Wednesday, 26 February 2014

Health »Beauty» Skin care and prevention of wrinkles of the lips


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music, exercise, yoga and keeps away from :-  संगीत, व्‍यायाम और योग कामकाजी महिलाओं को रखता है तनाव से दूर

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    नैंपिंग के फायदे
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     नींद के अलावा उंघना भी सेहत के लिए अच्‍छा होता है। क्‍या आप जानते हैं कि कुछ मिनट के लिए उंघने से आप तरोताज़ा महसूस करते हैं और यह बात वैज्ञानिक तौर पर सिद्ध हो चुकी है। कुछ देर झपकियां लेने के बाद, आप पूरे दिन के लिए रीचार्ज भी हो सकेंगे।

        आंखों से संबंधी भ्रम और तथ्‍य
 कंप्‍यूटर का इस्तेमाल करने का एक और अच्छा तरीका है कि आप हर एक घण्टे पर अपनी आंखों को थोड़ा आराम दें।

    कंप्‍यूटर प्रयोग और स्‍वास्‍थ्‍य
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आज की बदलती जीवनशैली में कंप्यूटर या लैपटाप का प्रयोग हमारी आवश्‍यकता है, इस बात को नकारा नहीं जा सकता।

    आंखों की सेहत जानें

    आंखों की सेहत के लिए खाने में ज्यादा नमक नहीं खाना चाहिए क्योंकि इससे आंखें कमजोर होती हैं।
    लोहे, तांबे व कांच के बर्तन में भोजन करने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।
    खाने में रोजाना शुद्ध घी का प्रयोग करना चाहिए। यह आंखों के लिए लाभकारी होता है।
    सुबह-सुबह मुंह में पानी भरकर बंद आंखों पर 20-25 बार ठंडे पानी के छींटे मारें। याद रखें, मुंह पर छींटे मारते समय या चेहरे को पानी से धोते समय मुंह में पानी भरा होना चाहिए।
    ऑफिस में लगातार कंप्यूटर पर नहीं बैठें बीच में थोड़ा ब्रेक लेकर 1-2 बार आंखें बंद कर, आंखों पर हल्के दबाव के साथ हथेलियों को रखकर आंखों को आराम देते रहें।
    शरीर पर तेल मालिश खासकर पैर के तलवे में मालिश से आंखों की रोशनी बढ़ती है।
    धूप से आने के तुरंत बाद चेहरे पर ठंडा पानी नहीं डालें। शरीर का तापमान सामान्य होने के बाद ही चेहरा धोएं। आंखों को गर्म पानी से नहीं धोना चाहिए।
    धूप में बाहर निकलने से पहले चश्‍मा जरूर लगाएं। इससे सूर्य की अल्ट्रावॉयलेट किरणें आंखों तक नहीं पहुंच पाती है।
    बहुत देर तक कम रोशनी में पढाई लिखाई नहीं करनी चाहिए। यह आंखों की सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। 
    रात को देर तक नहीं जगें और सूर्योदय के बाद देर तक सोना आंखों के लिए हानिकारक होता है। अगर आपको काम की वजह से देर रात तक जागना पड़े तो आधे-आधे घंटे में एक गिलास ठंडा पानी पी लेना चाहिए।
    अगर आपको नींद आ रही और आंखे बोझिल हो रहीं है तो ऐसे में देर तक नहीं जगें तुरंत सो जाएं।
    शरीर के दूसरे अंगों की तरह आंखों के लिए भी नियमित व्यायाम करें।
    आंखों के मेकअप के लिए सौंदर्य प्रसाधनों को चुनते समय हमेशा सावधानी बरतें।
    समय-समय पर आंखों के डॉक्टर से आंखों की जांच करवाते रहें।

आईए जानें कुछ ऐसे टिप्स जिनसे आप अपनी आंखों को सेहतमंद और खूबसूरत बनाए रख सकें।

    स्वच्छ और किटाणुरहित कार्यस्थल
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कार्यस्थल को खुला और हवादार बनाने के लिए कदम उठाने चाहिए क्योंकि यह ताज़ी हवा का स्त्रोत बनाए रखने में मदद करता है । स्वच्छ और किटाणुरहित कार्यस्थल के लिए निम्नलिखित बातों का समावेश होना चाहिए।

    आफिस में बैठने का सही तरीका
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आफिस एरगोनामिक्स आपको काम के आरामदायक तरीके समझने में मदद करती है । इससे तनाव, काम के दौरान घाव या असहज स्थिति की सम्भातवना कम होती  है ।

    की-बोर्ड भी बना सकता है बीमार
की बोर्ड का इस्‍तेमाल हम सब करते हैं, लेकिन क्‍या आप जानते हैं यही की-बोर्ड आपको बीमार भी बना सकता है। जानिये कैसे...

     लैपटॉप-टैबलेट न बन जाएं दर्द का सामान
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टेबलेट पर लंबे समय तो नजर गड़ाए रखने से आपकी गर्दन, सिर और कंधे प्रभावित होते है, जैसे-जैसे आपकी गर्दन नीचे झुकती जाती है, वैसे-वैसे तकलीफ़ बढ़ती जाती

    खान-पान में पौष्टिक आहार की कमी के कारण तनाव होना लाजमी है।
    ऑफिस जाने की तैयारी कर रही हैं तो ब्रेकफास्‍ट करना बिलकुल न भूलें।
    दिमाग को आराम देने के लिए एक घंटे में 10 मिनट का ब्रेक लीजिए।
    संगीत सुनने से आपके दिमाग को आराम मिलेगा और तनाव नहीं होगा।

कामकाजी महिलाओं की संख्‍या बढ़ रही हैं और वे नये कीर्तिमान भी स्‍थापित कर रही हैं। लेकिन महिलायें ऑफिस और घरवालों की देखरेख में खुद के स्‍वास्‍थ्‍य के प्रति लापरवाह भी हो जाती हैं। कार्यालय में काम के बोझ के कारण तनाव ज्‍यादा होता है।

लाइफस्‍टाइल का नकारात्‍मक असर सबसे ज्‍यादा स्‍वास्‍थ्‍य पर पड़ता है। खान-पान में पौष्टिक आहार की कमी के कारण तनाव होना लाजमी है। यदि आप नियमित दिनचर्या का पालन कर रही हैं तो काम के दौरान तनाव होने की संभावना कम होती है। इसके लिए जरूरी है मॉर्निंग वॉक और सुबह का नाश्‍ता। यदि आप इन तरीकों का पालन कर रही हैं तो ऑफिस में तनाव होने की संभावना भी कम होगी और आप फिट भी रहेंगी। आइए हम आपको ऑफिस में तनाव दूर करने के कुछ टिप्‍स बताते हैं।
ऑफिस में तनाव दूर करने के टिप्‍स

 ब्रेकफास्‍ट करके जायें
ऑफिस जाने की तैयारी कर रही हैं तो ब्रेकफास्‍ट करना बिलकुल न भूलें। सुबह का नाश्‍ता न केवल आपका पहला आहार होता है बल्कि यह आपको पूरे दिन ऊर्जावान रखता है। सुबह के नाश्ते में पूड़ी, पराठा न लें, इससे आलस्य आता है। नाश्ते में दूध के साथ ब्राउन ब्रेड, जैम या थोड़ा-सा मक्खन, मैंगो शेक, स्प्राउट, दलिया, ब्रेड-अंडा, सैंडविच के साथ 1 कप काफी आदि ले सकते हैं।

 काम के बीच ब्रेक
लगातार काम करने से बचें, काम के दौरान बीच में ब्रेक बहुत जरूरी है। लगभग 1 घंटे के बाद 10-15 मिनट का ब्रेक लीजिए। ब्रेक लेने से आपके दिमाग को आराम मिलता है और दोबारा काम करने के दौरान आलस नहीं आता। इसके अलावा यह आपको तनाव से भी बचाता है। इसलिए काम के बीच में ब्रेक बहुत जरूरी है।

 थोड़ा सा टहलें
कुर्सी पर ज्‍यादा देर तक बैठने से आपको तनाव या सिरदर्द हो रहा है तो कुर्सी छोड़क थोड़ी देर टहलें। इस दौरान आप अपने ऑफिस के कैफीटीरिया, अपने कैबिन या फिर सहकर्मी के की सीट तक टहल सकते हैं। टहलने से शरीर रक्‍त का संचार सुचारु तरीके से होता है। टहलने से आप एनर्जेटिक रह सकते हैं। काम के बीच में टहलने का समय निकालें।

 संगीत सुनें
कार्यालय में यदि लगातार काम करने से आपको तनाव हो गया है तो कुछ देर तक आप अपना मनपसंद संगीत सुन सकते हैं। संगीत सुनने से आपके दिमाग को आराम मिलेगा और तनाव नहीं होगा। काम के दौरान संगीत सुनने से सकारात्‍मक ऊर्जा मिलती है जिससे दिमाग एकाग्र होता है। एकाग्र दिमाग से व्‍यक्ति अच्‍छा काम कर सकता है।

 योग और व्‍यायाम
यह जरूरी नहीं कि आप योग और एक्‍सरसाइज सुबह या शाम के समय ही कर सकते हैं। सारा दिन कुर्सी पर बैठकर काम करने से शरीर की मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है और इससे तनाव भी हो सकता है। जब भी आप बोर हों या थकान महसूस करें तो स्ट्रेचिंग व्यायाम कर ताजगी ला सकते हैं। इसके लिए अपनी कुर्सी से पांच-दस बार उठ बैठ सकते हैं। खड़े-खड़े दोनों हाथ ऊपर उठाकर पंजों के बल खड़े हो सकते हैं, कमर से दाएं-बाएं बाजुओं को घुमा सकते हैं।

थोड़ा फन भी
ऑफिस में गंभीर मुद्रा में काम न करें, हंसते और मुस्‍कराते रहें, इससे आपका तनाव कम होगा साथ ही आपके साथियों का मूड भी अच्‍छा रहेगा। काम करते वक्त अपना चेहरा मुस्कराते हुए रखें। बीच में अपने मित्र के साथ चैट कर लें, फनी वीडियोज देख लें, जोक्स आदि पढ़ लें। इससे आपका मूड अच्छा रहेगा और काम करने का मन भी करेगा क्योंकि ये सब चीजें तनाव दूर करती हैं।

 पानी खूब पियें
पानी पीना स्‍वास्‍थ्‍य के लिए सबसे ज्‍यादा फायदेमंद है, इससे शरीर फिट रहता है कई बीमारियां नहीं होती हैं। सिरदर्द और तनाव दूर करने के लिए खूब सारा पानी पीजिए। अधिकतर आफिस एसी वाले होते हैं, एसी हमारे शरीर से नेचुरल नमी को चुराते हैं। उस नमी को बरकरार रखने के लिए दिन में थोड़ी-थोड़ी देर बाद पानी पीते रहें और दो-तीन बार ठंडे पानी से चेहरा धो लें।
ऑफिस में फिट रहने के लिए भरपूर आराम भी जरूरी है, इसलिए ऑफिस का काम वहीं निपटाइये और 7-8 घंटे की नींद के बाद सुबह व्‍यायाम कीजिए। इन सबसे भी आपका तनाव दूर न हो रहा हो तो चिकित्‍सक की सलाह लीजिए।

तनाव का मुकाबला करने की स्किल सीखें

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भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव होना लाजमी है। ऐसे में इससे भागने की बजाय इसका मुकाबला करने की कोशिश कीजिए।
अगर आप तनाव से जितना बचने की कोशिश करेंगे उतनी ही मानसिक पीड़ा होगी। कई प्रकार की मानसिक बीमारियां आपको अपना शिकार बना लेंगी। आइए हम आपको तनाव से बचने के कुछ टिप्‍स के बारे में बताते हैं।

 तनाव से लड़ने के कुछ टिप्स:
अपनी सोच पर ध्यान दें :
 ध्यान रखें जहां निगेटिव और फियरफुल सोच से तनाव और परेशानी बढ़ जाती है वहीं बुरी से बुरी परिस्थिति में भी पाज़िटिव सोचने से तनाव कम होता है।

 कल्पना करना सीखें:
ऐसी कल्पना करें कि आप जीवन में क्या चाहते हैं।

 रोज़ व्यायाम करें:
शारीरिक श्रम करने से हमारे शरीर से बिना कारण की चिन्ता खत्म हो जाती है और शरीर ठीक प्रकार से काम करता है ा व्यायाम करने से हमें चिन्ता से भी राहत मिलती है।

 आराम करना सीखें:
 हर दिन कुछ समय आराम करें, इससे हमें बुरी स्थितियों का सामना करने की ताकत मिलती है ा आराम करना भी एक स्किल है। ऐसी किताबें पढ़ें जिससे आपका आत्मबल बढ़े । अपना मनपसंद गाना सुनें ।

 तनाव के बारे में बात करें:
अपने किसी प्रिय मित्र या किसी पारिवारिक सदस्य से अपनी बातें शेयर करें। ऐसा करने से तनाव कम होता है।
अपने रोज़मर्रा के काम को प्लान कर लें :
हर दिन का प्लान करने से आप अपने समय का मूल्यांकन कर सकेंगे और तनाव से बच सकेंगे। ऐसा करके आप अपने काम के साथ साथ मनोरंजन का भी समय निकाल सकते हैं । आप अपने परिवार या मित्रों के लिए भी समय निकाल पायेंगे और अपने काम को भी ठीक प्रकार से कर सकेंगे ।

यथार्थवादी गोल बनायें :
 वो लोग जो अपनी क्षमता से कहीं ज़्यादा की इच्छा करते हैं वो अकसर निराशा के शिकार को जाते हैं ा इसलिए अपनी क्षमता को देखते हुए अपने गोल बनायें ।

अपना मनोरंजन भी करें :
हर रोज़ अपने मनोरंजन के लिए थोड़ा समय भी निकालें। अपने आपको हर रोज़ ऐसे कामों में लगायें जिन्हें आप इन्जाय कर सकें ।

तनाव दूर करने का सबसे आसान तरीका है मनोरंजन ।

रेगुलर फीज़िकल चेक अप करायें:
फीज़िशियन भी आपको तनाव से बचा सकते हैं और स्वस्थ्य रह कर भी तनाव से बचा जा सकता है। इसलिए हेल्थ चेक अप कराते रहें ।

कैसे बचें तनाव से 

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तनाव और परेशानी आज हमारे जीवन का एक आम हिस्सा बन कर रह गया है। कभी-कभी इन तनाव भरी स्थितियों का और अपनी ज़िम्मेदारियों का प्रबंधन करना बहुत मुश्किल हो जाता है।
हर रोज़ के काम और तनाव की स्थिति के बाद अगर हम कुछ समय अपने आप को दें तो शायद हमें तनाव से बचने के कुछ रास्ते मिल जायें। अगर आप रोजमर्रा के तनाव और परेशानियों से परेशान हो जाते हैं तो इसका अर्थ है कि आपको तनाव कम करने की ज़रूरत है।

तनाव से बचने के कुछ तरीके जिनसे आप अपने आपको थोड़ा आराम दे सकते हैं

entertainment / मनोरंजन
मनोरंजन करने वाली गतिविधियों को अपनाकर आप अपने जीवन को रोचक और खुशनुमा बना सकते हैं। व्यायाम करना, पेंटिंग करना, खाना बनाना या नाच गाने में कुछ समय व्यतीत करके आप अपना मनोरंजन कर सकते हैं।
    किसी पर्सनल नोट पर ऐसा लिखें कि मैं हर दिन इस तरह की दो एक्टिविटी करूंगा। इससे आप खुद को तरोताजा़ महसूस करेंगे।
    आज हर उम्र के लोग डांस क्लास जाइन कर सकते हैं। डांस से आपका थोड़ा व्यायाम भी हो जाता है और इससे आप तनाव मुक्त भी अनुभव करेंगे।

 
spas and massage therapy /  स्पा और मसाज थेरेपी
शोधों से ऐसा पता चलता है कि पैरों की मसाज करने से पूरे शरीर का तनाव कम हो जाता है। इस तरह की मसाज थेरेपी को आयुर्वेदिक सेन्टर पर भी सीखा जा सकता है। आज मसाज थेरेपी को कई भागों में बांटा गया है जैसे स्वेडिश मसाज थेरेपी, अरोमाथेरेपी, रिफ्लेक्सालाजी, स्पोर्टस मसाज और डीप टिश्यु मसाज।

    ऐसा पाया गया है कि रिफ्लेक्सालाजी से बहुत आराम मिलता है क्योंकि इससे तनाव बहुत ही जल्दी चला जाता है। बहुत से माल आज फिश थेरेपी करा रहे हैं, इस थेरेपी में आपको अपने पैर एक्वेरियम में डालने होते हैं और मछलियां आपकी डेड स्किन को खा लेती हैं। इस प्रकार की थेरेपी का खर्च आधे घंटे में लगभग 300 से 400 तक आता है।

 
Amusement Park /एम्यूज़मेंट पा

 पूरे परिवार के साथ एम्यूज़मेंट पार्क जैसी जगह पर जाने का मज़ा ही कुछ और होता है। ऐसे वातावरण में आप अपने आपको रिलैक्सड महसूस कर सकते हैं और इससे आपके मूड पर भी अच्छा प्रभाव पड़ता है।
    वाटर राइड या रेन डांस को इन्जाय करके आप पूरी तरह से फ्रेश महसूस कर सकते हैं। इसका खर्च लगभग 500 से 1000 रूपये तक आयेगा।

 
Yoga / योगा
योगा से हमारा शरीर और दिमाग संतुलित रहता है इसलिए लम्बे समय तक कुछ आसन करके आप तनाव मुक्त हो सकते हैं। हर रोज़ कुछ समय तक योगा करें और हफ्ते भर में आप फर्क महसूस करेंगे। योगा क्लास जाइन करके आप 10 से 30 पोज़ सीख सकते हैं जैसे शवासन या शिर्षासन जो कि बहुत मुश्किल माने जाते हैं। अगर आप घर पर योगा करते हैं तो आपका खर्च भी बच सकता है।

Laughter setion / लाफ्टर सेशन
यह एक बहुत पुराना कथन है कि हंसी सबसे अच्छी दवा है और आज शोधकर्ताओं ने यह सिद्ध भी कर दिया है। वो लोग जो तनाव की स्थितियों में भी अच्छे मूड में रहते हैं उनका इम्यून सिस्टम ठीक रहता है। अपने आसपास के पार्क में अपने परिवारजनों या मित्रों के साथ जाकर हंसें या फिर कामेडी मूवी देखने जायें।

Employment mind does not have a bad effect on the body / नौकरी मन की न हो तो तन पर पड़ता है बुरा असर
यदि आप अपनी नौकरी से असंतुष्ट हैं, तो इसका आपके स्वास्थ पर खराब असर पड़ सकता है। खास तौर पर, मानसिक स्वास्थ्य पर। एक नए अध्ययन में यह बात कही गई है।
अध्ययन ऑस्ट्रेलियाई राष्ट्रीय विश्र्वविद्यालय के डॉ. लियाना लीच के नेतृत्व में किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि मन की नौकरी न होना तनाव पैदा करता है। अध्ययन के अनुसार नौकरी होने का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि इससे स्वास्थ्य बेहतर रहेगा। वास्तव में, कई बार लोग अनिच्छा वाली नौकरी में बेरोजगारी की अपेक्षा ज्यादा अवसाद में जीते हैं।
डॉ. लीच के अनुसार, पूर्ववर्ती शोधों के परिणाम बताते हैं कि काम का दबाव लोगों के सामाजिक-आर्थिक, स्वास्थ्य और निजी हालातों को सुधारने में मदद करता है। वह कहती हैं कि यह शोध लोगों को सलाह देता है कि 'कोई भी' नौकरी मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद नहीं कर सकती। इसके बजाय लोगों को बेहतर जिंदगी बिताने के लिए ऐसे काम करने की जरूरत है, जो उनके मन के हों और जिनमें उनका विकास हो। यह नियोक्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए माहौल पर तय करता है।

female bass /महिला बास
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सदियों से महिलाओं की आलोचना होती आ रही है और उन्हें पुरूषवर्ग से कम समझा गया है। लेकिन पिछली कई सदी में महिला बास का समर्थन भी हुआ है।

आपका प्रमोशन होता है और आपको महिला बास के आधीन काम करना पड़ता है। ऐसे में जब लोग आपको बधाइयां देते हैं तो आपको खुशी से ज़्यादा यह चिन्ता होती है कि आप महिला बास के आधीन कैसे काम करेंगे। महिला बास की महान स्थिति किसी ऐयाश पुरूष की तरह है जो कि अपने अनुसार एक हाट सेक्रेटरी रखता है या बहुत से मज़ाक का शिकार होता है। आइये यह जानने की कोशिश करें कि इस पुरानी सोच ने नया रूप कैसे लिया कि एक महिला बास का रूप सभी पुरूषों को डरा देता है।
गुड़गांव के एम एन सी में काम करने वाली 26 वर्षीय अदिल चक्रवर्ती का कहना है कि मैंने पुरूष और महिला बास दोनों के साथ काम किया है लेकिन महिला बास के साथ काम करने में ज़्यादा सावधानी बरतनी पड़ती है क्योंकि आपको पता नहीं होता कि वो क्या सोच रही हैं । अगर उनका काम उनके अनुसार नहीं हुआ तो आप अपने आपको किसी कटघरे में खड़ा महसूस करेंगे ।

 क्‍या है वजह महिला बास के रूखेपन की
महिलाएं पुरूषों की तुलना में अधिक भावुक होती हैं और इसलिए उन्हें काम में और वास्तविक जीवन में सम्पर्क बनाने में समय लग जाता है । उन्हें यह समझाना थोड़ा मुश्किल होता है कि यह बिज़नेस है पर्सनल नहीं है।
    वो महिलाएं जो बोर्डरूम के बाहर बातें नहीं करतीं वो भी एक साथ खाना पसन्द करती हैं लेकिन क्या आपने किसी पुरूष प्रतिद्वंदी को साथ में खाना खाते देखा है।
    पुरूष ज़्यादा काम्पटीटिव होते हैं और इसलिए वो लम्बे समय तक नहीं सोच पाते और अपने पुराने प्रतिद्वंदी पर विश्वास नहीं करते चाहे वो उसी टीम में हों ।
    अच्छा तो यह है लिंग असहमति। लेकिन ऐसा देखा गया है कि पुरूषों की तुलना में महिलाए एक ही समय में कई काम करने में सक्षम हैं और वो असानी से किसी भी समस्या का समाधान निकालने में समर्थ हैं।

 महिला बास के व्‍यवहार पर पुरूषों की राय
कुछ पुरूष कर्मचारियों का मानना है कि वास्तव में महिलाएं पुरूषों की तुलना में अधिक कठोर होती हैं। कुछ पुरूष इस बात से असहमत हैं कि महिलाएं ऐसे मानक स्थापित कर रही हैं जो पुरूषों के लिए सम्भव नहीं है। बल्कि उनका मानना है कि
महिलाएं कितना काम और कितने अच्छे से काम करती हैं इस बात से ज़्यादा यह बात महत्व रखती है कि वह अपने काम पर कितना ध्यान दे पाती हैं।
एक पुरूष इस बात से सन्तुष्ट हो सकता है कि उसने बहुत ज़्यादा या समय पर काम किया है लेकिन एक महिला आपसे शिष्टाचार की भी उम्मीद करेगी।

    पब्लीशिंग हाउस के मार्केटिंग मैनेजर 32 वर्षीय रईज़ मिश्रा एक हास्यजनक घटना को याद करते हैं। उनकी महिला बास किसी भी प्रेज़ेंटेशन के दौरान अपनी नौकरानी से फोन पर बातें करती रहती थी कि उनके बच्चे को कैसे चुप करायें, कैसे सुलाए, कैसे खाना दे । हम सभी ने सोचा कि अब यह बहुत हो गया। वो प्रेज़ेंटेशन पर बिलकुल ध्यान नहीं देती थी और हमलोग अपनी प्रोडक्शन से बहुत नीचे जा चुके थे। इसके बाद भी वो 75 प्रतिशत हमारी गलतियां निकालती थीं।

    क्या महिलाएं मल्टिटास्क हो सकती हैं।

    क्या यह आदतें पुरूषों को डरा सकती हैं। सिन्हा ने दूसरी बात कही कि पुरूषों की तुलना में महिलाएं दोतरफा जीवन जीती हैं। घर पर वह पत्नी और मां होती हैं ।  काम पर आते समय उनके दिमाग में यह बातें होती हैं कि उनके बच्चे ने खाना खाया है या नहीं ।  नौकरानी ने रात के डिनर की तैयारी की है या नहीं।
    अगर घर पर काम करने की जगह कम हुई तो उन्हें प्रज़ेंटेशन का काम दो दिन में करना पड़ेगा।
    हर भूमिका में वो अपने जीवन के दूसरे पहलू पर ज़ोर देती है और दूसरी भूमिका के लिए ताकत जुटाती है।
    चाहे वह 21वीं सदी में रहने वाली भारतीय महिला हो उसे पुरूषों की तुलना में ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
    अगर महिला कोई टास्कमास्टर नहीं है तो उसे हर समय काम से निकाले जाने का डर रहता है।

 हृदय के लिए तनावमुक्त कार्यस्‍थल
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हृदय स्वास्‍थ्‍य की बात करें, तो सबसे पहले उस स्थान का जि़क्र होता है, जहां पर आप अपने जीवन का अधिकतर समय बिताते हैं। वह स्थान है ‘आपका आफिस’। जी हां, अपने जीवन का आधे से ज्यादा समय आप अपने आफिस में बिताते हैं। आपका ‘आफिस स्वास्‍थ्‍य’ कहीं ना कहीं आपके ‘हृदय स्वास्‍थ्‍य ’ को भी प्रभावित करता है। अगर आप भी आफिस का तनाव घर लाने वालों में से हैं, तो संभल जायें क्योंकि हाइपरटेंशन, उच्च  रक्त चाप जैसी समस्याएं आपको भी हो सकती हैं। अगर आप स्वस्थ कर्मचारी बनना चाहते हैं, तो अपने काम के साथ-साथ अपने स्वास्‍थ्‍य पर भी ध्यान दें। 

मेदांता मेडिसिटी के इंटरवेंशनल कार्डियोलाजी विभाग के अध्यक्ष डाक्टर प्रवीन चंद्रा की मानें तो हमारा हृदय स्वास्‍थ्‍य  हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्‍थ्‍य पर निर्भर करता है। अगर आपको भी लगता है कि आपके आफिस में बहुत अधिक तनाव है, तो देर ना करें, अपने एच आर विभाग में बात करें।

डाक्टर प्रवीन चंद्रा के अनुसार आफिस में इन बातों का रखें ख्याल:
•    हर आफिस के(एच आर) मानव संसाधन विभाग की यह जि़म्मेदारी होनी चाहिए कि वह कार्यकर्ताओं पर अतिरिक्त  दबाव पड़ने की स्थिति में इसका समाधान निकाले।
•    बास व कर्मचारियों के बीच होने वाले तनाव का आपके काम पर ही नहीं बल्कि आपके स्वास्‍थ्‍य पर भी असर होता है।
•    काम के साथ-साथ प्रतिदिन 30 मिनट का व्यायाम भी ज़रूरी है।
आवश्यक निर्देश: अगर आपको सीने में दर्द हो रहा है, जकड़न महसूस हो रही है, तो देर ना करें तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
भारत में अभी भी बहुत सी ऐसी कंपनियां हैं, जहां कि लोग इन बातों पर ध्यारन नहीं देते। लेकिन स्वास्‍थ्‍य की दृष्टि से यह आवश्यक है कि आप तनावमुक्त कार्यस्थल की पहल करें और लोगों में जागरूकता फैलायें।

जब सताए काम का बोझ
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आफिस में लगातार काम और टेंशन। ऐसे में थकान का होना लाजिमी है। थकान दूर कर खुद को तरोताजा बनाने के लिए जरूरी है कि काम से आप कुछ दिनों का ब्रेक लें।

इसके अलावा खुद को रिफ्रेश करने के लिए आप ये नुस्खे भी अपना सकते हैं :- आफिस में काम के दौरान थोड़ा धूप में टहल आएं। सूर्य की किरणों से मिलने वाला विटामिन डी शरीर में सेरेटोनिन नामक रसायन का स्तर बढ़ाता है। सेरेटोनिन अच्छी नींद लाने में मददगार होता है।
    अगर आपका आफिस दूसरी या तीसरी मंजिल पर है तो लिफ्ट की जगह सीढि़यों का प्रयोग करें। इससे न केवल आपकी कसरत की जरूरत पूरी होगी बल्कि शरीर में ऊर्जा का स्तर भी बढ़ेगा।
    मानसिक थकान होने की स्थिति में कोई क्रासवर्ड या पजल हल करें। इससे आप रिलैक्स महसूस करेंगे। थकावट होने पर दिमाग पर जोर डालने की बात भले ही अजीब लगे, लेकिन ट्राई जरूर करें।
    लगातार काम के बीच में कुछ मिनट अपनी पसंद की कोई किताब पढ़ें। इससे भी आपका मूड फ्रेश होगा।
    पैदल चलने से बेहतर कोई व्यायाम नहीं है। इससे आप तरोताजा और ऊर्जावान महसूस करेंगे।
    अधिक लाभ के लिए आप एरोमाथेरेपी का भी प्रयोग कर सकते हैं।

कार्यस्थल पर आपका मनोबल बढ़ा सकते हैं ताने
कार्यस्थल पर तानें, गुस्सा और समान रूप से व्यंग्यात्मक मुंहतोड़ जवाब के लिए खोज का कारण होते है। इस विषय पर किये गये नए अध्ययन अब यह सुझाव दे रहे हैं कि तानों का सामना करना पड़ने से आप अपना सर्वश्रेष्ठ कार्यप्रदर्शन दे सकते हैं। इन अध्ययनों में यह पाया गया है, कि जिन कर्मचारियों को व्यंग्यात्मक सहयोगियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ डाल दिया जाता है, वह ऐसी स्थितियों का सामना नही कर रहे कर्मचारीयों की तुलना में अधिक रचनात्मक रुप से कार्य करते हैं।

कार्यालय के अधिक तनावमुक्त और परवाह करने वाले वातावरण की तुलना में, एक मालिक या सहकर्मी से व्यंग्यात्मक टिप्पणी, एक व्यक्ति को कठोर मेहनत करने, और काम को तेजी से अधिक से अधिक रचनात्मकता से काम करने को बाध्य कर देती हैं।

शोधकर्ताओं ने कहा कि तानें सुनने पडने पर, अधिक 'संज्ञानात्मक जटिलता' की या चीजों को एक से अधिक कोण से देखने की क्षमता होने की जरुरी होती हैं।

जिस मर्यादा तक एक व्यक्ति या संगठन एक घटना पर भेद–भाव और एकीकरण करते हैं, उस हद को संज्ञानात्मक जटिलता संदर्भित करती हैं। जिन  व्यक्तियों की संज्ञानात्मक जटिलता उच्च होती हैं, वह एक स्थिति का उसके घटक तत्वों में विश्लेषण करने में सक्षम होते हैं और उनकी सोच बहुआयामी होती है और वह किसी एक समाधान पर अधिक तेजी से पहुँचते हैं। संज्ञानात्मक जटिलता कम होने वालें लोगों को एक विशिष्ट संदर्भ के लिए इन लाइनों में सोचने को सिखाया जा सकता है, लेकिन उच्च जटिलता वाले लोग नई स्थितियों में नाविन्यपूर्ण समाधान ढूँढने में सक्षम होते हैं।

प्रबंधकों को कार्यस्थल पर लोगों से अपेक्षित काम करवाने के लिए उपयोगी हो सकने वाले जटिलता के अध्ययन, निम्नलिखित निष्कर्ष तक पहुँच चुके हैं:

    सूचना: जटिल लोग नई जानकारी को प्राप्त करने लिए और अधिक खुले होते हैं, वे संबंधित श्रेणियों में अधिक जानकारी की तलाश करते हैं और कम जटिल व्यक्तियों की तुलना में हर तरह से अच्छा प्रभाव निर्माण करने के लिए प्रेरित होते हैं।
    आकर्षण: उच्च जटिलता वालें लोग एक दूसरे की ओर आकर्षित होते हैं और उनके समान दृष्टिकोण से वह किसी विशिष्ठ समाधान पर पहुंचने के लिए आपस में विचारों का आदानप्रदान करते हैं, जो कम जटिलता वाले व्यक्तियों में काम नहीं करता। कम जटिल व्यक्ति अपनी तरह के व्यक्तियों को आकर्षित करते हैं, और एक रचनात्मक समाधान ढुंढ निकालने के लिए कम सक्षम होते हैं।
    लचीलापनः जटील व्यक्तियों की सोच भी अधिक लचीली और अधिक रचनात्मक होती हैं। जल्दी समाधान तक पहुंचना उन्हें जटिल समस्याओं के लिए नए समाधान खोजने में आगे प्रेरित करता हैं। इसके विपरीत परिस्थिती कम जटिल व्यक्तियों के साथ होती हैं।
    समस्या को सुलझानाः जटील व्यक्ति की, विभिन्न प्रकार की जानकारी खोजने की प्रवृत्ती होती है, जो उन्हें एक समाधान खोजने के लिए प्रेरित करती हैं, जबकि कम जटिल दिमाग के साथ लोग फलस्वरूप समस्या को सुलझाने में कम प्रभावी होते हैं।
    कूटनीतिक योजनाः जटील व्यक्ति बेहतर रणनीतिक नियोजक होते हैं और विभिन्न विकल्पों को उपलब्ध बनाने के लिए कई दृष्टिकोण से जानकारी जुटाने, लंबी अवधि के लक्ष्यों को निर्धारित करने के लिए, खुद को प्रेरित करते हैं जबकि कम जटिल व्यक्ति ऐसा करने में असमर्थ होते हैं।

ताने के अभिप्रेरण प्रभाव के प्रभाव को विस्तृत करने के लिए, इस्राएल के बॅन इलान विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने इंजीनियरिंग के 350 छात्रों से कहाँ कि वह कल्पना करे कि वे ग्राहक सेवा प्रतिनिधि हैं। उनको क्रोधित व्यंग्यात्मक फोन कॉल आये। छात्रों की, आगे कि आपत्ती से बचने के लिए उनके गुस्से को शांत करके उनकी तत्काल चिंताओं को कम करने की प्रतिक्रिया थी।

ताने के प्रभाव से उच्च स्तर की सोच को और दो वास्तविकताओं पर एक साथ प्रक्रिया करने की क्षमता को प्रोत्साहित किया था, तानों के स्तर जितने उच्च थे, उतनी प्रेरणा उच्च थी। एप्लाइड मनोविज्ञान के जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार गुस्से और ताना के उच्च स्तर पर रचनात्मकता बहुत उन्नत थी।

कुर्सी से चिपके रहेंगे, तो सेहत को होगा नुकसान

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लगातार कुर्सी पर बैठे रहना आपके लिए जानलेवा भी साबित हो सकता है। काम के दबाव के चलते लोग कई-कई घंटे एक ही जगह और एक ही कुर्सी पर बैठकर काम करते रहते हैं। लेकिन ऐसा करना न सिर्फ उनकी सेहत के लिए नुकसानदायक होता है, बल्कि साथ ही इससे उनकी जान पर भी बन सकती है। ताजा अध्‍ययन बताते हैं कि जो लोग 11 घंटे या उससे ज्यादा देर तक लगातार कुर्सी पर बैठकर काम करते रहते हैं उनके अगले तीन वर्षों में मौत की संभावना बढ जाती है। भले ही हम कितना ही सक्रिय क्‍यों न रहते हों। यहां तक कि व्‍यायाम और योगा भी इसके दुष्‍प्रभाव को कम नहीं कर सकते।
अध्ययन के अनुसार –
ऑस्ट्रेलिया के सिडनी विश्वविद्यालय में हुए शोध के अनुसार जो लोग तक आधे दिन तक कुर्सी पर बैठे रहते हैं उनमें 40 प्रतिशत तक मौत का खतरा बढ जाता है। शोध में पाया गया कि लगातार बैठकर काम करने वालों लोगों में 3 वर्षों में मौत की संभावना दुगनी हो गई थी। लोगों की शारीरिक सक्रियता और वजन का इसके कोई संबंध नहीं है।

देर तक बैठने से दिल को खतरा
 लंबे समय तक बैठकर काम करते रहने से बचना चाहिए। छोटी या‍त्रा के दौरान बैठने से अच्छा है कि खड़े होकर यात्रा किया जाए, इससे वजन कम होता है।
    बैठकर काम करने से शारीरिक निष्क्रियता बढती है। बैठने से शरीर में रक्त-संचार सही तरीके से से नहीं होता जिससे दिल का दौरा पड़ने का ज्यादा संभावना बढ़ती है।

कुर्सी पर क्यों बैठते हैं लोग –
ऑफिस का काम ज्यादा होने से कामकाजी लोगों को ज्यादा देर तक कुर्सी पर बैठना होता है। काम का प्रेशर होने के कारण लोग अपना काम पूरा करना चाहते हैं जिसके कारण कुर्सी पर बैठना पड़ता है। कंप्यूटर पर गेम खेलने और टीबी देखने के कारण भी लोग कई घंटों तक कुर्सी पर बैठते हैं। दिन में लंबी यात्रा के दौरान या लंबी हवाई यात्रा बैठकर ही करते हैं। खाली लोग जो सोने से ऊब जाते हैं वे अपना समय घर में बैठकर या पार्कों में बैठकर बिताते हैं।

कुर्सी पर बैठने से बचने के‍ लिए
लगातार कई घंटे तक कुर्सी पर बैठने से बचिए। अगर काम ज्यादा है तो भी थोड़े-थोड़े वक्‍त के बाद ब्रेक लेते रहिए। ऑफिस में काम के दौरान बीच-बीच में टहलते रहना चाहिए। ऑफिस में अपने केबिन में चाय या काफी मंगाने के बजाय कैफीटीरिया में खुद जाकर कॉफी लीजिए। शाम को मॉर्केट जाते समय भी कार या बाइक की बजाए पैदल जाना ही बेहतर रहेगा। अगर आप दिन में लंबी यात्रा कर रहे हैं तो अपनी सीट पर बैठने के बजाय लेटकर यात्रा कीजिए। लंबी यात्रा के दौरान अपनी सीट से उठकर बीच-बीच में टहलते रहिए। 
ज्यादा देर तक बैठने से शरीर की कई समस्याएं शुरू हो जाती हैं। लगातार कुर्सी पर कई घंटे तक बैठने से बैक पेन की समस्या शुरू हो सकती है। आपको कुर्सी पर बैठने के दौरान अगर कोई समस्‍या हो तो अपने चिकित्सक से सलाह अवश्य लीजिए।

ऑफिस में लीजिए सेहत की झपकी
 ऑफिस में काम के दौरान झपकी लेना, भले ही आप इसे काम के प्रति लापरवाही से जोड़कर देखें, लेकिन जनाब ऐसा बिल्‍कुल भी नहीं है। दरअसल, इससे आपकी कार्यक्षमता पर सकारात्‍मक असर पड़ता है। कैसे, आइए जानें हमारे साथ...
जानकार कहते हैं‍ कि कुछ देर की झपकी लंबे समय तक काम करने के कारण होने वाली शारीरिक और मानसिक थकान को दूर करती है। इसका व्यक्ति की याददाश्त, सोचने-समझने की शक्ति और कार्यक्षमता पर काफी अच्छा प्रभाव पड़ता है।

तनाव से रखती है दूर
काम के लगातार दबाव के चलते तनाव और परेशानी आम हो चली है। इसके चलते मस्तिष्‍क अक्‍सर थका-थका रहता है। अपनी शक्ति और ऊर्जा वापस पाने के लिए इसे आराम की दरकार होती है। पावर नैप अपने मस्तिष्‍क को तनाव से दूर रखने का एक बढि़या तरीका है। जब कभी भी आप तनाव में या थके हुए महसूस करें तो बस अपने टेबल पर सिर टिकाइए और जरा सी देर के लिए एक झपकी लें। इसके बाद आप ऊर्जावान, एकाग्र, रिलेक्‍स और सजग महसूस करेंगे।

आपको रखती है सजग
बीती रात आपकी नींद पूरी नहीं हुयी। तो जाहिर तौर पर ऑफिस में आपके काम पर इसका असर नजर आएगा। अपने काम के बीच में जरा सी झपकी आपको सावधान और सजग रखने में मदद करेगी। साथ ही यह आपके एनर्जी लेवल को बनाए रखने में भी मदद करती है और साथ ही आपको रखती है रिफ्रेश। 

याद्दश्‍त पर पड़ता है सकारात्‍मक प्रभाव
थके हुए दिमाग की स्‍मरण शक्ति भी कमजोर रहती है। दिमाग आसानी से कुछ भी नहीं सीख पाता। पावर नैप मस्तिष्‍क की कोशिकाओं और मांसपेशियों को आराम पहुंचाती है। थका हुआ दिमाग विषाक्‍त पदार्थ का निर्माण करने लगता है, जिससे मस्तिष्‍क की कार्यक्षमता पर नकारात्‍मक प्रभाव पड़ता है। इससे आप थके-थके और सुस्‍त रहने लगते हैं। थोड़ी देर की एक झपकी मस्तिष्‍क की मांसपेशियों को राहत पहुंचाती है और आपको रखती है 'टेंशन फ्री'। इसके साथ ही यह मस्तिष्‍क को विषाक्‍त पदार्थ बनाने से भी रोकती है।
दिल के लिए है बेहतर

एक थके हुए मन और शरीर का नकारात्‍मक प्रभाव आपके दिल पर भी पड़ता है। एक झपकी हृदय पर पड़ने वाले अतिरिक्‍त दबाव को दूर करती है। यह दिल की धड़कन को भी नियंत्रित करती है और साथ ही रक्‍तचाप भी सामान्‍य रखती है। जिन लोगों को उच्‍च रक्‍तचाप की शिकायत होती है उन्‍हें हमेशा नैप लेने की सलाह दी जाती है। इससे उनका रक्‍तचाप सामान्‍य बनाए रखने में मदद मिलती है। इस झपकी से दिल अधिक आराम से अपना काम करता है। 

 मूड रहता है फ्रेश
कुछ देर की झपकी आपके मूड को भी ताजा बनाए रखती है। यह उन लोगों के लिए खासतौर पर मददगार है जो अधिक दबाव में काम करते हैं। नाइट शिफ्ट में काम करने वाले, विद्यार्थी और मीडियाकर्मियों के लिए खासतौर पर मददगार होता है। आमतौर पर इन लोगों में नींद को लेकर समस्‍याएं पायी जाती हैं, ऐसे में पावर नैप इनके मन और शरीर को शांत रखने में मदद करती है।

कितनी देर की झपकी का कितना असर
10 से 20 सेकेंड की झपकी : इसे ‘नैनो नैप’ कहते हैं। ‘नैनो नैप’ लेने से कंघों पर पड़ने वाले तनाव से राहत मिलती है।
2 से 5 मिनट की झपकी : इसे माइक्रो नैप कहते हैं। इस आलस दूर होता है और बने रहते हैं तरोताजा।
5 से 18 मिनट की झपकी : इसे मिनी नैप कहते हैं। मिनी नैप लेने से व्यक्ति की सतर्कता, कार्य करने की क्षमता पर अच्‍छा असर पड़ता है। और साथ ही याद्दश्‍त भी दुरुस्‍त रहती है।
20 मिनट की झपकी : इसे पावर नैप कहते हैं। पावर नैप लेने से व्यक्ति को माइक्रा और मिनी दोनों नैप्स के फायदे मिलते हैं। इसके साथ ही मांसपेशियों को लंबे समय तक कार्य करने, याददाश्त तेज करने और मस्तिष्क को थकान से दूर रखने में काफी फायदेमंद साबित होती है।

सुबह का नाश्ता गोल करना मतलब दिल की बीमारियां
 भले ही आप बहुत व्यस्त हों, लेकिन सुबह का नाश्ता अवश्य करें। एक वैज्ञानिक शोध में यह सलाह दी गई है। शोध के मुताबिक सुबह के नाश्ते की लगातार उपेक्षा करने से दिल की बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है।
यूनिवर्सिटी ऑफ तस्मानिया के शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन किया है। उन्होंने पाया कि जो लोग सुबह खाली पेट घर से निकलते हैं, वे मोटापा, पेट पर चर्बी बढ़ने के साथ कॉलेस्ट्राल बढ़ने के शिकार हो सकते हैं। ये तीनों ही दिल की बीमारियों को जन्म देते हैं।
ब्रिटिश अखबार डेली मेल में छपे शोध के मुताबिक खाली पेट रहने से खून में इंसुलिन का स्तर भी बढ़ जाता है जो मधुमेह के खतरे की घंटी है। वैसे, इससे पहले हुए अध्ययन बता चुके हैं कि दिल के लिए सुबह का नाश्ता फायदेमंद है। नाश्ता नहीं करने के खतरों को बताने वाला यह पहला शोध है।
शोध के अनुसार, बचपन में नाश्ते से जी चुराने वाले लोग 20 की उम्र के बाद दिल की बीमारी से ग्रस्त हो सकते हैं। इस शोध को अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रिशन में प्रकाशित किया गया है।

सुबह की जल्दी और नाश्‍ता  
 सुबह की जल्दी किसी बवंडर से कम नहीं होती जब एक सम्पूर्ण आहार लेना बहुत  मुश्‍किल होता है । ऐसे में हमें किसी स्वस्थ विकल्प वाले आहार को चुनना चाहिए ।

 मुख्य सामग्री
2 अण्डे, पूरे गेहूं वाला टारटिला बेस ।
अण्डे को आमलेट की तरह तल कर इसे गरम टारटिला बेस के ऊपर रखें । इसे और मज़ेदार बनाने के लिए इसपर सालसा सास डालें और रोल करें ।

 न्यूट्री चेक
टारटिला और अण्डे में प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट अधिक मात्रा में होती है जिससे आप दिन की अच्छी शुरूवात कर सकते हैं ।

आफिस स्‍वास्‍थ्‍य के नुस्‍खे
 
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कार्यालय में सही खान पान
ऐसी बहुत सी बातें हैं जो कि आपके करियर की वृद्वि को प्रभावित करती हैं । काम करने से लेकर उत्पादकता और मक्खनबाजी का कौशल,लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आप जिस प्रकार का आहार लेते हैं उसका प्रभाव आपके करियर की वृद्वि में भी हो सकता है। आइये इस बारे में जानकारी इकट्ठी करें।

 काम के स्थान पर आपकी सही खान पान की आदतें आपके शिष्टाचार को दर्शाती हैं । ऐसे बहुत से आहार हो सकते हैं जो कि आपके स्वाद से लेकर आपके ज्ञान और पोषण सम्बन्धी लाभ को भी दर्शाते हैं । कम शब्दों में यह कह सकते हैं कि सही खाने का प्रभाव हमारे काम पर भी पड़ता है । इससे सिर्फ आपका स्वास्‍थ्‍य ही नहीं अच्छा रहता बल्कि आपके मेहनती और सूक्ष्म कार्यकर्ता होने का भी पता चलता है ।

 उचित समय पर सही खाना
हम सभी जानते हैं कि स्वस्थ आहार का अर्थ है सही मात्रा में सही आहार । लेकिन खाने के बारे में बहुत सूक्ष्म अध्ययन आपको उत्तेजित भी कर सकता है । जब आपको मीटिंग में जाना हो या दूसरे काम हो ऐसे में खाने के बारे में सोचना कोई स्वस्थ संकेत भी नहीं । ध्यान रखें कि आपकी प्राथमिकता आफिस का काम है आहार नहीं । आफिस में लिए जाने वाले आहार कुछ ऐसे हो सकते हैं जो कि ताकत देने वाले आहार हों। ऐसे आहार बिलकुल नहीं लेने चाहिए जिनसे आपको नींद आये।

 जब थोड़ा आहार ही पर्याप्त हो
आफिस में खाना खाते समय अपनी प्लेट को पूरी तरह से ना भर लें । सही मात्रा में सम्पूर्ण आहार लेने का प्रयास करें । अपने आहारे के बीच स्नैक्स भी कुछ इसी प्रकार के लें । चाहे बिस्किट खाने की बात हो या सूखे स्नैक्स।

 काम करने के दौरान दिन का खाना
ध्यान रखें कि आप उस ग्रुप का भाग हैं जिसके लिए खाना मंगाया गया है। वही खायें जो आसानी से मिल सके। खाने को लेकर बहुत तुनुकमिज़ाजी ना दिखायें जब तक कि आपको किसी खास प्रकार के आहार से एलर्जी ना हो।

 तुनुकमिज़ाज होना
अगर आप ऊंचे औदे पर हैं तो यह बिलकुल सही है कि आपके कलीग्स को पता होना चाहिए आपको किस प्रकार के आहार नहीं लेने चाहिए । लेकिन अगर आप कार्यकर्ता हैं तो खाना मंगाने के समय आपको थोड़ा लचीला रवैया अपनाना चाहिए।  अंत में अगर आप वास्तविक फूडी हैं और आपका मनपसंद खाना देखकर आपके चेहरे पर मुस्का़न तैर जाती है तो अपने आहार के बारे में अपने आसपास वालों से बातें करें ।  

 आफिस में स्‍नैक्‍स से दूर रहने के नुस्‍खे
पूरा दिन बिना स्नैक्स के आफिस में समय काटना हम सब के लिए मुश्किल हो सकता है। वास्तविकता जो हम सब जानते हैं वो यह है कि स्नैक्स हमारे स्वास्‍थ्‍य के लिए अच्छे नहीं होते । गुड़गांव की एम एन सी में कार्यरत संजय शर्मा का मानना है कि आफिस में जब चबाने के लिए स्नैक्स नहीं होते तो काम करना भी थोड़ा मुश्किल हो जाता है। आफिस की आलमारी से स्नैक्स दूर रखने के लिए क्या करना चाहिए । आफिस में ऐसे आहार ना लेने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप भारी मात्रा में ब्रेकफास्ट करें।

नयी दिल्ली की चिकित्सक अंजली भार्गवा के अनुसार अगर ब्रेकफास्टा के बाद आपका पेट भर गया है और आप अधिक नहीं खाना चाहते तो सुबह भर पेट बिना तेल वाला स्वस्थ आहार लें और आपको लंच के समय तक कुछ भी खाने की आवश्यकता नहीं होगी ।

लेकिन फिर भी अगर आप स्नै‍क्स लेना चाहते हैं तो थोड़ा टहल लें। इससे ना केवल आपका ध्यान स्नै‍क्स से हटेगा बल्कि आपको व्यायाम करने का मौका भी‍ मिल जायेगा ।

चिकित्सक भार्गवा के अनुसार कभी कभी हमारा शरीर भूख और प्यास की आवश्यकता को गलत तरीके से पढ़ लेता है । यह एक अच्छा विकल्प है कि आफिस में खूब पानी पीयें । तो पानी के कूलर की ओर चलने के कई फायदे हैं । यह आपको स्नैक्स से दूर रखता है, इस बहाने आपका व्यायाम होता है और आपके शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा भी होती है।

 काम के दौरान आहार को स्किप करना कोई अच्छा विकल्प नहीं है । इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप आफिस में ब्रेकफास्ट कर रहे हैं, लंच कर रहे हैं या डिनर कर रहे हैं बस आपको आहार स्किप नहीं करना चाहिए । समय पर आहार स्किप करना भी एक बड़ा कारण है जिससे लोग पूरा दिन खाने के बारे में सोचते रहते हैं । इसलिए स्वस्थ और अच्छा खायें । कैफेटेरिया से खाना मंगाने के बजाय आप घर से खाना पैक करके भी ला सकते हैं । इससे ना केवल आप जंक फूड खाने से बचेंगे बल्कि इससे आपको स्वस्थ रह...

सुबह का नाश्ता गोल करना मतलब दिल की बीमारियां
भले ही आप बहुत व्यस्त हों, लेकिन सुबह का नाश्ता अवश्य करें। एक वैज्ञानिक शोध में यह सलाह दी गई है। शोध के मुताबिक सुबह के नाश्ते की लगातार उपेक्षा करने से दिल की बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है। यूनिवर्सिटी ऑफ तस्मानिया के शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन किया है। उन्होंने पाया कि जो लोग सुबह खाली पेट घर से निकलते हैं, वे मोटापा, पेट पर चर्बी बढ़ने के साथ कॉलेस्ट्राल बढ़ने के शिकार हो सकते हैं। ये तीनों ही दिल की बीमारियों को जन्म देते हैं।
ब्रिटिश अखबार डेली मेल में छपे शोध के मुताबिक खाली पेट रहने से खून में इंसुलिन का स्तर भी बढ़ जाता है जो मधुमेह के खतरे की घंटी है। वैसे, इससे पहले हुए अध्ययन बता चुके हैं कि दिल के लिए सुबह का नाश्ता फायदेमंद है। नाश्ता नहीं करने के खतरों को बताने वाला यह पहला शोध है।
शोध के अनुसार, बचपन में नाश्ते से जी चुराने वाले लोग 20 की उम्र के बाद दिल की बीमारी से ग्रस्त हो सकते हैं। इस शोध को अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रिशन में प्रकाशित किया गया है।


नाश्ता तय करता है आपका दिन भर का मूड
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क्या आप सुबह भरपूर नाश्ता लेते हैं। यदि नहीं तो निश्चित मानिए कि अपने स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। पुराने समय में गांवों में सुबह भर पेट कलेवा यानी नाश्ता करने की अवधारणा को अब वैज्ञानिक भी सही मानने लगे हैं और उनका कहना है कि यदि नाश्ता ठीक से नहीं किया जाए तो शरीर में कई तरह की विकृतियां पैदा हो सकती हैं। और तो और नाश्ता किसी भी व्यक्ति के दिन भर का मिजाज और व्यवहार भी तय करता है।

मुंबई के एसएनडीटी विश्वविद्यालय में खाद्य विज्ञान एवं पोषण के प्रोफेसर रामास्वामी और के मिस्त्री ने अपने ताजा निष्कर्ष में यह खुलासा किया। उनका कहना है कि सुबह भर पेट अच्छा नाश्ता करने से शरीर की कई जरूरतें पूरी होती हैं। नाश्ता नहीं करने की प्रवृत्ति काफी घातक है क्योंकि बाद में कितना भी अच्छा भोजन ग्रहण क्यों न किया जाए, सुबह के नाश्ते से शरीर को जो आवश्यक विटामिन, कार्बोहाइड्रेट, लौह तत्व और प्रोटीन मिलता है, उसकी कमी को न तो लंच और न डिनर पूरा कर सकता है। उन्होंने बताया कि भारत में 60 प्रतिशत आबादी शाकाहारी है लेकिन परेशानी की बात यह है कि अधिकतर लोगों के सुबह के नाश्ते में  लौह तत्व पर्याप्त नहीं होता जो शरीर के विकास के लिए अनिवार्य तत्व है।

 उन्होंने कहा कि सुबह का नाश्ता दिन का सबसे महत्वपूर्ण भोजन है। इसके जरिए लौह और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों की दिन भर की 25 प्रतिशत पूर्ति होती है। विशेषज्ञों ने बताया कि नाश्ते से बच्चों, वयस्कों और बुजुर्गो की प्रतिरोधक क्षमता में सुधार आता है। व्यक्ति दिन भर सक्रिय बना रहता है और उसके शरीर में विशेष तौर पर लौह तत्व की मात्रा में काफी उल्लेखनीय सुधार होता है। सुबह का नाश्ता गोल करने से व्यक्ति के व्यवहार पर खासा असर पड़ता है। उन्होंने बताया कि नाश्ते में मिक्स्ड वेज, पोहा, कार्नफ्लेक्स, रोटी दाल, चावल, मेथी भाजी, पालक भाजी ,सब्जी ,उपमा, आलू पराठा और दही  इडली सांभर, बे्रड आमलेट, ब्रेड बटर आदि खाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि मोटे अनाज से 7.4 मिग्रा, पोहा से 6.7 मिग्रा, आलू पराठा और दही से 2. 4 मिलीग्राम लौह तत्व मिलता है।

रामास्वामी और मिस्त्री के मुताबिक लौह तत्व की कमी से होने वाली बीमारी एनीमिया की चपेट में शहरी आबादी का बड़ा हिस्सा आ चुका है और अब यह बीमारी मध्यम वर्ग के साथ साथ उच्च वर्ग को भी सताने लगी है। सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं बच्चे, महिलाएं और किशोरियां। भारतीय जो खाना खाते हैं उनमें लौह तत्व पर्याप्त मात्रा नहीं होता। उनका कहना है कि  दोपहर और रात के भोजन में भले ही लौह तत्व वाले खाद्य पदार्थ क्यों न हों लेकिन सुबह के नाश्ते में यदि पर्याप्त  पोषण वाला भोजन ले लिया जाए तो दिन भर किसी तरह की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
(Sports and Fitness, Health
 Sports and Fitness


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आफिस स्‍वास्‍थ्‍य संगीत, व्‍यायाम और योग कामकाजी महिलाओं को रखता है तनाव से दूर     नैंपिंग के फायदे      नींद के अलावा उंघना भी सेहत के लिए अच्‍छा होता है। क्‍या आप जानते हैं कि कुछ मिनट के लिए उंघने से आप तरोताज़ा महसूस करते हैं और यह बात वैज्ञानिक तौर पर सिद्ध...
 

डायबिटीज


 बुजुर्ग डायबिटीज में कैसे करें पैरों की देखभाल
अधिकतर अधिक उम्र के डायबिटीज मरीज नहीं रख पाते पैरों का ध्‍यान।
अंग-विच्‍छेदन से बचने के लिए पैरों की सही देखभाल करते रहना है जरूरी।
पैरों को साफ रखें और कट व अन्‍य खतरों से बचने के लिए नाखून छोटे रखें।
किसी भी प्रकार की समस्‍या होने पर बिना देर किये अपने डॉक्‍टर से संपर्क करें।

डायबिटीज में पैरों की देखभाल काफी जरूरी होता है। इससे पैरों को होने वाली अन्य गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है। डायबिटीज के मरीज अपने पैरों की सही देखभाल करें, तो वे अंग-विच्छेदन से भी बच सकते हैं।

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अधिक उम्र में पैरों की देखभाल करना कई बार मुश्किलों भरा हो सकता है और ऐसे में उन्हें अन्य लोगों की मदद लेनी पड़ सकती है। 1992 में इस विषय पर हुए एक विशेष शोध में यह बात सामने आई कि 86 प्रतिशत प्रतिभागी स्वयं से अपने पैरों की देखभाल करने में सक्षम नहीं थे।
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस में छपा यह शोध डायबिटीज से पीडि़त बुजुर्गों में पैरों की होने वाली समस्याओं की एक बड़ी तस्वीर पेश करता है। इस शोध में यह भी बताया गया था कि कैसे पीडि़त के परिजन अथवा उनकी देखभाल करने वाले उन्हें पैरों में होने वाली समस्याओं से बचा सकते हैं। इसके लिए उन्हें उनके पैरों का नियमित परीक्षण करना चाहिए। आइए जानें डायबिटीज से पीडि़त बुजुर्गों में पैरों की देखभाल कैसे की जा सकती है।

ब्लड ग्लूकोज का स्तर
सबसे जरूरी बात है कि अपने रक्त में ग्लूकोज का स्तर सामान्य बनाए रखने का प्रयास करें। इसके लिए सही समय पर दवाओं का सेवन करना भी जरूरी है। इसके साथ ही अपने आहार को भी नियंत्रित रखें। इससे आप पैरों की मांसपेशियों और उत्तकों को होने वाले नुकसान से बच सकते हैं। डायबिटीज के मरीज यदि अपने रक्त में ग्लूकोज का स्तर सामान्य बनाये रखें, तो वह स्वयं को कई प्रकार की परेशानियों से बचाये रख सकते हैं।

रोजाना करें पैरों की देखभाल
डायबिटीज के मरीज के पैरों का रोजाना परीक्षण किया जाना जरूरी है। अल्सर, फफोले, घावों, कट और सूजन होने के किसी भी लक्षण पर पूरी नजर रखी जानी चाहिए। पैरों की सफाई का समय परीक्षण के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। पैरों को रोज साफ करें। इसके लिए गुनगुना पानी और माइल्ड सोप का इस्तेमाल करना बेहतर रहेगा। पानी का तापमान अधिक गर्म न हो। आमतौर पर डायबिटीज के कारण पैरों में असंवेदनशीलता पैदा हो जाती है, जिसके कारण मरीज को तापमान का सही अंदाजा नहीं लग पाता। लेकिन, अधिक गर्म पानी पैरों को नुकसान जरूर पहुंचा सकता है। पैरों को धोने के बाद साफ और सूखे तौलिये से उन्हें अच्छी तरह साफ कर लें। इसके बाद पैरों पर लोशन लगायें। याद रखिये, आपको पैरों की उंगलियों के बीच लोशन नहीं लगाना है, क्योंकि इससे फंगल इंफेक्शेन होने का खतरा बढ़ जाता है।

पैरों की उंगलियों के नाखून
अपने पैरों की उंगलियों के नाखूनों को छोटा ही रखें। बड़े नाखून कट अथवा किसी अन्य समस्या का कारण भी बन सकते हैं। नाखूनों को सीधा ही काटें। टेढ़ा-मेढ़ा काटने से आसपास का मांस भी कट सकता है, जिसके कारण काफी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आपको अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है। नाखूनों को काटने के बाद उन्हें स्मूथ भी कर दें।

जूते-चप्प‍ल हो सही
डायबिटीज के मरीजों को अपने पैरों को गर्म और सुरक्षित रखने की जरूरत होती है। ऐसे लोगों को चाहिए कि अपने पैरों में हमेशा जुराबें पहनकर रखें। बैक्टीरिया और फंगल इंफेक्शजन से बचने के लिए जुराबों को रोजाना बदलना जरूरी है। घर से बाहर जाते समय डायबिटीज के मरीजों को जूते पहनना बहुत जरूरी है। इसके साथ ही इस बात का ध्यान रखना भी जरूरी है कि आप किस प्रकार के जूते पहनते हैं। जूते आरामदेह और‍ फिट होने चाहिए। उसमें आपके पैरों पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ना चाहिए। अपने पास कम से कम दो जोड़ी ऐसे जूते अवश्य रखें। ताकि आपको रोजाना एक ही जोड़ी जूते न पहनने पड़ें।

जूतों को वैकल्पिक दिनों में पहनने से उन्हें पूरी तरह सूखने का वक्त मिल जाएगा और ऐसे में जूतों में फंगस होने की आशंका भी खत्म हो जाएगी। जूतों में पैर डालते समय एक बार उसे जांच लें कि कहीं गलती से उनके भीतर कोई कंकड़ अथवा पैरों को नुकसान पहुंचाने वाली कोई अन्य  चीज न हो। कई बार असंवेदनशीलता के कारण डायबिटीज के मरीजों को पैर में कुछ चुभने का अहसास ही नहीं हो पाता। और ऐसे में उनके पैरों के लिए खतरा और बढ़ जाता है।

नियमित मेडिकल जांच
डायबिटीज के मरीजों को नियमित रूप से डॉक्टर के पास जांच के लिए जाना चाहिए। यह जांच पैरों को किसी भी प्रकार के संभावित खतरे से बचाने में मददगार हो सकती है। इसके साथ ही अल्सर, पैरों की उंगलियों के नाखूनों का अंदर की ओर बढ़ना अथवा पैरों में दर्द आदि की समस्या होने पर भी बिना देर किये डॉक्टर से संपर्क किया जाना चाहिए। समय रहते अगर पैरों की समस्या का पता लगाया जा सके, तो अंग-विच्छेदन से बचा जा सकता है।

इन सब बातों का खयाल कर अधिक उम्र के डायबिटीज पीडि़त लोग अपने पैरों की उचित देखभाल कर सकते हैं।

डायबिटीज आहार से संबंधित दस मिथ
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ये गलत है कि डायबिटीज होने पर आप अपना पसंदीदा भोजन नहीं कर सकते।
 सच्‍चाई तो यह है कि 'डायबिटिक आहार' जैसी कोई चीज नहीं होती है।
 इनसुलिन के बाद भी रखें आहार का ध्यान ।
 वही आहार चुनें जो रोजमर्रा की शार‍ीरिक गतिविधियों से मिलता हो।

डायबिटीज डायट का नाम सुनते ही आपके जेहन में बेस्‍वाद खाना आता है। लेकिन, क्‍या यह पूरी तरह सच है। डायबिटीज के आहार को लेकर आपके जेहन में कई ऐसी बातें हैं, जो शायद पूरी तरह सच नहीं हैं। इनमें कई बातें या तो आपने किसी से सुनी हैं या कहीं पढ़ी हैं। लेकिन, इन बातों के पीछे की पूरी हकीकत शायद आप नहीं जानते।

पहला मिथ - अधिक चीनी खाने से हो सकती है डायबिटीज
हम यही मानते हैं कि अधिक चीनी खाने से डा‍यबिटीज होती है, लेकिन यह बात पूरी तरह सच नहीं है। जब आपके शरीर में आहार को ऊर्जा में बदलने की क्षमता कम हो जाती है, तब डायबिटीज होती है। डायबिटीज को जानने के लिए इस प्रक्रिया को समझें। आप जो भी खाते हैं, आपका शरीर उसे ग्‍लूकोज में बदल देता है। यह शुगर का एक प्रकार है, जो आपकी कोशिकाओं को शक्ति देता है। पेनक्रियाज में मौजूद हार्मोन इनसुलिन शरीर को इस ग्‍लूकोज को ऊर्जा में बदलने में मदद करता है।

डायबिटीज के प्रमुख प्रका

टाइप वन डायबिटीज
इस परिस्थिति में पेनक्रियाज इनसुलिन का निर्माण नहीं करता। इनसुलिन के बिना रक्‍त में शक्‍कर की मात्रा बढ़ जाती है। आमतौर पर यह बच्‍चों और नौजवानों में देखी जाती है। जानकारों की राय में इम्‍यून सिस्‍टम में कमजोरी इसकी सबसे बड़ी वजह होती है।

टाइप टू डायबिटीज
यह तब होता है जब पेनक्रियाज पर्याप्‍त मात्रा में इनसुलिन नहीं बनाता या इनसुलिन सही प्रकार से इस्‍तेमाल नहीं हो पाता, अथवा दोनों ही कारण हों। अधिक वजन टाइप टू डायबिटीज का सबसे बड़ा कारण होता है। यह किसी भी उम्र में हो सकती है।

गर्भावधि मधुमेह
गर्भावस्‍था के दौरान कुछ महिलाओं में यह समस्‍या होती है। गर्भावस्‍था के दौरान हार्मोन्‍स में बदलाव के कारण इनसुलिन सही प्रकार से काम नहीं कर पाता। गर्भावधि मधुमेह से पीडि़त महिला को अक्‍सर इनसुलिन लेना पड़ता है। बच्‍चे के जन्‍म के बाद यह समस्‍या अपने आप ठीक हो सकती है।

मिथ -2 डायबिटीज आहार में नियमों का अंबार
डायबिटीज डायट में बहुत सारे नियम नहीं होते। इसका मूल नियम यही है कि आप ऐसा आहार चुनें जो आपकी रोजमर्रा की शार‍ीरिक गतिविधियों से मेल खाता हो और इसके साथ ही दवायें जो आपके रक्‍त में शर्करा की मात्रा को संतुलित कर सके। क्‍या आपको अपने आहार में बदलाव लाने की जरूरत है ? शायद हां, लेकिन उस हद तक नहीं जितना कि आप सोचते हैं।

मिथ -3 डायबिटीज में कार्बोहाइड्रेट बहुत बुरा होता है
वास्‍तव‍िकता में कार्बोहाइड्रेट डायबिटीज में बहुत अच्‍छा होता है। ये एक स्‍वस्‍थ डायबिटीज आहार अथवा किसी भी आहार का आधार होता है। रक्‍त में शर्करा की मात्रा पर कार्बोहाइड्रेट का सीधा असर पड़ता है, इसलिए डायबिटीज आहार लेते समय आपसे कार्बोहाइड्रेट के सेवन पर नजर रखने की सलाह दी जाती है। हालांकि, कार्बोहाइड्रेट आहार में कई जरूरी पोषक तत्‍व जैसे, विटामिन, मिनरल और फाइबर आदि भी होते हैं। तो, ऐसे में समझदारी इसी बात में है कि आप साबुत अनाज और उच्‍च फाइबर युक्‍त फल और सब्जियों का सेवन करना चाहिए। आप आहार विशेषज्ञ से मिलकर अपने लिए सर्वश्रेष्‍ठ आहार चुन सकते हैं।

मिथ 4 डायबिटीज में प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट से बेहतर होता है
कार्बोहाइड्रेट रक्‍त में शर्करा की मात्रा पर तेजी से असर डालता है, इसलिए डायबिटीज से ग्रस्‍त कुछ लोग प्रोटीन युक्‍त आहार का रुख कर लेते हैं। लेकिन अधिक प्रोटीन लेना आपकी समस्‍याओं को बढ़ा सकता है। प्रोटीन युक्‍त अधिकतर आहारों जैसे मीट आदि में सैचुरेटेड फैट भी काफी मात्रा में होता है। इनका अधिक सेवन आपको दिल की बीमारियां दे सकता है। आपकी कुल कैलोरी का 15 से 20 फीसदी हिस्‍सा ही प्रोटीन होना चाहिए।

मिथ -5 दवा से सब बराबर हो जाता है
अगर आप इनसुलिन लेने के बाद यह सोचते हैं कि आप कुछ भी खा सकते हैं, तो यह आपकी गलती है। आपको इनसुलिन का इंजेक्‍शन लेने के साथ ही खाने का नया तरीका भी सीखना होगा। यह नहीं कि आप कितना भी खा लें और फिर इनसुलिन की मात्रा बढ़ा दें। अपने डॉक्‍टर की सलाह के बिना दवा और आहार में बदलाव करने से परहेज करें। डायबिटीज की दवा तभी अधिक कारगर साबित होती है, जब वह डॉक्‍टर की सलाह से ली जाती है।

मिथ 6 अपना पसंदीदा भोजन छोड़ना होगा
ऐसा नहीं है कि डायबिटीज होने पर आप अपना पसंदीदा भोजन नहीं कर सकते। आपको उसे पकाने का तरीका बदलना होगा। इसके साथ ही अन्‍य आहार के साथ उसे खाने के तरीके में भी जरा बदलाव लाना होगा। अपने पसंदीदा भोजन में प्रोटीन की मात्रा कम करनी होगी। इसके साथ ही अगर आप अपनी आहार योजना पर टिके रहते हैं, तो खुद को अपने पसंदीदा भोजन के रूप में ईनाम दें। आप इसके लिए आहार-विशेषज्ञ की मदद ले सकते हैं।

मिथ -7- अगर आपको डायबिटीज है, तो आपको मीठा छोड़ना होगा
सच नहीं है- आप अपने डायबिटीज आहार में मीठा शामिल कर सकते हैं। किसी स्‍वीट डिश में आप कृत्रिम चीनी का उपयोग कर सकते हो। मीठे की मात्रा कम कर दें। उदहारण के लिए अगर पहले आप दो आइसक्रीम खाते थे, तो तब एक खाएं। मीठे को अपने लिए ईनाम मान लें। यदि आप अपनी आहार-योजना पर टिके रहते हैं, तो खुद को ईनाम के तौर पर मीठा खाने को दें। आप चाहें तो अपने मीठे को पौष्टिक भी बना सकते हैं। आप यह मीठा बनाते समय साबुत अनाज, ताजा फल और वेजिटेबल ऑयल इस्‍तेमाल कर सकते हैं। आप आइसक्रीम, पाई अथवा केक के स्‍थान पर फल और ओटमील बिस्‍कुट आदि खा सकते हैं।

मिथ -8 कृत्रिम चीनी भी डायबिटीज के मरीजों के लिए नुकसानदेह होती है  
कृत्रिम चीनी सामान्‍य चीनी के मुकाबले अधिक मीठी होती है, तो आपको उतने ही मीठे के लिए कम चीनी डालने की जरूरत होती है। इससे आप कम कैलोरी का सेवन करते हैं। जो लोग अपना वजन काबू करने की कोशिश कर रहे हैं, उनके लिए भी ये स्‍वीटनर काफी मददगार हो सकते हैं, लेकिन इनकी मात्रा के बारे में आपको जरा ध्‍यान रखने की जरूरत है। इस मामले में आप आहार-विशेषज्ञ की मदद ले सकते हैं।

मिथ -9 आपको डायबिटीज का खास आहार खाना पड़ेगा
सच्‍चाई तो यह है कि 'डायबिटिक आहार' जैसी कोई चीज नहीं होती। जो आहार डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद है, वह आहार सभी लोगों के लिए फायदेमंद होता है। वास्‍तव में डायबिटीज के लिए कोई खास आहार तैयार करने की जरूरत नहीं है। डायबिटीज के शिकार किसी व्‍यक्ति को अपने आहार पर और गहरी नजर रखने की जरूरत होती है। इसमें कुल खायी गयी कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट के प्रकार का भी ध्‍यान रखना पड़ता है। आपका डॉक्‍टर अथवा डायटिशियन आपकी मदद कर सकता है।

मिथ -10 डायट आहार डायबिटीज के लिए सबसे उत्तम आहार होता है
सिर्फ 'डायट' का तमगा लगा होने से कोई आहार डायबिटीज के लिए फायदेमंद नहीं हो जाता। डायट फूड सामान्‍य से महंगे भी होते हैं, तो सेहत को इनका कोई विशेष लाभ भी नहीं पहुंचता। तो किसी भी आहार को चुनने से पहले उसमें मौजूद पोषक तत्‍वों व अन्‍य सामग्री की जानकारी जरूर ले लें। इसके लिए भी आप अपने डॉक्‍टर की मदद ले सकते हैं।
अब आपको डायबिटीज के बारे में तथ्‍यों की जानकारी है, तो अब आपको अपने लिए बेहतर आहार चुनने में आसानी होगी। इसके साथ ही व्‍यायाम और दवाओं का मेल आपको एक सेहतमंद जिंदगी जीने में मदद करेगा। इससे आपकी रक्‍त-शर्करा मात्रा नियंत्रित रहेगी।

बार्डरलाइन डायबिटीज के बारे में जानें
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    बॉर्डरलाइन डायबिटीज में रक्त में ग्लूकोज का स्तर सामान्य से अधिक होता है।
    संतुलित आहार आपको प्रीडायबिटीज से डायबिटीज तक जाने से रोकता है।
    हर रोज व्यायाम की मदद से आप इस समस्या से बच सकते हैं।
    स्वस्थ जीवशैली अपनाएं, जल्दी सोएं और जल्दी उठें।

बॉर्डरलाइन डायबिटीज अथवा प्री-डायबिटीज उस स्थिति को कहा जाता है जब रक्‍त में ग्‍लूकोज का स्‍तर सामान्‍य से अधिक होता है, पर इतना अधिक नहीं होता कि उसे डायबिटीज कहा जा सके। बॉर्डरलाइन डायबिटीज से ग्रस्‍त अधिकतर लोगों में किसी प्रकार के लक्षण नजर नहीं आते, लेकिन उन्‍हें हृदय रोग होने का खतरा काफी अधिक होता है।

हमारा शरीर इनसुलिन हार्मोन का स्राव करता है, जो भोजन में पाये जाने वाली ऊर्जा (ग्‍लूकोज) को इस्‍तेमाल करने में मदद करता है। डायबिटीज में या तो शरीर पर्याप्‍त मात्रा में इनसुलिन का निर्माण नहीं कर पाता या फिर निर्मित हो रहे इनसुलिन का पर्याप्‍त इस्‍तेमाल नहीं कर पाता। जब रक्‍त में ग्‍लूकोज की मात्रा अधिक हो जाती है, तो यह किडनी, हृदय, आंखों और नर्वस सिस्‍टम में मौजूद रक्‍तवा‍हिनियों को नुकसान पहुंचा सकता है।
कुछ तो गड़बड़ है
प्री-डायबिटीज में ग्‍लूकोज और इनसुलिन का संतुलन हलका सा बिगड़ जाता है। पेनक्रियाज ग्रंथि पर्याप्‍त मात्रा में इनसुलिन का निर्माण नहीं कर पाती जिससे रक्‍त से ग्‍लूकोज की अतिरिक्‍त मात्रा को 'हटा पाना' संभव नहीं हो पाता। या कोशिकायें इनसुलिन रोधी हो जाती हैं। जब कोशिकायें इनसुलिन रोधी हो जाती हैं, वे इनसुलिन को रक्‍त में से ग्‍लूकोज  ले जाने से रोकने लगती हैं। रक्‍त में बहुत अधिक शर्करा हो जाने को हाई ब्‍लड शुगर अथवा हायपेरग्‍लासिमा कहा जाता है, लो ब्‍लड शुगर को हायपोग्‍लासिमा कहा जाता है।

बढ़ जाता है हृदय रोग का खतरा
अगर आप प्रीडायबिटीज की श्रेणी में आ चुके हैं, तो आपको टाइप टू डायबिटीज होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसके साथ ही आपको कई अन्‍य गंभीर चिकित्‍सीय परेशानियां भी हो सकती हैं, जिनमें ह्रदय रोग और स्‍ट्रोक आदि शामिल हैं। प्री डायबिटीज के साथ आपको सामान्‍य लोगों की अपेक्षा हृदय रोग और स्‍ट्रोक होने का खतरा 50 फीसदी बढ़ जाता है।

कैसे होता है निदान
यह पता लगाने के लिए कि क्‍या आपका प्रीडायबिटीज है, आपका डॉक्‍टर कई प्रकार की रक्‍त जांच कर सकता है। फास्टिंग प्‍लाजमा ग्‍लूकोज जांच, ओरल ग्‍लूकोज टोलरेंस टेस्‍ट अथवा हीमोग्‍लोबिन ए1सी (एवेरज ब्‍लड शुगर) जांच आदि।

कितना सामान्‍य है प्री-डायबिटीज
एक अनुमान के अनुसार अकेले अमेरिका में 20 वर्ष की आयु से ऊपर के करीब आठ करोड़ लोग प्रीडायबिटीज के शिकार हैं। प्री डायबिटीज को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह आने वाली गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है। यह आपके दिल, किडनी, आंखों, नर्वस सिस्‍टम और आंखों को होने वाले संभावित नुकसान का इशारा हो सकता है।

कैसे लाएं जीवन में बदलाव
जीवनशैली में जरूरी बदलाव लाकर आप प्री‍डायबिटीज के खतरे को टाल सकते हैं और यहां तक कि डायबिटीज होने के खतरे को भी रोक सकते हैं। डायबिटीज के खतरे को कम करने के लिए आपको सबसे पहले अपने वजन को काबू में रखना चाहिए। इसके साथ ही रोजाना व्‍यायाम और संतुलित आहार भी आपकी दिनचर्या का हिस्‍सा होना चाहिए।

डायबिटीज प्रिवेंशन प्रोग्राम के तहत यदि आप अपनी जीवनशैली में इस प्रकार का बदलाव लेकर आते हैं, तो आपको तीन वर्षों में डायबिटीज का खतरा 58 फीसदी कम हो जाता है। 60 वर्ष की आयु से ऊपर के लोगों में को 71 फीसदी से भी अधिक लाभ‍ मिलता है।

वजन काबू
मोटे और अधिक वजन वाले लोगों में प्रीडायबिटीज के डायबिटीज में बदलने का खतरार काफी अधिक होता है। कुछ अतिरिक्‍त वजन को घटाकर आप टाइप टू डायबिटीज होने की आशंका को काफी कम कर सकते हैं। केवल पांच से दस फीसदी वजन कम करना भी डायबिटीज से बचे रहने में आपकी मदद कर सकता है।

व्‍यायाम
शोध इस बात की पुष्टि करते हैं कि रोजाना महज 30 मिनट का मद्धम व्‍यायाम, जैसे साइक्लिंग, तैराकी और तेज चलना आदि भी डायबिटीज से बचाने अथवा उसे नियंत्रित करने में मददगार हो सकता है। एरोबिक्‍स व्‍यायाम भी आपके दिल की धड़कनों को संतुलित रख आपको टाइप टू डायबिटीज से बचाने में सहायता प्रदान करता है। साथ ही आपकी प्रीडायबिटीज को टाइप टू डायबिटीज में बदलने से भी रोकता है। एक्‍सरसाइज प्‍लान अपनाने और अपनी शार‍ीरिक गतिविधियां बढ़ाने से पहले एक बार अपने डॉक्‍टर से जरूर बात कर लें।

आहार
संतुलित आहार आपको प्रीडायबिटीज से डायबिटीज तक जाने से रोकता है। एक संतुलित आहार में लो-फैट प्रोटीन, सब्जियां और साबुत अनाज शामिल होते हैं, जो प्रीडायबिटीज को डायबिटीज के स्‍तर तक नहीं जाने देते। अपने आहार में कैलोरी की मात्रा कम कर, प्रोटीन और लो शुगर खाद्य पदार्थों की मात्रा बढ़ाकर और लो कॉर्बोहाइड्रेट युक्‍त आहार का संतुलित मेल आपके लिए सही रहेगा। आपको पर्याप्‍त मात्रा में फाइबर का सेवन भी करना चाहिए।

इन उपायों को आजमाकर आप स्‍वयं को हृदय रोग, उच्‍च रक्‍तचाप और स्‍ट्रोक के खतरे से बचा सकते हैं। आमतौर पर डायबिटीज और प्रीडायबिटीज के मरीजों में उच्‍च रक्‍तचाप  कीशिकायत होती है।

इसके साथ ही आपको हाई कोलेस्‍ट्रॉल की मात्रा कम करने के लिए धूम्रपान भी नहीं करना चाहिए। यह आपके दिल की सेहत के लिए अच्‍छा नहीं होता।

आप एक सेहतमंद जीवनशैली अपनाकर प्रीडायबिटीज को नियंत्रित कर सकते हैं। अगर प्री‍डायबिटीज, टाइप टू डायबिटीज में बदल जाए, तो वजन कम करना, व्‍यायाम करना, पोषण युक्‍त आहार लेना और रक्‍तचाप को नियंत्रित करके आप डायबिटीज  के साथ भी स्‍वस्‍थ जीवन जी सकते हैं। एक स्‍वस्‍थ जीवनशैली दवाओं और इनसुलिन पर आपकी निर्भरता को भी कम और नियंत्रित करती है।

बच्चों में डायबिटीज के लक्षणों को पहचानें

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    मधुमेह बच्चों को भी अपनी चपेट में ले सकता है।
    शुरुआती अवस्था मधुमेह का पता लगने पर इलाज में आसानी हो सकती है।
    बच्चों को बार-बार पेशाब आना एक गंभीर समस्या है।
    बच्चों के वजन में अचानक होने वाली गिरावट चिंताजनक है।

डायबिटीज को अक्‍सर अधिक उम्र के साथ जोड़कर देखा जाता है। लेकिन, अब यह रोग बच्‍चों में भी फैलता जा रहा है। हालांकि, माता-पिता बच्‍चों में इस रोग को लेकर गंभीर नहीं होते, इसलिए वे इसके लक्षणों की ओर ध्‍यान भी नहीं देते। लेकिन, ऐसा करना बच्‍चों की सेहत के साथ खिलवाड़ हो सकता है।

माता-पिता के लिए बच्‍चों में डायबिटीज के लक्षणों को समय रहते पहचानना बहुत जरूरी है, अन्‍यथा इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। डायबिटीज के कारण शरीर में होने वाले बदलाव काफी धीमे और सूक्ष्‍म होते हैं, इसलिए जब तक बच्‍चा काफी बीमार नहीं होता, तब तक इस बीमारी को पकड़ पाना आसान नहीं होता। आमतौर पर वह किसी अन्‍य बीमारी के संयोजन से बीमार होता है, लेकिन जांच में डायबिटीज का होना सामने आता है। 

तो माता-पिता को कैसे पता चले कि उनके बच्‍चे को डायबिटीज है। इसके लिए जरूरी है कि आप अपने बच्‍चे की सेहत पर नजर रखें और इन लक्षणों को अनदेखा न करें-

पेशाब अधिक आना
डायबिटीज के दौरान ग्‍लूकोज कोशिकाओं तक नहीं पहुंच पाता, इसलिए रक्‍त में ग्‍लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है। नतीजा यह होता है कि किडनी अतिरिक्‍त शर्करा को फिल्‍टर करने लगती है। इससे पेशाब की मात्रा बढ़ जाती है। इसलिए आपका बच्‍चा पहले से अधिक बार पेशाब करने जाने लगता है। यह बच्‍चों में डायबिटीज होने का सबसे सामान्‍य लक्षण है।

अधिक प्‍यास लगना
अब क्‍योंकि आपका बच्‍चा अधिक बार पेशाब करने जाने लगता है, इसलिए उसे पहले से अधिक प्‍यास लगती है। आमतौर पर माता-पिता यह सोचते हैं कि क्‍योंकि बच्‍चा अधिक पानी पी रहा है, इसलिए अधिक पेशाब कर रहा है, लेकिन हकीकत इससे उल्‍टी होती है।

भूख बढ़ना
डायबिटीज से पीडि़त बच्‍चे हमेशा भूख लगने की शिकायत करते हैं। इसके पीछे सीधा सा कारण है, क्‍योंकि ग्‍लूकोज शरीर की कोशिकाओं में नहीं पहुंच रहा होता, इसलिए उसे हमेशा भूख का अहसास होता रहता है।

वजन कम होना
आमतौर पर लोग वजन बढ़ने को डायबिटीज के साथ जोड़कर देखते हैं। टाइप टू डायबिटीज में, अधिक मोटे व्‍यक्ति को डायबिटीज होने का खतरा अधिक होता है। टाइप वन अथवा बच्‍चों को होने वाली डायबिटीज इससे अलग होती है। अगर बच्‍चों में डायबिटीज का इलाज न करवाया जाए, तो उनका वजन कम होने लगता है। क्‍योंकि शरीर को पर्याप्‍त मात्रा में ग्‍लूकोज नहीं मिलता, इसलिए भी वजन घटने लगता है।

अगर आपको अपने बच्‍चे में इनमें से किसी भी प्रकार का लक्षण नजर आए, तो उसे फौरन डॉक्‍टर के पास ले जाएं क्‍योंकि ये लक्षण डायबिटीज के अलावा अन्‍य कारणों से भी हो सकते हैं। अगर डॉक्‍टर को संशय हो कि आपके बच्‍चे को डायबिटीज है, तो वह रक्‍त जांच से इस बात की पुष्टि कर सकता है। एक बार जब डायबिटीज की पुष्टि हो जाती है, तो माता-पिता को इस बात का अहसास होता है कि वे काफी समय से इन लक्षणों को देखकर अनदेखा कर रहे थे।

अगर डायबिटीज का इलाज न करवाया जाए, तो यह बच्‍चों को जीवनभर की परेशानियां दे सकती है। इसके लघुगामी प्रभावों में हाई ब्‍लड शुगर, लो ब्‍लड शुगर, डायबिटीज केटोएसिडोसिस (पेशाब में किटोन्‍स की मात्रा बढ़ना) ओर कोमा आदि शामिल हैं। वहीं दीर्घगामी प्रभावों में मुख्‍य संवहिनी और तंत्रिका प्रणाली को नुकसान होना, जिससे आंखों की रोशनी भी जा सकती है, किडनी फैल्‍योर, अंग-विच्‍छेदन और हृदयाघात अथवा स्‍ट्रोक का खतरा बढ़ना आदि शामिल हैं।

अब क्‍योंकि बच्‍चे इस बीमारी के दीर्घगामी प्रभावों को नहीं समझ सकते, लेकिन यह माता-पिता की जिम्‍मेदारी है कि वे बच्‍चों का पूरा खयाल रखें। तकनीक और इलाज की उन्‍नत पद्धतियों का होने के कारण डायबिटीज से पीडि़त बच्‍चे अब स्‍वस्‍थ और लंबा जीवन जी सकते हैं।



    शिफ्ट में काम करने से मधुमेह का खतरा
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    शिफ्ट में काम करने से मधुमेह का खतरा: जानिए शिफ्ट में काम करने से मधुमेह का खतरा कैसे बढ़ सकता है।

   डायबीटिज से बचाव के प्राकृतिक उपचार
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    ड़ायबीटिज एक बहुत हीं खतरनाक बीमारी है लेकिन अगर आप प्राकृतिक उपायों से इस पर नियंत्रण कर  सके तो मधुमेह से आपको घबराने की जरुरत नहीं है। निम्न कुछ प्राकृतिक उपचार से आप ड़ायबीटिज पर नियंत्रण पा सकते हैं।

    डायबिटिक नेफरोपैथी के लंबे समय तक रहने वाले प्रभाव
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    डायबिटिक नेफरोपैथी एक प्रकार का किडनी रोग है। जानें इस बीमारी से पैदा होने वाली अन्य समस्याओं के बारे में।

       कैसे जियें डायबिटीज के साथ
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    डायबिटीज को पूर्ण रूप से दूर नहीं कर सकते, लेकिन नियंत्रण में रखकर स्वस्थ एवं सामान्य जीवन बीता सकते है।

     धूम्रपान से मधुमेह का खतरा
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    मधुमेह और धूम्रपान की जुगलबंदी से गुर्दे की बीमारी का खतरा बढ जाता है।

      डायबिटीज़ 1 में इंसुलिन थेरेपी
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    डायबिटीज की समस्या आज महानगरों में आम बात हैं। डायबिटीज के लिए ओवरईटिंग घातक होती है। डायबिटीज की मात्रा कम करने के लिए इंसुलिन थेरेपी दी जाती है। डायबिटीज बढ़ने से डायबिटीज के मरीज के खून में शर्करा की मात्रा अधिक बढ़ जाती है। आइए जानें डायबिटीज 1 में इंसुलिन थेरेपी कितनी कारगार साबित होती है।

       किशोरावस्‍था मधुमेह में होती है थकान, कमजोरी और त्‍वचा रोग जैसी समस्‍यायें
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    किशोर डायबिटीज के इस प्रकार के लक्षण यदि आपके बच्‍चे को दिखें तो इसे बिलकुल भी नजरअंदाज न करें।

       डायबिटिक्स में इंसुलिन के अतिरिक्त प्रभाव
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    आइए जानें डायबिटिक्स में इंसुलिन के अतिरक्त प्रभावों के बारे में।

   

    मधुमेह रोगियों पर धूम्रपान का प्रभाव
धूम्रपान के बारे में अक्सर कहा जाता है कि यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।  इसके बावजूद जिन्हें धूम्रपान की लत लग जाती है वे इसे नहीं छोड़ते। यूँ तो धूम्रपान किसी के लिए भी अच्‍छा नहीं होता, लेकिन अगर आपको मधुमेह है और अगर आपको अपनी जिन्दगी से जरा भी प्यार है तो जितनी जल्दी हो सके, धूम्रपान छोड़ दें क्योकि यह आपके लिए जानलेवा सिद्ध हो सकता है।

आइये जानते हैं कि मधुमेह के मरीजों के लिए धूम्रपान कितना और क्‍यों खतरनाक हो सकता है।
नर्वस सिस्‍टम पर धूम्रपान का असर: धूम्रपान तंत्रिका तंत्र पर बहुत बुरा असर डालता है। यह तंत्रिका तंत्र को बहुत हीं कमजोर कर देता है जिसकी वजह से इंसान ढ़ेर सारी समस्याओं का शिकार हो जाता है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति मधुमेह का शिकार है और वह धूम्रपान करता है तो यह उसकी तंत्रिका तंत्र को बहुत हीं क्षति पहुंचाता है। धूम्रपान करने से मधुमेह के मरीजों में मधुमेह के अलावा दिल की बीमारी, यौन समस्या इत्यादि भी होने लगती है।
गुर्दे होते हैं प्रभावित: मधुमेह वैसे हीं गुर्दों पर बुरा असर डालता है, लेकिन धूम्रपान करने वाले व्यक्ति पर इसका प्रभाव चौगुना या उससे भी ज्यादा होता है। धूम्रपान करने से उस व्यक्ति के गुर्दे ख़राब होने लगते हैं।  इससे मरीज की स्‍थिति और भी गंभीर हो जाती है।
धूम्रपान का आँखों पर प्रभाव: हमारी आँखों पर भी मधुमेह का असर होता है। धूम्रपान करने वाले डायबिटीज़ रोगियों को कम समय में ही आंखों की समस्‍याएं भी होने लगती हैं।
धूम्रपान का रक्त वाहिनियों पर असर : मधुमेह में ग्‍लूकोज़ का स्‍तर प्रभावित होता है और रक्‍त वाहीनियां भी प्रभावित होती है। लेकिन जो लोग मधुमेह के मरीज होते हुए भी धूम्रपान करते रहते हैं उनकी रक्त वाहिनियों की अंदरूनी दीवारों पर प्लेक जमने लगता है जिससे रक्त संचार इस कदर बाधित होने लगता है कि रोगी को हार्ट एटेक आ जाता है।  कुछ मरीजों को स्ट्रोक मार देता है अथवा उन्हें जिन्दगी भर के लिए कोमा की स्थिति में भेज देता है।
    धूम्रपान किसी के लिए भी अच्‍छा नहीं होता, लेकिन अगर आपको मधुमेह है तो यह आपके लिए जानलेवा सिद्ध हो सकता है।

 
    डायबीटिज के लिए व्यायाम
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    डायबीटिज किसी भी अन्य गंभीर बीमारी की तरह खतरनाक है। आइए जानें डायबिटीज के लिए व्‍यायाम के बारे में।

  आहारीय मैग्नेशियम करे डाइबिटीज़ से बचाव
भोजन में मैग्नीशियम की पर्याप्त मात्रा आपको डायबिटिज के खतरे से बचाती है।

 मधुमेह रोगियों के लिए आहार
मधुमेह रोगियों के लिए आहार: आपको यह जानकार आश्चर्य हो सकता है कि ऐसा कोई आहार नहीं होता जिसे सिर्फ मधुमेह आहार कहा जाये, मधुमेह आहार के बारे मैं अधिक जानकरी के लिए पूरा लेख पड़ें.

 मधुमेह से संबंधी दस तथ्य
 डब्यूएचओ ने व्यापक रूप से फैल रही डायबिटीज की बीमारी से जुडे 10 तथ्यों को इकट्ठा किया।

डायबिटीज़ रोगियों के लिए इंसुलिन पंप
डायबिटीज़ रोगियों के लिए इंसुलिन पंप: अब डायबिटीज के मरीज बिना किसी दर्द के भी इनसुलिन दवा ग्रहण कर सकते हैं।

घर पर ब्लड शुगर टेस्ट कैसे करें
ग्लूकोज को नापने के लिए निरंतर ग्लूकोज मॉनिटरिंग सिस्टम का भी विकास किया गया।

पुरूषों में मधुमेह के लक्षण
आइए जानते हैं आखिर पुरूषों में मधुमेह के लक्षण क्या होते हैं और महिलाओं में पाए जाने वाले लक्षणों से वे कितने भिन्न हैं।

मधुमेह से बचाव के तरीके
मधुमेह एक खतरनाक बीमारी है। लेकिन अगर इसका मरीज अपना पूरा ख्याल रखे और व्यायाम करने के साथ साथ उचित खाद्य पदार्थों का सेवन करे तो इस रोग पर काबू पाया जा सकता है और इस रोग से होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है।

शुगर के स्‍तर पर नियंत्रण ही डायबिटिक नेफरोपैथी से बचने का बेहतर उपाय
डायबिटिक नेफरोपैथी गुर्दे से संबंधित एक गंभीर बीमारी है, इससे बचने के लिए ये तरीके आपके लिए कारगर हो सकते हैं।

ब्लड शुगर में रखें सावधानी
काम के प्रेशर व दिनभर भागदौड़ के कारण लोग अपने खाने पर ध्यान नहीं देते हैं। ऐसे में सभी के लिए रक्त में शर्करा का संतुलन बनाए रखना बहुत जरूरी है।

मधुमेह रोगी हल्दी का सेवन करें
हल्दी में वातनाशक गुण होते हैं जिससे मधुमेह की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। आइए जानें मधुमेह रोगियों के लिए हल्दी का सेवन कैसे लाभदायक है।

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महिलाओं की प्रमुख दस बीमारियां

महिलाओं में पुरूषों के मुकाबले अधिक बीमारियां होती है। फिर चाहे वह हृदय से जुड़ी बीमारी हो, खान-पान की बात हो, विटामिन डी की कमी हो या फिर महिलाओं में कैंसर से संबंधित बीमारियां हो। आइए जानें आमतौर पर होने वाली महिलाओं की प्रमुख दस बीमारियां कौन सी है।

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1 स्तन कैंसर- स्तन कैंसर आज के समय में महिलाओं में सबसे अधिक पाया जाता है। फिर वह 25 साल की युवती हो या फिर 55 साल की महिला। हालांकि कम उम्र में कैंसर न होकर गांठे होती है जो सही उपचार न मिलने पर कैंसर का रूप ले सकती हैं। इसके अलावा इनसे स्तन पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाते और कोशिकाएं अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगती है।

ब्रेस्ट कैंसर या स्तन कैंसर महिलाओं में होने वाली एक भयावह बीमारी है। हालांकि यह एक भ्रम है कि ब्रेस्ट कैंसर सिर्फ महिलाओं में होता है। आज पुरूषों में भी इस बीमारी की संख्या बढ़ रही है। कैंसर से बचने का सिर्फ एक ही उपाय है जागरूकता।मैक्स हैल्थैकेयर के रेडियेशन आंकालाजिस्ट डाक्टर ए.के आनंद का कहना है कि महिलाओं और पुरूषों में होने वाले इस कैंसर के वास्तकविक कारणों का पता नहीं चल पाया है, लेकिन ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि यह हार्मोनल या अनुवांशिक कारणों से होता है।
•    स्तन कैंसर किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन 40 वर्ष की उम्र के बाद इसके होने की संभावना बढ़ जाती है।
•    अगर आपके परिवार में पहले से किसी को कैंसर रहा है , तो 40 वर्ष की उम्र के होने के बाद, साल में एक बार जांच ज़रूर करायें।
•    अगर आप धूम्रपान या मादक पदार्थो का सेवन करती हैं तो भी आपमें कैंसर की संभावना बढ़ जाती है।
स्‍तन कैंसर क्‍या है
स्तन कैंसर, असामान्य कोशिकाओं की एक प्रकार की अनियंत्रित वृद्धि है जो स्तन के किसी भी हिस्से में पनप सकता है यह निप्पल में दूध ले जाने वाले डक्ट्स (नलियों), दूध उत्पन्न करने वाले छोटे कोशों और ग्रंथिहीन ऊतकों में भी हो सकता है।

स्‍तन कैंसर के लक्षण
स्तन पर या बांह के नीचे (बगल में) उभार या मोटापन।
निप्पल से पानी या खून जैसा रिसाव होना।
निप्पल पर परत या पपड़ी बनना।
निप्पल्स का अंदर की ओर धंसना।
स्तन पर लालिमा या सूजन।
स्तन स्किन पर किसी संतरे जैसी बनावट के गड्ढे बनना।
स्तन की गोलाई में कोई बदलाव जैसे एक का दूसरे की अपेक्षा ज़्यादा उभर आना।
स्तन की त्वचा पर कोई फोड़ा या अल्सर जो ठीक न होता हो।

2 अर्थराइटिस- इस बीमारी में महिलाओं के घुटनों में सबसे अधिक दर्द होता है। घुटनों का दर्द जब बहुत अधिक बढ़ जाता है तो ये आर्थराइटिस का रूप ले लेता है जिसको सर्जरी के माध्यम से भी ठीक किया जा सकता है। इस बीमारी से जोड़ों में दर्द, जलन, सूजन इत्यादि होने लगती है।

अर्थराइटिस जोड़ों में होने वाली एक बहुत ही आम बीमारी है। इस बीमारी में जोड़ों में दर्द होता है और जोड़ों को घुमाने, मोड़ने, हिलाने और हरकत करने में परेशानी होती है।
अर्थराइटिस का शाब्दिक अर्थ- जोड़, राइटिस-दर्द यानि जोड़ों का दर्द होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि एक सौ से भी अधिक किस्म के अर्थराइटिस होते हैं। अर्थराइटिस से व्यक्ति की रोज़मर्रा की जीवनशैली बुरी तरह प्रभावित होती है। यह जीवन भर सताने वाली बीमारी होती है। बीमारी अधिक बढने पर मरीज के जोड़ों में असहनीय पीड़ा होती है और हाथ–पांव हरकत करना तक बंद कर देता है।
अर्थराइटिस में दर्द के कारण :
रूमेटॉयड अर्थराइटिस : यह इस बीमारी की बहुत ही सामान्य और गंभीर रूप है जिसका समय पर प्रभावी उपचार करवाना आवश्‍यक होता है वरना बीमारी बढ़ने पर एक साल के अन्दर ही शरीर के जोड़ों को काफी नुकसान होता है।
सोराइटिक अर्थराइटिस : अर्थराइटिस के दर्द का यह रूप सोराइसिस के साथ प्रकट होता है। समय पर और सही इलाज न होने पर यह बीमारी काफी घातक और लाइलाज हो जाती है।
ओस्टियोसोराइसिस : इस तरह का अर्थराइटिस आनुवांशिक हो सकता है और यह उम्र बीतने के साथ प्रकट होता है। यह विशेष रूप से शरीर का भार सहन करने वाले पीठ, कमर, घुटना और पांव को प्रभावित करता है ।
पोलिमायलगिया रूमेटिका : यह 50 साल की आयु पार कर चुके लोगों को होता है। इसमें गर्दन, कंधा और कमर में असहनीय पीड़ा होती है और इन अंगों को घूमाने में कठिनाई होती है। अगर सही समय पर सही इलाज हो तो इस बीमारी का निदान किया जा सकता है। लेकिन कई कारणों से आमतौर पर इसका इलाज संभव नहीं हो पाता है।
एनकायलाजिंग स्पोंडिलाइटिस : यह बीमारी सामान्यत: शरीर के पीठ और शरीर के निचले हिस्से के जोड़ों में होता है। इसमें दर्द हल्‍का होता है लेकिन लगातार बना रहता है। इसका उपचार संभंव हैं लेकिन सही समय पर इसकी पहचान कर सही इलाज किया जाए तब।
रिएक्टिव अर्थराइटिस : रिएक्टिव अर्थराइटिस शरीर में किसी तरह के संक्रमण फैलने के बाद होने का खतरा रहता है। आंत या जेनिटोरिनैरी संक्रमण होने के बाद इसके होने की संभावना बढ जाती है। इसमें सही इलाज काफी कारगर साबित होता है।


3 सर्वाइकल कैंसर- गर्भाशय  के अंदर व भीतरी सतह पर घातक कोशिकाओं की वृद्धि होती है जिससे मीनोपोज के बाद भी रक्त स्राव होने लगता है।


4 फाइब्राइड-फाइब्रायड यानी रसौली या ट्यूमर होना। आज लगभग 30 फीसदी महिलाएं फाइब्रायड की शिकायत से ग्रस्त है। फाइब्रायड एक महिला में एक से लेकर कई हो सकते है। फाइब्रायड की शिकायत होने इसकी चिकित्सा के लिए सर्जरी करवाई जाती है। आमतौर पर फाइब्रायड गर्भाशय की दीवार से निकलते है जिससे बांझपन का खतरा भी रहता है।


5 टीबी- यह संक्रामक बीमारी है। आम तौर पर फेंफड़ों पर हमला करती है। लेकिन शरीर के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकती है।


6 हृदय से जुड़ी बीमारी- दिल और दिल की धमनियों से संबंधित रोग अकसर महिलाओं में अधिक होते है। इसकी वजह से हार्ट अटैक की नौबत भी आ जाती है।


7 मधुमेह- मधुमेह ऐसी बीमारी है जिसकी शिकार महिलाएं ही अधिक होती है। मधुमेह के कारण महिलाओं को कई और बीमारियां भी घेर लेती हैं। मधुमेह के दौरान शरीर में इंसुलिन बनना बंद हो जाता है, इसमें पेंक्रियाज़ ग्रंथी सुचारू रूप से काम करना बंद कर देती है। इस ग्रंथि में इंसुलिन के अलावा कई तरह के हार्मोंस निकलते हैं।


8 ऑस्टियोपोरोसिस- इस रोग में हड्डियां कमजोर हो जाती है और उनमें अत्यधिक दर्द होता है। यह जल्दी मीनोपोज होने से , अधिक शराब व एल्कोहल लेने से और संतुलित खान-पान ने लेने से होता है।


9 पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज-महिलाओं की कमर के निचले हिस्से में फेलोपियन ट्यूब ब गर्भाशय तक ले जाने वाली नली जलन  होती है। इस बीमारी में पेट में दर्द होना, माहवारी के समय अधिक रक्ते स्राव होना इत्यादि होता है।


10 वल्वर कैंसर-  महिलाओं के जनांग के बाहरी हिस्से में यह कैंसर होता है। इसमें पेशाब के दौरान जलन, खुजली और रक्त स्राव इत्यादि होता है। 

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सिर दर्द

 
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माइग्रेन

माइग्रेन
माइग्रेन के लिए वैकल्पिक उपचार

    माइग्रेन से बचने के लिए विटामिन बी का सेवन करें।
    जंकफूड और चाइनीज भोजन का सेवन करना बंद कर दें।
    दर्द होने पर घी और कपूर को मिला कर लगाएं।
    अंगूर के रस का सेवन करें।
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माइग्रेन एक प्रकार का मस्तिष्क विकार है, जिसमें सिरदर्द होता है। यह प्राय: शाम के समय प्रारंभ होता है। इसमें दर्द 2 से 72 घंटे तक हो सकता है।माइग्रेन के दर्द से बचने के लिए लोग दवा पर ज्यादा निर्भर रहते हैं जो कि ठीक नहीं है। क्या आपने कभी इसके वैकल्पिक उपचार के बारे में सोचा है। ये वैकल्पिक उपचार भी इसके दर्द को कम करने में मददगार साबित होते हैं।

सभी जानते हैं कि माइग्रेन में होने वाला सिरदर्द कितना तकलीफदेह होता है। यह दर्द अचानक ही शुरू होता है और अपने आप ही ठीक भी हो जाता है। हाथों के स्पर्श से मिलने वाला आराम और प्यार किसी भी दवा से ज्यादा असर करता है। कुछ लोग तो इन उपचारों की मदद से ही इस दर्द को काबू में कर लेते हैं। आइए जानें माइग्रेन के वैकल्पिक उपचारों के बारे में-

  सिर दर्द होने पर बिस्तर पर लेट कर दर्द वाले हिस्से को बेड के नीचे लटकाएं। सिर के जिस हिस्से में दर्द हो, उस तरफ वाली नाक में सरसों के तेल की कुछ बूंदें डालें, फिर जोर से सांस ऊपर की ओर खीचें। इससे सिर दर्द में राहत मिलेगी।
    माइग्रेन के दर्द से बचने के लिए दालचीनी को पानी के साथ बारीक पीस ले और इस लेप माथे पर लेप लगाएं। जब यह लेप सूख जाए तो हटा लें। कुछ ही देर में आपको माइग्रेन के दर्द से राहत मिलेगी।
    भूखे रहने पर भी यह दर्द बढ़ सकता है। इसलिए ज्‍यादा देर तक भूखे न रहें, थोड़ी-थोड़ी देर में कुछ न कुछ खाते रहें। हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन फायदेमंद रहता है। गाजर और खीरा भी फायदेमंद है। मैग्निशियम से भरपूर गज़ा माइग्रेन में फायदेमंद होता है।
    दर्द होने पर मछली के तेल की सिर में मालिश करने से काफी आराम मिलता है। मालिश करने से सिकुड़ी हुई धमनियां फैल जाती हैं। मछली का सेवन भी माइग्रेन को कम करता है। इसमें पाया जाने वाला ओमेगा 3 फैटी एसिड दर्द से राहत देता है।
    चाइनीज नूडल्स जैसे कई व्यंजनों में अजीनोमोटो का इस्तेमाल होता है जिसे एमएसजी 'मोनो सैचुरेटेड ग्लूमेट' भी कहते हैं। कई बार इसके सेवन से माइग्रेन के मरीजों की दिक्कतें बढ़ जाती हैं।
    जब माइग्रेन दर्द आपको सताने लगे तो कपूर को घी में मिला कर सिर पर हल्के हाथों से मालिश करें। इससे दर्द में आराम मिलेगा।
    डिब्बाबंद या प्रोसेस्ड डाइट भी माइग्रेन का ट्रिगर हो सकती है। रेडी टू ईट भोजन, कप नूडल्स, जंकफूड आदि में प्रिजर्वेटिव्स, सोडियम का इस्तेमाल अधिक होता है जो माइग्रेन के दर्द को बढ़ा सकता है।
    अंगूर के रस का सेवन माइग्रेन के इलाज में सहायक होता है। इसके अलावा गाजर, चुकंदर, पालक, खीरे के रस का सेवन प्रभावी होता है।
    इस दर्द में अगर सिर, गर्दन और कंधों की मालिश की जाए तो यह इस दर्द से राहत दिलाने बहुत मददगार साबित हो सकता है। इसके लिए हल्की खुशबू वाले अरोमा तेल का प्रयोग किया जा सकता है।
    एक तौलिये को गर्म पानी में डुबाकर, उस गर्म तौलिये से दर्द वाले हिस्सों की मालिश करें। कुछ लोगों को ठंडे पानी से की गई इसी तरह की मालिश से भी आराम मिलता है। इसके लिए आप बर्फ के टुकड़ों का उपयोग भी कर सकते हैं।
    रोगी को अपने भोजन में मेथी, बथुआ, अंजीर, आंवला, नींबू, अनार, अमरूद, सेब, संतरा तथा धनिया अधिक लेना चाहिए। इसके अलावा मसालेदार भोजन कम खाना चाहिए। 
    प्राकृतिक चिकित्सा के द्वारा नाक से भाप देकर रोगी व्यक्ति के माइग्रेन रोग को ठीक किया जा सकता है। नाक से भाप लेने के लिए सबसे पहल एक छोटे से बर्तन में गर्म पानी लेना चाहिए। इसके बाद रोगी को उस बर्तन पर झुककर नाक से भाग लेना चाहिए। इस क्रिया को कुछ दिनों तक करने के फलस्वरूप माइग्रेन रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
    इसके अलावा विटामिन बी से भरपूर चीजों का सेवन करें। विटामिन माइग्रेन रोगियों के लिए आवश्यक माना गया है। गाजर का रस और पालक का रस दोनों करीब 300 मिलीटर मात्रा में पीएं। यह इस रोग काफी गुणकारी है।
माइग्रेन के दर्द को बढ़ाने वाले आहार :-

    माइग्रेन के कारण असहनीय सिरदर्द हो सकता है।
    बीन्‍स, पनीर, अचार और मिर्ची बढ़ाते हैं इस दर्द को।
    जैतून का तेल, सूखा मेवा, एवोकैडो आदि न खायें।
    केला, खट्टे फल, कॉफी और शराब का सेवन न करें।

माइग्रेन एक आम बीमारी हो गई है। इसका शिकार लोग एक हफ्ते में या एक या दो बार जरूर होते हैं। कुछ लोगों को तो यह बीमारी सौगात में मिलती है। माइग्रेन का दर्द बड़ा ही तेज होता है जिसमें सिर के एक ही ओर तेज दर्द होने लगता है। यह दर्द कई अन्‍य बीमारियों की भी न्‍यौता देता है, जैसे - चक्‍कर, उल्‍टी और थकान।
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सिर के अंदर की रक्त नलिकाओं के सिकुड़न से मस्तिष्क के कुछ हिस्सों में रक्त संचार कम हो जाता है। इसके कारण दृष्टि दोष या सूनापन का आभास होने लगता है। उसके बाद सिर के बाहर वाली रक्त नलिकाएं फैलने लगती हैं जिससे तीव्र सिरदर्द महसूस होता है। सीरोटोनिन नामक न्यूरोट्रांसमीटर का स्राव माइग्रेन के होने में मुख्य भूमिका निभाता है। मस्तिष्क में मैग्नीशियम की कमी हार्मोंन और मौसम परिवर्तन भी माइग्रेन को प्रभावित करते हैं। कुछ ऐसे खाद्य-पदार्थ हैं जो माइग्रेन के दर्द को बढ़ाते हैं।


बीन्स
बीन्‍स खाने से माइग्रेन का दर्द बढ़ जाता है। इसके अलावा इटेलियन बीन्‍स, मटर की फली, टोफू, सोया सॉस आदि माइग्रेन के दर्द को बढ़ा सकते हैं। इसलिए माइग्रेन होने पर इनका सेवन करने से बचना चाहिए।


पनीर
माइग्रेन के दर्द को बढ़ाने में पनीर की भी महत्‍वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए माइग्रेन होने पर पनीर खाने से बचना चाहिए। चीज केक, पनीर स्‍लाइस, आदि का सेवन न करें


अचार और मिर्ची:- किसी भी प्रकार का अचार माइग्रेन के दर्द को बढ़ा सकता है। मिर्ची तो सिरदर्द को बढ़ाता है। कई बार अनुसंधानकर्ता भी मिर्ची का प्रयोग माइग्रेन के मरीजों में रिसर्च के लिए करते हैं।
 

जैतून का तेल:-माइग्रेन के मरीजों को जैतून के तेल का सेवन नहीं करना चाहिए। ऑलिव ऑयल से माइग्रेन का दर्द बढ़ता है।

सूखा मेवा
सूखे मेवे में सल्‍फाइट्स नामक तत्‍व पाया जाता है, जो माइग्रेन के दर्द को बढ़ाता है। इसलिए अखरोट, मूंगफली, बादाम, काजू, किशमिश आदि खाने से बचना चाहिए।


एवोकेडो और आलूबुखारा :-लाल आलूबुखारा और एवोकेडो भी माइग्रेन के दर्द को बढ़ाते हैं, इसलिए इनके सेवन से परहेज करना चाहिए।
 

केला और खट्टे :-फलबनाना यानी केला और संतरा जैसे खट्टे फल माइग्रेन के दर्द को बढ़ाते हैं, इसलिए माइग्रेन के मरीजों को इनका सेवन भी नहीं करना चाहिए।

पिज्‍जा
पिज्‍जा जैसे फास्‍ट फूड भी माइग्रेन में हानिकारक हैं, इसलिए माइग्रेन की समस्‍या होने पर इसे न खायें।

शराब से बचें
शराब का सेवन करने से दिमाग में रक्‍त का संचार ठीक से नहीं होता है, जिसके कारण मरीज का दर्द बढ़ जाता है। इसलिए शराब का सेवन नहीं करना चाहिए।

इनके अलावा चाकलेट, कॉफी, अंजीर, नींबू, प्याज, चायनीज फूड, हॉट डॉग, सूखी नमकन मछली आदि खाने से भी माइग्रेन का दर्द बढ़ता है।


माइग्रेन होने पर क्या करें :-


    4 घंटे से लेकर 72 घंटे तक हो सकता है माइग्रेन का दर्द।
    जी मिचलाना, उल्टी आना, फोटोफोबिया आदि होते हैं इसके लक्षण।
    एपिसॉडिक और क्रॉनिक इल दो प्रकार का होता है माइग्रेन।
    दालचीनी को पीसकर इस लेप को माथे पर लगाने से होता है आराम।

माइग्रेन के दौरान सिर में बहुत तेज दर्द होता है। यह मस्तिष्‍क में सूजन के कारण होने वाली समस्‍या है। माइग्रेन होने पर क्या किया जाए यह एक बड़ा और महत्वपूर्ण सवाल है। इस लेख में हम आपको बता रहे हैं कि माइग्रेन होने पर क्या किया जाए।

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माइग्रेन एक प्रकार का सिरदर्द है। माइग्रेन के दौरान सिर में पहला हल्का दर्द होता है, जो धीरे-धीरे तेज होता जाता है। यह सिरदर्द चार घंटे से लेकर 72 घंटे तक भी बना रह सकता है। इसमें सिर के पिछले हिस्से में गर्दन के पास से लेकर पूरे सिर में भंयकर दर्द होता है। माइग्रेन किसी भी आयु में हो सकता है। माइग्रेन का प्रुख कारण आजकल की अव्यवस्थित और तनावपूर्ण जिंदगी है। जिसके चलते हम न तो अपने खान-पान पर ध्यान दे पाते हैं और न ही सेहत पर। परिणामस्वरूप जाने अनजाने माइग्रेन जैसे रोगों के शिकार बन जाते हैं।

आज के बदलती जीवनशैली में हर व्यक्ति के जीवन में भागदौड़ और बहुत सारा तनाव है। इस वजह से जीवनशैली में बदलाव आना स्वाभाविक है। और इस बदलाव के कारण हमें कई शारीरिक समस्याओं से भी जूझना पड़ता है। इन्हीं समस्याओं में से एक है माइग्रेन। यह प्राय: शाम के समय शुरू होता है और इसमें सिर में एकतरफा दर्द होता है। इसलिए आम बोलचाल की भाषा में इसे अर्द्धकपाली भी कहा जाता है।

माइग्रेन दो प्रकार का होता है।
1- एपिसॉडिक माइग्रेन (प्रासंगिक माइग्रेन)
2- क्रॉनिक माइग्रेन (दीर्घकालिक माइग्रेन)

माइग्रेन होने पर जीभ का मिचलाना, उल्टी आना, फोटोफोबिया (प्रकाश वृद्धि पर संवेदनशील होना), फोनोफोबिया (ध्वनि वृद्धि में संवेदनशीलता) और शारीरिक गतिविधियों का बढ़ जाना जैसे लक्षण होते हैं। इसमें सेरेब्रल कॉर्टेक्स (मस्तिष्क की बाहरी परत है, जो कि टिशू है) में वृद्धि के कारण उत्तेजना और दर्द होता है। इसके होने के कई कारण होते हैं जैसे - मौसम में बदलाव (विशेषचौर पर मानसून में), अधिक शोर-शराबा, बहुत तेज आवाज, शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव, रोशनी का कम और ज्यादा होना, किसी प्रकार का तनाव, नींद पूरी न होने पर, धूम्रपान करने से माइग्रेन के रोगी प्रभावित होते हैं।

 कभी-कभी यह लगभग 4 से लेकर 72 घंटे तक बना रहता है। इसमें सिर के पिछले हिस्से में गर्दन के पास से लेकर पूरे सिर में बहुत भंयकर दर्द होता है। माइग्रेन किसी भी आयु में हो सकता है। यह आजकल की अव्यवस्थित जिंदगी की देन है। जिसमें हम अपने खानपान पर नियमित ध्यान नहीं दे पाते हैं। परिणामस्वरूप जाने-अनजाने माइग्रेन जैसे रोगों के शिकार बन जाते हैं।

 माइग्रेन होने पर क्या करें
 माइग्रेन होने पर ठंडे पानी की पट्टी सिर पर रखें इससे रक्त धमनियां फैल जाती हैं और अपनी पूर्व स्थिति में आ जाती हैं।

    माइग्रेन होने पर अपने दिमाग को तनाव मुक्त करने का प्रयास करें, गहरी सांस लें और मन को सांत करने का प्रयास करें। नियमित रुप से व्यायाम, योग और ध्यान करने से आपको इस समस्या से लड़ने की पूरी शक्ति मिलती है।

    ज्यादा देर तक भूखे न रहें। थोड़ी-थोड़ी देर में कुछ ना कुछ खाते रहें। इससे बचने के लिए भोजन समय पर करना बहुत जरूरी होता है।

    माइग्रेन होने पर नियमित रुप से, डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं लेनी चाहिये।

    माइग्रेन होने पर समान्य तापमान में जाने की कोशिश करें। अधिक ठंड या गर्मी के कारण माइग्रेन हो सकता है। खासतौर पर मौसम के बदलाव से खुद को बचाना चा‍हिए।

    माइग्रेन होने पर आराम करें। इसके लिए रोज कम से कम 6 से 8 घंटे की गहरी नींद लेना बेहद जरूरी होता है।

    बर्फ या ठंडे पानी की पट्टी सिर पर रखें। इससे जो रक्त धमनियां फैल गयी हैंए वे फिर से अपनी पूर्व स्थिति पर वापस आ जायेगी।

    सिर पर मेहंदी का लेप लगा सकते हैं

    दालचीनी को पीसकर इस लेप को माथे पर लगाने से माइग्रेन के दर्द से तुरंत आराम मिलता है।

    दालचीनी को पाउडर बनाकर दिन में चार बार ठंडे पानी के साथ खाने से भी इसमें आराम मिलता है।

    माइग्रेन सिर दर्द में अदरक बहुत फायदेमंद है। अदरक के सेवन से मिचली और उल्टी आना बंद हो जाती हैं।

    माइग्रेन सिर दर्द होने पर पिसी दालचीनी, अदरक का पाउडर, पिसी काली मिर्च और तुलसी पत्ती को मिलाकर एक मिश्रित पाउडर बना लें और इसे शहद के साथ खाएं। आपको तुरंत फायदा होगा।

    माइग्रेन होने पर रात का बहुत भारी भोजन न करें। रोत को केवल हल्का एवं फाइबर युक्त भोजन करें साथ ही सोते समय एक चम्मच त्रिफला तथा आंवले के चूर्ण को गुनगुने पानी से लें। इससे पेट साफ रहेगा और आप काफी आराम महसूस करेंगें।

    माइग्रेन सिर दर्द शुरू होते ही जीभ की नोक पर एक चुटकी नमक रख लें और आधा मिनट बाद पानी पी लें सर दर्द गायब हो जायगा।

    माइग्रेन में घर पर आराम करें, बाहर न जाएं, और यदि जाना ही पड़े तो जब भी घर से बाहर निकले छाता लें और सूरज की साधी तेज रौशनी से बचें।



माइग्रेन का दर्द अचानक ही शुरू होता है और कई बार खुद-ब-खुद ठीक भी हो जाता है। वैसे तो हाथों के स्पर्श और प्यार से मिलने वाला आराम किसी भी दवा से ज़्यादा असर करता है। इस दर्द में अगर सिर, गर्दन और कंधों की मालिश की जाए तो यह राहत दिलाने बहुत मददगार साबित हो सकता है।


इसके लिए आप हल्की खुश्बू वाले अरोमा तेल का प्रयोग कर सकते हैं। इसके लिए एक तौलिये को गर्म पानी में डुबाकर, उस गर्म तौलिये से दर्द वाले हिस्सों की मालिश करें। कुछ लोगों को ठंडे पानी से की गई मालिश से आराम मिलता है, तो इस बात को जांच लें। इसके लिए आप बर्फ के टुकड़ों का उपयोग कर सकते हैं। इसके अवावा कपूर को घी में मिलाकर सिर पर हल्के हाथों से मालिश करें।



महिलाओं में माइग्रेन के कारणों को जानें :-


    माइग्रने के शिकार लोगों में महिलाओं की संख्या ज्यादा है।
    यह एक न्यूरोलॉजिकल रोग है।
    अनियमित खान-पान व तनाव के कारण यह समस्या हो सकती है।
    महिलाओं के जीवन में होने वाले बदलाव इसकी मुख्य वजह हैं।

माइग्रेन की समस्या इन दिनों काफी आम हो चुकी है। इसकी सबसे बड़ी वजह है अनियमित दिनचर्या, खान-पान की गलत आदतें व तनाव लेना। माइग्रेन से ग्रस्त लोगों में पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं की संख्या कहीं ज्यादा है। 
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माइग्रेन एक प्रकार का मस्तिष्क विकार है, जिसमें सिरदर्द होता है। इस में सिर में एकतरफा दर्द होता है। इसलिए आम बोलचाल की भाषा में इसे अर्द्धकपाली भी कहा जाता है।यह प्राय: शाम के समय शुरू होता है। इसमें दर्द 2 से 72 घंटे तक हो सकता है। माइग्रेन दो प्रकार के होते हैं। पहला एपिसॉडिक माइग्रेन (प्रासंगिक माइग्रेन) दूसरा क्रॉनिक माइग्रेन (दीर्घकालिक माइग्रेन। माइग्रेन के पीछे पर्यावरणीय और आनुवंशिक कारक दोनों होते हैं। करीब दो तिहाई मामले परिवारों में होते हैं। हार्मोन के स्तर में बदलाव भी इसमें भूमिका निभा सकता है। युवावस्था से पहले यह लड़कियों की तुलना में लड़कों को अधिक होता है, लेकिन पुरुषों की तुलना में दो से तीन गुणा अधिक महिलाएं इससे पीडि़त हैं।


यह एक न्यूरोलॉजिकल विकार है। महिला के जीवन चक्र के दौरान बदलता हार्मोनल वातावरण जैसे मासिक धर्म की शुरुआत, मासिक धर्म, गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन, गर्भधारण, रजोनिवृत्ति और हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (एचआरटी) आदि से माइग्रेन की अवधि पर काफी प्रभाव पड़ सकता है। आइए जानें महिलाओं में माइग्रेन के कारणों के बारें में-

मासिक धर्म
मासिक धर्म के दौरान महिलाओं में हार्मोनल परिवर्तन के कारण मूड स्विंग होते हैं जिसकी वजह से माइग्रेन की समस्या हो सकती है। मासिक धर्म से पहले एस्ट्रोजन में बदलाव से कुछ महिलाओं में माइग्रेन की शुरुआत होती है। माइग्रेन का हमला मासिक धर्म के चक्र से दो दिन पहले और तीन दिन बाद के बीच में होता हैं। इसमें महिलाओं को अवसाद, चिड़चिड़ापन, थकान, भूख में बदलाव आना, सूजन, पीठ में दर्द, स्तनों की कोमलता या उबकाई की शिकायत रहती है।

गर्भधारण
गर्भधारण के दौरान ज्यादातर महिलाओं में माइग्रेन के लक्षणों में सुधार या कमी देखी जाती है। बाकी महिलाओं में माइग्रेन की स्थिति में कोई बदलाव नहीं होता या स्थिति और बिगड़ जाती है। जिन महिलाओं में गर्भधारण के दौरान माइग्रेन होता है, उनमें से अधिकतर को माइग्रेन के दौरान प्रभामंडल दिखाई देता है। गर्भधारण के दौरान माइग्रेन में कमी आए तो माइग्रेन प्रसव के बाद की अवधि में फिर से होता है। यह खासकर उन महिलाओं को होता है, जो मासिक धर्म से जुडे़ माइग्रेन या एस्ट्रोजन में बदलाव से जुड़े माइग्रेन से पीडित होती हैं। माइग्रेन प्रसव के 3 से 6 दिन बाद होता है। हल्के से मध्यम दर्द के इलाज में आराम, बायोफीडबैक और विश्राम चिकित्सा पद्घति अपनाई जाती है। एसिटामिनोफेन का इस्तेमाल किया जा सकता है।

रजोनिवृत्ति
गर्भधारण की तरह ही रजोनिवृत्ति के माइग्रेन पर असर के बारे में भी बताया नहीं जा सकता। माइग्रेन से पीडित दो तिहाई महिलाओं में रजोनिवृत्ति में माइग्रेन की स्थिति बिगड़ सकती है या सुधर सकती है। कुछ महिलाओं में रजोनिवृत्ति के बाद माइग्रेन शुरू भी हो सकता है। एस्ट्रोजन के अनियमित या कम स्रव से उत्पन्न रजोनिवृत्ति के लक्षणों से पीडित महिलाओं को एचआरटी से लाभ मिल सकता है।

गर्भनिरोधक गोलियां
गर्भनिरोधक गोलियां खाने का माइग्रेन पर अस्थायी असर होता है। गर्भनिरोधक गोलियां खाना शुरू करने से महिलाओं में माइग्रेन नए सिरे से हो सकता है, पहले से मौजूद माइग्रेन का दर्द और बढ़ सकता है या इसकी आवृत्ति या इसके होने के लक्षण बदल सकते हैं। माइग्रेन से पीडित खास तौर पर उन महिलाओं में इस्कीमिक दौरों का खतरा अधिक हो सकता है, जो गर्भनिरोधक गोलियां खाती हैं, बहुत धूम्रपान करती हैं या जिन्हें माइग्रेन के दौरान चमकीली रोशनी दिखाई देती है।

महिलाओं में माइग्रेन पैदा करने वाले इन कारणों को जानने के बाद आप माइग्रेन के दर्द से बचने में सफल हो सकती है।
 


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फूड पाइज़निंग

फूड पाइज़निंग 
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जीवनरक्षक घोल है ओआरएस
ओरल रिहाइड्रेशन साल्ट्स  (ओआरएस), डिहाइड्रेशन यानी निर्जलीकरण को दूर करने का एक किफायती और प्रभावशाली उपाय है। इसके जरिये शरीर को इलेक्ट्रॉल्स, ग्लूजकोज और जल की पर्याप्‍त मात्रा मिलती है।

ओआरएस घोल
दस्त लगने पर शिशुओं के लिए ओआरएस किसी संजीवनी से कम नहीं। इससे बच्चों का दस्त ठीक हो जाता है। डायरिया की चपेट में आने वाले बच्चों को बिना चिकित्सकीय सलाह के भी ओआरएस का घोल दिया जा सकता है। ऐसा करने से बच्चों के शरीर में पानी की कमी नहीं होती। इसके कारण बच्चों की तबियत बहुत ज्यादा बिगड़ने से भी बच सकती है। याद रखिए देर करने से बच्चे की जान पर बन सकती है।

अक्सर हम बच्चे को दस्त लगने पर उसे दवा खिलाने लगते हैं। जबकि कई बार इसकी जरूरत भी नहीं होती। जानकार भी मानते हैं कि अधिकांश मामलों में डायरिया तीन-चार दिनों में केवल ओआरएस व जिंक के घोल से ही ठीक हो जाता है। अगर डॉम्‍क्‍टर कोई दवा लिखता है, तो ठीक, वरना खुद से न दवा लिखवाएं और न ही अपने से कोई दवा बच्चे को खिलाएं।

बच्चे को दस्त के दुष्प्राभावों से बचाने के लिए सबसे जरूरी चीज है अभिभावकों में जागरुकता। अगर अभिभावक सही समय पर सही फैसला ले लेंगे तो बच्चे की कीमती जान बचायी जा सकेगी। दुनिया में केवल 40 फीसदी बच्चों को ही डा‍यरिया का सही इलाज मिल पाता है।

ऐसा नहीं है कि केवल गरीब अथवा विकासशील देशों में ही डायरिया एक गंभीर बीमारी है, बल्कि विकसित देशों में इसे निमोनिया के बाद दूसरी सबसे खतरनाक बीमारी माना जाता है। डायरिया से बचने के लिए ओआरएस एक बेहद प्रभावी तरीका है।

ओआरएस
विश्‍व स्वास्‍थय संगठन ने वर्ष 1978 में घर पर उपलब्ध सामान से ही ओरल रिहाइड्रेशन थेरेपी यानी ओआरटी और ओआरएस की शुरुआत की। इस इलाज ने डायरिया से होने वाली मौतों की संख्या में कमी ला दी है। ओआरएस के आने से पहले जहां हर वर्ष 50 लाख लोग डायरिया के चलते अपनी जान गवांते थे, वहीं अब यह आंकड़ा कम होकर 15 लाख हो गया है। अपनी उपयोगिता के लिए ओआरएस को दुनिया भर में सराहा जाता है। इसे इस सदी की सबसे बड़ी चिकित्सीय उपलब्धि भी माना जाता है।

डॉक्टर के पास कब जाएं
डायरिया यूं तो तीन-चार दिन में ठीक हो जाता है। अगर ऐसा न हो, तो फिर डॉक्टर के पास जाना चाहिए। इसके साथ ही अगर डायरिया बढ़ जाए या दस्त के साथ खून आए तो भी डॉक्टर के पास जरूर जाना चाहिए। अगर बच्‍चे को दस्‍त के साथ लगातार उल्टियां भी हो रही हों, तो भी आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। दस्त के सा‍थ ही बच्चे को तेज बुखार और थकान भी हो रही हो, तो यह वक्‍त है कि आप उसे डॉक्टर के पास ले जाएं। बच्‍चे को यदि बहुत ज्यादा प्यास लग रही हो, तो भी बिना देर किए उसे चिकित्सीय सहायता दिलायी जाए।

कब करें ओआरएस का इस्‍तेमाल
अगर बच्‍चे को दिन में तीन या उससे ज्‍यादा बार दस्‍त आएं तो उसे ओआरएस देना शुरू कर देना चाहिए। अगर बच्‍चे की उम्र छह महीने या उससे अधिक है तो उसे 20 मिलीग्राम जिंक रोजाना दिया जा सकता है। यह गोली अथवा सिरप किसी भी रूप में हो सकता है। बच्‍चे को करीब डेढ़ से दो सप्‍ताह तक यह गोलियां अथवा सिरप दिया जा सकता है। अगर बच्‍चे की उम्र छह महीने से कम है तो 10 मिलीग्राम जिंक दिया जा सकता है।

कैसे करें ओआरएस तैयार
ओआरएस तैयार करने से पहले साबुन से अच्‍छी तरह अपने हाथ धो लें।
ओआरएस घोल तैयार करने से पहले पैकेट पर लिखे दिशा-निर्देशों को अच्‍छी तरह पढ़ लें।
 एक साफ बर्तन में ओआरएस पैकेट डालें।
 फिर उसमें पर्याप्‍त मात्रा में साफ पानी डालें। अगर आप पानी की उचित मात्रा नहीं डालेंगे तो इससे डायरिया का दुष्‍प्रभाव बढ़ सकता है।
 ओआरएस घोल को केवल पानी में ही तैयार करें। दूध, सूप, फलों के रस और सॉफ्ट ड्रिंक के साथ इसका सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही इसमें अतिरिक्‍त चीनी भी नहीं मिलानी चाहिए।
 इस घोल को अच्‍छी तरह मिलाने के बाद एक साफ कप से बच्‍चे को पिलाएं। बोतल से इस घोल को नहीं पिलाना चाहिए।
 अगर बच्‍चा इसे पीकर उल्‍टी कर देता है तो थोड़ी देर रुककर उसे एक बार फिर ओआरएस दें।
अभिभावकों को अपने बच्‍चे को ओआरएस पीने के लिए प्रोत्‍साहित करना चाहिए। दो वर्ष से कम उम्र के बच्‍चों को दस्‍त के बाद कम से कम 75 से 125 मिलीलिटर ओआरएस घोल लेना चाहिए। वहीं दो वर्ष से अधिक आयु के बच्‍चे को 125 से 250 मिलि. घोल रोजाना लेना चाहिए।
हैजा रोग में क्या खाएं
हैजा में खाने पीने का विशेष ध्यान रखना होता है। खान पान में सावधानियां नहीं बरतने पर यह बिमारी दोबारा अटैक कर सकती है।। दूषित पानी व खाने से फैलने वाला यह रोग आपकी आंतों में होता है। महामारी के दौरान इस रोग के फैलने की ज्यादा संभावना होती है। इस रोग के जीवाणु आंत की आन्तरिक लाइनिंग पर आक्रमण करता है जिससे आपके अंदर हैजा के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। आईए जानें हैजा में कैसा हो आपका खान पान।

उबला पानी पीएं
हैजा के इलाज के दौरान उबला हुआ पानी ही पिएं या फिर क्लोरीन या आयोडीन युक्त पानी भी पी सकते हैं। पानी में बर्फ का इस्तेमाल नहीं करें क्योंकि हैजा के बैक्टैरिया ठंडी जगहों पर ही होते हैं।

ताजा खाना खाएं
हैजा में ताजा बना हुआ खाना ही खाएं। कच्ची सब्जियां खाने से बचें। खासकर सलाद खाने से पहले उसे अच्छे से धो लें। फलों को भी खाने से पहले अच्छी तरह से धो लें और छिलका उतार कर काट कर खाएं।

नमक-चीनी का घोल लें
हैजा के दौरान शरीर में पानी की कमी हो जाती है इसलिए रोगी को थोड़ी-थोड़ी दर में नमक-शकर-पानी का घोल देना चाहिए या बना बनाया इलेक्ट्रोलाइट पिलाकर रोगी को लवणों की पूर्ति की जाती है।

शिकंजी पिएं
हैजा अगर शुरुआती अवस्था में है तो एक गिलास पानी में एक नींबू निचोड़ कर इसमें एक चम्मच पिसी मिश्री मिलाकर शिकंजी बना लें और रोज पिएं। इससे हैजा के बैक्टेरिया खत्म हो जाते हैं।

 बाहर का खाना नहीं खाएं
बाहर के खाने में मक्खियां बार-बार बैठती है जिससे उनके पैरों पर लगे जीवाणु खाने वाली चीजों पर लग जाते हैं इसलिए हैजा के दौरान बाहर का खाना नहीं खाना चाहिए। 

सावधानियां
अधिक शारीरिक या मानसिक थकान और तापमान में जल्दी-जल्दी बदलाव से बचें।
    कोई भी तरल पदार्थ बिना उबाले हुए न पियें। शौचालय से आने के बाद हाथ को साबुन से अच्छे से धोएं।
    घर के सभी बर्तनों को अच्छे से गर्म पानी से साफ करें।
    भोजन करने से पहले हाथ धोना कभी नहीं भूले। पानी में कार्बोलिक एसिड मिला कर हाथ धोएं।
    जहां तक संभव हो, हर बार साफ तौलिये का इस्तेमाल करें। महामारी वाली जगहों पर जाने से बचें। अगर जाना जरुरी हो तो मुंह पर मास्क लगाकर जाएं।
    घर के आसपास साफ सफाई रखें।। नालियों व गड्ढों को ढ़क दें।

उच्‍च रक्‍तचाप


हाई ब्लड-प्रेशर में रोगी की याददाश्त पर असर हो सकता है, जिसे डिमेंशिया कहा जाता है। इसमें समय के साथ-साथ रोगी के मस्तिष्क में खून की आपूर्ति और कम हो जाती है। और व्यक्ति की सोचने-समझने की शक्ति घटती जाती है। 
नियमित व्‍यायाम और संतुलित आहार के जरिये नियंत्रित करें उच्‍च रक्‍तचाप
 शोध के मुताबिक विश्‍व के लगभग 26% लोग है इसकी चपेट में।
 अमेरिका में 15% लोगों की मौत का कारण हाई ब्‍ल्‍ड प्रेशर है।
  इस पर नियंत्रण पाने के लिए संतुलित आहार का सेवन है जरूरी।
  व्‍यायाम और योग नियमित करने से सामान्‍य रहता है रक्‍तचाप।

आजकल की लाइफस्‍टाइल का सबसे बुरा असर रक्‍तचाप पर पड़ा है और इसकी वजह से इसके मरीजों की संख्‍या लगातार बढ़ रही है। यह बीमारी धीरे-धीरे कब शरीर में अपना घर बना लेता है, इसकी भनक तक नहीं लगती। आजकल लगभग हर घर एक व्‍यक्ति में इसकी शिकायत देखने को मिल रही है।

http://www.onlymyhealth.com/imported/images/2013/November/27_Nov_2013/high-blood-pressure-treatment-300x450.jpgहाई ब्लड प्रेशर के मरीजों की बढ़ती संख्‍या को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्‍ल्‍यूएचओ ने इसे सार्वभौमिक स्वास्थ्य समस्या माना है। उच्‍च रक्‍तचाप का असर रोगों में बढ़ोतरी के साथ-साथ गुर्दे खराब होने, अपंगता और मृत्यु तक के रूप में देखने को मिल रहा है। एक शोध के मुताबिक दुनिया के लगभग 26% लोग इसकी चपेट में हैं, वहीं हावर्ड के शोध के अनुसार अमेरिका में लगभग 15% लोगों की मौत का कारण उच्‍च रक्‍तचाप की वजह से होती है।
क्‍या है उच्‍च रक्‍तचाप
दिल, धमनियों के जरिये पूरे शरीर में खून का संचार करता है। उच्‍च रक्‍तचाप का मुख्‍य कारण धमनियों की दीवारों का अपने सामान्य आकार से मोटा और संकुचित हो जाने से है। इसके कारण ही बॉडी में रक्त संचार अपनी स्‍वाभाविक गति से नहीं हो पाता और दिल को खून पंप करने के लिए ज्‍यादा मेहनत करनी पड़ती है। जब रक्त दिल अथवा दिमाग तक सही ढंग से नहीं पहुंच पाता तो दिल का दौरा पड़ने की संभावना बढ़ जाती है। इसी कारण उच्च रक्तचाप वाले व्यक्ति को सलाह दी जाती है कि वो नियमित रूप से अपने डॉक्टर से अपनी जांच करवाए।
उच्‍च रक्‍तचाप की चिकित्‍सा

डायट चार्ट के द्वारा
रक्‍तचाप को बढ़ाने में खाद्य पदार्थ बहुत महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए हमें अपने भोजन में उन पोषक तत्वों को शामिल करना चहिए जो रक्त संचार को नियंत्रण में रखें। अपने आहार में ताजे फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और कम वसा और कोलेस्ट्रॉल वाले डेयरी उत्पाद शामिल करने चाहिए। अपनी डायट में प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा जरूर रखें। रेड मीट, मिठाइयां और शुगरयुक्त पेय पदार्थ का सेवन कम करें।
कैल्शियम और पोटैशियम
नियमित व्‍यायाम करें 
कम नमक खायें
कैफीन को ना
धूम्रपान और एल्‍कोहल

नाक से खून बहना हो सकता है उच्‍च रक्‍तचाप का संकेत :-

    सिर चकराना भी सकता है उच्‍च रक्‍तचाप का लक्षण।
    कम मेहनत में थकान होना है हाई ब्‍लड प्रेशर का संकेत।
    हृदय की धड़कन बढ़ना भी है उच्‍च रक्‍तचाप का इशारा।
    कुछ लोगों में इससे संबंधित लक्षण दिखाई भी नहीं देते।

उच्‍च रक्‍तचाप आधुनिक जीवनशैली में 40 वर्ष की उम्र के आसपास होने वाली आम स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या बन गई है। सामान्य स्वास्थ्य वाले व्यक्ति का उच्चतम रक्‍तचाप 120 तथा न्यूनतम 80 होता है। सेहतमंद रहने के लिए रक्‍तचाप सामान्य रहना बहुत जरूरी है।

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दुनिया में बड़ी संख्‍या में लोग हाई ब्‍लड प्रेशर की समस्‍या से ग्रस्‍त हैं। उच्‍च रक्‍तचाप की समस्‍या में धमनियों में रक्‍त का दबाव बढ़ जाता है। दबाव की इस वृद्धि के कारण धमनियों में रक्‍त प्रवाह सुचारू बनाये रखने के लिये दिल को अधिक काम करने की आवश्यकता पड़ती है। अधिकतर लोग इस समस्‍या को अनदेखा कर देते हैं। कुछ ही लोग दवाओं का सेवन कर रक्‍तचाप को सामान्‍य रखते हैं। अध्‍ययनों से साफ हुआ है कि उच्‍च रक्‍तचाप के 85 फीसदी मरीज समय से अपनी दवाई नहीं लेते।

यदि आप भी उन्‍हीं में से एक हैं जो रक्‍तचाप को नियंत्रित करने के लिए फिजीशियन द्वारा दिए गए परामर्श को फॉलो नहीं करते, तो यह शरीर के अंगों जैसे दिल, गुर्दे, मस्तिष्‍क और आंखों पर असर डाल सकता है। यदि आपको खुद से प्‍यार हैं, तो रक्‍तचाप को नियंत्रण में रखें। हो सकता है आपको हाई ब्‍लड प्रेशर के लक्षणों के बारे में जानकारी न हों। इस लेख के जरिए हम आपको बता रहे हैं उच्‍च रक्‍तचाप के सामान्‍य लक्षणों के बारे में।

शुरुआती लक्षण
उच्‍च रक्‍तचाप के प्रारंभिक लक्षण में संबंधित व्‍यक्ति के सिर के पीछे और गर्दन में दर्द रहने लगता है। कई बार इस तरह की परेशानी को वह नजरअंदाज कर जाता है, जो आगे चलकर गंभीर समस्‍या बन जाती है।

तनाव होना
यदि आप खुद को ज्‍यादा तनाव में महसूस कर रहे हैं, तो यह उच्‍च रक्‍तचाप का संकेत हो सकता है। ऐसे में व्‍यक्ति को छोटी-छोटी बातों पर गुस्‍सा आने लगता है। कई बार वह सही-गलत की भी पहचान भी नहीं कर पाता। किसी भी समस्‍या से बचने के लिए जरूरी है कि आप जांच करा लें।

सिर चकराना
उच्‍च रक्‍तचाप के लक्षणों में सिर चकराना भी आम है। कई बार शरीर में कमजोरी के कारण भी सिर चकराने की परेशानी हो सकती है। ऐसे कोई लक्षण दिखाई दें, तो पहले अपने डॉक्‍टर से परामर्श कर लें।

थकावट होना
यदि आपको थोड़ा काम करने पर थकान महसूस होती है या जरा सा तेज चलने पर परेशानी होती है या फिर आप स‍ीढि़यां चढ़ने में काफी थक जाते हैं, तब भी आप उच्‍च रक्‍तचाप से ग्रस्‍त हो सकते हैं।

नाक से खून आना
सांस न आना, लंबी सांस आना या सांस लेने में परेशानी होने पर एक बार अपने चिकित्‍सक से संपर्क करें। ऐसे में व्‍यक्ति के उच्‍च रक्‍तचाप से ग्रस्‍त होने की प्रबल आशंका होती है। साथ ही यदि नाक से खून आए, तब भी आपको जांच करानी चाहिए।

नींद न आना
आमतौर पर उच्‍च रक्‍तचाप के रोगियों के साथ यह समस्‍या होती है कि उन्‍हें रात में नींद आने में परेशानी होती है। हालांकि यह परेशानी किसी चिंता के कारण या अनिंद्रा की वजह से भी हो सकती है।

हृदय की धड़कन बढ़ना
यदि आप महसूस करते हैं कि आपके हृदय की धड़कन पहले के मुकाबले तेज हो गई हैं या आपको अपने हृदय क्षेत्र में दर्द महसूस हो रहा है, तो यह उच्‍च रक्‍तचाप का भी कारण हो सकता है।

कई बार कुछ लोगों में उच्‍च रक्‍तचाप से संबंधित कोई भी लक्षण नजर नहीं आता। उन्‍हें इस बारे में चेकअप के बाद ही जानकारी होती है। हाई ब्‍लड प्रेशर के लक्षण दिखाई न देना किडनी और हार्ट के लिए घातक हो सकता है।
क्‍या है उच्‍च रक्‍तचाप और इससे होने वाले खतरे/  उच्‍च रक्‍तचाप / ब्लड प्रेशर से निदान के उपाय:-

    उच्‍च रक्‍तचाप में हो सकता है किडनी और हार्ट फेल्‍योर।
    अमेरिका में हाई बीपी से ग्रस्‍त है तीन में से एक वयस्‍क।
    हर वर्ष 90 लाख लोगों की मौत का कारण है उच्‍च रक्‍तचाप।
    सोते समय सामान्‍य अवस्‍था में होता है मनुष्‍य का रक्‍तचाप।

उच्‍च रक्‍तचाप आधुनिक जीवनशैली में होने वाली गंभीर समस्‍या है। हाई ब्‍लड प्रेशर के कारण ही कोरोनरी हार्ट डिजीज, हार्ट फेल्‍योर, स्‍ट्रोक, किडनी फेल्‍योर और कई अन्‍य तरह की समस्‍याएं पनप रही हैं।
http://www.onlymyhealth.com/imported/images/2013/November/28_Nov_2013/high-bloodpressure-300x450.jpgएक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में तीन वयस्‍कों में से एक को हाई ब्‍लड प्रेशर की समस्‍या है। हाई ब्‍लड प्रेशर कितना भयाव‍ह रोग है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रत्‍येक वर्ष 90 लाख व्‍यक्ति इसके कारण मौत का शिकार हो रहे हैं। आमतौर पर इसका कोई संकेत या लक्षण नहीं होता। कई सालों तक हाई ब्‍लड प्रेशर के बारे में जानें बिना भी आप इस समस्‍या से ग्रस्‍त रह सकते हैं।
उच्‍च रक्‍तचाप की समस्‍या होने पर धमनियों में रक्‍त का दबाव बढ़ जाता है। दबाव वृद्धि के कारण धमनियों में रक्‍त प्रवाह बनाये रखने के लिये दिल को सामान्य से ज्‍यादा काम करने की जरूरत पड़ती है। हाई बीपी के कारण आपका हृदय काम करना बंद कर सकता है, जिसे हार्ट फेल्‍योर कहते हैं। इसके अलावा उच्‍च रक्‍तचाप की समस्‍या में आपकी रक्‍त धमनियां, किडनी और शरीर के अन्‍य अंग भी काम करना बंद कर सकते हैं।
रक्‍तचाप के प्रकार
प्रत्‍येक व्‍यक्ति के रक्‍तचाप में दो माप शामिल होती हैं, पहली सिस्टोलिक और दूसरी डायस्टोलिक। इसे उच्‍चतम रीडिंग और निम्‍नतम रीडिंग भी कहा जाता है। किसी भी व्‍यक्ति का बीपी इस बात पर निर्भर करता है कि मांसपेशियों में संकुचन हो रहा है या धड़कनों के बीच तनाव मुक्‍तता हो रही है। आराम के समय सामान्य रक्‍तचाप में उच्‍चतम रीडिंग यानी सिस्टोलिक 100 से 140 तक और डायस्‍टोलिक यानी निचली रीडिंग 60 से 90 के बीच होती है। यदि कई दिन तक किसी व्‍यक्ति का रक्‍तचाप 90 और 140 से ऊपर बना रहता है, तो इसे उच्‍च रक्‍तचाप माना जाता है।
ध्‍यान रखने वाली बातें
यदि आप सामान्‍य हैं, तब भी आपको रक्‍तचाप के प्रति सचेत रहना चाहिए। आपको अपने ब्‍लड प्रेशर के स्‍तर के बारे में जानकारी होनी चाहिए। यदि आपका रक्‍तचाप सामान्‍य है, तो डॉक्‍टर से इसे सामान्‍य बनाए रखने के लिए परामर्श कर सकते हैं। यदि यह सामान्‍य से ज्‍यादा है तो समय से लिया गया उपचार शरीर के अंगों को होने वाले किसी भी प्रकार के नुकसान से बचा सकता है।
कब ज्‍यादा होता है रक्‍तचाप
उच्‍च रक्‍तचाप की समस्‍या ज्‍यादा समय तक नहीं रहती। सोने के दौरान इसका स्‍तर कम हो जाता है और जब आप जागते हैं तो इसका स्‍तर बढ़ जाता है। उत्‍तेजित होने, नर्वस होने या एक्टिव होने पर भी रक्‍तचाप घटता-बढ़ता है। यदि आपके रक्‍तचाप का स्‍तर अधिकतर समय नॉर्मल बना रहता है, तो आपको स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी समस्‍याएं हो सकती हैं। ब्‍लड प्रेशर बढ़ने के साथ ही इसका खतरा भी बढ़ता जाता है।
ब्‍लड प्रेशर की समस्‍या उम्र के साथ बढ़ती है। यदि आपकी हेल्‍दी लाइफस्‍टाइल है, तो यह समस्‍या आपको कुछ समय बाद हो सकती है। जिन लोगों को हाई बीपी की समस्‍या है, वे कुछ उपायों के जरिए उच्‍च रक्‍तचाप की समस्‍या से निजात पा सकते हैं। इसके लिए आपको डॉक्‍टर द्वारा दिए गए सुझावों का पालन करना चाहिए और समय से ट्रीटमेंट लेना होगा।

उच्‍च रक्‍तचाप / ब्लड प्रेशर से निदान के उपाय:-
ब्‍लड प्रेशर को मेनटेन रखता है नियमित चेकअप।
उच्‍च रक्‍तचाप होने पर नमक का सेवन कम करें।
गुस्‍सा करने से भी होती है उच्‍च रक्‍तचाप की समस्‍या।
एल्‍कोहल के सेवन से बढ़ता है ब्‍लड प्रेशर का लेवल।
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भागदौड़ भरी जिंदगी और अनियमित दिनचर्या के बीच उच्‍च रक्‍तचाप की समस्‍या आम हो गई है। दिल को तंदुरुस्‍त बनाए रखने के लिए रक्‍तचाप का नियंत्रित रहना बहुत जरूरी है। दिल को स्‍वस्‍थ बनाए रखने के लिए जरूरी है कि यदि आपको कोई हृदय संबंधी परेशानी है, तो आप तुरंत डॉक्‍टरी परामर्श लें।

हृदय स्वास्थ्य के बारे में जानकारी आपको दिल संबंधी बीमारियों से बचाती है। शरीर का सबसे अहम अंग हृदय है, इसलिए इसकी देखभाल जरूरी है। आपकी सेहत आपके हृदय के साथ जुड़ी हुई है। हमारा जीवनचक्र तभी तक चलता है, जब तक हृदय सही प्रकार से काम करता है। हृदय स्‍वास्‍थ्‍य और रक्‍तचाप एक-दूसरे के पूरक हैं। हाई ब्‍लड प्रेशर होने पर आपको हृदय संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। इस लेख के जरिए हम आपको बताते हैं उच्‍च रक्‍तचाप से निदान पाने के तरीकों के बारे में।
नियमित चेकअप
रक्‍तचाप को नियंत्रित रखने और हाई ब्‍लड प्रेशर से निदान के लिए जरूरी है कि आप अपने ब्‍लड प्रेशर की नियमित जांच कराएं। स्वस्थ वयस्क व्यक्ति का सिस्टोलिक ब्‍लड प्रेशर पारा 90 और 120 मिलीमीटर के बीच और सामान्य डायालोस्टिक रक्‍तचाप पारा 60 से 80 मिलीमीटर के बीच होता है।
नमक का सेवन कम करें
आपको अपने आहार में नमक का सेवन कम मात्रा में करना चाहिए। अधिक मात्रा में नमक का सेवन, हृदय समस्‍याओं के खतरे को बढ़ाता है। यदि आप समय रहते अपने खान-पान पर ध्यान देंगे तो आपको भविष्‍य में किसी भी प्रकार की समस्या नहीं होगी।
कोलेस्‍ट्रॉल नियंत्रित रखें
आपको ऐसे आहार का सेवन नहीं करना चाहिए, जिससे कोलेस्‍ट्रॉल का स्‍तर बढ़ सकता है। कोलेस्‍ट्रॉल का स्‍तर बढ़ने से रक्‍तचाप का स्‍तर भी बढ़ता है और इसका असर आपके हृदय पर भी पड़ता है। हृदय को तंदुरुस्‍त बनाए रखने के लिए मौसमी फलों और हरी सब्जियों के साथ ही मछली का सेवन करना चाहिए।
गुस्सा कम करें
अक्‍सर देखा जाता है कि जो लोग ज्‍यादा गुस्‍सा करते हैं, उनका रक्‍तचाप का स्‍तर भी अधिक होता है। गुस्‍से आपके जीवन पर नकारात्‍मक असर डालता है और ऐसे में आप तनाव में भी रहते हैं। तनाव दूर करने और रक्‍तचाप नियंत्रित करने के लिए आप मेडिटेशन और योग का सहारा ले सकते हैं।
एल्‍कोहल से रहें दूर
विशेषज्ञों के मुताबिक ज्‍यादा मात्रा में एल्‍कोहल का सेवन भी आपके ब्‍लड प्रेशर को बढ़ाता है। एल्‍कोहल के सेवन से वजन बढ़ता है, भविष्‍य में यह आपके दिल के लिए भी नुकसानदेह हो सकता है। स्वास्‍थ्‍य और रहन-सहन पर ध्यान देकर आप हृदय संबंधी परेशानियों से बच सकते हैं।
नियमित व्यायाम है लाभकारी
नियमित व्‍यायाम करना आपकी सेहत के लिए फायदेमंद होता है। साथ ही व्‍यायाम आपका उच्‍च रक्‍तचाप और हृदय रोग से भी बचाव करता है। प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट का व्यायाम अवश्य करना चाहिए। यदि आप किसी रोग या समस्या से ग्रस्त हैं तो डॉक्टर से सलाह लें कि किस तरह का व्यायाम आपके लिए सही रहेगा।
वजन को नियंत्रित करें
सामान्‍य से ज्‍यादा वजन उच्‍च रक्‍तचाप का कारण होता है। यदि आपका वजन अधिक है, तो आपको हाई ब्‍लड प्रेशर की समस्‍या हो सकती है। इसलिए जरूरी है कि आप अपने वजन को नियंत्रित रखें, इससे आपके रक्‍तचाप का स्‍तर भी नियंत्रित रहेगा।
उच्‍च रक्‍तचाप आपके शरीर में कई तरह की बीमारियों का कारण बन सकता है। इसलिए आप कुछ जरूरी बातों का ध्‍यान रख अपने रक्‍तचाप को नियंत्रित रखने की कोशिश करें। ऐसा करने से आप हमेशा सेहतमंद बने रहेंगे।
हाईपरटेंशन के कारण :-
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हाईपरटेंशन को अगर इस युग का इनाम कहें तो ये कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। आजकी भाग दौड़ वाली ज़िन्दगी में घर हो या बाहर, चिन्ता, परेशानी व गुस्सा हमारे दिल दिमाग व शरीर के दूसरे भागों को भी प्रभावित करता है। हमारा हृदय हमारे शरीर में रक्त को प्रवाहित करता है। स्‍वच्‍छ रक्त आर्टरी से शरीर के दूसरे भागों में जाता है और शरीर के दूसरे भागों से दूषित रक्‍त हृदय में वापस जाता है। ब्लड प्रेशर खून को पम्प करने की इसी प्रक्रीया को कहते हैं। ब्लड प्रेशर इसीलिए कोई बीमारी नहीं है बल्कि एक नार्मल प्रक्रिया है। लेकिन जब किसी कारणवश यह प्रेशर कम या ज़्यादा होता है, तो इसे हाई ब्लड प्रेशर या लो ब्लड प्रेशर कहते हैं।
आज लोगों में हाईपरटेंशन एक बहुत ही आम समस्‍या है। यह बिना किसी चेतावनी के होती है इसलिए इसे साइलेंट किलर कहते है।
हाइपरटेंशन के कारण दो प्रकार के है:
शारिरिक   खून में कालेस्ट्राल का बढ़ना , मोटापा , आनुवांशिक , अधिक मात्रा में मांसाहारी भोजन करना , अधिक मात्रा में तैलीय भोजन करना , शराब पीना
मानसिक 
संवेदनशील लोगों में चिंता व डर से हृदय गति बढ़ जाती है, जिससे कि आगे जाकर ब्लड प्रेशर भी बढ़ जाता है।
    अकारण परेशान होना
    ज़रूरत से ज्‍यादा काम
    परिवार में या कार्यस्‍थल में तनाव
खान पान से उपचार
हाइपरटेंशन के उपचार के लिए कुछ इस प्रकार के आहार का सेवन किया जा सकता है:
   धनिया, गोभी, नारियल का सेवन करें
    हाइपरटेंशन में शहद भी फायदेमंद है।
    केले, मिठाइयां, आइसक्रीम, अचार, दही बिलकुल ना खाएं।
    खाना बनाने में अदरक या लहसुन का प्रयोग कर सकते हैं।
    रोज़ व्यायाम करें और भरपूर आराम करें।

इसके अलावा कुछ और आदतें अपनाकर आपा हाइपरटेंशन जैसी बला को टाल सकते हैं- 

मोटापे से दूर रहें।  गुस्सा, परेशानी और निगेटिव एनर्जी से दूर रहें। योगा करें।शवासन योग निद्रा, शशांकासन, पद्मासन, पवन मुक्तासन, कूर्मासन, मकरासन, शीतली प्राणायाम, ध्यान और दूसरे आसन भी हाइपरटेंशन जैसी बीमारी में लाभदायी होते है।

उच्‍च रक्‍तचाप से बचाव के लिए जरूरी है नियमित व्‍यायाम :-
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    उच्‍च रक्‍तचाप में राहत देता है नमक का कम सेवन।
    एल्‍कोहल का कम सेवन हाई ब्‍लड प्रेशर से देता है आराम।
    हरी सब्जियों का सेवन आपके शरीर को बनाता है स्‍वस्‍थ।
    मैथी चूर्ण का नियमित सेवन है उच्‍च रक्‍तचाप में फायदेमंद।

आधुनिक जीवनशैली के बीच उच्‍च रक्‍तचाप की समस्‍या आम हो गई है। यह आमतौर पर 40 वर्ष या इससे ज्‍यादा उम्र में होने वाली समस्‍या है। हाई ब्‍लड प्रेशर रोगी के लिए कई प्रकार से हानिकारक हो सकता है, इसलिए जरूरी है कि समय रहते इससे बचाव के उपायों को अपने व्‍यवहार में शामिल किया जाए।
उच्‍च रक्‍तचाप में धमनियों में रक्‍त का दबाव बढ़ जाता है। दबाव की इस वृद्धि के कारण धमनियों में रक्‍त प्रवाह सुचारू बनाये रखने के लिए दिल को अधिक काम करने की आवश्यकता पड़ती है। अधिकतर लोग इस समस्‍या को अनदेखा कर देते हैं, यह स्‍वास्‍थ्‍य के लिए हानिकारक हो सकता है। हाई ब्‍लड प्रेशर में हृदय संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। इस लेख के जरिए हम आपको बताते हैं उच्‍च रक्‍तचाप से बचाव के उपयों के बारे नियमित व्‍यायाम
उच्‍च रक्‍तचाप की परेशानी से बचे रहें, इसके लिए नियमित व्‍यायाम करना चाहिए। नियमित 30 मिनट तक किया गया व्‍यायाम आपको स्‍वस्‍थ्‍य रखता है। और आपका रक्‍तचाप भी सामान्‍य रहता है। यदि व्‍यायाम के लिए समय न निकाल पाए, तो प्रतिदिन कम से कम दो किलोमीटर पैदल चलने की कोशिश करें।
नमक का सेवन कम करें
आपको भोजन में ज्‍यादा नमक खाने की आदत है, तो यह नुकसानदेह साबित हो सकती है। ज्‍यादा नमक खाने से हाई ब्‍लड प्रेशर होने की आशंका बनी रहती है। यदि आप नमक ज्‍यादा खाने की आदत पर तुरंत कंट्रोल नहीं कर पाते, तो धीरे-धीरे इसके सेवन को कम करने की कोशिश करें।
शराब से रहे दूर
आप धूम्रपान और शराब का सेवन करते हैं तो यह आदत भी उच्‍च रक्‍तचाप की समस्‍या के लिए जिम्‍मेदार होती है। एल्‍कोहल के सेवन से दूर रहे और धूम्रपान बंद कर अपने शरीर को स्‍वस्‍थ बनाए।
हरी सब्जियों का सेवन
भोजन में मौसमी और हरी सब्जियों का सेवन शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है। हरी सब्‍जियों से मिलने वाले पोषक तत्‍वों से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और आप स्‍वस्‍थ रहते हैं।
वसा युक्‍त भोजन से परहेज
वसा युक्‍त भोजन शरीर का मोटापा बढ़ाने के साथ ही कई प्रकार के रोगों के पनपने का कारण होता है। मोटे व्‍यक्तियों में उच्‍च रक्‍तचाप की समस्‍या आम होती है। 
उच्‍च रक्‍तचाप से बचाव के अन्‍य उपचार
20 ग्राम प्‍याज के रस में लगभग 10 ग्राम शहद मिलाकर प्रतिदिन पीने से उच्‍च रक्‍तचाप के रोगियों को आराम मिलता है।
मैथी दाने का चूर्ण सुबह-शाम ताजे पानी के साथ लेने से उच्‍च रक्‍तचाप की समस्‍या में राहत मिलती है।
आंवला, सर्पगंधा और गिलाय तीनों का रस निकालकर पीना भी उच्‍च रक्‍तचाप में फायदेमंद रहता है।
मूली और नींबू का सेवन उच्‍च रक्‍तचाप की समस्‍या से ग्रस्‍त रोगियों के लिए अच्‍छा रहता है।
गाजर के एक गिलास जूस में दो से तीन चम्‍मच शहद मिलाकर पीने से हाई ब्‍लड प्रेशर सामान्‍य रहता है।
एक मुठ्ठी किशमिश और सोयाबीन को आहार का हिस्सा बनाकर भी उच्च रक्तचाप से बचा जा सकता है।
इन सबके अलावा उच्‍च रक्‍तचाप के रोगियों को सुबह बिस्‍तर से उठने के बाद किसी पार्क या अन्‍य जगह पर कम से कम दो किलोमीटर की सैर अवश्‍य करनी चाहिए। यह उनके लिए बहुत ही फायदेमंद रहती है।
क्यों होता है लो ब्लड प्रेशर  :-
जब किसी के शरीर में रक्त-प्रवाह सामान्य से कम हो जाता है तो उसे निम्न रक्तचाप या लो ब्लड प्रेशर कहते है। नार्मल ब्लड प्रेशर 120/80 होता है। थोड़ा बहुत ऊपर-नीचे होने से कोई फर्क नही पड़ता। लेकिन, यदि ब्‍लड प्रेशर 90 से कम हो जाए तो उसे लो ब्लड प्रेशर कहते हैं।

http://www.onlymyhealth.com/imported/images/2013/January/28_Jan_2013/kyun-hota-hai-low-blood-pressure.jpgअक्सर लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते। जबकि लो ब्लड प्रेशर में शरीर में ब्लड का दबाव कम होने से आवश्यक अंगों तक पूरा ब्लड नही पहुंच पाता जिससे उनके कार्यो में बाधा पहुंचती है। ऐसे में दिल, किडनी, फेफड़े और दिमाग आंशिक रूप से या पूरी तरह से काम करना भी बंद कर सकते हैं। आइए जानें क्या है लो ब्लड प्रेशर के कारण, लक्षण और उपाय-
क्या हैं लक्षण
 लो ब्लड प्रेशर के मरीजों को आमतौर पर चक्कर आना, आंखों के आगे अंधेरा आना, कुछ पल के लिए बेहोशी आना आदि प्रमुख लक्षण हैं।
    ऐसे मरीज के हाथ-पैर ठंडे रहते हैं।
    हार्ट में मिस्ड बीट्स महसूस की जाती है।
    इस तरह के मरीजों के चेकअप में ब्लड प्रेशर में काफी अंतर होता हैं। अगर मरीज लेटा हो, बैठा हो और बाद में खड़ा हो, तो उसके ब्लड प्रेशर में काफी बदलाव आ जाता है।
क्यों होता है ब्लड प्रेशर कम क्या है इलाज -

लो ब्लड प्रेशर के पीछे कई कारण हो सकते हैं-

1. दिल की बीमारी- ब्लड प्रेशर कम होना दिल की गंभीर बीमारी से जुड़ा होता है, दिल की बीमारी से हार्ट की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे हार्ट पर्याप्त खून को पम्प नहीं कर पाता और हमारा बीपी लो रहने लगता है। दिल के मरीजों और एनीमिया के शिकार लो बीपी को लेकर सावधान रहें।

2. आर्थोस्टेटिक हाइपर- टेंशन टाइपइसमें मरीज को खड़े होने पर चक्कर आते हैं, क्योंकि उसका ब्लड प्रेशर एकदम से 20 पॉइंट नीचे आ जाता है। यह नर्वस सिस्टम पर आधारित होता है। लेकिन कई बार दवाओं के साइड इफेक्ट से या एलर्जी से भी हो सकती है।

इसके अलावा शरीर के अंदरूनी अंगों से खून बह जाने या खून की कमी से, खाने में पौष्टिकता की कमी या अनियमितता से, लंग या फेफड़ों के अटैक से, हार्ट का वॉल्व खराब हो जाने से लो बीपी हो सकता हैं। अचानक सदमा लगने, कोई भयावह दृश्य देखने या खबर सुनने से भी लो बीपी हो सकता है।
सबसे पहले लो ब्लड प्रेशर की आशंका होने पर लेटकर और खड़े होकर दोनों तरीको से बीपी चैक कराए। तुरंत किसी डॉक्टर को दिखाए। अगर किसी दवा से लो ब्लड प्रेशर हो रहा है तो डॉक्टर से सलाह लेकर दवा की मात्रा कम या पूरी तरह बंद कर दे।
पोषक तत्वों से भरपूर आहार लें, अलग-अलग किस्म के फलों, सब्जियों, अनाज, कम फैट वाले मांस और मछली को भोजन में शामिल करें। कई बार थोड़ा-थोड़ा भोजन करें और खाने में आलू, चावल और ब्रेड जैसे ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थों का प्रयोग कम कर दे। स्मोकिंग से परहेज करें, एक्टिव रहें, ज्यादा पसीना निकालने वाले कामों से बचें, धूप में ज्यादा न घूमें और पर्याप्त मात्रा में नमक खाएं और ज्यादा टेंशन न करें तो लो बीपी से बचा जा सकता है।
जब ब्लडप्रेशर लो है तो क्या करें
    तुरंत बैठ या लेट जाएं, मुट्ठियां भींचें, बांधें, खोलें, पैर हिलायें।
    नमक या नमक-चीनी वाला पानी या चाय पीयें। पैरों के नीचे दो तकिए लगाकर लेटें।
    जो लोग पहले से हाई बीपी की दवा खा रहे हैं, वे दवा खाना बंद कर दें।

इन सब के अलावा तुरन्त डॉक्टरी सलाह लें।
  
खतरनाक हो सकता है हाई ब्‍लड प्रेशर:-

क्या है हाई ब्लड प्रेशरhttp://www.onlymyhealth.com/imported/images/2013/April/17_Apr_2013/khatrnak-ho-sakta-hai-high-blood-pressure.jpg

हाई ब्लड-प्रेशर सबसे घातक बीमारियों में है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक दुनिया भर में हर साल हाई ब्‍लड-प्रेशर के चलते 70 लाख मौतें होती हैं। दुनिया का लगभग हर तीसरा व्यक्ति इससे प्रभावित है। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि 2025 तक विश्व में 1.5 बिलियन से ज्यादा लोगों को हाई ब्लड-प्रेशर का शिकार हो सकते हैं। हाई ब्लड-प्रेशर का सीधे तौर पर कोई इलाज नहीं है, बल्कि इसमें जानकारी ही बचाव है। अगर आप अपने खानपान और लाइफस्‍टाइल पर काबू रखें तो इस पर काबू पाया जा सकता है।
 रक्त द्वारा धमनियों पर डाले गए दबाव को ब्लड-प्रेशर या रक्तचाप कहते हैं। हाई ब्लड-प्रेशर किसी भी व्यक्ति को किसी भी उम्र में हो सकता है। यह बीमारी पुरुष व महिला किसी को भी हो सकती है। एक बार अगर आप इस रोग के शिकार हो गए तो इससे निकल पाना मुश्किल होता है। इसलिए सावधानी बरतना ही इसका सबसे बड़ा इलाज है।
हाई ब्लड-प्रेशर को ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है। यह अपने साथ अन्य कई बीमारियां लेकर आता है। जिससे शरीर के अन्य हिस्से भी प्रभावित होते हैं।
पढ़े: योगा दिलाए हाई ब्लड प्रेशर में छुटकारा
आंखों पर 
हाई ब्लड-प्रेशर से आंखों की समस्या हो सकती है। रोगी को आंखों की रोशनी कम होने लगती है उसे धुंधला दिखाई देने लगता है। इसलिए ब्लड प्रेशर की समस्या में आंखों की नियमित जांच की सलाह दी जाती है। 
गुर्दे की समस्या
गुर्दा हमारे शरीर से दूषित पदार्थों को बाहर निकालता है। हाई ब्लड-प्रेशर के कारण किडनी की रक्त वाहिकाएं संकरी या मोटी हो सकती है। इससे किडनी अपना काम ठीक से नहीं कर पाती और खून में दूषित पदार्थ जमा होने लगते हैं। 
हार्ट अटैक का खतरा
हाई ब्लड प्रेशर में सबसे ज्यादा खतरा हृदय को होता है। जब ह्वदय को संकरी या सख्त हो चुकी रक्त वाहिकाओं के कारण पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलता तो सीने में दर्द हो सकता है और अगर खून का बहाव रुक जाए तो हार्ट-अटैक भी हो सकता है। 
मस्तिष्क पर असर

घर बैठे ब्लड प्रेशर का इलाज:-

भागमभाग और तनाव भरी जिंदगी में लोगों में ब्लड प्रेशर (रक्तचाप) की समस्या पेश आ रही है। जितना घातक हाई ब्लड प्रेशर होता है उतना ही नुकसानदेह लो ब्लड प्रेशर। लो ब्लड प्रेशर की स्थिति वह होती है कि जिसमें रक्तवाहिनियों में खून का दबाव काफी कम हो जाता है। सामान्य रूप से 90/60 एमएम एचजी को लो ब्लड प्रेशर की स्थिति माना जाता है।


क्या हैं लक्षण
सुस्ती
कमजोरी
थकान 
लो ब्लड प्रेशर के कारण
 पोषक तत्व रहित भोजन
 कुपोषण
 खून की कमी
 पेट व आंतों, किडनी और ब्लैडर में खून का कम पहुंचना
 निराशा का भाव लगातार बने रहना

कैसे करें इलाज

पिएं चुकंदर का जूस
लो ब्लड प्रेशर को सामान्य रखने में चुकंदर का जूस काफी कारगर होता है। जिन्हें लो ब्लड प्रेशर की समस्या है उन्हें रोजाना दो बार चुकंदर का जूस पीना चाहिए। हफ्ते भर में आप अपने ब्लड प्रेशर में सुधार पाएंगे।

जटामानसी
जटामानसी नामक एक आयुर्वेदिक औषधि भी लो ब्लड प्रेशर का निदान करने में मददगार है। जटामानसी का कपूर और दालचीनी के साथ मिश्रण बनाकर सेवन कर सकते हैं। इसके अलावा जटामानसी के अर्क (पानी के साथ उबालकर) को पीने से भी लो ब्लड प्रेशर की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।

एप्सम नमक से नहाएं
एप्सम नमक (मैग्नीशियम सल्फेट) से स्नान लो ब्लड प्रेशर को ठीक करने का सबसे सरलतम इलाज है। इसके लिए पानी में करीब आधा किलो एप्सम नमक मिलाएं और करीब आधा घंटा पानी में बैठें। बेहतर होगा कि सोने के पहले यह स्नान करें।

भोजन में बढ़ाएं पोषक तत्वों की मात्रा
प्रोटीन, विटामिन बी और सी लो ब्लड प्रेशर को ठीक रखने में मददगार साबित होते हैं। ये पोषक तत्व एड्रीनल ग्रंथि से निकलने वाले हार्मोनों के स्राव में वृद्धि कर लो ब्लड प्रेशर को तेजी से सामान्य करते हैं
यह भी कारगर है लो ब्लड प्रेशर के निदान में

फल और दूध का सेवन
लो ब्लड प्रेशर को दूर करने के लिए ताजे फलों का सेवन करें। दिन में करीब तीन से चार बार जूस का सेवन करना फायदेमंद रहेगा। जितना संभव हो सके, लो ब्लड प्रेशर के मरीज दूध का सेवन करें।

पैदल चलें और साइकिल चलाएं
लो ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए पैदल चलना, साइकिल चलाना और तैरना जैसी कसरतें फायदेमंद साबित होती हैं। इन सबके अलावा सबसे जरूरी यह है कि व्यक्ति तनाव और काम की अधिकता से बचें।

 

सनबेड के जरिए बेहतर टैन पाने के कुछ आसान व असरकारी टिप्स

    सनबेड टैन के लिए चेहरे पर सनस्‍क्रीन का इस्‍तेमाल करें।
    शरीर पर ब्राउन्जर लगाने से भी सनबेड टैन में होता है फायदा।
    सनबेड टैन के दौरान आईकप लगाकर आंखों की हिफाजत करें।
    बेड से उठने के बाद अपनी त्वचा पर माश्‍चराइजर लगाना न भूलें।

सनबेड पर टैनिंग लेने से आपको बिना टैन लाइन के समान टैन मिल जाता है। हालांकि सनबेड टैन से आपके शरीर के कुछ हिस्सों पर सफेद निशान भी पड़ सकते हैं, आमतौर पर इस तरह के सफेद निशान बनने की समस्‍या सभी के साथ नहीं होती। अच्छा सनबेड टैन पाने के लिए आपको कुछ जरूरी बातों पर ध्यान देना चाहिए। इससे आपकी त्वचा की समान रंगत बनी रहेगी।

http://www.onlymyhealth.com/imported/images/2013/September/11_Sep_2013/sunbed-300x450.jpgचेहरे पर सनस्क्रीन लगाएं

अपने चेहरे पर सनस्क्रीन लगाएं। आपके चेहरे की त्वचा शरीर के अन्य हिस्सों के मुकाबले अधिक संवेदनशील होती है। चेहरे की त्वचा के काले और लाल होने का खतरा बाकी शरीर के मुकाबले अधिक होता है। अपने चेहरे पर समान टैनिंग के लिए जरूरी है कि आप उसे बचाकर रखें। टैनिंग सप्लीमेंट कुछ खास मददगार साबित नहीं होते। सनस्क्रीन लगाने के बाद अपने हाथों को अच्छी तरह धो लें।

फायदेमंद है ब्राउन्जर का इस्तेमाल
ब्राउन्जर का इस्तेमाल करें। इसे व्यवस्थित तरीके से लगाएं। थोड़ा ब्राउन्जर अपने हाथों पर लें और इसे अपनी टांगों और छाती पर लगाएं। इसके साथ ही कमर और कंधों पर भी इसका इस्तेमाल करें। आपको अपनी बाजुओं पर सबसे आखिरी में ब्राउन्जर का इस्तेमाल करना चाहिए।

हाथों को रखें साफ
अपने हाथों को अच्छी तरह पोंछ लें। याद रखें कि अगर आपने अतिरिक्‍त ब्रान्जर नहीं हटाया, तो आपकी उंगली के पोर और हथेलियां काली पड़ सकती हैं।

आंखों को बचाएं
आंखों के ऊपर आईकप लगाएं। यह बहुत जरूरी है क्योंकि इससे आपकी आंखें सुरक्षित रहती हैं। आपकी आंखों के आसपास की त्वहचा काफी संवेदनशील होती है और उन्हें अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करने की आवश्यकता होती है। अगर आप इस हिस्सेस की त्वपचा की सही देखभाल नहीं करेंगे, तो इससे आपके चेहरे की रंगत असमान बनी रहेगी।

अधिक दबाव अच्‍छा नहीं
बेड पर आराम करें। टेनिंग बेड से आपके शरीर पर सफेद निशान पड़ सकते हैं। जहां भी आपके शरीर से बेड पर अधिक दबाव पड़ता है, शरीर के उस हिस्से पर निशान पड़ने की आशंका रहती है। आपको आराम से लेटने की जरूरत होती है, ताकि आपके शरीर के किसी एक खास हिस्से पर अधिक जोर न पड़े। आपकी रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से और कंधे की हड्डी पर अधिक जोर पड़ने का खतरा हमेशा बना रहता है। तो आपको बार-बार उन पर अधिक जोर पड़ने से रोकना होता है।

करवट बदलें
उठने से केवल पांच मिनट पहले घूम जाएं। इस दबाव के धब्बे को कम करने और आप अन्यथा सफेद के रूप में प्रकट हो सकता है कि क्रीज से बचने में मदद मिलेगी

माश्‍चराइजर लगाएं त्‍वचा दमक उठेगी
जब आप बेड से उठें तो अपनी त्वचा पर माश्चराइजर लगाएं। अपनी त्वचा को किसी भी प्रकार के नुकसान से बचाने के लिए काफी मात्रा में लोशन लगाएं। इससे आपकी त्वचा रक्तिम और रंगहीन नहीं लगेगी। इसके साथ ही आप अपनी त्व‍चा को पहले से अधिक साफ और टोन्ड देख पाएंगे।

कम से कम 48 घंटे बाद ही दूसरी बार टैन लीजिए। बहुत जल्‍दी-जल्‍दी टैन लेने से आपकी त्‍वचा को नुकसान पहुंच सकता है।

टैनिंग स्किन टैन से राहत पाने और त्‍वचा में चमक लाने के आसान घरेलू उपाय



नाजुक त्वचा की देखभाल के प्राकृतिक उपाय

नाजुक त्वचा की देखभाल के प्राकृतिक उपाय
नाजुक त्वचा की देखभाल करना आसान काम नहीं है। ऐसी त्वचा पर कोई भी प्रोडक्ट इस्तेमाल करने से पहले उसकी पूरी जानकारी होना जरूरी है। अगर आपकी त्वचा भी ऐसी है तो उसकी देखभाल के लिए क्यों ना कुछ प्राकृतिक उपाय अपनाया जाए।


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कुछ खास व बेहतरीन प्रकृतिक उपायों की मदद से आपके लिए नाजुक त्वचा की देखभाल करना आसान हो सकता है। इन उपायों के नियमित प्रयोग से कुछ ही दिनों में त्वचा चमकदार व खूबसूरत बनेगी। जानें हमारे साथ ऐसे ही कुछ आसान प्रकृतिक उपायों के बारे में-


क्लींजिंग ऑयल
सेंसटिव स्किन को साफ करने के लिए ऑलिव ऑयल, कैस्टर ऑयल को मिलाएं। इस मिश्रण को हथेली पर रगड़ कर गर्म करें और चेहरे पर लगाएं। इसके बाद भीगे कपड़े को गर्म पानी में भीगोएं और कपड़े को अच्छे से निचोड़ कर चेहरे पर तब तक रखें जब तक कपड़ा ठंडा ना हो जाए। इस प्रक्रिया को एक बार से फिर से दोहराएं और पाएं नर्म व चमकदार त्वचा।

शहद मास्क
शहद त्वचा के लिए काफी फायदेमंद होता है। शहद की थोड़ी सी मात्रा को त्वचा पर लगाएं और दस मिनट बाद चेहरे को धो लें। इससे त्वचा स्मूद व सॉफ्ट रहेगी।

अंडे का मास्क
नहाने से पहले अंडे में ऑरेंज जूस व ऑलिव ऑयल मिलाएं उसमें गुलाब जल व नींबू की कुछ बूंदे भी मिला लें। इस मिश्रण को हर सुबह 15 मिनट के लिए चेहरे पर लगाएं।

चॉकलेट मास्क
त्वचा संबंधी समस्याओं से बचने के लिए चॉकलेट का प्रयोग कर सकते हैं। चॉकलेट मास्क के प्रयोग से चेहरे में चमक बनी रहती है और झुर्रियां व स्ट्रेच मार्क जैसी समस्या दूर रहती है। कोकोआ पाउडर में शहद व मैश किया हुआ एवोकाडो मिलाकर एक पेस्ट बनाए। इस मास्क को चेहरे व शरीर के अन्य हिस्सों पर लगाएं और 15-20 मिनट बाद धो लें।

स्ट्रांग साबुन से बचें
सेंसटिव स्किन के लिए स्ट्रांग साबुन के प्रयोग से बचना चाहिए। कभी भी साबुन का चुनाव उसकी खूशबू से नहीं करना चाहिए। इस तरह के साबुन त्वचा के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं।

आम का मास्क
पके हुए आम के गुदे में चीनी मिलाएं और इस मिश्रण को चेहरे पर लगाएं। 15-20 मिनट के बाद चेहरे को धो लें। इसके बाद किसी भी तरह के लोशन का प्रयोग करने से बचना चाहिए। आम से बने मास्क का प्रयोग चेहरे में जान डाल देता है।

अंडे, शहद व ऑलिव ऑयल मास्क
एक अंडे में शहद व ऑलिव ऑयल मिलकार पेस्ट तैयार करें। इसमें गुलाब जल की कुछ बूंदे डाल लें। इसे 15-20 मिनट के लिए चेहरे पर लगाएं फिर सामान्य पानी से धो लें।

केले का मास्क
पके हुए केले को मैश करके पूरे चेहरे पर अच्छे से लगाएं। इसे लगाने के बाद दस मिनट तक बैठें उसके बाद हल्के गर्म पानी से चेहरे को दो लें।

बादाम व दूध का मास्क
रात भर भीगे हुए 3-4 बादाम को आधे कप दूध में मिलाकर अच्छे से पीस लें। इस पेस्ट को फ्रिज में ठंडा होने के लिए रख दें। रात को सोने से पहले इस मिश्रण को लगा लें और अगले दिन सुबह उठकर साफ पानी से चेहरे को धो लें।

ऑरेंज पील फेस मास्‍क
संतरे के छिलके को धूप में कम से कम दो दिन सुखा कर उसका पाउडर बना लीजिये। अब गैस पर मध्‍यम आंच पर एक कप पानी उबालें, उसमें चीनी डाल कर उसे आधा होने तक पकाएं। अब इसमें एक चम्‍मच सूखा संतरे के छिलके वाला पाउडर डालें और चेहरे पर लगाएं। 10 मिनट बाद जब यह सूख जाए तब इसे ऊपर की ओर निकाले। इससे आपके ब्‍लैकहेड्स और डेड स्‍किन दोनों ही साफ होगें।

दही से मसाज
नाजुक त्वचा की देखभाल के लिए दही एक अच्छा विकल्प हो सकता है। इसमें प्रोबायोटिक तत्‍व होते हैं जो त्‍वचा को साफ कर के उसे अंदर से निखारता है। हर रोज दही से अपने चेहरे की मसाज करें और फर्क महसूस करें।

अब किसी भी उम्र में पाएं स्वस्थ त्वचा

अब किसी भी उम्र में पाएं स्वस्थ त्वचा
प्रदूषण, धूल-मिट्टी, तनाव, धूप और दौड़भाग न जाने कितनी चीजों का सामना हमारी त्वचा को प्रतिदिन करना पड़ता है। ऐसे में समय रहते उचित देखभाल न करने से तरह-तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
http://www.onlymyhealth.com/imported/images/2013/July/29_Jul_2013/ab-kisi-bhi-umar-mein-payein-swasth-twacha-300x450.jpgहर उम्र में खूबसूरत व आकर्षक दिखने के लिए त्वचा की देखभाल के साथ-साथ स्वस्थ खान-पान भी जरूरी है। जवां दिखने के लिए जरूरी है कि आप अपनी त्वचा की जरूरतों को समझें और उन्हें पूरा करने की कोशिश करें। कुछ खास व आसान उपायों के जरिए आप हमेशा खूबसूरत व जवां दिख सकती हैं। जानें उन उपायों के बारें में- 


सूर्य की रोशनी से बचें
धूप से स्किन को कई तरह से नुकसान पहुंचता है। इस मौसम की तेज धूप भी आपका रंग चुरा सकती है। स्किन टैन होना, झुर्रियां, स्पॉट् व अन्य त्वचा संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए बाहर निकलने से पहले सनस्क्रीन लगाना ना भूलें। सुबह दस से चार के बीच की धूप में निकलने से बचना चाहिए क्योंकि इस समय सूर्य की रोशनी काफी तेज होती है।

चेहरे की सफाई है जरूरी
हफ्ते में एक बार चेहरे की क्लीजिंग, टोनिंग, स्क्रबिंग व मसाज जरूरी है। इसे चेहरे पर जमा डेड स्किन हट जाते हैं और रोम छिद्र खुल जाते हैं जिससे चेहरे में चमक आ जाती है। आप चाहें तो पार्लर या घर पर इस आसानी से कर सकती हैं। 

नमी के लिए पीएं पानी
त्वचा को प्राकृतिक रूप से खूबसूरत बनाना हो तो प्रतिदिन 8-10 लीटर पानी पीएं । इससे त्वचा में कुदरती नमी बनी रहेगी और त्वचा चिपचिपी नजर नहीं आएगी। साथ ही यह शरीर को स्वस्थ और त्वचा को हाईड्रेटेड रखने में मदद करता है।

नाइट क्रीम लगाना ना भूलें
नाइट क्रीम लगाने से त्वचा सवस्थ व चमकदार बनी रहती है। और यह आपकी त्वचा की प्राकृतिक मरम्मत में भी सहायक होता है। नियमित रूप से मॉस्चराइजर का उपयोग झुर्रियों को आने से रोकता है और आपकी त्वचा को कोमल और उज्जवल बनाए रखने में सहायता करता है।

नींद पूरी करना जरूरी है
पर्याप्त मात्रा में नींद न लेने से भी त्वचा तनावपूर्ण और थकी हुई दिखती है। नियमित तौर पर पर्याप्त नींद आपकी त्वचा को स्वस्थ और जवान रखने में सहायक है। जब आप सोते हैं तो आपका शरीर पुनर्जीवन की प्रक्रिया से होकर गुजरता है और अधिक स्वस्थ त्वचा कोशिकाएं उत्पन्न करता है जो झुर्रियों और बुढ़ापे को रोकता है।

आहार का रखें ध्यान
जिस तरह हमारे शरीर को ऑक्सीजन की जरूरत है ठीक उसी तरह हमारी त्वचा के लिए विटामिन की आवश्यकता होती है। कुछ खास तरह के विटामिन आपकी त्वचा की चमक को बरकरार रखने में मदद करता है जैसे विटामिन सी, विटामिन ए, विटामिन बी, विटामिन ई आदि।

त्वचा से दाग-धब्बे हटाने के प्राकृतिक उपाय त्वचा से दाग-धब्बे हटाने के प्राकृतिक उपाय
http://www.onlymyhealth.com/imported/images/2013/July/26_Jul_2013/beauty-treatment-300x450.jpgचेहरे के दाग-धब्बे आपकी सुंदरता को बिगाड़ देते हैं। इसके लिए बार-बार डॉक्टर या कॉस्मेटिक का ज्यादा प्रयोग करना नुकसानदेह हो सकता है। ऐसे में कुछ प्राकृतिक उपायों की मदद से इनसे छुटकारा पाया जा सकता है। ये उपाय बिना किसी दुष्प्रभाव के जल्द ही असर दिखाने में कामयाब होते हैं। जानें इन खास व सरल उपायों के बारे में-

बड़े काम का नींबू:- 
चेहरे के दाग-धब्बे वाले हिस्से पर नींबू का रस लगाएं। उसे तीस मिनट तक रहने दें उसके बाद साफ पानी से चेहरे को धो लें। नींबू का रस चेहरे के दाग-धब्बों को हटाने में मदद करता है। दो महीने तक इस प्रक्रिया को अपनाने के बाद जल्‍द ही आपको फर्क नजर आने लगेगा।

    एक नींबू के रस में थोड़ी सी चीनी को घोल लें। इस मिश्रण को कॉटन के टुकड़े की मदद से दाग वाले हिस्से पर लगाएं। आधे घंटे बाद सामान्य पानी से चेहरे को धो लें।


    नींबू के रस में शहद मिलाएं और पेस्ट को अच्छे से मिक्स करें। इस मिश्रण को चेहरे प्रभावित क्षेत्रों पर लगाएं। आधे घंटे बाद चेहरे को धो लें। नींबू के रस से त्वचा शुष्क हो सकती है लेकिन शहद से त्वचा को मॉशचरराइजर मिलता है जो त्वचा को क्षतिग्रस्त होने से बचाता है।


    नींबू के रस व दही का पेस्ट बनाएं। आप इस पेस्ट को चेहरे के स्पॉट वाले हिस्से पर रगड़ सकते हैं या मास्क की तरह भी लगा सकते हैं। 20-30 मिनट के बाद चेहरे को सामन्य पानी से धो लें।

स्‍ट्राबेरी है कमाल   
स्ट्राबेरी व छिले हुए एप्रिकॉट को मैश करके पेस्ट बना लें। इस मिश्रण को नियमित रुप से चेहरे के स्पॉट वाली जगह पर लगाने से जल्द ही असर दिखायी देगा। ध्यान रहें इस मिश्रण को 15 मिनट के बाद धो लें।     

चावल और तरबूज से निखारें :-कच्चे चावल को अच्छे से पीस कर तरबूज के रस में मिलाकर एक मास्क तैयार करें। इसे चेहरे पर लगाएं और पंद्रह मिनट बाद सामान्य पानी से चेहरे को धो लें।


अनानास करे दाग धब्‍बों का नाश
अनानास के रस को कॉटन की मदद से स्पॉट पर लगाएं। प्रतिदिन इसके प्रयोग से चेहरा दाग रहित हो जाएगा।


रूप निखारे पपीता
पीपते के गुदे को चेहरे के दाग वाले हिस्से पर हल्के हाथों से रगड़ें। 15-20  मिनट के लिए चेहरे को ऐसे ही छोड़ दें। फिर हल्के गुनगुने पानी से चेहरे को साफ कर लें। ऐसा करने से चेहरे साफ व चमकदार बनेगा।

एलोवरा है अमृत:-  एलोवेरा जैल को चेहरे के दाग-धब्बे वाले हिस्से पर लगाएं। इसे चेहरे पर 45 मिनट के लिए छोड़ दें। एक महीने बाद आपको असर दिखाना शुरु हो जाएगा।


कैस्‍टर ऑयल का कमाल
:-   कैस्टर ऑयल (अरंडी का तेल) को चेहरे पर लगाने से दाग-धब्बों से छुटकारा मिलता है। इसके प्रयोग से दाग धीरे-धीरे हल्के पड़ने शुरु हो जाते हैं।


जादू करे आलू:-  आलू के टुकड़े को दाग वाले हिस्से पर लगा सकते हैं। इसके अलावा मैश आलू, नींबू का रस, दूध की थोड़ी मात्रा व शहद को मिलाकर मास्क बनाएं। इसे स्पॉट वाली जग पर लगाएं। धीरे-धीरे दाग हल्के नजर आने लगेंगे।


घर पर कैसे करें त्वचा की देखभाल

घर पर कैसे करें त्वचा की देखभाल
त्वचा की देखभाल का जिक्र आते ही अक्‍सर लोग बाजार के महंगे उत्पादों के बारे में ही सोचते हैं। लेकिन क्या आपने कभी घर पर प्राकृतिक चीजों से बने सौंदर्य प्रसाधनों के प्रयोग के बारे में सोचा है। ये सौंदर्य प्रसाधन बिना किसी साइड इफेक्ट के आपको बेदाग निखार देते हैं।


http://www.onlymyhealth.com/imported/images/2013/July/19_Jul_2013/skin-care-at-home.jpg300x450.jpgप्रकृति के कण-कण में खूबसूरती बिखरी हुई है। और इसी प्रकृति की गोद से निकले प्राकृतिक उपाय आपको कितना खूबसूरत बना सकते हैं। खूबसूरती पाना एक सफर है और इसके लिए कदम-दर-कदम बढ़ना होता है।

त्वचा की देखभाल के लिए सबसे पहला स्टेप होता है चेहरे की सफाई यानी की क्लीजिंग। हर दिन त्वचा धूल-मिट्टी व प्रदूषण के संपर्क में आती है, जो केवल पानी से साफ नहीं हो पाती। अगर त्वचा को हर दिन क्लीन न की जाए, तो रोम छिद्र बंद हो जाते हैं। धूप व प्रदूषण के कारण स्किन बेजान, टैन व झुरिर्यों युक्त हो जाती है। जानिए हमारे साथ घर पर रोजाना क्लीजिंग, टोनिंग व मॉइश्चराइजिंग करने के आसान टिप्स।  






क्लीजिंग
चेहरे को प्राकृतिक रुप से साफ करने के लिए घर पर बने क्लींजर का प्रयोग कर सकती हैं। खीरे का रस को थोड़े से दूध के साथ मिलाकर चेहरे पर लगाएं। यह नेचरल क्लींजर का काम करेगा। इसके अलावा, केले को मैश करके लगभग 20 मिनट के लिए चेहरे पर लगाकर रखें। यह ड्राई स्किन के लिए बेहद फायदेमंद है।

टोनिंग
क्लीजिंग के बाद त्वचा को टोनिंग अर्थात पोषण की जरूरत होती है। टोनिंग से त्वचा में मौजूद अतिरिक्त तेल का स्राव नियंत्रित होता है और त्वचा में धूल-मिट्टी के कारण जमा गंदगी भी साफ होती है। त्वचा के प्रकार को देखते हुए त्वचा की क्लींजिंग और टोनिंग करें। इस के लिए पपीते और खीरे, टमाटर का जूस व केले का पल्प भी लगा सकती हैं।

स्क्रबिंग
त्वचा की सफाई के लिए स्क्रबिंग भी अच्छा उपाय है। यह त्वचा की बाहरी मृत परत को यह आसानी से हटाता है। साथ ही अतिरिक्त सीबम के बहाव के कारण बंद हुए रोमकूपों को खोलता है ताकि ब्लैकहेड्स न बनने पाएं। सीबम त्‍वचा का प्राकृतिक मॉश्‍चराइजर होता है। स्क्रबिंग से त्वचा का रक्तसंचार व लचीलापन बढ़ता है। ऑरेंज पील पाउडर में कुछ बूंदे एसेंशियल ऑयल व दूध की मिलाकर तैयार पेस्ट से चेहरे की स्क्रबिंग करें। इससे त्वचा साफ-सुंदर हो जाएगी।

मॉश्चरराइजर
त्वचा की नमी को बरकरार रखने के लिए मॉश्चरराइजर का इस्तेमाल जरूरी है। यह त्वचा को कोमल और कांतिमय बनाए रखता है। एवोकाडो, शहद, नींबू का रस व दही को एकसाथ ब्लेंड करें। इस मिश्रण को अच्छी तरह फेंटें जिससे यह क्रीम की तरह हो जाए। आधे घंटे के लिए फ्रिज में रखें। फिर इससे चेहरे और गर्दन की मसाज करें। यह त्वचा की नमी को बरकरार रखने के साथ ही उसे चिकना और कांतिमय बनाए रखता है।

फेस पैक
रूखी, बेजान त्वचा में निखार लाने और उसे चुटकियों में खूबसूरत बनाने के लिए फेस पैक से बेहतर विकल्प कोई और नहीं है। यह न सिर्फ त्वचा को भीतर से खूबसूरत बनाता है, बल्कि उसे साफ करने में भी मदद करता है। एक बाउल में टमाटर का पेस्ट और चार-पांच बूंद नीबू का रस डालकर अच्छी तरह से मिलाएं। अपनी उंगलियों की मदद से इस मिश्रण को चेहरे पर लगाएं और हल्के हाथों से चेहरे पर मसाज करें। इस फेस पैक को चेहरे पर 15 मिनट तक लगा रहने दें और उसके बाद चेहरा साफ कर लें। इस फेस पैक से चेहरे की त्वचा में कसाव आएगा और त्वचा मुलायम व चमकदार बनेगी।

स्वास्थ्य » सौंदर्य » त्‍वचा की देखभाल होठों की झुर्रियों के कारण व बचाव

त्‍वचा की देखभाल
होठों की झुर्रियों के कारण व बचाव
झुर्रियां या लकीरों का दिखाना बढ़ती उम्र की निशानी मानी जाती है। इसके अलावा बुरी आदतें व दोषपूर्ण जीवनशैली भी इन समस्याओं को बढ़ा देती हैं। ज्यादातर महिलाएं मुंह व होठों  के आसापास की त्वचा पर लकीरों की समस्या से परेशान रहती हैं।

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होठों पर झुर्रियां व लाइनों के कई कारण हो सकते हैं। इन कारणों के उपायों के बारे में जानने से पहले एक नजर उन कारणों पर डाल लेते हैं-  

धूम्रपान
धूम्रपान की आदत ना सिर्फ फेफड़ों के लिए हानिकारक होती है बल्कि यह आपके होठों की त्वचा को भी नुकसान पहुंचाती है। धूम्रपान से कोलेजन व इलेस्टिन ( वे तत्व जो त्वचा को सहारा व संरचना प्रदान करते हैं) क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। इसलिए धूम्रपान की आदत को जल्द से जल्द छोड़ने की कोशिश करें।

च्युइंग गम
सुनने में च्युइंग गम खाने की आदत भले ही बुरी ना लगती हो लेकिन ज्यादातर लोग स्मोकिंग के बाद च्युइंग गम खाते हैं जो  होठों पर झुर्रियों का कारण बन सकती है। च्युइंग गम खाने से होठों के आसपास की त्वचा या जॉ लाइन क्षतिग्रस्त होने लगती हैं।    

स्ट्रॉ का प्रयोग
जब आप कोई भी ड्रिंक स्ट्रॉ से पीते हैं तो आपके होठों का आकार सिगरेट पीने के समान हो जाता है। आपने देखा होगा जो लोग सिगरेट पीते हैं उनके होठों पर या इसके आसपास झुर्रियां व लाइनें दिखाई देने लगती हैं। इसी प्रकार स्ट्रॉ का प्रयोग करने वाले लोगों में भी यह समस्या हो सकती है।  

होठों पर झुर्रियों व लाइनों की समस्या से बचने के लिए खास देखभाल की जरूरत होती है। जानें होठों की झुर्रियों से बचने के आसान उपायों के बारे में-

    प्रतिदिन 5 से 6 गिलास पानी पिएं। पानी न सिर्फ शरीर में पानी की पूर्ति करता है बल्कि होंठों की नमी भी बनाए रखता है।
    मौसम में आ रहे बदलाव का सबसे ज्यादा असर होंठों पर पड़ता है, इसलिए अच्छे क्वालिटी का लिप बाम दो से तीन बार लगाएं।
    यदि होठ स्मोकिंग से काले पड़ चुके हैं तो नींबू लगाइये क्योंकि यह प्राकृतिक ब्लीच होता है। जो कि त्वचा का रंग साफ करेगा।
    बहुत लोगों को दांतों से होंठ काटने या चबाने की आदत होती है। इस आदत को बदलें।
    जब आप लिपस्टिक लगाती हैं तब जिस तरह से अपने होठो को बाहर की ओर निकालती हैं, बिल्कुसल वैसा ही रोज करें। ऐसा दिन में 20 बार करें जिससे आपके होठ भरे-भरे लगें।
    देशी गुलाब की भीगी हुई पत्तियों को होठों पर कुछ देर तक नियमित मलें। इससे आपके होठ नेचुरल गुलाबी हो जाएंगे।
    रात को सोने से पहले होंठों पर क्रीम, मलाई, मक्खन या देशी घी हल्के हाथों से कुछ देर मलें। होंठों की त्वचा इससे एक जैसी होकर मुलायम बनी रहेगी।

स्वास्थ्य » सौंदर्य » त्‍वचा की देखभाल त्‍वचा के साथ न करें ये पांच गलतियां

 त्‍वचा के साथ न करें ये पांच गलतियां
हर किसी का सपना होता है एक परफेक्‍ट स्किन पाना। हम सब चाहते हैं कि हमारी त्‍वचा कोमल और मुलायम हो। वह पूरी तरह से बेदाग़ हो। इसके लिए हम कई प्रयास भी करते हैं। लेकिन, कई बार हमारी ये कोशिशें अपने अंजाम तक नहीं पहुंच पातीं। इसकी वजह यह होती है कि हम अपनी त्‍वचा को लेकर कुछ गलत और गैरजरूरी फैसले करते हैं।


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आप किसी भी जानकार से पूछ सकती हैं। वह आपको यही बताएगा कि अगर महंगे और उत्तम क्‍वालिटी के स्किन प्रोडक्‍ट्स को सही तरीके से इस्‍तेमाल न किया जाए तो वे फायदे के बजाय नुकसान दे सकते हैं। क्‍या आप उन उत्‍पादों को सही तरीके से इस्‍तेमाल करते हैं। शायद नहीं... हम भले ही कितनी ही सावधानियां क्‍यों न बरतें, त्‍वचा सम्‍बन्‍धी उत्‍पादों को इस्‍तेमाल करते समय हमसे अक्‍सर गलतियां हो ही जाती हैं। और उसका खामियाजा हमारी त्‍वचा को भुगतना पड़ता है। आइए जानते हैं ऐसी त्‍वचा सम्‍बन्‍धी पांच गलतियां जो हम अक्‍सर दोहराते हैं-


माश्‍चराइजर क्‍या है
अधिकतर लोग यही सोचते हैं कि माश्‍चराइजर हमेशा अच्‍छे होते हैं। वे मानते हैं कि कोई भी मौसम हो या आपकी त्‍वचा किसी भी प्रकार की हो, माश्‍चराइजर आप कभी भी इस्‍तेमाल कर सकते हैं। लेकिन, यह बात हर बार सही नहीं होती। माश्‍चराइजर आपकी त्‍वचा को अस्‍‍थायी रूप से मोटा बना सकते हैं। माश्‍चराइजर लगाने से त्‍वचा से पानी बाहर नहीं आ पाता जिससे आपकी त्‍वचा मोटी लग सकती है। अगर आपकी त्‍वचा ऑयली है या आपको मुंहासों की समस्‍या होती रहती है, तो आपको माश्‍चराइजर की जरूरत नहीं है क्‍योंकि इससे आपकी त्‍वचा और ऑयली हो सकती है। आपकी त्‍वचा को रूखापन दूर करने के लिए माश्‍चराइजर की जरूरत होती है। चेहरे के कुछ हिस्‍से को ही माश्‍चराइजर की जरूरत होती है। तो इसका ओवरडोज आकपे लिए अच्‍छा नहीं।



सनस्‍क्रीन
हम तभी सनस्‍क्रीन का इस्‍तेमाल करते हैं जब हमें धूप में बाहर निकलना होता है। लेकिन, इसके अलावा भी सनस्‍क्रीन काफी मददगार हो सकती है। जब भी घर से बाहर निकलें सनस्‍क्रीन का इस्‍तेमाल जरूर करें। भले ही मौसम कैसा भी हो। सूर्य की अल्‍ट्रावॉयलेट किरणें किसी भी मौसम में आपको नुकसान पहुंचा सकती हैं। ये आपकी त्‍वचा के लिए भी नुकसानदेह होती हैं। यहां तक कि जब आप अपनी कार में होते हैं, तब भी ये किरणें आपको काफी नुकसान पहुंचा सकती हैं। सूर्य की किरणें आपकी त्‍वचा के काफी अंदर तक समा जाती हैं जिससे डीएनएन को भी नुकसान पहुंचता है। सन बर्न के कारण आपको स्किन कैंसर भी हो सकता है।


सफाई पसंदगी
अगर आपको अपनी त्‍वचा को बार-बार साफ करने की आदत है, तो यकीन ज‍ानिए आप अपनी त्‍वचा को नुकसान ही पहुंचा रहे हैं। त्‍वचा को साफ करना अच्‍छी आदत है, लेकिन कई बार इससे फायदा कम और नुकसान अधिक होता है, खासतौर पर अगर आपका साबुन काफी हार्ड है तो। साबुन आपके चेहरे से धूल-मिट्टी और एक्‍स्‍ट्रॉ ऑयल तो हटाते ही हैं, लेकिन कई बार आपकी त्‍वचा को काफी रुखा कर जाते हैं। इसके बाद आप उसे साफ करने के लिए एल्‍कोहल आधारित क्‍लींजर का इस्‍तेमाल करती हैं तो इससे आपकी त्‍वचा को और अधिक नुकसान पहुंचता है। त्‍वचा विशेषज्ञ आपको हलके क्‍लींजर इस्‍तेमाल करने की सलाह देते हैं।


मेकअप लगाकर सोना
कभी भी यह गलती न करें। रात को सोने से पहले सारा मेकअप उतार कर सोयें। मेकअप में धूल-मिट्टी और ऑयल फंसा हुआ हो सकता है और सारी रात इसे लगाकर सोने से ये कण चेहरे के रोमछिद्रों में फंस सकते हैं। इसके साथ ही मेकअप में कुछ ऐसे पदार्थ भी हो सकते हैं, जो कुछ समय के बाद आपकी त्‍वचा में जलन पैदा कर सकते हैं। तो, इसलिए सोने से पहले मेकअप उतारना एक अच्‍छी आदत है। और आपको यह जरूर करना चाहिए।


अपने चेहरे को गलत तरीके से धोना
आपको अपना चेहरा हमेशा सही तरीके से धोना चाहिये। अपना चेहरा हमेशा अपने बाल धोने के बाद धोयें। बाल धोते समय को कंडीशनर या बाल धोने के उत्‍पाद चेहरे को एक बार दोबारा 'धो' देते हैं। कंडीशनर से आपको काफी नुकसान हो सकता है। और साथ ही कुछ उत्‍पादों में नारियल तेल होता है। इससे आपके चेहरे पर मुंहासों की समस्‍या हो सकती है। तो पहले अपने बाल धोयें और उसके बाद अपना चेहरा धोयें।

स्वास्थ्य » सौंदर्य » त्‍वचा की देखभाल कैसे करें स्केलडेड स्किन सिंड्रोम का उपचार

त्‍वचा की देखभाल कैसे करें
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स्केलडेड स्किन सिंड्रोम एक प्रकार का त्वचा संक्रमण है। इसमें त्वचा क्षतिग्रस्त हो जाती है और उतरने लगती है। स्टाफ संक्रमण के कारण उत्पन्न विषाक्‍त पदार्थ, स्केलडेड स्किन सिंड्रोम का कारण बन सकते हैं। यह रोग अक्सर नवजात को बुखार, दाने और कभी-कभी फफोले जैसे लक्षणों के साथ होता है। इस संक्रमण का उपचार संभव है। इस लेख को पढ़ें और स्केलडेड स्किन सिंड्रोम और इसके उपचार के बारे में जानें।


स्केलडेड स्किन सिंड्रोम
स्केलडेड स्किन सिंड्रोम एक संक्रमण है जो स्टाफीलोकोकस बैक्टीरिया की विकृति के कारण होता है। यह बैक्टीरिया विष का उत्पादन करता है। इस विष के त्वचा क्षतिग्रस्‍त हो जाती है। इस स्थिति में त्वचा पर छाले हो जाते हैं। छालों के फूटने पर त्वचा लाल हो जाती है और ऐसी लगती है कि जैसे वह जल गई हो। स्केलडेड स्किन सिंड्रोम पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में सबसे ज्‍यादा पाया जाता है।


स्केलडेड स्किन सिंड्रोम की शुरूआत स्थानीय स्टाफिलोकोकल संक्रमण से होती है। यह संक्रमण दो प्रकार के विष (एपिडर्मोलिटिक विषाक्‍त पदार्थों ए और बी) के कारण उत्पन्न होता है। यदि आपके बच्‍चे के शरीर पर जले होने जैसे निशान दिखाई दें तो यह चिंताजनक हो सकता है। यदि यह बिगड़ जाये तो स्केलडेड स्किन सिंड्रोम जीवन के लिए भी घातक साबित हो सकता है। इसलिए इस रोग का उपचार तत्काल कराना चाहिए। बच्‍चों के साथ ही यह रोग वयस्‍कों में गुर्दे की विफलता और प्रतिरक्षा क्षमता में कमी के कारण हो सकता है।

स्केलडेड स्किन सिंड्रोम के लक्षण


स्केलडेड स्किन सिंड्रोम के लक्षण निम्‍न लिखित हैं-

- फफोले
- बुखार
- त्वचा का छिलना या गिरना (छूटना या विशल्कन)
- त्वचा में दर्द
- त्वचा में लालिमा (एरथीम), यह शरीर के अधिकांश भाग में फैल जाती है।


 स्केलडेड स्किन सिंड्रोम का उपचार
स्केलडेड स्किन सिंड्रोम के उपचार के लिए मरीज को अस्पताल में रहना पड़ता है। स्टाफिलोकोकल संक्रमण को खत्म करने के लिए नसों में एंटीबायटिक दवाओं को देने की आवश्यकता होती है। इस रोग के उपचार के लिए फ्लोक्लोक्सिसलीन, पेनेसिलिनेस तथा स्टैफलोकोकल जैसे एंटीबायटिक दी जाती हैं। समय बीतने के बाद दवाओं को बदला जा सकता है। रोगी की स्थिति में सुधार होने पर चिकित्‍सक मरीज को छुट्टी दे सकता है, लेकिन घर पर भी उपचार जारी रहता है।

 स्केलडेड स्किन सिंड्रोम के अन्य उपचार
- पैरासिटामोल जब बुखार और दर्द के लिए जरूरी हो तो
- तरल और इलेक्ट्रोलाइट मात्रा को बनाए रखें।
- त्‍वचा नाजुक होने पर देखभाल

स्केलडेड स्किन सिंड्रोम के लक्षण भयानक होते हैं। फिर भी यदि इस प्रकार के रोगी को शुरूआत में ही सही चिकित्‍सा मिल जाये तो यह 5 से 7 दिन के अंदर ठीक हो जाता है।

 स्केलडेड स्किन सिंड्रोम में की जाने वाली जांच

इसमें जांचकर्ता डॉक्टर शारीरिक परीक्षा कर त्वचा की जांच करता है। यह जांच समय लेती है क्‍योंकि इसमें त्वचा बहुत नाजुक हो जाती है और मामूली रगड़ लगने पर छिल सकती है।

 इस जांच में शामिल हैं-
- पूर्ण रक्‍त गणना (सीबीसी)
- त्वचा और गले के कल्चर
- इलेक्ट्रोलाइट परीक्षण
- त्वचा बॉयोप्‍सी (दुर्लभ मामलों में)

 

क्यों होता है स्केलडेड स्किन सिंड्रोम 

यह त्‍वचा की एक समस्‍या है जो स्‍टफ बैक्‍टीरिया के संक्रमण के कारण होता है। स्‍केलडेड स्किन सिंड्रोम सबसे ज्‍यादा नाक पर होता है। यह समस्‍या, सर्जरी, किसी प्रकार की चोट आदि के कारण भी हो सकती है।

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त्वचा के लिए ग्लायकोलिक एसिड के फायदे व नुकसान ग्लायकोलिक एसिड, अल्फा हाइड्रोक्सील एसिड के समूह में से ही एक है। यह प्राकृतिक रुप से गन्ने व अंगूर में पाया जाता है। इसका प्रयोग त्वचा के उपचार के लिए किया जाता है जैसे एक्ने, केमिकल पीलिंग व एक्सफोलिएशन आदि। ग्लायकोलिक एसिड की कुछ मात्रा क्रीम व लोशन...
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पीलिंग समस्या को कैसे रोकें 

पीलिंग समस्या को कैसे रोकें
क्‍या आपकी त्‍वचा की पपड़ी उतर जाती है। क्‍या आपकी त्‍वचा की परत अपने आप ही उतरने लगती है। इसमें घबराने या डरने की कोई बात नहीं है। हमारी त्‍वचा हर 28 दिनों में पीलिंग (त्‍वचा की ऊपरी परत का छिलना या हटना) की प्रक्रिया से गुजरती है। त्‍वचा की पुरानी कोशिकायें मरती हैं और नयी कोशिकायें जन्‍म लेती हैं।
लेकिन, यह प्रक्रिया कई बाहरी कारणों से भी हो सकती है। पीलिंग के कई कारण हो सकते हैं जैसे सनबर्न, एक्जिमा, सराइअसिस व रुखी त्वचा। इन सभी स्थितियों में त्वचा में खुजली व मृत त्वचा की पीलिंग होती है। जानें त्वचा की पीलिंग के कारणों के बारे में विस्तार से- 

सनबर्न
बहुत ज्यादा सूर्य की रोशनी में रहने पर त्वचा की ऊपरी परत पर असर पड़ता है। सूर्य की हानिकारक यूवी किरणें त्वचा को क्षतिग्रस्त कर देती हैं, जिससे त्वचा की परत हटने लगती है। शॉवर लेने, सफेद सिरके के प्रयोग से क्षतिग्रस्त त्वचा को ठीक करने में मदद मिलती है।

एक्जिमा
एक्जिमा, त्वचा पर होने वाला एक प्रकार का रैशेज है, जो त्वचा में खुजली व पीलिंग पैदा करता है। त्वचा में खुजली व लाल हो जाना इसके मुख्य लक्षण हैं। ऐसे में तुरंत डॉक्टर से संपंर्क करना चाहिए।

सराइअसिस
यह भी एक प्रकार का त्वचा रोग है जिसमें त्वचा की ऊपरी परत हटने लगती है। इस अवस्था में त्वचा रंग भी फीका पड़ने लगता है।इस अवस्था में डॉक्टर से कंसल्ट कर तुरंत इलाज शुरु करवाएं।  

पीलिंग को रोकने के कुछ असरकारी उपायों के बारें में जानें-

मॉश्चराइजर का प्रयोग

अक्सर त्वचा रुखी होने के कारण उसकी ऊपरी परत हटने लगती है। ऐसे में मॉश्चराइजर के प्रयोग से त्वचा नरम व मुलायम बनी रहती है। जिस जगह पर पीलिंग की समस्या हो वहां पर नियमित रुप से एंटीऑक्सीडेंट मॉश्चराइजर के प्रयोग से त्वचा का निर्माण जल्दी होता है।  ]

एलोविरा लगाएं

एलोविरा जेल त्वचा के पीलिंग को रोकने में मददगार हो सकता है। एलोविरा के पौधे से निकलने वाले जॅल को दिन में दो बार पीलिंग वाली जगह पर लगायें और कुछ समय बाद साधारण पानी से धो लें। आप चाहें तो एलोविरा का पौधा घर पर भी लगा सकते हैं।
विटामिन ई युक्त तेल का प्रयोग

विटामिन ई

विटामिन ई त्वचा को मॉश्चराइज करने के लिए काफी अच्छा माना जाता है साथ ही यह त्वचा में होने वाली लालिमा व पीलिंग को भी रोकता है। इस विटामिन युक्‍त तेल इस तेल को नियमित रुप से पीलिंग वाली जगह पर हल्के हाथों से रगड़ें और फर्क देखें।

प्राकृतिक उपाय

    प्राकृतिक ओट्स को स्क्रब के रुप में इस्तेमाल करें। हल्के हाथों से इसे पीलिंग वाली जगह पर लगायें और थोड़ी देर बाद चेहरे को ठंडे पानी से धो लें।
    पुदीने की पत्तियों को पीस कर पीलिंग वाली जगह पर लगाएं। इसे त्वचा को ताजगी मिलेगी साथ ही यह त्वचा को पीलिंग से भी बचाएगा। 
    प्राकृतिक मॉश्चराइजर के लिए पीलिंग वाली जगह पर शहद से मालिश करें। आधे घंटे बाद साफ पानी से धो लें। इसे त्वचा मॉश्चराइजर को अवशोषित कर लेगी और आगे से पीलिंग की समस्या नहीं होगी।
    ऑलिव ऑयल, शहद व हल्दी को अच्छे से मिलाएं और इसे पीलिंग वाली जगह पर नियमित रुप से लगाएं।
    खाने में विटामिन ए,बी,सी युक्त भोजन को शामिल करें। हरी सब्जियों व ताजे फलों के सेवन से पीलिंग की समस्या से निजात मिल सकता है।

 
 

बच्चों के लिए ब्यूटी टिप्स

बच्चों के लिए ब्यूटी टिप्स
‘बच्चों के लिए ब्यूटी टिप्स’ का अर्थ यह नहीं है कि आप बच्चों की त्वचा पर मेकअप के सामान का प्रयोग करें। बच्चों की त्वचा काफी सेंसटिव व कोमल इसलिए उनकी त्वचा पर कोई भी क्रीम लगाने से पहले उसमें मिलें तत्वों को जरूर पढ़ लें। बच्चे अक्सर खेलकूद में इतने मग्न हो जाते हैं कि वे अपने हाथ-पैर व चेहरे का उचित खयाल नहीं रख पाते। ऐसे में आपकी जिम्मेदारी बनती है कि आप उनका खयाल रखें। ध्यान रहे बच्चों की त्वचा को सुंदर बनाने के लिए किसी मेकअप की जरूरत नहीं है उनकी त्वचा के लिए उचित साफ-सफाई व देखभाल ही पर्याप्त होती है। जानिए बच्चों की त्वचा की देखभाल करने के आसान उपाय :

पोषण युक्त आहार दें
अगर आप बच्चों को पोषण युक्त आहार देंगी तो उनकी त्वचा हमेशा चमकती रहेगी। अक्सर बच्चे हेल्दी चीजें खाने में आनाकानी करते हैं। यह आपकी जिम्मेदारी है कि आप उन्हें हेल्दी चीजें खाने की आदत डालें । अगर एक बार यह बच्चों की आदत में शामिल हो गया तो वे खुद ही आपसे इन चीजों की मांग करने लगेंगे। बच्चों को दूध, चीज, अंडे, मछली, हरी सब्जियां व फलों का सेवन करना चाहिए। 

बालों का ध्यान
अपने बच्चों को बालों व चेहरे की साफ सफाई के बारे में बताएं। बच्चों के बालों के लिए हमेशा माइल्ड शैंपू का प्रयोग करना चाहिए साथ ही बच्चों के बालों को रुखे व बेजान होने से रोकने के लिए रात को सोते समय बालों में नियमित रुप से तेल लगाएं। इस उम्र में बच्चों के बाल छोटे ही रखने चाहिए जिससे उनकी उचित देखभाल हो सके। 

हैंडवॉश की आदत डालें
खेलते समय या अन्य किसी कारण से बच्चों के हाथ में धूल मिट्टी या अन्य तरह के कीटाणु जमा हो जाते हैं। इसलिए बच्चों को हमेशा हाथ धोने की आदत डालें। खासतौर पर खाना खाने से पहले बच्चों को हाथ धोने के लिए जरूर कहें। यह एक अच्छी आदत है जो बच्चों को बीमार पड़ने से बचाती है।
साफ-सफाई जरुरी
बच्चों को गर्मियों के मौसम में दिन में दो बार नहलाना चाहिए और त्वचा के सूखने के बाद बेबी पाउडर का प्रयोग जरूर करें। इससे बच्चे ताजगी का एहसास करते हैं। ध्यान रहें बच्चों को कभी भी डीयोडेरेंट की आदत ना डालें। यह उनकी त्वचा के लिए नुकसानदेह हो सकता है। 

पर्याप्त नींद जरूरी
बच्चे हो या बड़े खूबसूरत त्वचा के लिए पर्याप्त नींद हर किसी के लिए जरुरी है। बच्चे दिन भर की थकान के बाद जब बिस्तर पर जाते हैं तो यह जरूरी हो जाता है कि वे एक अच्छी नींद ले। नींद पूरी नहीं होने पर बच्चे थके हुए व चिड़चिड़े से रहते हैं। जब बच्चे नींद पूरी कर लेते हैं तो खुद को हल्का व ताजगी भरा महसूस करते हैं।

एक्ने से बचने के उपाय 


पुरुषों के लिए ब्यूटी टिप्स

सुंदर दिखने की चाह केवल महिलाओं में ही नहीं होती, पुरुष भी चाहते हैं कि वे खूबसूरत नजर आएं। अब वो दौर नहीं है जब रफ एंड टफ रहना ही पुरुषों की पहचान होता है।

लड़कियों के लिए ब्यूटी टिप्स


फेशियल क्या है और इसे क्यों कराना चाहिए


फेशियल क्या है और इसे क्यों कराना चाहिए :-

फेशियल वह ब्यूटी प्रोसीजर है, जिसमें त्वचा को अनेक चरणों जैसे क्लींजिंग, स्टीम से एक्सफॉलियेशन, एक्सट्रैक्शन, मसाज और फेस मास्क आदि की मदद से साफ और पोषित किया जाता है। फेशियल काफी लोकप्रिय है क्योंकि यह त्वचा को साफ करके पोषण देकर इसे मुलायम और नरम बनाता है। आप ब्यूटी सैलून या स्पा में फेशियल करा सकते हैं। या आप खुद से इसे घर पर भी कर सकते हैं। इस लेख में हम आपको फेशियल और इसके प्रकारों के बारे में विस्तार से बता रहे हैं।


फेशियल प्रक्रिया की शुरूआत फेस क्लींजिंग से होती है, जिसके बाद त्वचा एस्थेटीशियन आपकी त्वचा के प्रकार और समस्या वाले हिस्सों की जांच करते हैं और यदि आपको कोई त्वचा सम्बन्‍धी समस्या है तो उसके समाधान हेतु लिये जा सकने वाले इनपुट्स के बारे में सलाह-मशवहरा करता है।

 फेशियल का चुनाव और तरीका


फेशियल हमेशा त्वचा के प्रकार और समस्याओं के आधार पर ही किया जाना चाहिए। ऑयली त्वचा को क्ले-मास्क की ज़रूरत हो सकती है, जबकि ड्राई त्वचा पर हाइड्रेटिंग मास्क की ज़रूरत होती है। वहीं संवेदनशील त्वचा की अधिक सावधानी से साज संभाल करनी होता है, क्योंकि ऐसी त्वचा पर इरिटेशन हो सकती है। इसलिये इस प्रकार की त्वचा पर केवल हाइपोएलर्जिक प्रोडक्ट्स का ही उपयोग किया जाना चाहिये।

त्वचा का एक्सफॉलियेशन हॉट वॉटर के वेपर्स या स्टीम की मदद से किया जाता है। दरअसल स्टीम त्वचा के रंध्रों को खोल देती है और इसे मुलायम तथा फेशियल ट्रीटमेंट के लायक बनाती है। ब्लैकहेड्स की ज़्यादा संभावना वाली त्वचा के बंद रंध्र हॉट वेपर से खुल जाते हैं, जिससे ब्लैकहेड्स को निकालने का काम काफी आसान हो जाता है। लेकिन ब्लैकहेड्स को निकालना कभी-कभी सूट नहीं करता क्योंकि यह संवेदनशील त्वचा पर इन्फ्लेमेशन पैदा कर सकता है।

नाजुक त्वचा पर से ब्लैकहेड्स निकालना दर्दभरा हो सकता है, इन्हें निकालना वैकल्पिक है। फेशियल मसाज आधा घंटा या तब तक की जाती है जब आपके चेहरे की मसल्स रिलैक्स होकर नयी ऊर्जा से भर ना जायें। यह रिलैक्सिंग तकनीक है जो चेहरे पर खून के संचार को बढ़ाकर चेहरे को चमकदार बनाती है। फेस मास्क फेशियल का अंतिम चरण है जिसे आपके त्वचा प्रकार के मुताबिक लगाया जाता है। मास्क के सूखने के बाद आपका चेहरा साफ कर दिया जाता है और एक टोनर या मॉइश्चराईज़र लगाया जाता है। फेशियल युक्त त्वचा केयर विधियों को महीने में एक बार इस्तेमाल करना काफी होता है।

फेशियल करवाते समय जितना जरूरी अपने स्किन टाइप का ध्यान रखना है, उतना ही जरूरी मौसम का रखना भी है। जैसे गर्मी में ऑयल कंट्रोल वाला फेशियल होता है और सर्दियों में नमी देने वाला, इसलिए मौसम के हिसाब से भी फएशियलका चुनाव करें।

समस्याएं

यदि फेशियल सही तरह से किया जाये तो फेशियल के साथ कोई जोखिम नहीं होता है। फेशियल ट्रीटमेंट का महत्त्वपूर्ण नियम यह है कि त्वचा का प्रकार क्या है और त्वचा की जरूरतें क्या हैं। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को किसी एलर्जिक रिएक्शन से बचने के लिये अपने एस्थेटीशियन से अपने त्वचा प्रकार के बारे में पहले ही बता देना चाहिये।

शादी हो, पार्टी, किसी भी खास मौके पर खास दिखना भला कौन नहीं चाहता। और खास दिखने की आपकी तैयारी तभी पूरी होती है, जब मेकअप के अलावा आपकी त्वचा भी ग्लो करे और उसमें निखार आए। इसके लिए फेशियल सबसे आसान और प्रभावी तरीका है। अगर आप किसी खास मौके पर दमकती त्वचा चाहती हैं तो अपनी जरूरत के हिसाब से अपना फेशियल चुनें।

त्वचा कहे नो चिपचिप


मिनटों में खूबसूरत दिखने के आसान नुस्खे


फल-सब्जियों का मौसम

हमारे पारंपरिक ज्ञान में ही फलों और सब्जियों के फायदों की लंबी सूची मिल जाती है। आहार विशेषज्ञों ने भी इसकी पुष्टि की है। अब हर व्यक्ति ताजे फल और सब्जियां खाने के स्वास्थ्यगत लाभ जानने लगा है। कुछ उनमें ऐसे भी हैं, जो फलों और सब्जियों का स्वास्थ्य और सौंदर्य के लिए उपयोग करना भी जानते हैं।

हकीकत यह है कि फल और सब्जियां एंटीऑक्सीडेंट्स, बहुमूल्य विटामिंस, मिनरल्स और पोषक तत्व जैसे विटामिन ए, बी, सी, डी और ई, कैरोटेनाइड्स, कोएंजाइम्स क्यू 10, पॉलिफेनल्स, पोटेशियम, सेलेनियम और जिंक आदि से भरपूर होती हैं। कुछ दूसरी सामग्री के साथ मिलाने पर फल और सब्जियां बेहद उपयोगी फेस मॉस्क, स्कीन क्रीम, बॉथ ट्रीटमेंट और स्कीन ऑइन्टमेंट भी बन सकती हैं। आइए जानते हैं कैसे?

केले में निहित प्राकृतिक तेल त्वचा को नर्म करने के तो काम आता ही है, साथ ही यह विटामिन और दूसरे पोषक तत्वों से भी परिपूर्ण होता है, जिससे बालों में लोच आती है।





तरह-तरह के बीन्स उम्र के प्रारंभिक लक्षणों से लड़ने के काम आते हैं।

ब्लूबेरी, ब्लैकबेरी और रास्पबेरी में एंटीऑक्सीडेंट्स के साथ-साथ ही प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी होते हैं। इसका उपयोग क्रीम में किया जाता है। यह एक तरफ जहां त्वचा को नर्म बनाती हैं, वहीं त्वचा के सेल्स की भी मरम्मत करती हैं।


पेय पदार्थों की हमारी डाइट में एक अलग ही भूमिका होती है, फिर भले ही वह पेय पदार्थ पानी हो या ज्यूस। इनके नियमित सेवन से हमारी त्वचा में निखार आने के साथ ही शरीर को भी भरपूर ऊर्जा मिलती है। फ्रूट ज्यूस जहां आयरन और विटामिन से भरपूर होते हैं, वहीं वेजीटेबल ज्यूस शरीर के लिए उपयोगी पोषक तत्वों से युक्त होते हैं।

इन दोनों ही तरह के ज्यूस का सेवन शरीर के लिए फायदेमंद होता है। यदि आप बेहतर स्वास्थ्य पाने की इच्छा रखते हैं तो आपको आज ही से अपनी डाइट में ज्यूस और पानी की उचित मात्रा को शामिल करना होगा।

ज्यूस  :- 
 100 % फल या सब्जियों से बनाए गए ज्यूस हमारे शरीर में विटामिन की पूर्ति करने के साथ ही त्वचा को भी पोषण प्रदान करते हैं। स्वाद में लाजवाब होने के साथ ही ज्यूस त्वचा की गहराई से सफाई कर विषैले पदार्थों को बाहर निकालता है। एक रिसर्च के अनुसार गहरे रंग के फलों के ज्यूस शरीर के लिए अधिक गुणकारी होते हैं।

अनार और ब्लू बेरी के ज्यूस में हमारे शरीर व त्वचा के लाभकारी एंटी ऑक्सीडेंट की भरपूर मात्रा होती है। चुकंदर का रस भी स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है|


ऐलोवेरा ज्यूस
त्वचा के लालपन व खुजली को खत्म करने के साथ ही ऐलोवेरा का ज्यूस त्वचा संबंधी अन्य समस्याओं जैसे एक्जिमा, सोरियोसिस में भी औषधि की तरह कार्य करता है। 


रक्त की शुद्धि, पाचन क्रिया को बढ़ाना, आर्थराइटिस में कारगर व शारीरिक क्षमता को बढाने के साथ ही ऐलोवेरा ज्यूस के अनगिनत फायदे हैं। रोजाना एक कप ऐलोवेरा ज्यूस का सेवन हमारे स्वास्थ्य व त्वचा संबंधी कई समस्याओं के निदान में कारगर है।




* दिन में एक गिलास गाजर का रस बिना नमक-मिर्च-शकर मिलाए पिएं, इससे चेहरा तो सुर्ख होगा ही, साथ ही झाइयां भी समाप्त हो जाएंगी।
* ताजा टमाटर काटकर चेहरे पर हल्के हाथों से मसाज करने से थोड़े दिनों के उपरांत चेहरे की झाइयां कम हो जाएंगी और रंगत भी निखर जाएगी। टमाटर का सूप और ज्यूस भी झाइयों से बचने का रामबाण इलाज है।

चमकती-दमकती त्वचा का राज


चमकीली त्वचा के लिए पौष्टिक पेय


गोरेपन की क्रीम


चेहरे की झाइयों का कैसे होता है उपचा

चेहरे की झाइयों का कैसे होता है उपचार

हार्मोनल असंतुलन : यह झाइयों का मुख्य कारण होता है। गर्भधारण करने की स्थिति में हो सकता है या गर्भ निरोधक गोलियां लंबे समय तक लेने से हो सकता है।

अनुवांशिक कारण: अनुवांशिक कारणों से। धूप की किरणों से बचाव न करने की वजह से।

एलर्जी : कुछ कॉस्मेटिक उत्पाद जिनसे एलर्जी होने के बाद भी उपयोग करने के कारण।

थायरॉइड : झाइयां थायरॉइड बीमारी के मरीजों में भी देखी जा सकती है।

रजोनिवृत्ति : रजोनिवृत्ति के समय बढ़ जाती हैं।
हार्मोनल असंतुलन होने की वजह से झाइयों का उपचार करना कठिन होता है। सही ढंग से उपचार कराने पर यह ठीक हो जाती है।
ब्यूटी केयर टिप्स » सर्दियों में चेहरे की झाइयों के घरेलू उपचार
ब्यूटी केयर टिप्स » इस मौसम में कीजिए हर्बल फेशियल

ब्यूटी केयर टिप्स » सुंदरता के लिए वरदान फल-सब्जियों का मौसम

ब्यूटी केयर टिप्स » सुंदरता के लिए वरदान फल-सब्जियों का मौसम

हमारे पारंपरिक ज्ञान में ही फलों और सब्जियों के फायदों की लंबी सूची मिल जाती है। आहार विशेषज्ञों ने भी इसकी पुष्टि की है। अब हर व्यक्ति ताजे फल और सब्जियां खाने के स्वास्थ्यगत लाभ जानने लगा है। कुछ उनमें ऐसे भी हैं, जो फलों और सब्जियों का स्वास्थ्य और सौंदर्य के लिए उपयोग करना भी जानते हैं।

हकीकत यह है कि फल और सब्जियां एंटीऑक्सीडेंट्स, बहुमूल्य विटामिंस, मिनरल्स और पोषक तत्व जैसे विटामिन ए, बी, सी, डी और ई, कैरोटेनाइड्स, कोएंजाइम्स क्यू 10, पॉलिफेनल्स, पोटेशियम, सेलेनियम और जिंक आदि से भरपूर होती हैं। कुछ दूसरी सामग्री के साथ मिलाने पर फल और सब्जियां बेहद उपयोगी फेस मॉस्क, स्कीन क्रीम, बॉथ ट्रीटमेंट और स्कीन ऑइन्टमेंट भी बन सकती हैं। आइए जानते हैं कैसे?







केले में निहित प्राकृतिक तेल त्वचा को नर्म करने के तो काम आता ही है, साथ ही यह विटामिन और दूसरे पोषक तत्वों से भी परिपूर्ण होता है, जिससे बालों में लोच आती है।


तरह-तरह के बीन्स उम्र के प्रारंभिक लक्षणों से लड़ने के काम आते हैं।

ब्लूबेरी, ब्लैकबेरी और रास्पबेरी में एंटीऑक्सीडेंट्स के साथ-साथ ही प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी होते हैं। इसका उपयोग क्रीम में किया जाता है। यह एक तरफ जहां त्वचा को नर्म बनाती हैं, वहीं त्वचा के सेल्स की भी मरम्मत करती हैं।


पिंपल्स से कैसे पाएं छुटकारा

पिंपल्स से कैसे पाएं छुटकारा
ब्यूटी टिप्स- पिंपल्स से कैसे पाएं छुटकारा

दिन में तीन-चार बार कच्चे लहसुन की पीठी बनाकर लगाने से पिंपल्स कम हो जाते हैं और काले निशान तथा फुंसियां मिटने में सहायता मिलती है


 

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ब्यूटी की दुश्मन स्किन एलर्जी कॉन्टैक्ट डरमेटाइटिस को समय पर पहचानें


स्वास्थ्य-सौन्दर्य » हेयर ड्रायर का ऐसे करें इस्तेमाल


पत्ते-पत्ते में समाई है सेहत

 पुदीना
पुदीने की पत्तियों को पीसकर उसके रस में आधा नींबू व चुटकी भर काला नमक मिलाकर पीने से पेट का अफरा व अपच खत्म हो जाता है। इसकी पत्तियों को खाने से मुंह की दुर्गंध खत्म हो जाती है।

बबूल
बबूल की पत्तियों को उबालकर उस पानी को कुल्ला करने से दांत व मसूड़े मजबूत होते हैं। बबूल की पत्तियों का रस निकालकर सरसों के तेल में मिलाकर लगाने से गर्मी के फोड़े-फुंसी में आराम मिलता है।

बड़
बड़ के दूध में एक नींबू का रस मिलाकर सिर में आधे घंटे तक लगा रहने दें। फिर सिर को गुनगुने पानी से धो लें। इससे बालों का झड़ना बंद हो जाता है व बाल तेजी से बढ़ते हैं।

बेर
बेर की पत्तियों व नीम की पत्तियों को बारीक पीसकर उसमें नींबू का रस मिलाकर बालों में लगा लें व दो घंटे बाद बालों को धो लें। इसका एक माह तक प्रयोग करने से बाल झड़ना बंद हो जाता है।

बेलफल
बेलफल के गूदे को शकर में मिलाकर तीन दिन नियमित डेढ़ से दो कप पीने से अतिसार में लाभ होता है।

नीम
नीम की 10-12 पत्तियों को पीसकर सुबह खाली पेट पीने से गर्मी की घमौरियों व चर्मरोग का शमन होता है। नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर सिर धोने से बाल झड़ना रुक जाता है।

तुलसी
तुलसी के 8-10 पत्तों को पीसकर चीनी में मिलाकर पीने से लू नहीं लगती है। अगर लू लग गई है तो आराम मिल जाता है। रोज प्रातः खाली पेट तुलसी के चार पत्ते नियमित खाने से बीमारी नहीं होती है।

नीम है आपकी सुंदरता का साथी


नीम के पत्ते को पानी में उबालकर इस पानी को ठंडा करके इससे मुंह धोने पर पिंपल्स दूर होते हैं। नीम की पत्तियों को पीसकर उसके लेप को चेहरे पर लगाने से फुंसियां व मुहांसों के दाग मिट जाते हैं। एक कटोरी गेहूं के आटे में एक चम्मच चंदन पावडर, दो चम्मच शहद और गुलाबजल मिलाकर इस उबटन को चेहरे पर लगाएं। यह एक आसान सौन्दर्य नुस्खा है।

चेहरे के दाग-धब्बे हटाने में नीम का फेस पैक बहुत ही कारगर होता है। नीम के फेस पैक बनाने के लिए चार-पांच ताजी नीम की पत्तियों को मिक्सी में पीसकर उसमें एक चम्मच मुलतानी मिट्टी पावडर मिलाएं। अब इस गाढ़े फेस पैक में थोड़ा गुलाबजल मिलाएं तथा इस पैक को पूरे चेहरे पर लगाएं। पैक के सूखने पर गरम पानी से चेहरा धो लें। नीम रक्त साफ करता है।

दाद,खाज,ब्लडप्रेशर में प्रातः 25 ग्राम नीम की पत्ती का रस लेना लाभदायक है। नीम के पत्ते कीड़े मारते हैं, इसलिए पत्तों को अनाज, कपड़ों में रखते हैं। नीम के तेल से मालिश करने से विभिन्न प्रकार के चर्म रोग ठीक हो जाते हैं। नीम की पत्तियों को उबालकर और पानी ठंडा करके नहाया जाए तो उससे भी बहुत फायदा होता है। नीम की छाल में ऐसे गुण होते हैं, जो दांतों और मसूढ़ों में लगने वाले तरह-तरह के बैक्टीरिया को पनपने नहीं देते हैं, जिससे दांत स्वस्थ व मजबूत रहते हैं।

ब्यूटी के लिए, बस पांच मिनट

HOME TOP TIP

beauty tips in hindi

* शहद का लेप चेहरे और गले पर करें। जब यह सूखकर कुछ चिपचिपा हो जाए तो उंगलियों के पोरों से चेहरे की मसाज करें। पूरी तरह सूख जाने पर गरम पानी से साफ करके ठंडे पानी से धो लें। इससे त्वचा में कसाव आएगा व चमकदार बनेगी। त्वचा के रूखेपन और अधिक तैलीयपन से भी आपको यह निजात दिलाएगा।

* दो चम्मच सोयाबीन का आटा, एक बड़ा चम्मच दही व शहद मिलाकर पेस्ट बनाएं तथा इस मिश्रण को कुछ देर चेहरे पर लगाकर चेहरा धो लें। इससे त्वचा में कसावट आती है।

* बादाम, गुलाब के फूल, चिरौंजी और पिसा जायफल रात को दूध में भिगो दें। सुबह इसे पीसकर इसका उबटन लगाएं। इससे चेहरे के दाग-धब्बे मिटते हैं और त्वचा कांतिमय बनती है। ब्यूटी के लिए, बस पांच मिनट

* धूप में अक्सर हमारी त्वचा झुलस जाती है और काली पड़ जाती है। त्वचा के रंग को पूर्ववत करने के लिए आम के पत्ते, जामुन, दारूहल्दी, गुड़ और हल्दी की बराबर मात्रा मिलाकर उसका पेस्ट बनाकर पूरे शरीर पर लगाएं। कुछ समय रखने के बाद स्नान कर लें। इस लेप से त्वचा की रंगत निखरती है।

* नीम की पत्तियां, गुलाब की पत्तियां, गेंदे का फूल सभी को एक कटोरी पानी में उबालें तथा इस रस को चेहरे पर लगाएं। इससे मुंहासे निकलना बंद हो जाते हैं।

* चंदन, गुलाब जल, पोदीने का रस एवं अंगूर का रस मिलाकर पेस्ट पेस्ट बनाएं और उसे चेहरे पर लगाएं। कुछ देर बाद ठंडे पानी से चेहरा धो लें। इस फेस पैक से चेहरे की झुर्रियां मिटती हैं।                            

त्वचा की देखभाल » भिन्न – भिन्न प्रकार के फेशियल


त्वचा की देखभाल » गोल्ड – मेटालिक फेशियल

गोल्ड – मेटालिक फेशियल

गोल्ड – मेटालिक फेशियल :-यह फेशियल ड्राई , नार्मल स्किन के लिए उपयोगी होता है । गोल्ड क्लीन्जर से फेस क्लीन करना चाहिए । इसके बाद डीप क्लींजिंग करके ब्लैक डेड्स – वाइट हेडसे रिमूव कर अस्ट्रिमजन्ट लगाना चाहिए । गोल्ड – मेटालिक पील को गोल्डडस्ट के साथ लगाना चाहिए । डस्ट को प्रोब्लामेटिक एरिया पर लगाना चाहिए । गोल्ड पील 7 से 10  मिनट तक लगी रहने दे । फिर इसे फ्रिकशन मसाज से रिमूव करना चाहिए । इसके बाद हैड्रोस्किन पालिशार से 5 से  7 मिनट तक मसाज करना चाहिए । इस प्रकार का मसाज करते समय वाटर का उपयोग नहीं करना चाहिए । इस जेल को पोछे बिना ही गोल्ड क्रीम से 20 से 25 मिनिट तक मसाज करना चाहिए । यदि स्किन अधिक ड्राई हो , तो स्किन बटर से 5 मिनट मसाज करने के बाद फेस को पोछ कर गोल्ड – मेटलिक जेल लगानी चाहिए । गोल्ड जेल पर गैल्वानिक अथवा अल्ट्रोसोनिक मशीन से 7 मिनट मसाज करना चाहिए । बाद में इसी जेल को हाथ से 5 मिनट मसाज करके स्किन में उतारनी चाहिए । इसके बाद इस पर गोल्डमास्क लगाना चाहिए । गोल्ड – मास्क 15 से 20 मिनट तक लगा रहने दे । फेस को पोछ कर सन प्रटेक्शन लोशन लगाना चाहिए । इस फेशियल के लिए लगभग 1 1 /2  से 2 घंटे का समय लगता है ।

स्लिवर फेशियल
सिल्वर फेशियल नार्मल तथा आइली स्किन के लिए उपयोगी होता है । सिल्वर क्लींजिंग से 5 से 7 मिनटमसाज करके फेस क्लीन करना चाहिए । स्क्रब से डीप क्लींजिंगकरके ब्लैक डेड्स – वाईट डेड्स रिमूव
कर अस्ट्रीजन्ट लगाना चाहिए । सिल्वर पील पाउडर को दही अथवा दूध में 7 से 10 मिनट तक भिगोने के बाद फेस पर लगाइए । पील को 10 मिनट फेस पर रखने के बाद दही अथवा दूध से मसाज करके इसे रिमूव करना चाहिए । इसके बाद फिर सिल्वर जेल लगा कर गैल्वानिक प्लस (+) करंट अथवा अल्ट्रासोनिक मशीन से 7 मिनट तक मसाज करना चाहिए । मशीन से मसाज करते समय साथ – ही – साथ सिल्वर लोशन लगाते रहना चाहिए । इसके बाद सिल्वर जेल से 10 से 15 मिनट मसाज करके सिल्वर पैक लगाना चाहिए । पैक 10 से 15 मिनट रख कर रिमूव करना चाहिए । अंत में सन प्रटेकशन लोशन लगाना चाहिए ।

पर्ल फेशियल
यह फेशियल नार्मल तथा डेलिकेट स्किन के लिए लाभदायक है । इस फेशियल से ठंडक मिलती है । इस फेशियल में इस्तेमाल किए जाने वाले सभी प्राडक्ट्स एन्टी – एलाज्रिक होते है । सबसे पहले पर्ल क्लींजर से 5 से 7 मिनट मसाज करके ब्लैक डेड्स – वाईट डेडस रिमूव कर अस्त्रिजन्ट लगाना चाहिए । इसके बाद पर्ल क्रीम से मसाज करना चाहिए । फेशियल स्टेप्स के अनुसार एक बार मसाज करना चाहिए । इसके बाद यह मसाज दूसरी बार करते समय पर्ल्कित में दिए गय आयल से फेस पर मसाज करना चाहिए । मसाज करने के बाद फेस को फोछ कर पर्ल्मास्क लगाना चाहिए । पर्ल्मास्क पोंछ कर सन प्रटेक्शन लोशन लगाना चाहिए ।

त्वचा की देखभाल » त्वचा लाड़ प्यार के लिए सुझाव


                                त्वचा की देखभाल » 8 युक्तियाँ तेल त्वचा को नियंत्रित

 

सुंदरता बढ़ाने के लिए चावल के लाभ  :-

 

भारतीय अपने दैनिक भोजन में चावल को प्राथमिकता देते हैं। विशेषत: भारत के पूर्व और दक्षिण में रहने वाले लोगों का मुख्य भोजन चावल है। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि चावल सुंदरता की देखभाल करने में बहुत महत्वपूर्ण घटक है। यह व्यक्ति की त्वचा को चमकीला बनाता है तथा इसे लम्बे समय तक बनाए रखता है। हर महिला चमकीली, रेशमी और चिकनी त्वचा चाहती है। एशियाई देशों में रहने वाली महिलाओं का रंग उजला, चिकना और चमकदार होता है। उनकी इस प्रकार की त्वचा का कारण उनकी आहार संबंधी आदतें हैं। यदि आप सुंदर त्वचा चाहते हैं तो अपनी सुंदरता को बढ़ाने के लिए चावल का उपयोग करें।

त्वचा को चमकीला बनाने के उपाय दो टेबलस्पून कच्चा चावल लें तथा इसे एक बर्तन में रखें। चावल से सारी धूल और अनचाहे कण निकाल दें। इन साफ़ चावलों में कुछ पानी डालें तथा उसे ढांक कर रख दें। इसे 20 मिनिट तक ऐसे ही रहने दें ताकि चावल बर्तन में नीचे बैठ जाए। अब इसे दूधिया रंग के पानी को एक बर्तन में निकाल लें। चावल के इस पानी का उपयोग अपना चेहरा साफ़ करने के लिए करें। चावल के इस पानी को सूखने तक अपने चेहरे पर लगा रहने दें। एक बार सूखने पर चावल के पानी की दूसरी परत लगायें। जैसे की आपकी त्वचा सूखेगी, चावल के पानी के सारे विटामिन और खनिज आपके रोम छिद्रों द्वारा सोख लिए जायेंगे। इसे धोने के बाद जब आप अपनी त्वचा को छूएंगे तो आप इसकी चिकनाहट को महसूस कर पाएंगे। अब आप ऑर्गेनिक मेकअप के द्वारा उजली और चमकीला रंग प्राप्त कर सकते हैं। लोग जिन चावल का उपयोग करते हैं वह समान गुणवत्ता का नहीं होता। आप अपनी त्वचा का रंग निखारने के लिए किसी भी प्रकार के चावल का उपयोग कर सकते हैं। चावल का फ़ेस वॉश यदि आपका चेहरा फीका हो गया है तो यह वह समय है जब आपको अपनी त्वचा को चमकीला बनाना है। त्वचा की चमक बढ़ने के लिए चावल का उपयोग किया जा सकता है। आपको नुकसान पहुंचाने वाले कॉस्मेटिक्स (सौंदर्य प्रसाधनों) का उपयोग करने की आवश्यकता नहीं है, केवल चावल के द्वारा आप उजली और चमकीली त्वचा पा सकते हैं। आप रुई के फ़ाहे (टुकड़े) को चावल के पानी में डुबाकर इसे चेहरे पर लगाकर चमकीली त्वचा प्राप्त कर सकते हैं। लाभ यह आपकी त्वचा को मज़बूत बनाने में सहायक होता है। आपकी त्वचा बहुत नरम हो जायेगी। यह रोम छिद्रों को सिकोड़ता है। आपकी त्वचा को चमकीला बनाने के लिए यह एक सस्ता उपाय है। यह धूप से आपकी त्वचा की रक्षा करता है। आपके रंग को उजला बनाता है। यह आपकी त्वचा को तरोताज़ा बनाता है। यह एक प्राकृतिक ऑर्गेनिक क्लीन्ज़र की तरह काम करता है। जब आप अपने हाथों से इस क्लीन्ज़र को अपने चेहरे पर लगाते हैं तो आप महसूस करेंगे कि आपके हाथ भी नरम हो गए हैं। यदि आपकी त्वचा फीकी और टैन्ड हो गई है तो आप चावल के इस क्लीन्ज़र की सहायता से अच्छा रंग प्राप्त कर सकते हैं। लोग यह बात जानकार आश्चर्यचकित हो जायेंगे कि घरों में मिलने वाले इस प्रकार के सामान्य पदार्थ चावल का उपयोग करके वे अपनी त्वचा को चमकीला बना सकते हैं। 

Read more at: http://hindi.boldsky.com/beauty/skin-care/2014/how-to-use-the-rice-for-beauty-care-beauty-benefits-004651.html


त्वचा की देखभाल » 
 तैलीय त्‍वचा की केयर करना बहुत ही जरुरी है क्‍योंकि इसका कोई परमानेंट इलाज नहीं है। आजकल बाजार में ऑयली स्‍किन के‍ लिए बहुत तरह की क्रीम मिलती हैं पर वह सभी बेकार होती हैं या फिर मेहगीं होती हैं। क्‍या आपको पता है कि आपकी खुद की रसोईं में ही इतनी सारी चीज़े छुपी हुई हैं कि आपको बाजार जा कर क्रीम खरीदने की जरुरत ही नहीं है। अगर आप अपनी त्‍वचा से परेशान हो चुकी हैं तो अपनाएं यह उपाय -
 चेहरे से ऑयल कंट्रोल करें-

1.दिन में अपने चेहरे को किसी हल्‍के साबुन या फेसवॉश से जरुर धोएं। चेहरे को साफ करने के लिए कोई हर्बल स्‍क्रब लें।

2.चेहरे की सफाई करने के लिए एस्‍ट्रिजेंट लोशन का उपयोग करें। रुई को उसमें डुबो कर अपने पूरे चेहरे पर लगाएं।

3.चेहरे पर तेल रहित मॉस्‍चोराइज़र लगाएं यह अधिक साबुन और एस्ट्रिजेंट का असर कम करने में सहायक है। वरना चेहरा रुखा लगने लगेगा। जब चेहरे पर मॉस्‍चोराइज़र लगाएं तो बचा हुआ मॉस्‍चोराइज़र टिशू पेपर से पोंछ दें।

4.खीरे के रस में कुछ बूंदे नींबू की मिला कर चेहरे पर 15 मिनट तक के लिए लगाएं और उसे ठंडे पानी से धो लें।

5.चेहरे पर अंडे का सफेद भाग लगाएं और थोड़ी देर के बाद जब वह सूख जाए तो उसे बेसन के आंटे से साफ कर लें।

6.चेहरे से अधिक तेल को कम करने के लिए गुलाब जल और पुदीने का रस मिला कर लगाएं।

7.वही क्रीम या लोशन लगाएं जो केवल ऑयली त्‍वचा के लिए ही बनाया गया हो।

8.सेब और नींबू का रस एक मात्रा में मिलाएं और इसे चेहरे पर 10 से 15 मिनट तक के लिए लगाएं। यह आपकी त्‍वचा को बिल्‍कुल निखार देगा।

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