mahilo-ki-pramukh-dus-bimariya महिलाओं की प्रमुख दस बीमारियां
महिलाओं में पुरूषों के मुकाबले अधिक बीमारियां होती है। फिर चाहे वह हृदय से जुड़ी बीमारी हो, खान-पान की बात हो, विटामिन डी की कमी हो या फिर महिलाओं में कैंसर से संबंधित बीमारियां हो। आइए जानें आमतौर पर होने वाली महिलाओं की प्रमुख दस बीमारियां कौन सी है।
1 स्तन कैंसर- स्तन कैंसर आज के समय में महिलाओं में सबसे अधिक पाया जाता है। फिर वह 25 साल की युवती हो या फिर 55 साल की महिला। हालांकि कम उम्र में कैंसर न होकर गांठे होती है जो सही उपचार न मिलने पर कैंसर का रूप ले सकती हैं। इसके अलावा इनसे स्तन पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाते और कोशिकाएं अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगती है।
ब्रेस्ट कैंसर या स्तन कैंसर महिलाओं में होने वाली एक भयावह बीमारी है। हालांकि यह एक भ्रम है कि ब्रेस्ट कैंसर सिर्फ महिलाओं में होता है। आज पुरूषों में भी इस बीमारी की संख्या बढ़ रही है। कैंसर से बचने का सिर्फ एक ही उपाय है जागरूकता।मैक्स हैल्थैकेयर के रेडियेशन आंकालाजिस्ट डाक्टर ए.के आनंद का कहना है कि महिलाओं और पुरूषों में होने वाले इस कैंसर के वास्तकविक कारणों का पता नहीं चल पाया है, लेकिन ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि यह हार्मोनल या अनुवांशिक कारणों से होता है।
• स्तन कैंसर किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन 40 वर्ष की उम्र के बाद इसके होने की संभावना बढ़ जाती है।
• अगर आपके परिवार में पहले से किसी को कैंसर रहा है , तो 40 वर्ष की उम्र के होने के बाद, साल में एक बार जांच ज़रूर करायें।
• अगर आप धूम्रपान या मादक पदार्थो का सेवन करती हैं तो भी आपमें कैंसर की संभावना बढ़ जाती है।
स्तन कैंसर क्या है
स्तन कैंसर, असामान्य कोशिकाओं की एक प्रकार की अनियंत्रित वृद्धि है जो स्तन के किसी भी हिस्से में पनप सकता है यह निप्पल में दूध ले जाने वाले डक्ट्स (नलियों), दूध उत्पन्न करने वाले छोटे कोशों और ग्रंथिहीन ऊतकों में भी हो सकता है।
स्तन कैंसर के लक्षण
स्तन पर या बांह के नीचे (बगल में) उभार या मोटापन।
निप्पल से पानी या खून जैसा रिसाव होना।
निप्पल पर परत या पपड़ी बनना।
निप्पल्स का अंदर की ओर धंसना।
स्तन पर लालिमा या सूजन।
स्तन स्किन पर किसी संतरे जैसी बनावट के गड्ढे बनना।
स्तन की गोलाई में कोई बदलाव जैसे एक का दूसरे की अपेक्षा ज़्यादा उभर आना।
स्तन की त्वचा पर कोई फोड़ा या अल्सर जो ठीक न होता हो।
2 अर्थराइटिस- इस बीमारी में महिलाओं के घुटनों में सबसे अधिक दर्द होता है। घुटनों का दर्द जब बहुत अधिक बढ़ जाता है तो ये आर्थराइटिस का रूप ले लेता है जिसको सर्जरी के माध्यम से भी ठीक किया जा सकता है। इस बीमारी से जोड़ों में दर्द, जलन, सूजन इत्यादि होने लगती है।
अर्थराइटिस जोड़ों में होने वाली एक बहुत ही आम बीमारी है। इस बीमारी में जोड़ों में दर्द होता है और जोड़ों को घुमाने, मोड़ने, हिलाने और हरकत करने में परेशानी होती है।
अर्थराइटिस का शाब्दिक अर्थ- जोड़, राइटिस-दर्द यानि जोड़ों का दर्द होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि एक सौ से भी अधिक किस्म के अर्थराइटिस होते हैं। अर्थराइटिस से व्यक्ति की रोज़मर्रा की जीवनशैली बुरी तरह प्रभावित होती है। यह जीवन भर सताने वाली बीमारी होती है। बीमारी अधिक बढने पर मरीज के जोड़ों में असहनीय पीड़ा होती है और हाथ–पांव हरकत करना तक बंद कर देता है।
अर्थराइटिस में दर्द के कारण :
रूमेटॉयड अर्थराइटिस : यह इस बीमारी की बहुत ही सामान्य और गंभीर रूप है जिसका समय पर प्रभावी उपचार करवाना आवश्यक होता है वरना बीमारी बढ़ने पर एक साल के अन्दर ही शरीर के जोड़ों को काफी नुकसान होता है।
सोराइटिक अर्थराइटिस : अर्थराइटिस के दर्द का यह रूप सोराइसिस के साथ प्रकट होता है। समय पर और सही इलाज न होने पर यह बीमारी काफी घातक और लाइलाज हो जाती है।
ओस्टियोसोराइसिस : इस तरह का अर्थराइटिस आनुवांशिक हो सकता है और यह उम्र बीतने के साथ प्रकट होता है। यह विशेष रूप से शरीर का भार सहन करने वाले पीठ, कमर, घुटना और पांव को प्रभावित करता है ।
पोलिमायलगिया रूमेटिका : यह 50 साल की आयु पार कर चुके लोगों को होता है। इसमें गर्दन, कंधा और कमर में असहनीय पीड़ा होती है और इन अंगों को घूमाने में कठिनाई होती है। अगर सही समय पर सही इलाज हो तो इस बीमारी का निदान किया जा सकता है। लेकिन कई कारणों से आमतौर पर इसका इलाज संभव नहीं हो पाता है।
एनकायलाजिंग स्पोंडिलाइटिस : यह बीमारी सामान्यत: शरीर के पीठ और शरीर के निचले हिस्से के जोड़ों में होता है। इसमें दर्द हल्का होता है लेकिन लगातार बना रहता है। इसका उपचार संभंव हैं लेकिन सही समय पर इसकी पहचान कर सही इलाज किया जाए तब।
रिएक्टिव अर्थराइटिस : रिएक्टिव अर्थराइटिस शरीर में किसी तरह के संक्रमण फैलने के बाद होने का खतरा रहता है। आंत या जेनिटोरिनैरी संक्रमण होने के बाद इसके होने की संभावना बढ जाती है। इसमें सही इलाज काफी कारगर साबित होता है।
3 सर्वाइकल कैंसर- गर्भाशय के अंदर व भीतरी सतह पर घातक कोशिकाओं की वृद्धि होती है जिससे मीनोपोज के बाद भी रक्त स्राव होने लगता है।
4 फाइब्राइड-फाइब्रायड यानी रसौली या ट्यूमर होना। आज लगभग 30 फीसदी महिलाएं फाइब्रायड की शिकायत से ग्रस्त है। फाइब्रायड एक महिला में एक से लेकर कई हो सकते है। फाइब्रायड की शिकायत होने इसकी चिकित्सा के लिए सर्जरी करवाई जाती है। आमतौर पर फाइब्रायड गर्भाशय की दीवार से निकलते है जिससे बांझपन का खतरा भी रहता है।
5 टीबी- यह संक्रामक बीमारी है। आम तौर पर फेंफड़ों पर हमला करती है। लेकिन शरीर के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकती है।
6 हृदय से जुड़ी बीमारी- दिल और दिल की धमनियों से संबंधित रोग अकसर महिलाओं में अधिक होते है। इसकी वजह से हार्ट अटैक की नौबत भी आ जाती है।
7 मधुमेह- मधुमेह ऐसी बीमारी है जिसकी शिकार महिलाएं ही अधिक होती है। मधुमेह के कारण महिलाओं को कई और बीमारियां भी घेर लेती हैं। मधुमेह के दौरान शरीर में इंसुलिन बनना बंद हो जाता है, इसमें पेंक्रियाज़ ग्रंथी सुचारू रूप से काम करना बंद कर देती है। इस ग्रंथि में इंसुलिन के अलावा कई तरह के हार्मोंस निकलते हैं।
8 ऑस्टियोपोरोसिस- इस रोग में हड्डियां कमजोर हो जाती है और उनमें अत्यधिक दर्द होता है। यह जल्दी मीनोपोज होने से , अधिक शराब व एल्कोहल लेने से और संतुलित खान-पान ने लेने से होता है।
9 पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज-महिलाओं की कमर के निचले हिस्से में फेलोपियन ट्यूब ब गर्भाशय तक ले जाने वाली नली जलन होती है। इस बीमारी में पेट में दर्द होना, माहवारी के समय अधिक रक्ते स्राव होना इत्यादि होता है।
10 वल्वर कैंसर- महिलाओं के जनांग के बाहरी हिस्से में यह कैंसर होता है। इसमें पेशाब के दौरान जलन, खुजली और रक्त स्राव इत्यादि होता है।
महिलाओं में पुरूषों के मुकाबले अधिक बीमारियां होती है। फिर चाहे वह हृदय से जुड़ी बीमारी हो, खान-पान की बात हो, विटामिन डी की कमी हो या फिर महिलाओं में कैंसर से संबंधित बीमारियां हो। आइए जानें आमतौर पर होने वाली महिलाओं की प्रमुख दस बीमारियां कौन सी है।
1 स्तन कैंसर- स्तन कैंसर आज के समय में महिलाओं में सबसे अधिक पाया जाता है। फिर वह 25 साल की युवती हो या फिर 55 साल की महिला। हालांकि कम उम्र में कैंसर न होकर गांठे होती है जो सही उपचार न मिलने पर कैंसर का रूप ले सकती हैं। इसके अलावा इनसे स्तन पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाते और कोशिकाएं अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगती है।
ब्रेस्ट कैंसर या स्तन कैंसर महिलाओं में होने वाली एक भयावह बीमारी है। हालांकि यह एक भ्रम है कि ब्रेस्ट कैंसर सिर्फ महिलाओं में होता है। आज पुरूषों में भी इस बीमारी की संख्या बढ़ रही है। कैंसर से बचने का सिर्फ एक ही उपाय है जागरूकता।मैक्स हैल्थैकेयर के रेडियेशन आंकालाजिस्ट डाक्टर ए.के आनंद का कहना है कि महिलाओं और पुरूषों में होने वाले इस कैंसर के वास्तकविक कारणों का पता नहीं चल पाया है, लेकिन ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि यह हार्मोनल या अनुवांशिक कारणों से होता है।
• स्तन कैंसर किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन 40 वर्ष की उम्र के बाद इसके होने की संभावना बढ़ जाती है।
• अगर आपके परिवार में पहले से किसी को कैंसर रहा है , तो 40 वर्ष की उम्र के होने के बाद, साल में एक बार जांच ज़रूर करायें।
• अगर आप धूम्रपान या मादक पदार्थो का सेवन करती हैं तो भी आपमें कैंसर की संभावना बढ़ जाती है।
स्तन कैंसर क्या है
स्तन कैंसर, असामान्य कोशिकाओं की एक प्रकार की अनियंत्रित वृद्धि है जो स्तन के किसी भी हिस्से में पनप सकता है यह निप्पल में दूध ले जाने वाले डक्ट्स (नलियों), दूध उत्पन्न करने वाले छोटे कोशों और ग्रंथिहीन ऊतकों में भी हो सकता है।
स्तन कैंसर के लक्षण
स्तन पर या बांह के नीचे (बगल में) उभार या मोटापन।
निप्पल से पानी या खून जैसा रिसाव होना।
निप्पल पर परत या पपड़ी बनना।
निप्पल्स का अंदर की ओर धंसना।
स्तन पर लालिमा या सूजन।
स्तन स्किन पर किसी संतरे जैसी बनावट के गड्ढे बनना।
स्तन की गोलाई में कोई बदलाव जैसे एक का दूसरे की अपेक्षा ज़्यादा उभर आना।
स्तन की त्वचा पर कोई फोड़ा या अल्सर जो ठीक न होता हो।
2 अर्थराइटिस- इस बीमारी में महिलाओं के घुटनों में सबसे अधिक दर्द होता है। घुटनों का दर्द जब बहुत अधिक बढ़ जाता है तो ये आर्थराइटिस का रूप ले लेता है जिसको सर्जरी के माध्यम से भी ठीक किया जा सकता है। इस बीमारी से जोड़ों में दर्द, जलन, सूजन इत्यादि होने लगती है।
अर्थराइटिस जोड़ों में होने वाली एक बहुत ही आम बीमारी है। इस बीमारी में जोड़ों में दर्द होता है और जोड़ों को घुमाने, मोड़ने, हिलाने और हरकत करने में परेशानी होती है।
अर्थराइटिस का शाब्दिक अर्थ- जोड़, राइटिस-दर्द यानि जोड़ों का दर्द होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि एक सौ से भी अधिक किस्म के अर्थराइटिस होते हैं। अर्थराइटिस से व्यक्ति की रोज़मर्रा की जीवनशैली बुरी तरह प्रभावित होती है। यह जीवन भर सताने वाली बीमारी होती है। बीमारी अधिक बढने पर मरीज के जोड़ों में असहनीय पीड़ा होती है और हाथ–पांव हरकत करना तक बंद कर देता है।
अर्थराइटिस में दर्द के कारण :
रूमेटॉयड अर्थराइटिस : यह इस बीमारी की बहुत ही सामान्य और गंभीर रूप है जिसका समय पर प्रभावी उपचार करवाना आवश्यक होता है वरना बीमारी बढ़ने पर एक साल के अन्दर ही शरीर के जोड़ों को काफी नुकसान होता है।
सोराइटिक अर्थराइटिस : अर्थराइटिस के दर्द का यह रूप सोराइसिस के साथ प्रकट होता है। समय पर और सही इलाज न होने पर यह बीमारी काफी घातक और लाइलाज हो जाती है।
ओस्टियोसोराइसिस : इस तरह का अर्थराइटिस आनुवांशिक हो सकता है और यह उम्र बीतने के साथ प्रकट होता है। यह विशेष रूप से शरीर का भार सहन करने वाले पीठ, कमर, घुटना और पांव को प्रभावित करता है ।
पोलिमायलगिया रूमेटिका : यह 50 साल की आयु पार कर चुके लोगों को होता है। इसमें गर्दन, कंधा और कमर में असहनीय पीड़ा होती है और इन अंगों को घूमाने में कठिनाई होती है। अगर सही समय पर सही इलाज हो तो इस बीमारी का निदान किया जा सकता है। लेकिन कई कारणों से आमतौर पर इसका इलाज संभव नहीं हो पाता है।
एनकायलाजिंग स्पोंडिलाइटिस : यह बीमारी सामान्यत: शरीर के पीठ और शरीर के निचले हिस्से के जोड़ों में होता है। इसमें दर्द हल्का होता है लेकिन लगातार बना रहता है। इसका उपचार संभंव हैं लेकिन सही समय पर इसकी पहचान कर सही इलाज किया जाए तब।
रिएक्टिव अर्थराइटिस : रिएक्टिव अर्थराइटिस शरीर में किसी तरह के संक्रमण फैलने के बाद होने का खतरा रहता है। आंत या जेनिटोरिनैरी संक्रमण होने के बाद इसके होने की संभावना बढ जाती है। इसमें सही इलाज काफी कारगर साबित होता है।
3 सर्वाइकल कैंसर- गर्भाशय के अंदर व भीतरी सतह पर घातक कोशिकाओं की वृद्धि होती है जिससे मीनोपोज के बाद भी रक्त स्राव होने लगता है।
4 फाइब्राइड-फाइब्रायड यानी रसौली या ट्यूमर होना। आज लगभग 30 फीसदी महिलाएं फाइब्रायड की शिकायत से ग्रस्त है। फाइब्रायड एक महिला में एक से लेकर कई हो सकते है। फाइब्रायड की शिकायत होने इसकी चिकित्सा के लिए सर्जरी करवाई जाती है। आमतौर पर फाइब्रायड गर्भाशय की दीवार से निकलते है जिससे बांझपन का खतरा भी रहता है।
5 टीबी- यह संक्रामक बीमारी है। आम तौर पर फेंफड़ों पर हमला करती है। लेकिन शरीर के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकती है।
6 हृदय से जुड़ी बीमारी- दिल और दिल की धमनियों से संबंधित रोग अकसर महिलाओं में अधिक होते है। इसकी वजह से हार्ट अटैक की नौबत भी आ जाती है।
7 मधुमेह- मधुमेह ऐसी बीमारी है जिसकी शिकार महिलाएं ही अधिक होती है। मधुमेह के कारण महिलाओं को कई और बीमारियां भी घेर लेती हैं। मधुमेह के दौरान शरीर में इंसुलिन बनना बंद हो जाता है, इसमें पेंक्रियाज़ ग्रंथी सुचारू रूप से काम करना बंद कर देती है। इस ग्रंथि में इंसुलिन के अलावा कई तरह के हार्मोंस निकलते हैं।
8 ऑस्टियोपोरोसिस- इस रोग में हड्डियां कमजोर हो जाती है और उनमें अत्यधिक दर्द होता है। यह जल्दी मीनोपोज होने से , अधिक शराब व एल्कोहल लेने से और संतुलित खान-पान ने लेने से होता है।
9 पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज-महिलाओं की कमर के निचले हिस्से में फेलोपियन ट्यूब ब गर्भाशय तक ले जाने वाली नली जलन होती है। इस बीमारी में पेट में दर्द होना, माहवारी के समय अधिक रक्ते स्राव होना इत्यादि होता है।
10 वल्वर कैंसर- महिलाओं के जनांग के बाहरी हिस्से में यह कैंसर होता है। इसमें पेशाब के दौरान जलन, खुजली और रक्त स्राव इत्यादि होता है।

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