एक ऐसी एक्सरसाइज है तो तीनों हिस्सों पर काम करती है। इसे आप बॉडी वेट के या एक्सट्रा वेट के साथ किया जा सकता है।

क्रंचेज
क्रंचेज कमाल का वर्कआउट है, ये न सिर्फ आपकी बॉडी को बेहतर शेप और मसल्स देता है, बल्कि स्टेमना भी बूस्त करता है। क्रंचेज करने से पेट के नीचे की मासपेशियां सही से तन जाती हैं। क्रंचेज करने के लिए जमीन पर लेट जाएं और अपने घुटनों को मोड़ लें और हाथों को सिर के पीछे रखें। अपने शरीर को अपने घुटनों से मिलाने की कोशिश करें। क्रंचेज करने से पेट के ऊपर और बीच की मासपेशियां प्रभावित होती हैं।

 लेग लिफ्ट वर्कआउट
लेग लिफ्टिंग करने से ना सिर्फ पेट के नीचे की मासपेशियां मजबूत होती हैं, बल्कि इससे जांघ और घुटनों के पीछे की मसल्‍स को भी मजबूत बनती हैं। लेग लिफ्ट करने के लिए दोनों पैरों को जमीन से ऊपर उठाएं और फिर उन्‍हें अपने धड़ के पास लाने की कोशिश करें।

बाइसिकल क्रंच वर्कआउट
सिक्स पैक बनाने हैं तो बाइसिकल क्रंच जरूर करें। बाकी की क्रंचेस आमतौर पर एब्स के किसी एक हिस्से पर ही काम करती हैं, जबकि बाइसिकल क्रंच एक साथ सिक्स पैक पर काम करती है।

 स्विमिंग
स्विमिंग शरीर के लिए एक पूर्ण व्यायाम है। इसे करने के लिए शुरू में आधे घंटे के सेशन से शुरुआत करें और फिर धीरे-धीरे इसका समय बढ़ाते रहें। इसके बाद हर सप्ताह आप अपने मसल्स की इम्प्रूवमेंट को आराम से देख सकते हैं। नियमित स्विमिंग करके आप कुछ ही दिनों में आपको अपने स्ट्रेंथ और स्टैमिना में फर्क देख पाएंगे।कार्डियो वर्कआउट करना हर इंसान के लिए जरूरी होता है। लगातार कार्डियो वर्कआउट बहुत जल्‍द चर्बी को कम कर देता है। आपका कार्डियोवैस्क्युलर हेल्थ और ब्लड फ्लो को अच्छा करता है। इसके लिए आप ब्रिस्क वॉक या कोई ऐसा काम करें, जिसमें आपका पूरा शरीर ऐक्टिव रहे। इसके अलावा मसल्स बढाने के लिए अपने वर्कआउट को नियमित रखना बेहद जरूरी होता है।
स्‍ट्रेंथ ट्रेनिंग से आप फिट रहते हैं, लेकिन इससे आपका वजन भी बढ़ सकता है, जानिए कैसे।

ग्लूटस एक्सरसाइज यानी आकर्षक बदन
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आप खू‍बसूरत लगे इसके लिए कूल्‍हों की शेप का अच्‍छा होना भी जरूरी है। इस लेख में हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसी ही एक्‍सरसाइज के बारे में जिनसे आपके बटक का आकार सुडौल रहेगा।

 लू लग जाने पर क्‍या करें
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अगर गर्मी के मौसम में ज़रा सी भी लापरवाही बरती जाए तो लू लगने की संभावना जबध  होती है। गर्मी के मौसम में लू चलना आम बात होती है। अगर अधिकतम तापमान सामान्‍य से 5 डिग्रीसेल्सिय अधिक हो जाता है तब लू चलती है। जब शरीर में नमक और पानी की कमी होती है तब लू लगती है। गर्मी में पसीने के रूप में नमक और पानी बाहर निकलता है जिसके कारण खून और नाडी की गति तेज हो जाती है। सांस लेने की गति भी ठीक नहीं रहती है और शरीर में ऐंठन शुरू हो जाती है। लू लगने के कारण बुखार काफी तेज हो जाता है। आंखें व हाथ-पैरों के तलुओं में जलन होती है। इससे आदमी बेहोश हो सकता है। आइए हम आपको बताते हैं कि अगर लू जग जाए तो कैसे बचें।

लू लग जाने पर क्या करें – 
लू लगने पर सबसे पहले रोगी को ठंडी और खुली हवा में आराम करने देना चाहिए।
    अगर बुखार 104 डिग्री से अधिक है तो बर्फ की पट्टी सिर पर रखना चाहिए।
    लू लगने वाले को तुरंत प्याज का रस शहद में मिलाकर खिलाना चाहिए।
    अगर रोगी को प्‍यास लगी हो तो प्यास बुझाने के लिए नींबू के रस में मिट्टी के घड़े अथवा सुराही का पानी देना चाहिए। बर्फ का या ज्‍यादा ठंडा पानी नहीं पिलाना चाहिए क्योंकि इससे रोगी और बीमार हो सकता है।
    रोगी के शरीर को दिन में चार-पाँच बार गीले तौलिए से पोंछना चाहिए।
    लू लगने पर चाय-कॉफी जैसे गर्म पेय पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।
    कैरी का पना पिलाने से रोगी को आराम मिलता है। कच्चे आम को गरम राख पर मंद आँच वाले अंगारे में भूनकर, उसके ठंडा होने पर उसका गूदा निकालकर उसमें पानी मिलाकर पना बनाकर पीजिए।
    जौ का आटा व पिसा प्याज मिलाकर शरीर पर लेप करने से लू में तुरंत राहत मिलती है।

 लू से बचने के कुछ उपाय – 
दोपहर में सबसे ज्‍यादा लू चलती है। इसलिए अगर बहुत जरूरी न हो तो दोपहर के समय घर से बाहर मत निकलिए। अगर बाहर जाना ही पड़े तो सिर व गर्दन को तौलिए या अंगोछे से ढंककर बाहर निकले।
    गर्मी के मौसम में हल्‍का और जल्‍दी पचने वाले खाद्य-पदार्थों का सेवन करना चाहिए। अगर आप घर से बाहर निकल रहे हैं तो खाली पेट न निकलें।
    गर्मी के दिनों में बार-बार पानी पीते रहना चाहिए जिससे कि शरीर में पानी की कमी नहीं होने पाए। पानी में नींबू व नमक मिलाकर दिन में दो-तीन बार पीते रहने से लू नहीं लगती।
    गर्मी के मौसम में कपडों पर भी ध्‍यान देना चाहिए। गर्मी के दौरान नरम, मुलायम और सूती कपड़े पहनना चाहिए जिससे हवा और कपड़े शरीर के पसीने को सोखते रहें।
    गर्मी में ठंडाई का सेवन नियमित करना चाहिए। मौसमी फलों जैसे – खरबूज, तरबूज, अंगूर मौसमी आदि का सेवन स्‍वास्‍थ्‍य के लिए फायदेमंद होता है।
    गर्मी के दिनों में प्याज का सेवन भी अधिक करना चाहिए एवं बाहर जाते समय कटे प्याज को जेब में रखकर निकलना चाहिए।

गर्मी के दिनों में प्याज का सेवन भी अधिक करना चाहिए एवं बाहर जाते समय कटे प्याज को जेब में रखकर निकलना चाहिए।

ऐसे व्यायाम जो बढ़ाएं आपकी लंबाई
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    मांसपेशियों पर दबाव डालने पर वे खिंचती हैं।
    बास्केटबॉल खेलने से हड्डियों पर दबाव पड़ता है और लंबाई बढ़ती है।
    शुरु किए गए व्यायामों को नियमित रुप से करें।
    ताड़ासन से लंबाई बढ़ाने में मदद मिलती है।

आपके व्यक्तित्व को निखारने में लंबाई की अहम भूमिका होती है। अक्सर ऐसा देखा जाता है जिन लोगों की लंबाई कम होती है वे काफी शर्मिंदगी महसूस करते हैं। जिसकी वजह से उनमें आत्म विश्वास की कमी देखी जा सकती है।
यूं तो लंबाई कम होने के कई कारण हो सकते हैं, जिसमें सबसे महत्‍वपूर्ण रोल आनुवांशिक गुण अदा करते हैं। लेकिन अगर आप चाहते हैं कि आपकी हाइट बढ जाए तो आप कुछ खास व्यायाम की मदद से इसे बढ़ा सकते हैं। अगर आप नियमित रुप से इन व्यायामों को अपनाएं तो निश्चित रूप से ये सहायता कर सकता है। आइए जानें लंबाई बढ़ाने वाले व्यायामों के बारे में।

लटकना या बास्केटबॉल
जमीन से सात फुट पर एक छंड गाडे़ और उस पर जितनी देर हो सके उतनी देर तक रोज लटकें। इससे रीढ़ की हड्डी लचीली बनेगी और आपकी लंबाई बढे़गी। आप चाहें तो बास्केटबॉल भी खेल सकते हैं इससे भी हड्डियों पर दबाव पड़ता है जिससे वे खिंचती हैं और आपकी लंबाई बढ़ने में मदद मिलती है।

ताड़ासन
ताड़ासन से लंबाई बढ़ाने में मदद मिलती है। इसके लिए सबसे पहले जमीन पर कंबल बिछाकर सीधे खड़े हो जाएं। अपने दोनों पैर को आपस में मिलाकर और दोनों हथेलियों को अपने बगल में रखें फिर पूरे शरीर को स्थिर रखें और दोनों पैरों पर अपने शरीर का वजन सामान रखें। उसके बाद दोनों हथेलियों की अंगुलियों को मिलाकर सिर के ऊपर ले जाएं।हथेलियों सीधी रखें फिर सांस भरते हुए अपने हाथों को ऊपर की ओर खींचिए, जिससे आपके कंधों और छाती में भी खिंचाव आएगा। इसके साथ ही पैरों की एड़ी को भी ऊपर उठाएं और पैरों की अंगुलियों पर शरीर का संतुलन बनाए रखिए। इस स्थिति में कुछ देर रहें। कुछ देर रुकने के बाद सांस छोड़ते हुए हाथों को वापस सिर के ऊपर ले आएं। इस आसन को प्रतिदिन 10-12 बार करें।
भुजंगासन

भुजंगा, जिसे इंग्लिश में कोबरा कहते है और चूंकि यह दिखने में फन फैलाए एक सांप जैसा पोज बनता है इसलिए इसका नाम भुजंगासन रखा गया है। इसके लिए पेट के बल जमीन पर लेट जाएं। अब दोनों हाथ के सहारे शरीर के कमर से ऊपरी हिस्से को ऊपर की तरफ उठाएं, लेकिन कोहनी आपकी मुड़ी होनी चाहिए। हथेली खुली और जमीन पर फैली हो। अब शरीर के बाकी हिस्से को बिना हिलाए-डुलाए चेहरे को बिल्कुल ऊपर की ओर करें। कुछ समय के लिए इस पॉस्चर को यूं ही रखें। यह आसन आपकी मांसपेशियों के लिए काफी फायदेमंद है।

शीर्षासन
दोनों घुटने जमीन पर टिकाते हुए फिर कोहनियां जमीन पर टिकाएं। फिर हाथों की अंगुलियों को आपस में मिलाकर ग्रिप बनाएं, तब सिर को ग्रिप बनी हथेलियों के पास भूमि पर टिका दें। ‍इससे सिर को सहारा मिलेगा।फिर घुटने को जमीन से उपर उठाकर पैरों को लंबा कर दें। फिर धीरे-धीरे पंजे टिके दोनों पैरों को पंजों के बल चलते हुए शरीर के करीब अर्थात माथे के नजदीक ले आते हैं और फिर पैरों को घुटनों से मोड़ते हुए उन्हें धीरे से ऊपर उठाते हुए सीधा कर देते हैं तथा पूर्ण रूप से सिर के बल शरीर को टिका लेते हैं। कुछ देर इसी अवस्था में रहने के बाद पुन: उसी अवस्था में आने के लिए पहले पैर घुटने से मोड़ते हुए धीरे-धीरे घुटनों को पेट की तरफ लाते हुए पंजों को भूमि पर रख देते हैं। फिर माथे को भूमि पर टिकाकार कुछ देर इसी स्थिति में रहने के बाद सिर को भूमि से उठाते हुए वज्रासन में बैठकर पूर्व स्थिति में आ जाए।
पशिचमोत्सानइसे करने से आप न सिर्फ कई स्वास्थ्य समस्याओं से दूर रहेंगे बल्कि आपका शरीर लचीला होगा । इसके लिए सबसे पहले सीधे बैठ जाएं और दोनों पैरों को फैलाकर एक सीध में रखें। दोनों पैर सटाकर रखें। दोनों हाथों को ऊपर की ओर उठाएं और कमर को बिल्कुल सीधा रखें। फिर झुककर दोनों हाथों से पैरों के दोनों अंगूठे पकड़ने की कोशिश करें। ध्यान रहे इस दौरान आपके घुटने न मुड़ें और न ही आपके पैर जमीन से ऊपर उठें।
इन व्यायामों को अपनाने के बाद आपकी लंबाई में बढ़ोत्तरी हो सकती है। इन व्यायामों को करने के दौरान मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है और वे खिंचती है जिससे लंबाई बढ़ने में मदद मिलती है।

स्ट्रैचिंग व्यायाम की गलतियां
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स्ट्रेचिंग एक बेहतरीन एक्‍सरसाइज है। लेकिन, इसके करते हुए अगर कुछ जरूरी सावधानियों को नजरअंदाज कर दिया जाए तो यह काफी तकलीफदेह भी हो सकती है।

फिटनेस ट्रेनर
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फिटनेस का क्रेज आज हर उम्र के लोगों में दिखाई देता है, फिर चाहे युवा हो या फिर बुजुर्ग। आज हर व्‍यक्ति फिट रहना चाहता है।

स्वास्थ्य समस्याएं
मेरी उम्र 31 वर्ष है। मेरे पीरियड्स 14 साल की उम्र में शुरू हुए थे और तब से लेकर आज तक अनियमित हैं। सिर्फ एक से दो दिन ही होते हैं। इस बीच कई बार पीरियड्स बंद हुए और फिर शुरू हो गए। उस दौरान पेट के निचले हिस्से में दर्द, भूख न लगना, पैर के तलुवों में जलन जैसी शिकायत रहती है।

टहलने की शुरूवात आज से ही करें
तो आज से ही टहलना शुरू कर दीजिए क्योंकि आप इसके फायदों का अंदाजा भी नहीं लगा सकते।

 पुरुष कैसे रखें बुढ़ापे को दूर
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बुढापे से कितना भी बचा जाए, लेकिन कहीं न कहीं इसकी छाप नजर आ ही जाती है। लेकिन, इसके असर को तो कम किया ही जा सकता है साथ ही इसे लंबे समय तक टाला भी जा सकता है।

ग्‍लूट एक्‍सरसाइज के फायदे
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कमर दर्द में आराम, जांघों में मजबूती और बीमारियों से बचाव। ग्‍लूट एक्‍सरसाइज के ऐसे ही कई फायदे होते हैं। जानिए इसके अन्‍य लाभ क्‍या हैं।

विटामिन सी के कार्य
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विटामिन्स शरीर को स्वस्थ और फिट रखने के लिए बेहद जरूरी है। सिटरस फ्रूट्स में भी विटामिन्स पाए जाते हैं। आइए जानें विटामिन सी के कार्य के बारे में।

जीन में है छुपा है शरीर का आकार
महिलाएं अपने 'फिगर' को लेकर काफी सजग रहती हैं। इसके बावजूद कुछ की काया छरहरी, जबकि कुछ की मोटी होती है।

फिटनेस का फार्मूला: 
तनावमुक्ति के लिए क्‍या करेंयह ऊर्जा प्राप्ति का मूलभूत तरीका है। यह न सिर्फ साइकोसोमेटिक अभ्यास है वरन तंत्रिकापेशीय तनावमुक्ति देता है जिससे कम समय में अधिकतम आंतरिक ऊर्जा प्राप्त होती है। अपने तनाव को पहचानें कि वह सकारात्मक है या नकारात्मक एवं तनाव तंत्रिकापेशीय है या मानसिक।  यदि संभव हो तो अपने तनावों को किसी विश्वसनीय सहेली, रिश्तेदार से बांटें।

आर्मसविधि
पैरो पर खड़े होकर कंधो को विस्तार देकर एक ओर खड़े हो जाओअपनी पीठ को सीधा और अपने पेट को अन्दर रखो।अब अपने हाथो को एक तरफ से फैलाकर और अपने हाथो की हथेलियों को सामने बाहर की ओर फैलाएं।दोनो हाथो को एक साथ, अपने सामने हथेलियों के साथ अपने सामने सीधे बाहर की ओर रखेफैलाएं हुए हाथो को वापस एक ओर करेंप्रत्येक पक्ष को दस बार दोहराओं।अपने हाथो को एक तरफ फैलाकर और फिर उन्हे सीधे एक साथ अपने सिर के उपर लाकर और फिर उन्हे वापस नीचे लाकर सीधी स्थिति के लिए छोडने के द्वारा अपनी कसरत कर सकते है।


इ एक हाथ को सिर के उपर फैलाकर
एक हाथ में बैठकर या खड़े होकर एक डम्बेल को पकड़ते हुए कोहनी को मोड़कर सिर के पीछे की ओर रखे और डम्बेल के निचले किनारे को थोड़ा सा गले से स्पर्श करे।
    हाथो को उपर ले जाएं अधिकतम सीमा तक यह (डम्बेल) उठाएं और धीरे धीरे नीचे की ओर आरम्भिक स्थिति में आएं।
नोटः  कोहनी को सयुक्त न बांध एक झटके के साथ ???जब आपने अपने हाथ को उपर की ओर फैलाया हो अपनी कोहनी को झटके से

फोरार्म (हाथ की कोहनी तक)
 रिवर्स कर्ल
 कंधो को विस्तार देते हुए पैरो पर एक ओर खड़े हो जाओ, घुटनो को संयत और हाथो को शरीर के सम्मुख विस्तार दे या फैलाएं, एक बाहं उठाकर बारबेल को मुðी के साथ पकड़े। हाथो को कंधो से अलग फैलाएं।
    बारबेल को उठाते हुए सिरे तक कंधो के काफी समीप जहां तक हो सके उठाएं और फिर वापस आरम्भिक स्थिति में आ जाओ।

इ कलाई कर्ल
बेंच पर हाथो (आग्र भाग से कोहनी तक) को रख कर एक कारपेट फर्श पर अपने घुटनो के ...
जब आप हों थकान से परेशान
थकान आजकल हर किसी की जिंदगी का हिस्‍सा बन चुकी है। लेकिन, थकान से राहत पाना इतना भी मुश्किल नहीं। जानिए कुछ ऐसे उपाय जिन्‍हें अपनाकर आपकी थकान हो जाएगी छूमंतर।

हाथ और आंखों का समन्वय बेहतर करने के तरीके
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    हाथ और आंखों के बीच समन्‍वय 7 साल में हो जाता है विकसित।
    यदि इनके बीच बेहतर समन्‍वय न हो तो अक्‍सर होती है परेशानी।
    रंगों से, पहेलियों आदि के द्वारा इनके बीच बनाइये बेहतर समन्‍वय।
    वीडियो गेम्‍स, ऑनलाइन गेम्‍स, क्रिकेट, बेसबॉल आदि भी आजमायें।

हाथ और आंखों का साथ अनोखा होता है, और इनके बीच में समन्‍वय यानी तालमेल उम्र के 7 साल में अपने आप विकसित हो जाता है। यानी बच्‍चा 7 साल का होते-होते हाथ और आंखों के बीच समन्‍वय करना अपने-आप सीख जाता है।
कुछ लोगों में इन दोनों के बीच तालमेल बिठाने में परेशानी होती है, जिसके कारण उनको अक्‍सर परेशानी होती है। ऐसे लोग जिनका हाथ और आंखों का समन्‍वय बेहतर नहीं होता उनको गेम्‍स खेलेन में परेशानी होती है। यदि आप भी इसी तरह की समस्‍या से परेशान हैं तो हमारा यह लेख आपके लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है। आइए हम आपको बताते हैं कि कैसे आंखों और हाथों के बीच बेहतर तालमेल बनायें।


रंगों के जरिये
आंखों और हाथ के बीच तालमेल बनाने के लिए आप रंगों का सहारा ले सकते हैं। इसके लिए आप कलर बु‍क लीजिए और उसपर रंग उकेरिये। कुछ ड्राइंग बनाइये, रंगीन पेंसिल और मार्कर का इस्‍तेमाल कर पेंटिंग बनाइए। इससे आपको बचपन की याद आयेगी लेकिन यह हाथ और आंखों के बीच समन्‍वय बेहतर करने के सबसे कारगर तरीकों में से एक है।

 वीडियो गेम या ऑनलाइन गेम
वीडियो गेम और ऑनलाइन गेम खेलने के लिए आपको हाथों के साथ-साथ आंखों के बेहतर समन्‍वय की जरूरत होती है। इस प्रकार के गेम में निर्धारित लक्ष्‍य को आप तभी हासिल कर पायेंगे जब आपका हाथ और आंखों का तालमेल अच्‍छा हो। इस प्रकार के खेल खेलने से आपके आंखों और हाथों का समनवय बेहतर होगा।

 पहेली के जरिये
हाथ और आंखों के समन्‍वय के लिए आप पहेली का सहारा ले सकते हैं। पहेलियों से न केवल आपके हाथ और आंखें का तालमेल बेहतर होगा बल्कि इससे आपका दिमाग भी तेज होगा। इन प्रकार के प‍हेलियों के जरिये आंखों और हाथ का तालमेल बेहतर होगा। यदि आप सामान्‍य पहेलियों को आसानी से हल कर पा रहे हैं तो थ्री-डी पहेलियों का अभ्‍यास कीजिए।

 क्रिकेट और बेसबॉल
क्रिकेट और बेसबॉल तो बहुत से लोगों का पसंदीदा खेल है, और इस प्रकार के खेल रुचिकर भी होते हैं। हाथ और आंखों के बीच बेहतर समन्‍वय के लिए ऐसे खेल का अभ्‍यास करना बहुत ही कारगर व्‍यायाम है। क्रिकेट और बेसबॉल के अभ्‍यास से आप अपने शरीर को फिट भी रख सकते हैं।

 रैकेट ड्रिल
1992 में 'क्‍लीनिक्‍स इन गेरियाट्रिक मेडिसिन' में एक रिसर्च छपा था, जिसके अुनसार, 'हाथ और आंखों के बीच बेहतर समन्‍वय बनाने में रैकेट खेलना फायदेमंद है, खासकर ऐसे लोगों में जो उम्र में अधिक हो चुके हैं।' रैकेट ड्रिल के जैसे खेल का अभ्‍यास नियमित करके आप अपने हाथ और आंखों के बीच बेहतर समन्‍वय स्‍थापित कर सकते हैं।
इसके अलावा आप नियमित बॉक्सिंग कर सकते हैं, कुछ बच्‍चों के गेम्‍स खेल सकते हैं, जैसे - क्रॉफ्ट बनाना, किसी प्रकार का मॉडल बनाना आदि। इसके जरिये आप अपने हाथ और आंखों के बीच बेहतर समन्‍वय बना सकते हैं।

टुकड़ों में करें कसरत होगा ज्‍यादा फायदा
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दो मिनट का कड़ा व्‍यायाम और 90 मिनट की दौड़ का असर बराबर होता है। दो मिनट की कड़ी कसरत 90 मिनट की दौड़ लगाने जितना ही फायदेमंद साबित होती है।



चेहरे के लिए योग और व्यायाम
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    योग से चेहरे के धब्बे, झाइयां, झुर्रियां को दूर किया जा सकता है।
    उदान मुद्रा और कपोल शक्ति विकासक क्रिया से आती है चमक।
    चेहरे की वसा घटाने के लिए ठोढ़ी को 20 बार अंदर-बाहर कीजिए। 
    इसके अलावा अपने डायट चार्ट में पोषक तत्‍वों को शामिल कीजिए।

खूबसूरत चेहरे की चाहत सभी की होती है, इसके लिए लोग खासकर महिलायें बहुत जतन करती हैं। कुछ लोग तो इसके लिए बाजार में उपलब्‍ध कई प्रकार की फेयरनेस क्रीम का प्रयोग चेहरे की सुंदरता के लिए प्रयोग चेहरे पर निखार लाने के लिए प्राकृतिक तरीके जैसे - योग और व्‍यायाम सबसे फायदेमंद हैं। यदि आप चेहरे के लिए योग और व्‍यायाम करते हैं तो यह आपकी उम्र को भी छिपा सकता है। योग की कुछ क्रियाओं से चेहरे पर लालिमा आती है तथा धब्बे, झाइयां, झुर्रियां और कालापन दूर किया जा सकता है। योग और व्‍यायाम आपके चेहरे की सुंदरता तो निखारते हैं साथ ही यह आपके पूरे शरीर को फिट भी रखते हैं। आइए हम आपको बताते हैं कि चेहरे के लिए कौन सा योग और व्‍यायाम करें।
चेहरे के लिए योग

    कपोल शक्ति विकासक क्रिया चेहरे प‍र निखार लाने के लिए अच्‍छा योगासन है। इसके लिए सुखासन या फिर पद्मासन में बैठ जाएं। दोनों हाथों की आठों अंगुलियों के आगे के भाग को आपस में मिलाकर दोनों अंगूठे से दोनों नाकों के छिद्रों को बंद कर लें। फिर सांस अंदर खींचे। फिर दोनों अंगूठों से नाक के छिद्रों को बन्द कर लें और अपने गालों को गुब्बारे की तरह फुलाएं और अपनी क्षमता अनुसार सांस रोककर धीरे-धीरे सांसों को बाहर निकालें। यह अभ्यास कम से कम 20 बार करें।

    पद्मासन में बैठकर, अपने मुंह को इस प्रकार चलाएं, जैसे कि गाय या भैंस चारा खाने के बाद जुगाली करती है। इस क्रिया को कम से कम 2 मिनट करें।
    सुखासन में बैठकर दोनों हाथों की अंगुलियों से अपने गालों को लगातार थपथपाएं। इस क्रिया को उसी प्रकार कीजिए, जिस प्रकार हम दुलार से किसी को तमाचा मार रहे हैं। यह क्रिया रोज 5 मिनट करें।
    अपनी गर्दन को पीछे की तरफ मोड़कर फिर अपने नीचे वाले होंठ से ऊपर वाले होंठ को छूने का प्रयास करें, कुछ देर इसी अवस्था में रुककर सामान्‍य स्थिति में आयें। यह इस क्रिया का एक चक्र हुआ। कम से कम 10 बार इसका अभ्यास करें।
    उदान मुद्रा करने के लिए पद्मासन में बैठ जायें। फिर अपने दोनों हाथों की तीनों अंगुलियों (तजर्नी अंगुली को छोड़कर) बाकी अंगुलियों को अंगूठे के टिप से आपस में मिलाइये। इसका अभ्यास 5 मिनट रोज करें।
    हाथों में दस्ताने पहनकर, दोनों अंगूठों को पूरी तरह मुंह के अंदर इस तरह डालें कि ऊपर के जबड़ों और ऊपरी होंठों से लगें। होंठों को फैलाएं, जिससे मांसपेशियों में खिंचाव महसूस हो, अब होंठों को बन्द करके दबाव दें। इस क्रिया का अभ्यास 5-6 बार करें।
    वज्रासन में बैठकर घुटनों को थोड़ा खोलकर रखें। हाथों की अंगुलियों को शेर के पंजे के समान खोलकर दोनों घुटनों पर रखें। सांस खींचकर जीभ बाहर निकालें और फिर सांस छोड़ते हुए शेर जैसी गजर्ना करें। इस क्रिया में मुंह ज्यादा से ज्यादा खुला होना चाहिये। जीभ अधिक से अधिक बाहर निकली होनी चाहिये। गले की मांसपेशियों में तनाव लाएं। इस आसन का अभ्यास 3-4 बार कर सकते हैं।
    जब समय मिले, खूब जोर से हंसिये, इसे हास्‍यासन कहते हैं। इतना हंसिये कि आंखों में आंसू आ जाए, क्योंकि हंसने के दौरान जिस्म की सभी 600 मांसपेशियों की कसरत एक साथ होती है। ठहाका लगाकर हंसने से फेफड़ों में ज्यादा ऑक्सीजन जाती है, रक्त शुद्ध होता है और चेहरा गुलाब की तरह खिल जाता है।

 चेहरे के लिए व्‍यायाम
मुंह को जितना हो सके खोल लीजिए, जीभ को बाहर निकालकर कुछ सेकेंड तक इसी स्थिति में रहिए। इस व्‍ययाम को 10 बार कीजिए। इससे जबड़े मजबूत होते हैं और यह गले की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।
    मुंह को जितना चौड़ा हो सके उतना खोलिये, 10 सेकेंड तक इसी स्थिति में रहिए और कम से कम 10 बार इस क्रिया को दोहराइए। इस व्‍यायाम से चेहरे की रेखायें हटती हैं।
    अपनी नाक और मुंह को सिकोड़कर लगभग 5 मिनट तक रखें। इस व्‍यायाम को 10 बार कीजिए। इससे चेहरे की झाइयां हटती हैं।
    सिर को पीछे की तरफ झुकाकर दांतों को भींच लें और मुंह के कोनों को पीछे की ओर खींचकर 10 मिनट तक इसी स्थिति में रहें। इस क्रिया को 8-10 बार दोहरायें। इससे चेहरे पर पड़ने वाली झुर्रियां दूर होती हैं।
    सिर को सीधा रखते हुए ठोढ़ी को बाहर निकालें, फिर ठोढ़ी को अंदर ले जाइए। इस क्रिया को 20 बार करें। यह व्‍यायाम ठोढ़ी के नीचे की फालतू की वसा को कम करता है।
    चेहरे को खूबसूरत बनाने के लिए योग और व्‍यायाम के साथ-साथ पौष्टिक आहार और आराम भी जरूरी है। इसलिए खाने में ताजे फल, हरी सब्जियों, सूखे मेवे आदि को शामिल कीजिए।

 आपका चेहरा आपके व्‍यक्तित्‍व का आईना होता है। और आप कुछ व्‍यायाम और योग के जरिये अपने चेहरे को सुंदर और सेहतमंद बनाकर रख सकते हैं। जरूरत इस बात की है आप इन व्‍यायाम और योगासनों को नियमित तौर पर करें। इससे आपके चेहरे के साथ-साथ आपका स्‍वास्‍थ्‍य भी अच्‍छा रहेगा।

 मसल्स बनाने के लिए कसरत और आहार में सही तालमेल है जरूरी
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मसल्स बनाना कोई आसान काम नहीं है। इसके लिए आपको मसल्स बनाने के वर्कआउट नियमों के बारे में जानना जरूरी है। जानिए किस प्रकार आप अपने आहार व वर्कआउट में संतुलन बना सकते हैं।

 व्यायाम से दूर होती है भूलने की बीमारी
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हल्का-फुल्का व्यायाम हर उम्र के लोगों के लिए फायदेमंद है। नियमित तौर पर व्यायाम करने से बुजुर्गो की याददाश्त बढ़ सकती है। यही नहीं, वे अधिक दिनों तक भूलने की बीमारी (डिमेंशिया) का शिकार होने से भी बच सकते हैं-दूर होता है।

 असुरक्षित व्यायाम की आदतें
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हर कोइ चाहता है कि वो फिट रहे और अच्छा दिखे। ऐसे में जिम जॉइन करना सबसे आम विकल्प दिखता है। शरीर को आकार में लाने का यह पहला कदम हो सकता है पर ज़रा सम्भलकर, क्योंकि आजकल निरंतर जिम में कसरत, युवाओं में बढ़ रही दुर्घटनाओं का कारण बन गयी है।

 मांसपेशियां बनाने के गलत तरीके
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प्रोटीन सप्लिमेंट्स से होने वाले दुष्प्रभाव आपको लम्बे समय तक प्रभावित कर सकते हैं। इस लेख में जानिए कि बॉडी बनाने के गलत तरीके क्‍या-क्‍या हैं।

  सूखे का स्‍वास्‍थ्‍य पर प्रभाव
 सूखे की स्‍ि‍थति स्‍वास्‍थ्‍य पर न सिर्फ छोटे बल्कि लंबे वक्‍त के लिए प्रभावित करती है।



स्वास्थ्य के विषय में सही क्या गलत क्या
कुछ स्वास्थ्य संबंधी धारणाएं हैं जो बरसों से मानी जाती रही हैं लेकिन उनमें से कुछ तो सही हैं और कुछ गलत। आइए जानें वे कौन सी धारणाएं हैं-

अंगुली के पोरों और टखने के जोड़ों का चटकना अर्थराइटिस का संकेत है:
गलत : जोड़ों के चटकने से आने वाली आवाज जोड़ों के बीच की गैस होती है जो चटकने पर निकलती है।

 ज्यादा सोओगे, बीमार हो जाओगे
गलत: जो लोग शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ होते हैं वे ज्यादा देर तक नहीं सोते। ज्यादा देर तक वह व्यक्ति सोता है जो वास्तव में बीमार होता है। उसे डिप्रेशन की भी शिकायत हो सकती है।

 छींकें रोकना नुकसानदेह होता है
सही: अगर आप छींक रोकते हैं तो म्यूकस दबाव के कारण कानों की तरफ चला जाता है जिससे इंफेक्शन होने का डर तो रहता ही है, बहरेपन की संभावना भी रहती है।



 

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आफिस स्‍वास्‍थ्‍य
संगीत, व्‍यायाम और योग कामकाजी महिलाओं को रखता है तनाव से दूर
    नैंपिंग के फायदे
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     नींद के अलावा उंघना भी सेहत के लिए अच्‍छा होता है। क्‍या आप जानते हैं कि कुछ मिनट के लिए उंघने से आप तरोताज़ा महसूस करते हैं और यह बात वैज्ञानिक तौर पर सिद्ध हो चुकी है। कुछ देर झपकियां लेने के बाद, आप पूरे दिन के लिए रीचार्ज भी हो सकेंगे।

        आंखों से संबंधी भ्रम और तथ्‍य
 कंप्‍यूटर का इस्तेमाल करने का एक और अच्छा तरीका है कि आप हर एक घण्टे पर अपनी आंखों को थोड़ा आराम दें।

    कंप्‍यूटर प्रयोग और स्‍वास्‍थ्‍य
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आज की बदलती जीवनशैली में कंप्यूटर या लैपटाप का प्रयोग हमारी आवश्‍यकता है, इस बात को नकारा नहीं जा सकता।

    आंखों की सेहत जानें

    आंखों की सेहत के लिए खाने में ज्यादा नमक नहीं खाना चाहिए क्योंकि इससे आंखें कमजोर होती हैं।
    लोहे, तांबे व कांच के बर्तन में भोजन करने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।
    खाने में रोजाना शुद्ध घी का प्रयोग करना चाहिए। यह आंखों के लिए लाभकारी होता है।
    सुबह-सुबह मुंह में पानी भरकर बंद आंखों पर 20-25 बार ठंडे पानी के छींटे मारें। याद रखें, मुंह पर छींटे मारते समय या चेहरे को पानी से धोते समय मुंह में पानी भरा होना चाहिए।
    ऑफिस में लगातार कंप्यूटर पर नहीं बैठें बीच में थोड़ा ब्रेक लेकर 1-2 बार आंखें बंद कर, आंखों पर हल्के दबाव के साथ हथेलियों को रखकर आंखों को आराम देते रहें।
    शरीर पर तेल मालिश खासकर पैर के तलवे में मालिश से आंखों की रोशनी बढ़ती है।
    धूप से आने के तुरंत बाद चेहरे पर ठंडा पानी नहीं डालें। शरीर का तापमान सामान्य होने के बाद ही चेहरा धोएं। आंखों को गर्म पानी से नहीं धोना चाहिए।
    धूप में बाहर निकलने से पहले चश्‍मा जरूर लगाएं। इससे सूर्य की अल्ट्रावॉयलेट किरणें आंखों तक नहीं पहुंच पाती है।
    बहुत देर तक कम रोशनी में पढाई लिखाई नहीं करनी चाहिए। यह आंखों की सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। 
    रात को देर तक नहीं जगें और सूर्योदय के बाद देर तक सोना आंखों के लिए हानिकारक होता है। अगर आपको काम की वजह से देर रात तक जागना पड़े तो आधे-आधे घंटे में एक गिलास ठंडा पानी पी लेना चाहिए।
    अगर आपको नींद आ रही और आंखे बोझिल हो रहीं है तो ऐसे में देर तक नहीं जगें तुरंत सो जाएं।
    शरीर के दूसरे अंगों की तरह आंखों के लिए भी नियमित व्यायाम करें।
    आंखों के मेकअप के लिए सौंदर्य प्रसाधनों को चुनते समय हमेशा सावधानी बरतें।
    समय-समय पर आंखों के डॉक्टर से आंखों की जांच करवाते रहें।

आईए जानें कुछ ऐसे टिप्स जिनसे आप अपनी आंखों को सेहतमंद और खूबसूरत बनाए रख सकें।

    स्वच्छ और किटाणुरहित कार्यस्थल
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कार्यस्थल को खुला और हवादार बनाने के लिए कदम उठाने चाहिए क्योंकि यह ताज़ी हवा का स्त्रोत बनाए रखने में मदद करता है । स्वच्छ और किटाणुरहित कार्यस्थल के लिए निम्नलिखित बातों का समावेश होना चाहिए।

    आफिस में बैठने का सही तरीका
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आफिस एरगोनामिक्स आपको काम के आरामदायक तरीके समझने में मदद करती है । इससे तनाव, काम के दौरान घाव या असहज स्थिति की सम्भातवना कम होती  है ।

    की-बोर्ड भी बना सकता है बीमार
की बोर्ड का इस्‍तेमाल हम सब करते हैं, लेकिन क्‍या आप जानते हैं यही की-बोर्ड आपको बीमार भी बना सकता है। जानिये कैसे...

     लैपटॉप-टैबलेट न बन जाएं दर्द का सामान
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टेबलेट पर लंबे समय तो नजर गड़ाए रखने से आपकी गर्दन, सिर और कंधे प्रभावित होते है, जैसे-जैसे आपकी गर्दन नीचे झुकती जाती है, वैसे-वैसे तकलीफ़ बढ़ती जाती

    खान-पान में पौष्टिक आहार की कमी के कारण तनाव होना लाजमी है।
    ऑफिस जाने की तैयारी कर रही हैं तो ब्रेकफास्‍ट करना बिलकुल न भूलें।
    दिमाग को आराम देने के लिए एक घंटे में 10 मिनट का ब्रेक लीजिए।
    संगीत सुनने से आपके दिमाग को आराम मिलेगा और तनाव नहीं होगा।

कामकाजी महिलाओं की संख्‍या बढ़ रही हैं और वे नये कीर्तिमान भी स्‍थापित कर रही हैं। लेकिन महिलायें ऑफिस और घरवालों की देखरेख में खुद के स्‍वास्‍थ्‍य के प्रति लापरवाह भी हो जाती हैं। कार्यालय में काम के बोझ के कारण तनाव ज्‍यादा होता है।

लाइफस्‍टाइल का नकारात्‍मक असर सबसे ज्‍यादा स्‍वास्‍थ्‍य पर पड़ता है। खान-पान में पौष्टिक आहार की कमी के कारण तनाव होना लाजमी है। यदि आप नियमित दिनचर्या का पालन कर रही हैं तो काम के दौरान तनाव होने की संभावना कम होती है। इसके लिए जरूरी है मॉर्निंग वॉक और सुबह का नाश्‍ता। यदि आप इन तरीकों का पालन कर रही हैं तो ऑफिस में तनाव होने की संभावना भी कम होगी और आप फिट भी रहेंगी। आइए हम आपको ऑफिस में तनाव दूर करने के कुछ टिप्‍स बताते हैं।
ऑफिस में तनाव दूर करने के टिप्‍स

 ब्रेकफास्‍ट करके जायें
ऑफिस जाने की तैयारी कर रही हैं तो ब्रेकफास्‍ट करना बिलकुल न भूलें। सुबह का नाश्‍ता न केवल आपका पहला आहार होता है बल्कि यह आपको पूरे दिन ऊर्जावान रखता है। सुबह के नाश्ते में पूड़ी, पराठा न लें, इससे आलस्य आता है। नाश्ते में दूध के साथ ब्राउन ब्रेड, जैम या थोड़ा-सा मक्खन, मैंगो शेक, स्प्राउट, दलिया, ब्रेड-अंडा, सैंडविच के साथ 1 कप काफी आदि ले सकते हैं।

 काम के बीच ब्रेक
लगातार काम करने से बचें, काम के दौरान बीच में ब्रेक बहुत जरूरी है। लगभग 1 घंटे के बाद 10-15 मिनट का ब्रेक लीजिए। ब्रेक लेने से आपके दिमाग को आराम मिलता है और दोबारा काम करने के दौरान आलस नहीं आता। इसके अलावा यह आपको तनाव से भी बचाता है। इसलिए काम के बीच में ब्रेक बहुत जरूरी है।

 थोड़ा सा टहलें
कुर्सी पर ज्‍यादा देर तक बैठने से आपको तनाव या सिरदर्द हो रहा है तो कुर्सी छोड़क थोड़ी देर टहलें। इस दौरान आप अपने ऑफिस के कैफीटीरिया, अपने कैबिन या फिर सहकर्मी के की सीट तक टहल सकते हैं। टहलने से शरीर रक्‍त का संचार सुचारु तरीके से होता है। टहलने से आप एनर्जेटिक रह सकते हैं। काम के बीच में टहलने का समय निकालें।

 संगीत सुनें
कार्यालय में यदि लगातार काम करने से आपको तनाव हो गया है तो कुछ देर तक आप अपना मनपसंद संगीत सुन सकते हैं। संगीत सुनने से आपके दिमाग को आराम मिलेगा और तनाव नहीं होगा। काम के दौरान संगीत सुनने से सकारात्‍मक ऊर्जा मिलती है जिससे दिमाग एकाग्र होता है। एकाग्र दिमाग से व्‍यक्ति अच्‍छा काम कर सकता है।

 योग और व्‍यायाम
यह जरूरी नहीं कि आप योग और एक्‍सरसाइज सुबह या शाम के समय ही कर सकते हैं। सारा दिन कुर्सी पर बैठकर काम करने से शरीर की मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है और इससे तनाव भी हो सकता है। जब भी आप बोर हों या थकान महसूस करें तो स्ट्रेचिंग व्यायाम कर ताजगी ला सकते हैं। इसके लिए अपनी कुर्सी से पांच-दस बार उठ बैठ सकते हैं। खड़े-खड़े दोनों हाथ ऊपर उठाकर पंजों के बल खड़े हो सकते हैं, कमर से दाएं-बाएं बाजुओं को घुमा सकते हैं।

थोड़ा फन भी
ऑफिस में गंभीर मुद्रा में काम न करें, हंसते और मुस्‍कराते रहें, इससे आपका तनाव कम होगा साथ ही आपके साथियों का मूड भी अच्‍छा रहेगा। काम करते वक्त अपना चेहरा मुस्कराते हुए रखें। बीच में अपने मित्र के साथ चैट कर लें, फनी वीडियोज देख लें, जोक्स आदि पढ़ लें। इससे आपका मूड अच्छा रहेगा और काम करने का मन भी करेगा क्योंकि ये सब चीजें तनाव दूर करती हैं।

 पानी खूब पियें
पानी पीना स्‍वास्‍थ्‍य के लिए सबसे ज्‍यादा फायदेमंद है, इससे शरीर फिट रहता है कई बीमारियां नहीं होती हैं। सिरदर्द और तनाव दूर करने के लिए खूब सारा पानी पीजिए। अधिकतर आफिस एसी वाले होते हैं, एसी हमारे शरीर से नेचुरल नमी को चुराते हैं। उस नमी को बरकरार रखने के लिए दिन में थोड़ी-थोड़ी देर बाद पानी पीते रहें और दो-तीन बार ठंडे पानी से चेहरा धो लें।
ऑफिस में फिट रहने के लिए भरपूर आराम भी जरूरी है, इसलिए ऑफिस का काम वहीं निपटाइये और 7-8 घंटे की नींद के बाद सुबह व्‍यायाम कीजिए। इन सबसे भी आपका तनाव दूर न हो रहा हो तो चिकित्‍सक की सलाह लीजिए।

तनाव का मुकाबला करने की स्किल सीखें

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भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव होना लाजमी है। ऐसे में इससे भागने की बजाय इसका मुकाबला करने की कोशिश कीजिए।
अगर आप तनाव से जितना बचने की कोशिश करेंगे उतनी ही मानसिक पीड़ा होगी। कई प्रकार की मानसिक बीमारियां आपको अपना शिकार बना लेंगी। आइए हम आपको तनाव से बचने के कुछ टिप्‍स के बारे में बताते हैं।

 तनाव से लड़ने के कुछ टिप्स:
अपनी सोच पर ध्यान दें :
 ध्यान रखें जहां निगेटिव और फियरफुल सोच से तनाव और परेशानी बढ़ जाती है वहीं बुरी से बुरी परिस्थिति में भी पाज़िटिव सोचने से तनाव कम होता है।

 कल्पना करना सीखें:
ऐसी कल्पना करें कि आप जीवन में क्या चाहते हैं।

 रोज़ व्यायाम करें:
शारीरिक श्रम करने से हमारे शरीर से बिना कारण की चिन्ता खत्म हो जाती है और शरीर ठीक प्रकार से काम करता है ा व्यायाम करने से हमें चिन्ता से भी राहत मिलती है।

 आराम करना सीखें:
 हर दिन कुछ समय आराम करें, इससे हमें बुरी स्थितियों का सामना करने की ताकत मिलती है ा आराम करना भी एक स्किल है। ऐसी किताबें पढ़ें जिससे आपका आत्मबल बढ़े । अपना मनपसंद गाना सुनें ।

 तनाव के बारे में बात करें:
अपने किसी प्रिय मित्र या किसी पारिवारिक सदस्य से अपनी बातें शेयर करें। ऐसा करने से तनाव कम होता है।
अपने रोज़मर्रा के काम को प्लान कर लें :
हर दिन का प्लान करने से आप अपने समय का मूल्यांकन कर सकेंगे और तनाव से बच सकेंगे। ऐसा करके आप अपने काम के साथ साथ मनोरंजन का भी समय निकाल सकते हैं । आप अपने परिवार या मित्रों के लिए भी समय निकाल पायेंगे और अपने काम को भी ठीक प्रकार से कर सकेंगे ।

यथार्थवादी गोल बनायें :
 वो लोग जो अपनी क्षमता से कहीं ज़्यादा की इच्छा करते हैं वो अकसर निराशा के शिकार को जाते हैं ा इसलिए अपनी क्षमता को देखते हुए अपने गोल बनायें ।

अपना मनोरंजन भी करें :
हर रोज़ अपने मनोरंजन के लिए थोड़ा समय भी निकालें। अपने आपको हर रोज़ ऐसे कामों में लगायें जिन्हें आप इन्जाय कर सकें ।

तनाव दूर करने का सबसे आसान तरीका है मनोरंजन ।

रेगुलर फीज़िकल चेक अप करायें:
फीज़िशियन भी आपको तनाव से बचा सकते हैं और स्वस्थ्य रह कर भी तनाव से बचा जा सकता है। इसलिए हेल्थ चेक अप कराते रहें ।

कैसे बचें तनाव से 

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तनाव और परेशानी आज हमारे जीवन का एक आम हिस्सा बन कर रह गया है। कभी-कभी इन तनाव भरी स्थितियों का और अपनी ज़िम्मेदारियों का प्रबंधन करना बहुत मुश्किल हो जाता है।
हर रोज़ के काम और तनाव की स्थिति के बाद अगर हम कुछ समय अपने आप को दें तो शायद हमें तनाव से बचने के कुछ रास्ते मिल जायें। अगर आप रोजमर्रा के तनाव और परेशानियों से परेशान हो जाते हैं तो इसका अर्थ है कि आपको तनाव कम करने की ज़रूरत है।

तनाव से बचने के कुछ तरीके जिनसे आप अपने आपको थोड़ा आराम दे सकते हैं

मनोरंजन
मनोरंजन करने वाली गतिविधियों को अपनाकर आप अपने जीवन को रोचक और खुशनुमा बना सकते हैं। व्यायाम करना, पेंटिंग करना, खाना बनाना या नाच गाने में कुछ समय व्यतीत करके आप अपना मनोरंजन कर सकते हैं।
    किसी पर्सनल नोट पर ऐसा लिखें कि मैं हर दिन इस तरह की दो एक्टिविटी करूंगा। इससे आप खुद को तरोताजा़ महसूस करेंगे।
    आज हर उम्र के लोग डांस क्लास जाइन कर सकते हैं। डांस से आपका थोड़ा व्यायाम भी हो जाता है और इससे आप तनाव मुक्त भी अनुभव करेंगे।

 स्पा और मसाज थेरेपी
शोधों से ऐसा पता चलता है कि पैरों की मसाज करने से पूरे शरीर का तनाव कम हो जाता है। इस तरह की मसाज थेरेपी को आयुर्वेदिक सेन्टर पर भी सीखा जा सकता है। आज मसाज थेरेपी को कई भागों में बांटा गया है जैसे स्वेडिश मसाज थेरेपी, अरोमाथेरेपी, रिफ्लेक्सालाजी, स्पोर्टस मसाज और डीप टिश्यु मसाज।

    ऐसा पाया गया है कि रिफ्लेक्सालाजी से बहुत आराम मिलता है क्योंकि इससे तनाव बहुत ही जल्दी चला जाता है। बहुत से माल आज फिश थेरेपी करा रहे हैं, इस थेरेपी में आपको अपने पैर एक्वेरियम में डालने होते हैं और मछलियां आपकी डेड स्किन को खा लेती हैं। इस प्रकार की थेरेपी का खर्च आधे घंटे में लगभग 300 से 400 तक आता है।

 एम्यूज़मेंट पार्क
 पूरे परिवार के साथ एम्यूज़मेंट पार्क जैसी जगह पर जाने का मज़ा ही कुछ और होता है। ऐसे वातावरण में आप अपने आपको रिलैक्सड महसूस कर सकते हैं और इससे आपके मूड पर भी अच्छा प्रभाव पड़ता है।
    वाटर राइड या रेन डांस को इन्जाय करके आप पूरी तरह से फ्रेश महसूस कर सकते हैं। इसका खर्च लगभग 500 से 1000 रूपये तक आयेगा।

 योगा
योगा से हमारा शरीर और दिमाग संतुलित रहता है इसलिए लम्बे समय तक कुछ आसन करके आप तनाव मुक्त हो सकते हैं। हर रोज़ कुछ समय तक योगा करें और हफ्ते भर में आप फर्क महसूस करेंगे। योगा क्लास जाइन करके आप 10 से 30 पोज़ सीख सकते हैं जैसे शवासन या शिर्षासन जो कि बहुत मुश्किल माने जाते हैं। अगर आप घर पर योगा करते हैं तो आपका खर्च भी बच सकता है।

 लाफ्टर सेशन
यह एक बहुत पुराना कथन है कि हंसी सबसे अच्छी दवा है और आज शोधकर्ताओं ने यह सिद्ध भी कर दिया है। वो लोग जो तनाव की स्थितियों में भी अच्छे मूड में रहते हैं उनका इम्यून सिस्टम ठीक रहता है। अपने आसपास के पार्क में अपने परिवारजनों या मित्रों के साथ जाकर हंसें या फिर कामेडी मूवी देखने जायें।

नौकरी मन की न हो तो तन पर पड़ता है बुरा असर

यदि आप अपनी नौकरी से असंतुष्ट हैं, तो इसका आपके स्वास्थ पर खराब असर पड़ सकता है। खास तौर पर, मानसिक स्वास्थ्य पर। एक नए अध्ययन में यह बात कही गई है।
अध्ययन ऑस्ट्रेलियाई राष्ट्रीय विश्र्वविद्यालय के डॉ. लियाना लीच के नेतृत्व में किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि मन की नौकरी न होना तनाव पैदा करता है। अध्ययन के अनुसार नौकरी होने का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि इससे स्वास्थ्य बेहतर रहेगा। वास्तव में, कई बार लोग अनिच्छा वाली नौकरी में बेरोजगारी की अपेक्षा ज्यादा अवसाद में जीते हैं।
डॉ. लीच के अनुसार, पूर्ववर्ती शोधों के परिणाम बताते हैं कि काम का दबाव लोगों के सामाजिक-आर्थिक, स्वास्थ्य और निजी हालातों को सुधारने में मदद करता है। वह कहती हैं कि यह शोध लोगों को सलाह देता है कि 'कोई भी' नौकरी मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद नहीं कर सकती। इसके बजाय लोगों को बेहतर जिंदगी बिताने के लिए ऐसे काम करने की जरूरत है, जो उनके मन के हों और जिनमें उनका विकास हो। यह नियोक्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए माहौल पर तय करता है।

महिला बास
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सदियों से महिलाओं की आलोचना होती आ रही है और उन्हें पुरूषवर्ग से कम समझा गया है। लेकिन पिछली कई सदी में महिला बास का समर्थन भी हुआ है।

आपका प्रमोशन होता है और आपको महिला बास के आधीन काम करना पड़ता है। ऐसे में जब लोग आपको बधाइयां देते हैं तो आपको खुशी से ज़्यादा यह चिन्ता होती है कि आप महिला बास के आधीन कैसे काम करेंगे। महिला बास की महान स्थिति किसी ऐयाश पुरूष की तरह है जो कि अपने अनुसार एक हाट सेक्रेटरी रखता है या बहुत से मज़ाक का शिकार होता है। आइये यह जानने की कोशिश करें कि इस पुरानी सोच ने नया रूप कैसे लिया कि एक महिला बास का रूप सभी पुरूषों को डरा देता है।
गुड़गांव के एम एन सी में काम करने वाली 26 वर्षीय अदिल चक्रवर्ती का कहना है कि मैंने पुरूष और महिला बास दोनों के साथ काम किया है लेकिन महिला बास के साथ काम करने में ज़्यादा सावधानी बरतनी पड़ती है क्योंकि आपको पता नहीं होता कि वो क्या सोच रही हैं । अगर उनका काम उनके अनुसार नहीं हुआ तो आप अपने आपको किसी कटघरे में खड़ा महसूस करेंगे ।

 क्‍या है वजह महिला बास के रूखेपन की
महिलाएं पुरूषों की तुलना में अधिक भावुक होती हैं और इसलिए उन्हें काम में और वास्तविक जीवन में सम्पर्क बनाने में समय लग जाता है । उन्हें यह समझाना थोड़ा मुश्किल होता है कि यह बिज़नेस है पर्सनल नहीं है।
    वो महिलाएं जो बोर्डरूम के बाहर बातें नहीं करतीं वो भी एक साथ खाना पसन्द करती हैं लेकिन क्या आपने किसी पुरूष प्रतिद्वंदी को साथ में खाना खाते देखा है।
    पुरूष ज़्यादा काम्पटीटिव होते हैं और इसलिए वो लम्बे समय तक नहीं सोच पाते और अपने पुराने प्रतिद्वंदी पर विश्वास नहीं करते चाहे वो उसी टीम में हों ।
    अच्छा तो यह है लिंग असहमति। लेकिन ऐसा देखा गया है कि पुरूषों की तुलना में महिलाए एक ही समय में कई काम करने में सक्षम हैं और वो असानी से किसी भी समस्या का समाधान निकालने में समर्थ हैं।

 महिला बास के व्‍यवहार पर पुरूषों की राय
कुछ पुरूष कर्मचारियों का मानना है कि वास्तव में महिलाएं पुरूषों की तुलना में अधिक कठोर होती हैं। कुछ पुरूष इस बात से असहमत हैं कि महिलाएं ऐसे मानक स्थापित कर रही हैं जो पुरूषों के लिए सम्भव नहीं है। बल्कि उनका मानना है कि
महिलाएं कितना काम और कितने अच्छे से काम करती हैं इस बात से ज़्यादा यह बात महत्व रखती है कि वह अपने काम पर कितना ध्यान दे पाती हैं।
एक पुरूष इस बात से सन्तुष्ट हो सकता है कि उसने बहुत ज़्यादा या समय पर काम किया है लेकिन एक महिला आपसे शिष्टाचार की भी उम्मीद करेगी।

    पब्लीशिंग हाउस के मार्केटिंग मैनेजर 32 वर्षीय रईज़ मिश्रा एक हास्यजनक घटना को याद करते हैं। उनकी महिला बास किसी भी प्रेज़ेंटेशन के दौरान अपनी नौकरानी से फोन पर बातें करती रहती थी कि उनके बच्चे को कैसे चुप करायें, कैसे सुलाए, कैसे खाना दे । हम सभी ने सोचा कि अब यह बहुत हो गया। वो प्रेज़ेंटेशन पर बिलकुल ध्यान नहीं देती थी और हमलोग अपनी प्रोडक्शन से बहुत नीचे जा चुके थे। इसके बाद भी वो 75 प्रतिशत हमारी गलतियां निकालती थीं।

    क्या महिलाएं मल्टिटास्क हो सकती हैं।

    क्या यह आदतें पुरूषों को डरा सकती हैं। सिन्हा ने दूसरी बात कही कि पुरूषों की तुलना में महिलाएं दोतरफा जीवन जीती हैं। घर पर वह पत्नी और मां होती हैं ।  काम पर आते समय उनके दिमाग में यह बातें होती हैं कि उनके बच्चे ने खाना खाया है या नहीं ।  नौकरानी ने रात के डिनर की तैयारी की है या नहीं।
    अगर घर पर काम करने की जगह कम हुई तो उन्हें प्रज़ेंटेशन का काम दो दिन में करना पड़ेगा।
    हर भूमिका में वो अपने जीवन के दूसरे पहलू पर ज़ोर देती है और दूसरी भूमिका के लिए ताकत जुटाती है।
    चाहे वह 21वीं सदी में रहने वाली भारतीय महिला हो उसे पुरूषों की तुलना में ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
    अगर महिला कोई टास्कमास्टर नहीं है तो उसे हर समय काम से निकाले जाने का डर रहता है।

 हृदय के लिए तनावमुक्त कार्यस्‍थल
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हृदय स्वास्‍थ्‍य की बात करें, तो सबसे पहले उस स्थान का जि़क्र होता है, जहां पर आप अपने जीवन का अधिकतर समय बिताते हैं। वह स्थान है ‘आपका आफिस’। जी हां, अपने जीवन का आधे से ज्यादा समय आप अपने आफिस में बिताते हैं। आपका ‘आफिस स्वास्‍थ्‍य’ कहीं ना कहीं आपके ‘हृदय स्वास्‍थ्‍य ’ को भी प्रभावित करता है। अगर आप भी आफिस का तनाव घर लाने वालों में से हैं, तो संभल जायें क्योंकि हाइपरटेंशन, उच्च  रक्त चाप जैसी समस्याएं आपको भी हो सकती हैं। अगर आप स्वस्थ कर्मचारी बनना चाहते हैं, तो अपने काम के साथ-साथ अपने स्वास्‍थ्‍य पर भी ध्यान दें। 

मेदांता मेडिसिटी के इंटरवेंशनल कार्डियोलाजी विभाग के अध्यक्ष डाक्टर प्रवीन चंद्रा की मानें तो हमारा हृदय स्वास्‍थ्‍य  हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्‍थ्‍य पर निर्भर करता है। अगर आपको भी लगता है कि आपके आफिस में बहुत अधिक तनाव है, तो देर ना करें, अपने एच आर विभाग में बात करें।

डाक्टर प्रवीन चंद्रा के अनुसार आफिस में इन बातों का रखें ख्याल:
•    हर आफिस के(एच आर) मानव संसाधन विभाग की यह जि़म्मेदारी होनी चाहिए कि वह कार्यकर्ताओं पर अतिरिक्त  दबाव पड़ने की स्थिति में इसका समाधान निकाले।
•    बास व कर्मचारियों के बीच होने वाले तनाव का आपके काम पर ही नहीं बल्कि आपके स्वास्‍थ्‍य पर भी असर होता है।
•    काम के साथ-साथ प्रतिदिन 30 मिनट का व्यायाम भी ज़रूरी है।
आवश्यक निर्देश: अगर आपको सीने में दर्द हो रहा है, जकड़न महसूस हो रही है, तो देर ना करें तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
भारत में अभी भी बहुत सी ऐसी कंपनियां हैं, जहां कि लोग इन बातों पर ध्यारन नहीं देते। लेकिन स्वास्‍थ्‍य की दृष्टि से यह आवश्यक है कि आप तनावमुक्त कार्यस्थल की पहल करें और लोगों में जागरूकता फैलायें।

जब सताए काम का बोझ
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आफिस में लगातार काम और टेंशन। ऐसे में थकान का होना लाजिमी है। थकान दूर कर खुद को तरोताजा बनाने के लिए जरूरी है कि काम से आप कुछ दिनों का ब्रेक लें।

इसके अलावा खुद को रिफ्रेश करने के लिए आप ये नुस्खे भी अपना सकते हैं :- आफिस में काम के दौरान थोड़ा धूप में टहल आएं। सूर्य की किरणों से मिलने वाला विटामिन डी शरीर में सेरेटोनिन नामक रसायन का स्तर बढ़ाता है। सेरेटोनिन अच्छी नींद लाने में मददगार होता है।
    अगर आपका आफिस दूसरी या तीसरी मंजिल पर है तो लिफ्ट की जगह सीढि़यों का प्रयोग करें। इससे न केवल आपकी कसरत की जरूरत पूरी होगी बल्कि शरीर में ऊर्जा का स्तर भी बढ़ेगा।
    मानसिक थकान होने की स्थिति में कोई क्रासवर्ड या पजल हल करें। इससे आप रिलैक्स महसूस करेंगे। थकावट होने पर दिमाग पर जोर डालने की बात भले ही अजीब लगे, लेकिन ट्राई जरूर करें।
    लगातार काम के बीच में कुछ मिनट अपनी पसंद की कोई किताब पढ़ें। इससे भी आपका मूड फ्रेश होगा।
    पैदल चलने से बेहतर कोई व्यायाम नहीं है। इससे आप तरोताजा और ऊर्जावान महसूस करेंगे।
    अधिक लाभ के लिए आप एरोमाथेरेपी का भी प्रयोग कर सकते हैं।

कार्यस्थल पर आपका मनोबल बढ़ा सकते हैं ताने


कार्यस्थल पर तानें, गुस्सा और समान रूप से व्यंग्यात्मक मुंहतोड़ जवाब के लिए खोज का कारण होते है। इस विषय पर किये गये नए अध्ययन अब यह सुझाव दे रहे हैं कि तानों का सामना करना पड़ने से आप अपना सर्वश्रेष्ठ कार्यप्रदर्शन दे सकते हैं। इन अध्ययनों में यह पाया गया है, कि जिन कर्मचारियों को व्यंग्यात्मक सहयोगियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ डाल दिया जाता है, वह ऐसी स्थितियों का सामना नही कर रहे कर्मचारीयों की तुलना में अधिक रचनात्मक रुप से कार्य करते हैं।

कार्यालय के अधिक तनावमुक्त और परवाह करने वाले वातावरण की तुलना में, एक मालिक या सहकर्मी से व्यंग्यात्मक टिप्पणी, एक व्यक्ति को कठोर मेहनत करने, और काम को तेजी से अधिक से अधिक रचनात्मकता से काम करने को बाध्य कर देती हैं।

शोधकर्ताओं ने कहा कि तानें सुनने पडने पर, अधिक 'संज्ञानात्मक जटिलता' की या चीजों को एक से अधिक कोण से देखने की क्षमता होने की जरुरी होती हैं।

जिस मर्यादा तक एक व्यक्ति या संगठन एक घटना पर भेद–भाव और एकीकरण करते हैं, उस हद को संज्ञानात्मक जटिलता संदर्भित करती हैं। जिन  व्यक्तियों की संज्ञानात्मक जटिलता उच्च होती हैं, वह एक स्थिति का उसके घटक तत्वों में विश्लेषण करने में सक्षम होते हैं और उनकी सोच बहुआयामी होती है और वह किसी एक समाधान पर अधिक तेजी से पहुँचते हैं। संज्ञानात्मक जटिलता कम होने वालें लोगों को एक विशिष्ट संदर्भ के लिए इन लाइनों में सोचने को सिखाया जा सकता है, लेकिन उच्च जटिलता वाले लोग नई स्थितियों में नाविन्यपूर्ण समाधान ढूँढने में सक्षम होते हैं।

प्रबंधकों को कार्यस्थल पर लोगों से अपेक्षित काम करवाने के लिए उपयोगी हो सकने वाले जटिलता के अध्ययन, निम्नलिखित निष्कर्ष तक पहुँच चुके हैं:

    सूचना: जटिल लोग नई जानकारी को प्राप्त करने लिए और अधिक खुले होते हैं, वे संबंधित श्रेणियों में अधिक जानकारी की तलाश करते हैं और कम जटिल व्यक्तियों की तुलना में हर तरह से अच्छा प्रभाव निर्माण करने के लिए प्रेरित होते हैं।
    आकर्षण: उच्च जटिलता वालें लोग एक दूसरे की ओर आकर्षित होते हैं और उनके समान दृष्टिकोण से वह किसी विशिष्ठ समाधान पर पहुंचने के लिए आपस में विचारों का आदानप्रदान करते हैं, जो कम जटिलता वाले व्यक्तियों में काम नहीं करता। कम जटिल व्यक्ति अपनी तरह के व्यक्तियों को आकर्षित करते हैं, और एक रचनात्मक समाधान ढुंढ निकालने के लिए कम सक्षम होते हैं।
    लचीलापनः जटील व्यक्तियों की सोच भी अधिक लचीली और अधिक रचनात्मक होती हैं। जल्दी समाधान तक पहुंचना उन्हें जटिल समस्याओं के लिए नए समाधान खोजने में आगे प्रेरित करता हैं। इसके विपरीत परिस्थिती कम जटिल व्यक्तियों के साथ होती हैं।
    समस्या को सुलझानाः जटील व्यक्ति की, विभिन्न प्रकार की जानकारी खोजने की प्रवृत्ती होती है, जो उन्हें एक समाधान खोजने के लिए प्रेरित करती हैं, जबकि कम जटिल दिमाग के साथ लोग फलस्वरूप समस्या को सुलझाने में कम प्रभावी होते हैं।
    कूटनीतिक योजनाः जटील व्यक्ति बेहतर रणनीतिक नियोजक होते हैं और विभिन्न विकल्पों को उपलब्ध बनाने के लिए कई दृष्टिकोण से जानकारी जुटाने, लंबी अवधि के लक्ष्यों को निर्धारित करने के लिए, खुद को प्रेरित करते हैं जबकि कम जटिल व्यक्ति ऐसा करने में असमर्थ होते हैं।

ताने के अभिप्रेरण प्रभाव के प्रभाव को विस्तृत करने के लिए, इस्राएल के बॅन इलान विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने इंजीनियरिंग के 350 छात्रों से कहाँ कि वह कल्पना करे कि वे ग्राहक सेवा प्रतिनिधि हैं। उनको क्रोधित व्यंग्यात्मक फोन कॉल आये। छात्रों की, आगे कि आपत्ती से बचने के लिए उनके गुस्से को शांत करके उनकी तत्काल चिंताओं को कम करने की प्रतिक्रिया थी।

ताने के प्रभाव से उच्च स्तर की सोच को और दो वास्तविकताओं पर एक साथ प्रक्रिया करने की क्षमता को प्रोत्साहित किया था, तानों के स्तर जितने उच्च थे, उतनी प्रेरणा उच्च थी। एप्लाइड मनोविज्ञान के जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार गुस्से और ताना के उच्च स्तर पर रचनात्मकता बहुत उन्नत थी।


कुर्सी से चिपके रहेंगे, तो सेहत को होगा नुकसान

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लगातार कुर्सी पर बैठे रहना आपके लिए जानलेवा भी साबित हो सकता है। काम के दबाव के चलते लोग कई-कई घंटे एक ही जगह और एक ही कुर्सी पर बैठकर काम करते रहते हैं। लेकिन ऐसा करना न सिर्फ उनकी सेहत के लिए नुकसानदायक होता है, बल्कि साथ ही इससे उनकी जान पर भी बन सकती है। ताजा अध्‍ययन बताते हैं कि जो लोग 11 घंटे या उससे ज्यादा देर तक लगातार कुर्सी पर बैठकर काम करते रहते हैं उनके अगले तीन वर्षों में मौत की संभावना बढ जाती है। भले ही हम कितना ही सक्रिय क्‍यों न रहते हों। यहां तक कि व्‍यायाम और योगा भी इसके दुष्‍प्रभाव को कम नहीं कर सकते।
अध्ययन के अनुसार –
ऑस्ट्रेलिया के सिडनी विश्वविद्यालय में हुए शोध के अनुसार जो लोग तक आधे दिन तक कुर्सी पर बैठे रहते हैं उनमें 40 प्रतिशत तक मौत का खतरा बढ जाता है। शोध में पाया गया कि लगातार बैठकर काम करने वालों लोगों में 3 वर्षों में मौत की संभावना दुगनी हो गई थी। लोगों की शारीरिक सक्रियता और वजन का इसके कोई संबंध नहीं है।

देर तक बैठने से दिल को खतरा
 लंबे समय तक बैठकर काम करते रहने से बचना चाहिए। छोटी या‍त्रा के दौरान बैठने से अच्छा है कि खड़े होकर यात्रा किया जाए, इससे वजन कम होता है।
    बैठकर काम करने से शारीरिक निष्क्रियता बढती है। बैठने से शरीर में रक्त-संचार सही तरीके से से नहीं होता जिससे दिल का दौरा पड़ने का ज्यादा संभावना बढ़ती है।

कुर्सी पर क्यों बैठते हैं लोग –
ऑफिस का काम ज्यादा होने से कामकाजी लोगों को ज्यादा देर तक कुर्सी पर बैठना होता है। काम का प्रेशर होने के कारण लोग अपना काम पूरा करना चाहते हैं जिसके कारण कुर्सी पर बैठना पड़ता है। कंप्यूटर पर गेम खेलने और टीबी देखने के कारण भी लोग कई घंटों तक कुर्सी पर बैठते हैं। दिन में लंबी यात्रा के दौरान या लंबी हवाई यात्रा बैठकर ही करते हैं। खाली लोग जो सोने से ऊब जाते हैं वे अपना समय घर में बैठकर या पार्कों में बैठकर बिताते हैं।

कुर्सी पर बैठने से बचने के‍ लिए
लगातार कई घंटे तक कुर्सी पर बैठने से बचिए। अगर काम ज्यादा है तो भी थोड़े-थोड़े वक्‍त के बाद ब्रेक लेते रहिए। ऑफिस में काम के दौरान बीच-बीच में टहलते रहना चाहिए। ऑफिस में अपने केबिन में चाय या काफी मंगाने के बजाय कैफीटीरिया में खुद जाकर कॉफी लीजिए। शाम को मॉर्केट जाते समय भी कार या बाइक की बजाए पैदल जाना ही बेहतर रहेगा। अगर आप दिन में लंबी यात्रा कर रहे हैं तो अपनी सीट पर बैठने के बजाय लेटकर यात्रा कीजिए। लंबी यात्रा के दौरान अपनी सीट से उठकर बीच-बीच में टहलते रहिए। 
ज्यादा देर तक बैठने से शरीर की कई समस्याएं शुरू हो जाती हैं। लगातार कुर्सी पर कई घंटे तक बैठने से बैक पेन की समस्या शुरू हो सकती है। आपको कुर्सी पर बैठने के दौरान अगर कोई समस्‍या हो तो अपने चिकित्सक से सलाह अवश्य लीजिए।

ऑफिस में लीजिए सेहत की झपकी
 ऑफिस में काम के दौरान झपकी लेना, भले ही आप इसे काम के प्रति लापरवाही से जोड़कर देखें, लेकिन जनाब ऐसा बिल्‍कुल भी नहीं है। दरअसल, इससे आपकी कार्यक्षमता पर सकारात्‍मक असर पड़ता है। कैसे, आइए जानें हमारे साथ...
जानकार कहते हैं‍ कि कुछ देर की झपकी लंबे समय तक काम करने के कारण होने वाली शारीरिक और मानसिक थकान को दूर करती है। इसका व्यक्ति की याददाश्त, सोचने-समझने की शक्ति और कार्यक्षमता पर काफी अच्छा प्रभाव पड़ता है।

तनाव से रखती है दूर
काम के लगातार दबाव के चलते तनाव और परेशानी आम हो चली है। इसके चलते मस्तिष्‍क अक्‍सर थका-थका रहता है। अपनी शक्ति और ऊर्जा वापस पाने के लिए इसे आराम की दरकार होती है। पावर नैप अपने मस्तिष्‍क को तनाव से दूर रखने का एक बढि़या तरीका है। जब कभी भी आप तनाव में या थके हुए महसूस करें तो बस अपने टेबल पर सिर टिकाइए और जरा सी देर के लिए एक झपकी लें। इसके बाद आप ऊर्जावान, एकाग्र, रिलेक्‍स और सजग महसूस करेंगे।

आपको रखती है सजग
बीती रात आपकी नींद पूरी नहीं हुयी। तो जाहिर तौर पर ऑफिस में आपके काम पर इसका असर नजर आएगा। अपने काम के बीच में जरा सी झपकी आपको सावधान और सजग रखने में मदद करेगी। साथ ही यह आपके एनर्जी लेवल को बनाए रखने में भी मदद करती है और साथ ही आपको रखती है रिफ्रेश। 

याद्दश्‍त पर पड़ता है सकारात्‍मक प्रभाव
थके हुए दिमाग की स्‍मरण शक्ति भी कमजोर रहती है। दिमाग आसानी से कुछ भी नहीं सीख पाता। पावर नैप मस्तिष्‍क की कोशिकाओं और मांसपेशियों को आराम पहुंचाती है। थका हुआ दिमाग विषाक्‍त पदार्थ का निर्माण करने लगता है, जिससे मस्तिष्‍क की कार्यक्षमता पर नकारात्‍मक प्रभाव पड़ता है। इससे आप थके-थके और सुस्‍त रहने लगते हैं। थोड़ी देर की एक झपकी मस्तिष्‍क की मांसपेशियों को राहत पहुंचाती है और आपको रखती है 'टेंशन फ्री'। इसके साथ ही यह मस्तिष्‍क को विषाक्‍त पदार्थ बनाने से भी रोकती है।
दिल के लिए है बेहतर

एक थके हुए मन और शरीर का नकारात्‍मक प्रभाव आपके दिल पर भी पड़ता है। एक झपकी हृदय पर पड़ने वाले अतिरिक्‍त दबाव को दूर करती है। यह दिल की धड़कन को भी नियंत्रित करती है और साथ ही रक्‍तचाप भी सामान्‍य रखती है। जिन लोगों को उच्‍च रक्‍तचाप की शिकायत होती है उन्‍हें हमेशा नैप लेने की सलाह दी जाती है। इससे उनका रक्‍तचाप सामान्‍य बनाए रखने में मदद मिलती है। इस झपकी से दिल अधिक आराम से अपना काम करता है। 

 मूड रहता है फ्रेश
कुछ देर की झपकी आपके मूड को भी ताजा बनाए रखती है। यह उन लोगों के लिए खासतौर पर मददगार है जो अधिक दबाव में काम करते हैं। नाइट शिफ्ट में काम करने वाले, विद्यार्थी और मीडियाकर्मियों के लिए खासतौर पर मददगार होता है। आमतौर पर इन लोगों में नींद को लेकर समस्‍याएं पायी जाती हैं, ऐसे में पावर नैप इनके मन और शरीर को शांत रखने में मदद करती है।

कितनी देर की झपकी का कितना असर
10 से 20 सेकेंड की झपकी : इसे ‘नैनो नैप’ कहते हैं। ‘नैनो नैप’ लेने से कंघों पर पड़ने वाले तनाव से राहत मिलती है।
2 से 5 मिनट की झपकी : इसे माइक्रो नैप कहते हैं। इस आलस दूर होता है और बने रहते हैं तरोताजा।
5 से 18 मिनट की झपकी : इसे मिनी नैप कहते हैं। मिनी नैप लेने से व्यक्ति की सतर्कता, कार्य करने की क्षमता पर अच्‍छा असर पड़ता है। और साथ ही याद्दश्‍त भी दुरुस्‍त रहती है।
20 मिनट की झपकी : इसे पावर नैप कहते हैं। पावर नैप लेने से व्यक्ति को माइक्रा और मिनी दोनों नैप्स के फायदे मिलते हैं। इसके साथ ही मांसपेशियों को लंबे समय तक कार्य करने, याददाश्त तेज करने और मस्तिष्क को थकान से दूर रखने में काफी फायदेमंद साबित होती है।

सुबह का नाश्ता गोल करना मतलब दिल की बीमारियां
 भले ही आप बहुत व्यस्त हों, लेकिन सुबह का नाश्ता अवश्य करें। एक वैज्ञानिक शोध में यह सलाह दी गई है। शोध के मुताबिक सुबह के नाश्ते की लगातार उपेक्षा करने से दिल की बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है।
यूनिवर्सिटी ऑफ तस्मानिया के शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन किया है। उन्होंने पाया कि जो लोग सुबह खाली पेट घर से निकलते हैं, वे मोटापा, पेट पर चर्बी बढ़ने के साथ कॉलेस्ट्राल बढ़ने के शिकार हो सकते हैं। ये तीनों ही दिल की बीमारियों को जन्म देते हैं।
ब्रिटिश अखबार डेली मेल में छपे शोध के मुताबिक खाली पेट रहने से खून में इंसुलिन का स्तर भी बढ़ जाता है जो मधुमेह के खतरे की घंटी है। वैसे, इससे पहले हुए अध्ययन बता चुके हैं कि दिल के लिए सुबह का नाश्ता फायदेमंद है। नाश्ता नहीं करने के खतरों को बताने वाला यह पहला शोध है।
शोध के अनुसार, बचपन में नाश्ते से जी चुराने वाले लोग 20 की उम्र के बाद दिल की बीमारी से ग्रस्त हो सकते हैं। इस शोध को अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रिशन में प्रकाशित किया गया है।

सुबह की जल्दी और नाश्‍ता  
 सुबह की जल्दी किसी बवंडर से कम नहीं होती जब एक सम्पूर्ण आहार लेना बहुत  मुश्‍किल होता है । ऐसे में हमें किसी स्वस्थ विकल्प वाले आहार को चुनना चाहिए ।

 मुख्य सामग्री
2 अण्डे, पूरे गेहूं वाला टारटिला बेस ।
अण्डे को आमलेट की तरह तल कर इसे गरम टारटिला बेस के ऊपर रखें । इसे और मज़ेदार बनाने के लिए इसपर सालसा सास डालें और रोल करें ।

 न्यूट्री चेक
टारटिला और अण्डे में प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट अधिक मात्रा में होती है जिससे आप दिन की अच्छी शुरूवात कर सकते हैं ।

आफिस स्‍वास्‍थ्‍य के नुस्‍खे
 
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कार्यालय में सही खान पान
ऐसी बहुत सी बातें हैं जो कि आपके करियर की वृद्वि को प्रभावित करती हैं । काम करने से लेकर उत्पादकता और मक्खनबाजी का कौशल,लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आप जिस प्रकार का आहार लेते हैं उसका प्रभाव आपके करियर की वृद्वि में भी हो सकता है। आइये इस बारे में जानकारी इकट्ठी करें।

 काम के स्थान पर आपकी सही खान पान की आदतें आपके शिष्टाचार को दर्शाती हैं । ऐसे बहुत से आहार हो सकते हैं जो कि आपके स्वाद से लेकर आपके ज्ञान और पोषण सम्बन्धी लाभ को भी दर्शाते हैं । कम शब्दों में यह कह सकते हैं कि सही खाने का प्रभाव हमारे काम पर भी पड़ता है । इससे सिर्फ आपका स्वास्‍थ्‍य ही नहीं अच्छा रहता बल्कि आपके मेहनती और सूक्ष्म कार्यकर्ता होने का भी पता चलता है ।

 उचित समय पर सही खाना
हम सभी जानते हैं कि स्वस्थ आहार का अर्थ है सही मात्रा में सही आहार । लेकिन खाने के बारे में बहुत सूक्ष्म अध्ययन आपको उत्तेजित भी कर सकता है । जब आपको मीटिंग में जाना हो या दूसरे काम हो ऐसे में खाने के बारे में सोचना कोई स्वस्थ संकेत भी नहीं । ध्यान रखें कि आपकी प्राथमिकता आफिस का काम है आहार नहीं । आफिस में लिए जाने वाले आहार कुछ ऐसे हो सकते हैं जो कि ताकत देने वाले आहार हों। ऐसे आहार बिलकुल नहीं लेने चाहिए जिनसे आपको नींद आये।

 जब थोड़ा आहार ही पर्याप्त हो
आफिस में खाना खाते समय अपनी प्लेट को पूरी तरह से ना भर लें । सही मात्रा में सम्पूर्ण आहार लेने का प्रयास करें । अपने आहारे के बीच स्नैक्स भी कुछ इसी प्रकार के लें । चाहे बिस्किट खाने की बात हो या सूखे स्नैक्स।

 काम करने के दौरान दिन का खाना
ध्यान रखें कि आप उस ग्रुप का भाग हैं जिसके लिए खाना मंगाया गया है। वही खायें जो आसानी से मिल सके। खाने को लेकर बहुत तुनुकमिज़ाजी ना दिखायें जब तक कि आपको किसी खास प्रकार के आहार से एलर्जी ना हो।

 तुनुकमिज़ाज होना
अगर आप ऊंचे औदे पर हैं तो यह बिलकुल सही है कि आपके कलीग्स को पता होना चाहिए आपको किस प्रकार के आहार नहीं लेने चाहिए । लेकिन अगर आप कार्यकर्ता हैं तो खाना मंगाने के समय आपको थोड़ा लचीला रवैया अपनाना चाहिए।  अंत में अगर आप वास्तविक फूडी हैं और आपका मनपसंद खाना देखकर आपके चेहरे पर मुस्का़न तैर जाती है तो अपने आहार के बारे में अपने आसपास वालों से बातें करें ।  

 आफिस में स्‍नैक्‍स से दूर रहने के नुस्‍खे
पूरा दिन बिना स्नैक्स के आफिस में समय काटना हम सब के लिए मुश्किल हो सकता है। वास्तविकता जो हम सब जानते हैं वो यह है कि स्नैक्स हमारे स्वास्‍थ्‍य के लिए अच्छे नहीं होते । गुड़गांव की एम एन सी में कार्यरत संजय शर्मा का मानना है कि आफिस में जब चबाने के लिए स्नैक्स नहीं होते तो काम करना भी थोड़ा मुश्किल हो जाता है। आफिस की आलमारी से स्नैक्स दूर रखने के लिए क्या करना चाहिए । आफिस में ऐसे आहार ना लेने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप भारी मात्रा में ब्रेकफास्ट करें।

नयी दिल्ली की चिकित्सक अंजली भार्गवा के अनुसार अगर ब्रेकफास्टा के बाद आपका पेट भर गया है और आप अधिक नहीं खाना चाहते तो सुबह भर पेट बिना तेल वाला स्वस्थ आहार लें और आपको लंच के समय तक कुछ भी खाने की आवश्यकता नहीं होगी ।

लेकिन फिर भी अगर आप स्नै‍क्स लेना चाहते हैं तो थोड़ा टहल लें। इससे ना केवल आपका ध्यान स्नै‍क्स से हटेगा बल्कि आपको व्यायाम करने का मौका भी‍ मिल जायेगा ।

चिकित्सक भार्गवा के अनुसार कभी कभी हमारा शरीर भूख और प्यास की आवश्यकता को गलत तरीके से पढ़ लेता है । यह एक अच्छा विकल्प है कि आफिस में खूब पानी पीयें । तो पानी के कूलर की ओर चलने के कई फायदे हैं । यह आपको स्नैक्स से दूर रखता है, इस बहाने आपका व्यायाम होता है और आपके शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा भी होती है।

 काम के दौरान आहार को स्किप करना कोई अच्छा विकल्प नहीं है । इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप आफिस में ब्रेकफास्ट कर रहे हैं, लंच कर रहे हैं या डिनर कर रहे हैं बस आपको आहार स्किप नहीं करना चाहिए । समय पर आहार स्किप करना भी एक बड़ा कारण है जिससे लोग पूरा दिन खाने के बारे में सोचते रहते हैं । इसलिए स्वस्थ और अच्छा खायें । कैफेटेरिया से खाना मंगाने के बजाय आप घर से खाना पैक करके भी ला सकते हैं । इससे ना केवल आप जंक फूड खाने से बचेंगे बल्कि इससे आपको स्वस्थ रह...

सुबह का नाश्ता गोल करना मतलब दिल की बीमारियां
भले ही आप बहुत व्यस्त हों, लेकिन सुबह का नाश्ता अवश्य करें। एक वैज्ञानिक शोध में यह सलाह दी गई है। शोध के मुताबिक सुबह के नाश्ते की लगातार उपेक्षा करने से दिल की बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है। यूनिवर्सिटी ऑफ तस्मानिया के शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन किया है। उन्होंने पाया कि जो लोग सुबह खाली पेट घर से निकलते हैं, वे मोटापा, पेट पर चर्बी बढ़ने के साथ कॉलेस्ट्राल बढ़ने के शिकार हो सकते हैं। ये तीनों ही दिल की बीमारियों को जन्म देते हैं।
ब्रिटिश अखबार डेली मेल में छपे शोध के मुताबिक खाली पेट रहने से खून में इंसुलिन का स्तर भी बढ़ जाता है जो मधुमेह के खतरे की घंटी है। वैसे, इससे पहले हुए अध्ययन बता चुके हैं कि दिल के लिए सुबह का नाश्ता फायदेमंद है। नाश्ता नहीं करने के खतरों को बताने वाला यह पहला शोध है।
शोध के अनुसार, बचपन में नाश्ते से जी चुराने वाले लोग 20 की उम्र के बाद दिल की बीमारी से ग्रस्त हो सकते हैं। इस शोध को अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रिशन में प्रकाशित किया गया है।


नाश्ता तय करता है आपका दिन भर का मूड
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क्या आप सुबह भरपूर नाश्ता लेते हैं। यदि नहीं तो निश्चित मानिए कि अपने स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। पुराने समय में गांवों में सुबह भर पेट कलेवा यानी नाश्ता करने की अवधारणा को अब वैज्ञानिक भी सही मानने लगे हैं और उनका कहना है कि यदि नाश्ता ठीक से नहीं किया जाए तो शरीर में कई तरह की विकृतियां पैदा हो सकती हैं। और तो और नाश्ता किसी भी व्यक्ति के दिन भर का मिजाज और व्यवहार भी तय करता है।

मुंबई के एसएनडीटी विश्वविद्यालय में खाद्य विज्ञान एवं पोषण के प्रोफेसर रामास्वामी और के मिस्त्री ने अपने ताजा निष्कर्ष में यह खुलासा किया। उनका कहना है कि सुबह भर पेट अच्छा नाश्ता करने से शरीर की कई जरूरतें पूरी होती हैं। नाश्ता नहीं करने की प्रवृत्ति काफी घातक है क्योंकि बाद में कितना भी अच्छा भोजन ग्रहण क्यों न किया जाए, सुबह के नाश्ते से शरीर को जो आवश्यक विटामिन, कार्बोहाइड्रेट, लौह तत्व और प्रोटीन मिलता है, उसकी कमी को न तो लंच और न डिनर पूरा कर सकता है। उन्होंने बताया कि भारत में 60 प्रतिशत आबादी शाकाहारी है लेकिन परेशानी की बात यह है कि अधिकतर लोगों के सुबह के नाश्ते में  लौह तत्व पर्याप्त नहीं होता जो शरीर के विकास के लिए अनिवार्य तत्व है।

 उन्होंने कहा कि सुबह का नाश्ता दिन का सबसे महत्वपूर्ण भोजन है। इसके जरिए लौह और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों की दिन भर की 25 प्रतिशत पूर्ति होती है। विशेषज्ञों ने बताया कि नाश्ते से बच्चों, वयस्कों और बुजुर्गो की प्रतिरोधक क्षमता में सुधार आता है। व्यक्ति दिन भर सक्रिय बना रहता है और उसके शरीर में विशेष तौर पर लौह तत्व की मात्रा में काफी उल्लेखनीय सुधार होता है। सुबह का नाश्ता गोल करने से व्यक्ति के व्यवहार पर खासा असर पड़ता है। उन्होंने बताया कि नाश्ते में मिक्स्ड वेज, पोहा, कार्नफ्लेक्स, रोटी दाल, चावल, मेथी भाजी, पालक भाजी ,सब्जी ,उपमा, आलू पराठा और दही  इडली सांभर, बे्रड आमलेट, ब्रेड बटर आदि खाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि मोटे अनाज से 7.4 मिग्रा, पोहा से 6.7 मिग्रा, आलू पराठा और दही से 2. 4 मिलीग्राम लौह तत्व मिलता है।

रामास्वामी और मिस्त्री के मुताबिक लौह तत्व की कमी से होने वाली बीमारी एनीमिया की चपेट में शहरी आबादी का बड़ा हिस्सा आ चुका है और अब यह बीमारी मध्यम वर्ग के साथ साथ उच्च वर्ग को भी सताने लगी है। सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं बच्चे, महिलाएं और किशोरियां। भारतीय जो खाना खाते हैं उनमें लौह तत्व पर्याप्त मात्रा नहीं होता। उनका कहना है कि  दोपहर और रात के भोजन में भले ही लौह तत्व वाले खाद्य पदार्थ क्यों न हों लेकिन सुबह के नाश्ते में यदि पर्याप्त  पोषण वाला भोजन ले लिया जाए तो दिन भर किसी तरह की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।









































डायबिटीज

 डायबिटीज में कैसे करें देखभाल :-


अधिकतर अधिक उम्र के डायबिटीज मरीज नहीं रख पाते पैरों का ध्‍यान।
अंग-विच्‍छेदन से बचने के लिए पैरों की सही देखभाल करते रहना है जरूरी।
पैरों को साफ रखें और कट व अन्‍य खतरों से बचने के लिए नाखून छोटे रखें।
किसी भी प्रकार की समस्‍या होने पर बिना देर किये अपने डॉक्‍टर से संपर्क करें।

डायबिटीज में पैरों की देखभाल काफी जरूरी होता है। इससे पैरों को होने वाली अन्य गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है। डायबिटीज के मरीज अपने पैरों की सही देखभाल करें, तो वे अंग-विच्छेदन से भी बच सकते हैं।

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अधिक उम्र में पैरों की देखभाल करना कई बार मुश्किलों भरा हो सकता है और ऐसे में उन्हें अन्य लोगों की मदद लेनी पड़ सकती है। 1992 में इस विषय पर हुए एक विशेष शोध में यह बात सामने आई कि 86 प्रतिशत प्रतिभागी स्वयं से अपने पैरों की देखभाल करने में सक्षम नहीं थे।
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस में छपा यह शोध डायबिटीज से पीडि़त बुजुर्गों में पैरों की होने वाली समस्याओं की एक बड़ी तस्वीर पेश करता है। इस शोध में यह भी बताया गया था कि कैसे पीडि़त के परिजन अथवा उनकी देखभाल करने वाले उन्हें पैरों में होने वाली समस्याओं से बचा सकते हैं। इसके लिए उन्हें उनके पैरों का नियमित परीक्षण करना चाहिए। आइए जानें डायबिटीज से पीडि़त बुजुर्गों में पैरों की देखभाल कैसे की जा सकती है।

ब्लड ग्लूकोज का स्तर
सबसे जरूरी बात है कि अपने रक्त में ग्लूकोज का स्तर सामान्य बनाए रखने का प्रयास करें। इसके लिए सही समय पर दवाओं का सेवन करना भी जरूरी है। इसके साथ ही अपने आहार को भी नियंत्रित रखें। इससे आप पैरों की मांसपेशियों और उत्तकों को होने वाले नुकसान से बच सकते हैं। डायबिटीज के मरीज यदि अपने रक्त में ग्लूकोज का स्तर सामान्य बनाये रखें, तो वह स्वयं को कई प्रकार की परेशानियों से बचाये रख सकते हैं।

रोजाना करें पैरों की देखभाल
डायबिटीज के मरीज के पैरों का रोजाना परीक्षण किया जाना जरूरी है। अल्सर, फफोले, घावों, कट और सूजन होने के किसी भी लक्षण पर पूरी नजर रखी जानी चाहिए। पैरों की सफाई का समय परीक्षण के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। पैरों को रोज साफ करें। इसके लिए गुनगुना पानी और माइल्ड सोप का इस्तेमाल करना बेहतर रहेगा। पानी का तापमान अधिक गर्म न हो। आमतौर पर डायबिटीज के कारण पैरों में असंवेदनशीलता पैदा हो जाती है, जिसके कारण मरीज को तापमान का सही अंदाजा नहीं लग पाता। लेकिन, अधिक गर्म पानी पैरों को नुकसान जरूर पहुंचा सकता है। पैरों को धोने के बाद साफ और सूखे तौलिये से उन्हें अच्छी तरह साफ कर लें। इसके बाद पैरों पर लोशन लगायें। याद रखिये, आपको पैरों की उंगलियों के बीच लोशन नहीं लगाना है, क्योंकि इससे फंगल इंफेक्शेन होने का खतरा बढ़ जाता है।

पैरों की उंगलियों के नाखून
अपने पैरों की उंगलियों के नाखूनों को छोटा ही रखें। बड़े नाखून कट अथवा किसी अन्य समस्या का कारण भी बन सकते हैं। नाखूनों को सीधा ही काटें। टेढ़ा-मेढ़ा काटने से आसपास का मांस भी कट सकता है, जिसके कारण काफी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आपको अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है। नाखूनों को काटने के बाद उन्हें स्मूथ भी कर दें।

जूते-चप्प‍ल हो सही
डायबिटीज के मरीजों को अपने पैरों को गर्म और सुरक्षित रखने की जरूरत होती है। ऐसे लोगों को चाहिए कि अपने पैरों में हमेशा जुराबें पहनकर रखें। बैक्टीरिया और फंगल इंफेक्शजन से बचने के लिए जुराबों को रोजाना बदलना जरूरी है। घर से बाहर जाते समय डायबिटीज के मरीजों को जूते पहनना बहुत जरूरी है। इसके साथ ही इस बात का ध्यान रखना भी जरूरी है कि आप किस प्रकार के जूते पहनते हैं। जूते आरामदेह और‍ फिट होने चाहिए। उसमें आपके पैरों पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ना चाहिए। अपने पास कम से कम दो जोड़ी ऐसे जूते अवश्य रखें। ताकि आपको रोजाना एक ही जोड़ी जूते न पहनने पड़ें।

जूतों को वैकल्पिक दिनों में पहनने से उन्हें पूरी तरह सूखने का वक्त मिल जाएगा और ऐसे में जूतों में फंगस होने की आशंका भी खत्म हो जाएगी। जूतों में पैर डालते समय एक बार उसे जांच लें कि कहीं गलती से उनके भीतर कोई कंकड़ अथवा पैरों को नुकसान पहुंचाने वाली कोई अन्य  चीज न हो। कई बार असंवेदनशीलता के कारण डायबिटीज के मरीजों को पैर में कुछ चुभने का अहसास ही नहीं हो पाता। और ऐसे में उनके पैरों के लिए खतरा और बढ़ जाता है।

नियमित मेडिकल जांच
डायबिटीज के मरीजों को नियमित रूप से डॉक्टर के पास जांच के लिए जाना चाहिए। यह जांच पैरों को किसी भी प्रकार के संभावित खतरे से बचाने में मददगार हो सकती है। इसके साथ ही अल्सर, पैरों की उंगलियों के नाखूनों का अंदर की ओर बढ़ना अथवा पैरों में दर्द आदि की समस्या होने पर भी बिना देर किये डॉक्टर से संपर्क किया जाना चाहिए। समय रहते अगर पैरों की समस्या का पता लगाया जा सके, तो अंग-विच्छेदन से बचा जा सकता है।

इन सब बातों का खयाल कर अधिक उम्र के डायबिटीज पीडि़त लोग अपने पैरों की उचित देखभाल कर सकते हैं।

डायबिटीज आहार से संबंधित दस मिथ
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ये गलत है कि डायबिटीज होने पर आप अपना पसंदीदा भोजन नहीं कर सकते।
 सच्‍चाई तो यह है कि 'डायबिटिक आहार' जैसी कोई चीज नहीं होती है।
 इनसुलिन के बाद भी रखें आहार का ध्यान ।
 वही आहार चुनें जो रोजमर्रा की शार‍ीरिक गतिविधियों से मिलता हो।

डायबिटीज डायट का नाम सुनते ही आपके जेहन में बेस्‍वाद खाना आता है। लेकिन, क्‍या यह पूरी तरह सच है। डायबिटीज के आहार को लेकर आपके जेहन में कई ऐसी बातें हैं, जो शायद पूरी तरह सच नहीं हैं। इनमें कई बातें या तो आपने किसी से सुनी हैं या कहीं पढ़ी हैं। लेकिन, इन बातों के पीछे की पूरी हकीकत शायद आप नहीं जानते।

पहला मिथ - अधिक चीनी खाने से हो सकती है डायबिटीज
हम यही मानते हैं कि अधिक चीनी खाने से डा‍यबिटीज होती है, लेकिन यह बात पूरी तरह सच नहीं है। जब आपके शरीर में आहार को ऊर्जा में बदलने की क्षमता कम हो जाती है, तब डायबिटीज होती है। डायबिटीज को जानने के लिए इस प्रक्रिया को समझें। आप जो भी खाते हैं, आपका शरीर उसे ग्‍लूकोज में बदल देता है। यह शुगर का एक प्रकार है, जो आपकी कोशिकाओं को शक्ति देता है। पेनक्रियाज में मौजूद हार्मोन इनसुलिन शरीर को इस ग्‍लूकोज को ऊर्जा में बदलने में मदद करता है।

डायबिटीज के प्रमुख प्रका

टाइप वन डायबिटीज
इस परिस्थिति में पेनक्रियाज इनसुलिन का निर्माण नहीं करता। इनसुलिन के बिना रक्‍त में शक्‍कर की मात्रा बढ़ जाती है। आमतौर पर यह बच्‍चों और नौजवानों में देखी जाती है। जानकारों की राय में इम्‍यून सिस्‍टम में कमजोरी इसकी सबसे बड़ी वजह होती है।

टाइप टू डायबिटीज
यह तब होता है जब पेनक्रियाज पर्याप्‍त मात्रा में इनसुलिन नहीं बनाता या इनसुलिन सही प्रकार से इस्‍तेमाल नहीं हो पाता, अथवा दोनों ही कारण हों। अधिक वजन टाइप टू डायबिटीज का सबसे बड़ा कारण होता है। यह किसी भी उम्र में हो सकती है।

गर्भावधि मधुमेह
गर्भावस्‍था के दौरान कुछ महिलाओं में यह समस्‍या होती है। गर्भावस्‍था के दौरान हार्मोन्‍स में बदलाव के कारण इनसुलिन सही प्रकार से काम नहीं कर पाता। गर्भावधि मधुमेह से पीडि़त महिला को अक्‍सर इनसुलिन लेना पड़ता है। बच्‍चे के जन्‍म के बाद यह समस्‍या अपने आप ठीक हो सकती है।

मिथ -2 डायबिटीज आहार में नियमों का अंबार
डायबिटीज डायट में बहुत सारे नियम नहीं होते। इसका मूल नियम यही है कि आप ऐसा आहार चुनें जो आपकी रोजमर्रा की शार‍ीरिक गतिविधियों से मेल खाता हो और इसके साथ ही दवायें जो आपके रक्‍त में शर्करा की मात्रा को संतुलित कर सके। क्‍या आपको अपने आहार में बदलाव लाने की जरूरत है ? शायद हां, लेकिन उस हद तक नहीं जितना कि आप सोचते हैं।

मिथ -3 डायबिटीज में कार्बोहाइड्रेट बहुत बुरा होता है
वास्‍तव‍िकता में कार्बोहाइड्रेट डायबिटीज में बहुत अच्‍छा होता है। ये एक स्‍वस्‍थ डायबिटीज आहार अथवा किसी भी आहार का आधार होता है। रक्‍त में शर्करा की मात्रा पर कार्बोहाइड्रेट का सीधा असर पड़ता है, इसलिए डायबिटीज आहार लेते समय आपसे कार्बोहाइड्रेट के सेवन पर नजर रखने की सलाह दी जाती है। हालांकि, कार्बोहाइड्रेट आहार में कई जरूरी पोषक तत्‍व जैसे, विटामिन, मिनरल और फाइबर आदि भी होते हैं। तो, ऐसे में समझदारी इसी बात में है कि आप साबुत अनाज और उच्‍च फाइबर युक्‍त फल और सब्जियों का सेवन करना चाहिए। आप आहार विशेषज्ञ से मिलकर अपने लिए सर्वश्रेष्‍ठ आहार चुन सकते हैं।

मिथ 4 डायबिटीज में प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट से बेहतर होता है
कार्बोहाइड्रेट रक्‍त में शर्करा की मात्रा पर तेजी से असर डालता है, इसलिए डायबिटीज से ग्रस्‍त कुछ लोग प्रोटीन युक्‍त आहार का रुख कर लेते हैं। लेकिन अधिक प्रोटीन लेना आपकी समस्‍याओं को बढ़ा सकता है। प्रोटीन युक्‍त अधिकतर आहारों जैसे मीट आदि में सैचुरेटेड फैट भी काफी मात्रा में होता है। इनका अधिक सेवन आपको दिल की बीमारियां दे सकता है। आपकी कुल कैलोरी का 15 से 20 फीसदी हिस्‍सा ही प्रोटीन होना चाहिए।

मिथ -5 दवा से सब बराबर हो जाता है
अगर आप इनसुलिन लेने के बाद यह सोचते हैं कि आप कुछ भी खा सकते हैं, तो यह आपकी गलती है। आपको इनसुलिन का इंजेक्‍शन लेने के साथ ही खाने का नया तरीका भी सीखना होगा। यह नहीं कि आप कितना भी खा लें और फिर इनसुलिन की मात्रा बढ़ा दें। अपने डॉक्‍टर की सलाह के बिना दवा और आहार में बदलाव करने से परहेज करें। डायबिटीज की दवा तभी अधिक कारगर साबित होती है, जब वह डॉक्‍टर की सलाह से ली जाती है।

मिथ 6 अपना पसंदीदा भोजन छोड़ना होगा
ऐसा नहीं है कि डायबिटीज होने पर आप अपना पसंदीदा भोजन नहीं कर सकते। आपको उसे पकाने का तरीका बदलना होगा। इसके साथ ही अन्‍य आहार के साथ उसे खाने के तरीके में भी जरा बदलाव लाना होगा। अपने पसंदीदा भोजन में प्रोटीन की मात्रा कम करनी होगी। इसके साथ ही अगर आप अपनी आहार योजना पर टिके रहते हैं, तो खुद को अपने पसंदीदा भोजन के रूप में ईनाम दें। आप इसके लिए आहार-विशेषज्ञ की मदद ले सकते हैं।

मिथ -7- अगर आपको डायबिटीज है, तो आपको मीठा छोड़ना होगा
सच नहीं है- आप अपने डायबिटीज आहार में मीठा शामिल कर सकते हैं। किसी स्‍वीट डिश में आप कृत्रिम चीनी का उपयोग कर सकते हो। मीठे की मात्रा कम कर दें। उदहारण के लिए अगर पहले आप दो आइसक्रीम खाते थे, तो तब एक खाएं। मीठे को अपने लिए ईनाम मान लें। यदि आप अपनी आहार-योजना पर टिके रहते हैं, तो खुद को ईनाम के तौर पर मीठा खाने को दें। आप चाहें तो अपने मीठे को पौष्टिक भी बना सकते हैं। आप यह मीठा बनाते समय साबुत अनाज, ताजा फल और वेजिटेबल ऑयल इस्‍तेमाल कर सकते हैं। आप आइसक्रीम, पाई अथवा केक के स्‍थान पर फल और ओटमील बिस्‍कुट आदि खा सकते हैं।

मिथ -8 कृत्रिम चीनी भी डायबिटीज के मरीजों के लिए नुकसानदेह होती है  
कृत्रिम चीनी सामान्‍य चीनी के मुकाबले अधिक मीठी होती है, तो आपको उतने ही मीठे के लिए कम चीनी डालने की जरूरत होती है। इससे आप कम कैलोरी का सेवन करते हैं। जो लोग अपना वजन काबू करने की कोशिश कर रहे हैं, उनके लिए भी ये स्‍वीटनर काफी मददगार हो सकते हैं, लेकिन इनकी मात्रा के बारे में आपको जरा ध्‍यान रखने की जरूरत है। इस मामले में आप आहार-विशेषज्ञ की मदद ले सकते हैं।

मिथ -9 आपको डायबिटीज का खास आहार खाना पड़ेगा
सच्‍चाई तो यह है कि 'डायबिटिक आहार' जैसी कोई चीज नहीं होती। जो आहार डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद है, वह आहार सभी लोगों के लिए फायदेमंद होता है। वास्‍तव में डायबिटीज के लिए कोई खास आहार तैयार करने की जरूरत नहीं है। डायबिटीज के शिकार किसी व्‍यक्ति को अपने आहार पर और गहरी नजर रखने की जरूरत होती है। इसमें कुल खायी गयी कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट के प्रकार का भी ध्‍यान रखना पड़ता है। आपका डॉक्‍टर अथवा डायटिशियन आपकी मदद कर सकता है।

मिथ -10 डायट आहार डायबिटीज के लिए सबसे उत्तम आहार होता है
सिर्फ 'डायट' का तमगा लगा होने से कोई आहार डायबिटीज के लिए फायदेमंद नहीं हो जाता। डायट फूड सामान्‍य से महंगे भी होते हैं, तो सेहत को इनका कोई विशेष लाभ भी नहीं पहुंचता। तो किसी भी आहार को चुनने से पहले उसमें मौजूद पोषक तत्‍वों व अन्‍य सामग्री की जानकारी जरूर ले लें। इसके लिए भी आप अपने डॉक्‍टर की मदद ले सकते हैं।
अब आपको डायबिटीज के बारे में तथ्‍यों की जानकारी है, तो अब आपको अपने लिए बेहतर आहार चुनने में आसानी होगी। इसके साथ ही व्‍यायाम और दवाओं का मेल आपको एक सेहतमंद जिंदगी जीने में मदद करेगा। इससे आपकी रक्‍त-शर्करा मात्रा नियंत्रित रहेगी।

बार्डरलाइन डायबिटीज के बारे में जानें
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    बॉर्डरलाइन डायबिटीज में रक्त में ग्लूकोज का स्तर सामान्य से अधिक होता है।
    संतुलित आहार आपको प्रीडायबिटीज से डायबिटीज तक जाने से रोकता है।
    हर रोज व्यायाम की मदद से आप इस समस्या से बच सकते हैं।
    स्वस्थ जीवशैली अपनाएं, जल्दी सोएं और जल्दी उठें।

बॉर्डरलाइन डायबिटीज अथवा प्री-डायबिटीज उस स्थिति को कहा जाता है जब रक्‍त में ग्‍लूकोज का स्‍तर सामान्‍य से अधिक होता है, पर इतना अधिक नहीं होता कि उसे डायबिटीज कहा जा सके। बॉर्डरलाइन डायबिटीज से ग्रस्‍त अधिकतर लोगों में किसी प्रकार के लक्षण नजर नहीं आते, लेकिन उन्‍हें हृदय रोग होने का खतरा काफी अधिक होता है।

हमारा शरीर इनसुलिन हार्मोन का स्राव करता है, जो भोजन में पाये जाने वाली ऊर्जा (ग्‍लूकोज) को इस्‍तेमाल करने में मदद करता है। डायबिटीज में या तो शरीर पर्याप्‍त मात्रा में इनसुलिन का निर्माण नहीं कर पाता या फिर निर्मित हो रहे इनसुलिन का पर्याप्‍त इस्‍तेमाल नहीं कर पाता। जब रक्‍त में ग्‍लूकोज की मात्रा अधिक हो जाती है, तो यह किडनी, हृदय, आंखों और नर्वस सिस्‍टम में मौजूद रक्‍तवा‍हिनियों को नुकसान पहुंचा सकता है।
कुछ तो गड़बड़ है
प्री-डायबिटीज में ग्‍लूकोज और इनसुलिन का संतुलन हलका सा बिगड़ जाता है। पेनक्रियाज ग्रंथि पर्याप्‍त मात्रा में इनसुलिन का निर्माण नहीं कर पाती जिससे रक्‍त से ग्‍लूकोज की अतिरिक्‍त मात्रा को 'हटा पाना' संभव नहीं हो पाता। या कोशिकायें इनसुलिन रोधी हो जाती हैं। जब कोशिकायें इनसुलिन रोधी हो जाती हैं, वे इनसुलिन को रक्‍त में से ग्‍लूकोज  ले जाने से रोकने लगती हैं। रक्‍त में बहुत अधिक शर्करा हो जाने को हाई ब्‍लड शुगर अथवा हायपेरग्‍लासिमा कहा जाता है, लो ब्‍लड शुगर को हायपोग्‍लासिमा कहा जाता है।

बढ़ जाता है हृदय रोग का खतरा
अगर आप प्रीडायबिटीज की श्रेणी में आ चुके हैं, तो आपको टाइप टू डायबिटीज होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसके साथ ही आपको कई अन्‍य गंभीर चिकित्‍सीय परेशानियां भी हो सकती हैं, जिनमें ह्रदय रोग और स्‍ट्रोक आदि शामिल हैं। प्री डायबिटीज के साथ आपको सामान्‍य लोगों की अपेक्षा हृदय रोग और स्‍ट्रोक होने का खतरा 50 फीसदी बढ़ जाता है।

कैसे होता है निदान
यह पता लगाने के लिए कि क्‍या आपका प्रीडायबिटीज है, आपका डॉक्‍टर कई प्रकार की रक्‍त जांच कर सकता है। फास्टिंग प्‍लाजमा ग्‍लूकोज जांच, ओरल ग्‍लूकोज टोलरेंस टेस्‍ट अथवा हीमोग्‍लोबिन ए1सी (एवेरज ब्‍लड शुगर) जांच आदि।

कितना सामान्‍य है प्री-डायबिटीज
एक अनुमान के अनुसार अकेले अमेरिका में 20 वर्ष की आयु से ऊपर के करीब आठ करोड़ लोग प्रीडायबिटीज के शिकार हैं। प्री डायबिटीज को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह आने वाली गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है। यह आपके दिल, किडनी, आंखों, नर्वस सिस्‍टम और आंखों को होने वाले संभावित नुकसान का इशारा हो सकता है।

कैसे लाएं जीवन में बदलाव
जीवनशैली में जरूरी बदलाव लाकर आप प्री‍डायबिटीज के खतरे को टाल सकते हैं और यहां तक कि डायबिटीज होने के खतरे को भी रोक सकते हैं। डायबिटीज के खतरे को कम करने के लिए आपको सबसे पहले अपने वजन को काबू में रखना चाहिए। इसके साथ ही रोजाना व्‍यायाम और संतुलित आहार भी आपकी दिनचर्या का हिस्‍सा होना चाहिए।

डायबिटीज प्रिवेंशन प्रोग्राम के तहत यदि आप अपनी जीवनशैली में इस प्रकार का बदलाव लेकर आते हैं, तो आपको तीन वर्षों में डायबिटीज का खतरा 58 फीसदी कम हो जाता है। 60 वर्ष की आयु से ऊपर के लोगों में को 71 फीसदी से भी अधिक लाभ‍ मिलता है।

वजन काबू
मोटे और अधिक वजन वाले लोगों में प्रीडायबिटीज के डायबिटीज में बदलने का खतरार काफी अधिक होता है। कुछ अतिरिक्‍त वजन को घटाकर आप टाइप टू डायबिटीज होने की आशंका को काफी कम कर सकते हैं। केवल पांच से दस फीसदी वजन कम करना भी डायबिटीज से बचे रहने में आपकी मदद कर सकता है।

व्‍यायाम
शोध इस बात की पुष्टि करते हैं कि रोजाना महज 30 मिनट का मद्धम व्‍यायाम, जैसे साइक्लिंग, तैराकी और तेज चलना आदि भी डायबिटीज से बचाने अथवा उसे नियंत्रित करने में मददगार हो सकता है। एरोबिक्‍स व्‍यायाम भी आपके दिल की धड़कनों को संतुलित रख आपको टाइप टू डायबिटीज से बचाने में सहायता प्रदान करता है। साथ ही आपकी प्रीडायबिटीज को टाइप टू डायबिटीज में बदलने से भी रोकता है। एक्‍सरसाइज प्‍लान अपनाने और अपनी शार‍ीरिक गतिविधियां बढ़ाने से पहले एक बार अपने डॉक्‍टर से जरूर बात कर लें।

आहार
संतुलित आहार आपको प्रीडायबिटीज से डायबिटीज तक जाने से रोकता है। एक संतुलित आहार में लो-फैट प्रोटीन, सब्जियां और साबुत अनाज शामिल होते हैं, जो प्रीडायबिटीज को डायबिटीज के स्‍तर तक नहीं जाने देते। अपने आहार में कैलोरी की मात्रा कम कर, प्रोटीन और लो शुगर खाद्य पदार्थों की मात्रा बढ़ाकर और लो कॉर्बोहाइड्रेट युक्‍त आहार का संतुलित मेल आपके लिए सही रहेगा। आपको पर्याप्‍त मात्रा में फाइबर का सेवन भी करना चाहिए।

इन उपायों को आजमाकर आप स्‍वयं को हृदय रोग, उच्‍च रक्‍तचाप और स्‍ट्रोक के खतरे से बचा सकते हैं। आमतौर पर डायबिटीज और प्रीडायबिटीज के मरीजों में उच्‍च रक्‍तचाप  कीशिकायत होती है।

इसके साथ ही आपको हाई कोलेस्‍ट्रॉल की मात्रा कम करने के लिए धूम्रपान भी नहीं करना चाहिए। यह आपके दिल की सेहत के लिए अच्‍छा नहीं होता।

आप एक सेहतमंद जीवनशैली अपनाकर प्रीडायबिटीज को नियंत्रित कर सकते हैं। अगर प्री‍डायबिटीज, टाइप टू डायबिटीज में बदल जाए, तो वजन कम करना, व्‍यायाम करना, पोषण युक्‍त आहार लेना और रक्‍तचाप को नियंत्रित करके आप डायबिटीज  के साथ भी स्‍वस्‍थ जीवन जी सकते हैं। एक स्‍वस्‍थ जीवनशैली दवाओं और इनसुलिन पर आपकी निर्भरता को भी कम और नियंत्रित करती है।

बच्चों में डायबिटीज के लक्षणों को पहचानें

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    मधुमेह बच्चों को भी अपनी चपेट में ले सकता है।
    शुरुआती अवस्था मधुमेह का पता लगने पर इलाज में आसानी हो सकती है।
    बच्चों को बार-बार पेशाब आना एक गंभीर समस्या है।
    बच्चों के वजन में अचानक होने वाली गिरावट चिंताजनक है।

डायबिटीज को अक्‍सर अधिक उम्र के साथ जोड़कर देखा जाता है। लेकिन, अब यह रोग बच्‍चों में भी फैलता जा रहा है। हालांकि, माता-पिता बच्‍चों में इस रोग को लेकर गंभीर नहीं होते, इसलिए वे इसके लक्षणों की ओर ध्‍यान भी नहीं देते। लेकिन, ऐसा करना बच्‍चों की सेहत के साथ खिलवाड़ हो सकता है।

माता-पिता के लिए बच्‍चों में डायबिटीज के लक्षणों को समय रहते पहचानना बहुत जरूरी है, अन्‍यथा इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। डायबिटीज के कारण शरीर में होने वाले बदलाव काफी धीमे और सूक्ष्‍म होते हैं, इसलिए जब तक बच्‍चा काफी बीमार नहीं होता, तब तक इस बीमारी को पकड़ पाना आसान नहीं होता। आमतौर पर वह किसी अन्‍य बीमारी के संयोजन से बीमार होता है, लेकिन जांच में डायबिटीज का होना सामने आता है। 

तो माता-पिता को कैसे पता चले कि उनके बच्‍चे को डायबिटीज है। इसके लिए जरूरी है कि आप अपने बच्‍चे की सेहत पर नजर रखें और इन लक्षणों को अनदेखा न करें-

पेशाब अधिक आना
डायबिटीज के दौरान ग्‍लूकोज कोशिकाओं तक नहीं पहुंच पाता, इसलिए रक्‍त में ग्‍लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है। नतीजा यह होता है कि किडनी अतिरिक्‍त शर्करा को फिल्‍टर करने लगती है। इससे पेशाब की मात्रा बढ़ जाती है। इसलिए आपका बच्‍चा पहले से अधिक बार पेशाब करने जाने लगता है। यह बच्‍चों में डायबिटीज होने का सबसे सामान्‍य लक्षण है।

अधिक प्‍यास लगना
अब क्‍योंकि आपका बच्‍चा अधिक बार पेशाब करने जाने लगता है, इसलिए उसे पहले से अधिक प्‍यास लगती है। आमतौर पर माता-पिता यह सोचते हैं कि क्‍योंकि बच्‍चा अधिक पानी पी रहा है, इसलिए अधिक पेशाब कर रहा है, लेकिन हकीकत इससे उल्‍टी होती है।

भूख बढ़ना
डायबिटीज से पीडि़त बच्‍चे हमेशा भूख लगने की शिकायत करते हैं। इसके पीछे सीधा सा कारण है, क्‍योंकि ग्‍लूकोज शरीर की कोशिकाओं में नहीं पहुंच रहा होता, इसलिए उसे हमेशा भूख का अहसास होता रहता है।

वजन कम होना
आमतौर पर लोग वजन बढ़ने को डायबिटीज के साथ जोड़कर देखते हैं। टाइप टू डायबिटीज में, अधिक मोटे व्‍यक्ति को डायबिटीज होने का खतरा अधिक होता है। टाइप वन अथवा बच्‍चों को होने वाली डायबिटीज इससे अलग होती है। अगर बच्‍चों में डायबिटीज का इलाज न करवाया जाए, तो उनका वजन कम होने लगता है। क्‍योंकि शरीर को पर्याप्‍त मात्रा में ग्‍लूकोज नहीं मिलता, इसलिए भी वजन घटने लगता है।

अगर आपको अपने बच्‍चे में इनमें से किसी भी प्रकार का लक्षण नजर आए, तो उसे फौरन डॉक्‍टर के पास ले जाएं क्‍योंकि ये लक्षण डायबिटीज के अलावा अन्‍य कारणों से भी हो सकते हैं। अगर डॉक्‍टर को संशय हो कि आपके बच्‍चे को डायबिटीज है, तो वह रक्‍त जांच से इस बात की पुष्टि कर सकता है। एक बार जब डायबिटीज की पुष्टि हो जाती है, तो माता-पिता को इस बात का अहसास होता है कि वे काफी समय से इन लक्षणों को देखकर अनदेखा कर रहे थे।

अगर डायबिटीज का इलाज न करवाया जाए, तो यह बच्‍चों को जीवनभर की परेशानियां दे सकती है। इसके लघुगामी प्रभावों में हाई ब्‍लड शुगर, लो ब्‍लड शुगर, डायबिटीज केटोएसिडोसिस (पेशाब में किटोन्‍स की मात्रा बढ़ना) ओर कोमा आदि शामिल हैं। वहीं दीर्घगामी प्रभावों में मुख्‍य संवहिनी और तंत्रिका प्रणाली को नुकसान होना, जिससे आंखों की रोशनी भी जा सकती है, किडनी फैल्‍योर, अंग-विच्‍छेदन और हृदयाघात अथवा स्‍ट्रोक का खतरा बढ़ना आदि शामिल हैं।

अब क्‍योंकि बच्‍चे इस बीमारी के दीर्घगामी प्रभावों को नहीं समझ सकते, लेकिन यह माता-पिता की जिम्‍मेदारी है कि वे बच्‍चों का पूरा खयाल रखें। तकनीक और इलाज की उन्‍नत पद्धतियों का होने के कारण डायबिटीज से पीडि़त बच्‍चे अब स्‍वस्‍थ और लंबा जीवन जी सकते हैं।



    शिफ्ट में काम करने से मधुमेह का खतरा
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    शिफ्ट में काम करने से मधुमेह का खतरा: जानिए शिफ्ट में काम करने से मधुमेह का खतरा कैसे बढ़ सकता है।

   डायबीटिज से बचाव के प्राकृतिक उपचार
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    ड़ायबीटिज एक बहुत हीं खतरनाक बीमारी है लेकिन अगर आप प्राकृतिक उपायों से इस पर नियंत्रण कर  सके तो मधुमेह से आपको घबराने की जरुरत नहीं है। निम्न कुछ प्राकृतिक उपचार से आप ड़ायबीटिज पर नियंत्रण पा सकते हैं।

    डायबिटिक नेफरोपैथी के लंबे समय तक रहने वाले प्रभाव
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    डायबिटिक नेफरोपैथी एक प्रकार का किडनी रोग है। जानें इस बीमारी से पैदा होने वाली अन्य समस्याओं के बारे में।

       कैसे जियें डायबिटीज के साथ

    डायबिटीज को पूर्ण रूप से दूर नहीं कर सकते, लेकिन नियंत्रण में रखकर स्वस्थ एवं सामान्य जीवन बीता सकते है।

     धूम्रपान से मधुमेह का खतरा
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    मधुमेह और धूम्रपान की जुगलबंदी से गुर्दे की बीमारी का खतरा बढ जाता है।

      डायबिटीज़ 1 में इंसुलिन थेरेपी
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    डायबिटीज की समस्या आज महानगरों में आम बात हैं। डायबिटीज के लिए ओवरईटिंग घातक होती है। डायबिटीज की मात्रा कम करने के लिए इंसुलिन थेरेपी दी जाती है। डायबिटीज बढ़ने से डायबिटीज के मरीज के खून में शर्करा की मात्रा अधिक बढ़ जाती है। आइए जानें डायबिटीज 1 में इंसुलिन थेरेपी कितनी कारगार साबित होती है।

       किशोरावस्‍था मधुमेह में होती है थकान, कमजोरी और त्‍वचा रोग जैसी समस्‍यायें
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    किशोर डायबिटीज के इस प्रकार के लक्षण यदि आपके बच्‍चे को दिखें तो इसे बिलकुल भी नजरअंदाज न करें।

       डायबिटिक्स में इंसुलिन के अतिरिक्त प्रभाव
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    आइए जानें डायबिटिक्स में इंसुलिन के अतिरक्त प्रभावों के बारे में।

   

    मधुमेह रोगियों पर धूम्रपान का प्रभाव
धूम्रपान के बारे में अक्सर कहा जाता है कि यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।  इसके बावजूद जिन्हें धूम्रपान की लत लग जाती है वे इसे नहीं छोड़ते। यूँ तो धूम्रपान किसी के लिए भी अच्‍छा नहीं होता, लेकिन अगर आपको मधुमेह है और अगर आपको अपनी जिन्दगी से जरा भी प्यार है तो जितनी जल्दी हो सके, धूम्रपान छोड़ दें क्योकि यह आपके लिए जानलेवा सिद्ध हो सकता है।

आइये जानते हैं कि मधुमेह के मरीजों के लिए धूम्रपान कितना और क्‍यों खतरनाक हो सकता है।
नर्वस सिस्‍टम पर धूम्रपान का असर: धूम्रपान तंत्रिका तंत्र पर बहुत बुरा असर डालता है। यह तंत्रिका तंत्र को बहुत हीं कमजोर कर देता है जिसकी वजह से इंसान ढ़ेर सारी समस्याओं का शिकार हो जाता है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति मधुमेह का शिकार है और वह धूम्रपान करता है तो यह उसकी तंत्रिका तंत्र को बहुत हीं क्षति पहुंचाता है। धूम्रपान करने से मधुमेह के मरीजों में मधुमेह के अलावा दिल की बीमारी, यौन समस्या इत्यादि भी होने लगती है।
गुर्दे होते हैं प्रभावित: मधुमेह वैसे हीं गुर्दों पर बुरा असर डालता है, लेकिन धूम्रपान करने वाले व्यक्ति पर इसका प्रभाव चौगुना या उससे भी ज्यादा होता है। धूम्रपान करने से उस व्यक्ति के गुर्दे ख़राब होने लगते हैं।  इससे मरीज की स्‍थिति और भी गंभीर हो जाती है।
धूम्रपान का आँखों पर प्रभाव: हमारी आँखों पर भी मधुमेह का असर होता है। धूम्रपान करने वाले डायबिटीज़ रोगियों को कम समय में ही आंखों की समस्‍याएं भी होने लगती हैं।
धूम्रपान का रक्त वाहिनियों पर असर : मधुमेह में ग्‍लूकोज़ का स्‍तर प्रभावित होता है और रक्‍त वाहीनियां भी प्रभावित होती है। लेकिन जो लोग मधुमेह के मरीज होते हुए भी धूम्रपान करते रहते हैं उनकी रक्त वाहिनियों की अंदरूनी दीवारों पर प्लेक जमने लगता है जिससे रक्त संचार इस कदर बाधित होने लगता है कि रोगी को हार्ट एटेक आ जाता है।  कुछ मरीजों को स्ट्रोक मार देता है अथवा उन्हें जिन्दगी भर के लिए कोमा की स्थिति में भेज देता है।
    धूम्रपान किसी के लिए भी अच्‍छा नहीं होता, लेकिन अगर आपको मधुमेह है तो यह आपके लिए जानलेवा सिद्ध हो सकता है।

 
    डायबीटिज के लिए व्यायाम
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    डायबीटिज किसी भी अन्य गंभीर बीमारी की तरह खतरनाक है। आइए जानें डायबिटीज के लिए व्‍यायाम के बारे में।

  आहारीय मैग्नेशियम करे डाइबिटीज़ से बचाव
भोजन में मैग्नीशियम की पर्याप्त मात्रा आपको डायबिटिज के खतरे से बचाती है।

 मधुमेह रोगियों के लिए आहार
मधुमेह रोगियों के लिए आहार: आपको यह जानकार आश्चर्य हो सकता है कि ऐसा कोई आहार नहीं होता जिसे सिर्फ मधुमेह आहार कहा जाये, मधुमेह आहार के बारे मैं अधिक जानकरी के लिए पूरा लेख पड़ें.

 मधुमेह से संबंधी दस तथ्य
 डब्यूएचओ ने व्यापक रूप से फैल रही डायबिटीज की बीमारी से जुडे 10 तथ्यों को इकट्ठा किया।

डायबिटीज़ रोगियों के लिए इंसुलिन पंप
डायबिटीज़ रोगियों के लिए इंसुलिन पंप: अब डायबिटीज के मरीज बिना किसी दर्द के भी इनसुलिन दवा ग्रहण कर सकते हैं।

घर पर ब्लड शुगर टेस्ट कैसे करें
ग्लूकोज को नापने के लिए निरंतर ग्लूकोज मॉनिटरिंग सिस्टम का भी विकास किया गया।

पुरूषों में मधुमेह के लक्षण
आइए जानते हैं आखिर पुरूषों में मधुमेह के लक्षण क्या होते हैं और महिलाओं में पाए जाने वाले लक्षणों से वे कितने भिन्न हैं।

मधुमेह से बचाव के तरीके
मधुमेह एक खतरनाक बीमारी है। लेकिन अगर इसका मरीज अपना पूरा ख्याल रखे और व्यायाम करने के साथ साथ उचित खाद्य पदार्थों का सेवन करे तो इस रोग पर काबू पाया जा सकता है और इस रोग से होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है।

शुगर के स्‍तर पर नियंत्रण ही डायबिटिक नेफरोपैथी से बचने का बेहतर उपाय
डायबिटिक नेफरोपैथी गुर्दे से संबंधित एक गंभीर बीमारी है, इससे बचने के लिए ये तरीके आपके लिए कारगर हो सकते हैं।

ब्लड शुगर में रखें सावधानी
काम के प्रेशर व दिनभर भागदौड़ के कारण लोग अपने खाने पर ध्यान नहीं देते हैं। ऐसे में सभी के लिए रक्त में शर्करा का संतुलन बनाए रखना बहुत जरूरी है।

मधुमेह रोगी हल्दी का सेवन करें
हल्दी में वातनाशक गुण होते हैं जिससे मधुमेह की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। आइए जानें मधुमेह रोगियों के लिए हल्दी का सेवन कैसे लाभदायक है।




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