headache सिर दर्द की वजह:-
क्या आप सिर दर्द से अकसर परेशान रहती हैं? अगर हां, तो जानिए इसकी वजह क्या है। कहीं उस सिर दर्द के पीछे आपकी लापरवाही तो नहीं? ऐसे बहुत से सामान्य कारण होते हैं, जिन पर हम ध्यान नहीं देते और बेवजह सिर दर्द झेलते रहते हैं। यदि इससे बचना चाहती हैं तो जानिए उन सामान्य कारणों और उनसे बचने के उपायों को।
1. चुस्त परिधान
बहुत चुस्त कपड़े व टाइट बेल्ट लगातार एब्डॉमेन पर दबाव डालते हैं, जिससे अकसर सिर दर्द होता है। अधिक देर तक पेट को भीतर दबा कर रखने से कभी-कभी लगता है कि सिर फट जाएगा।
क्या करें
आरामदायक कपड़े पहनें और खाना खाते समय पेट को टाइट न रखें। यदि बेल्ट बांधती हैं तो खाने से पहले उसे खोल दें व तुरंत खाने के बाद न बांधें। पेट कम करने के लिए या शरीर को आकर्षक दिखाने के लिए टाइट बेल्ट न बांधें, साथ ही लंबी दूरी यानी भविष्य की प्लानिंग करें। अभी जो कपड़े फिट हों, वही खरीदें।
2. गैस्ट्रोनॉमी
बहुत मिर्च-मसाले का खाना खाने से, खाना मिस करने से और हैवी खाना खाने या जंक फूड खाने से पेट में जलन व गैस बनने की समस्या होती है। जिन्हें अधिक गैस बनती है उन्हें भी सिर दर्द परेशान करता है।
क्या करें
ऐसे खाने से बचें, जो एसिड बनाते हों। खाना खाने के तुरंत बाद लेटने से भी गैस्टि्रक समस्या होती है। कम से कम सोने के दो घंटे पहले खाना खा लेना चाहिए। इसके अलावा खूब पानी पिएं। एंटी एसिड दवाएं भी फायदेमंद होंगी। यदि इन सभी गैस बनाने वाली समस्याओं से दूर रहेंगी तो सिर दर्द से भी बची रहेंगी।
ऐसे खाने से बचें, जो एसिड बनाते हों। खाना खाने के तुरंत बाद लेटने से भी गैस्टि्रक समस्या होती है। कम से कम सोने के दो घंटे पहले खाना खा लेना चाहिए। इसके अलावा खूब पानी पिएं। एंटी एसिड दवाएं भी फायदेमंद होंगी। यदि इन सभी गैस बनाने वाली समस्याओं से दूर रहेंगी तो सिर दर्द से भी बची रहेंगी।
3. कहीं ये खुशबू तो नहीं
कहीं आपका सिर उस समय तो दर्द नहीं करने लगता, जब आपके पति तैयार होकर सेंट छिड़क रहे हों। या जब आप भीड़ भरे खुशबूदार माहौल में हों। यह भी हो सकता है कि आप ज्यादा सेंसिटिव हों। तेज महक से या यूं कहना चाहिए कि खुशबू से आपको एलर्जी हो।
क्या करें
बहुत आसान है कि जिन तेज फ्रेगरेंस से आपको परेशानी होती है, उनसे दूर रहें। उस समय वहां से दूर रहें, जहां डिओडरेंट या परफ्यूम स्प्रे हो रहा हो। याद रखें कि एक बार सिर दर्द हो गया तो दर्द की दवा के बिना आपको चैन नहीं मिलेगा।
बहुत आसान है कि जिन तेज फ्रेगरेंस से आपको परेशानी होती है, उनसे दूर रहें। उस समय वहां से दूर रहें, जहां डिओडरेंट या परफ्यूम स्प्रे हो रहा हो। याद रखें कि एक बार सिर दर्द हो गया तो दर्द की दवा के बिना आपको चैन नहीं मिलेगा।
4. कैफीन की ओवरडोज
अकसर कैफीन की अधिकता भी सिर दर्द का कारण बनती है। कुछ खाने वाली चीजों जैसे पुडिंग और केक में इतनी कैफीन होती है कि उन्हें खाने से सिर में दर्द हो जाता है। कुछ पेय पदार्थो जैसे कोला, कॉफी, लिकर और चाय के सेवन से भी ऐसा ही होता है।
क्या करें
इनमें से कुछ खाना हो तो अधिक मात्रा में न खाएं। इस पर भी ध्यान रखें कि जिनमें मोनो सोडियम ग्ल्यूटामेट हो, जैसे प्रोसेस्ड मीट और फिश, खमीर से बेक्ड खाना, रेड वाइन, सिट्रस फ्रूट और आर्टिफिशियल स्वीटनर वाली चीजें, अपने भोजन से एकदम कम कर दें।
इनमें से कुछ खाना हो तो अधिक मात्रा में न खाएं। इस पर भी ध्यान रखें कि जिनमें मोनो सोडियम ग्ल्यूटामेट हो, जैसे प्रोसेस्ड मीट और फिश, खमीर से बेक्ड खाना, रेड वाइन, सिट्रस फ्रूट और आर्टिफिशियल स्वीटनर वाली चीजें, अपने भोजन से एकदम कम कर दें।
5. ब्रेन फ्रीज
कई बार बहुत ठंडी आइसक्रीम या जमा हुआ कोल्ड ड्रिंक पीने से लगता है कि सिर में दर्द हो गया। इसे ही बेन फ्रीज कहते हैं, जो बहुत ठंडा खाने से या पीने से होता है। यदि आपको माइग्रेन की शिकायत है तो आपको इस ठंडे सिर दर्द से बच कर रहना पड़ेगा।
क्या करें
इसके लिए बहुत ठंडे व फ्रीज्ड पदार्थ
खाने-पीने से जहां तक हो सके बचें।
इसके लिए बहुत ठंडे व फ्रीज्ड पदार्थ
खाने-पीने से जहां तक हो सके बचें।
6. फैशन कारण तो नहीं
कई बार जब आप कहीं जा रही होती हैं, तब आपको सिर दर्द होता है। देखिए, कहीं बहुत हेवी इयररिंग तो नहीं पहनीं या आपने टाइट बाल तो नहीं बनाए। हेवी इयररिंग से आपके कान नीचे लटक जाएंगे और टाइट बाल आपके बालों को पीछे की ओर खीचेंगे, इससे सिर में दर्द तो होगा ही।
क्या करें
लंबे लेकिन हलके इयररिंग पहनने के साथ बालों को ढीला बांधिए या खुला छोड़ दीजिए।
फिर भी सिर दर्द नहीं जा रहा तो कोई पेन किलर लेना पड़ेगा।
लंबे लेकिन हलके इयररिंग पहनने के साथ बालों को ढीला बांधिए या खुला छोड़ दीजिए।
फिर भी सिर दर्द नहीं जा रहा तो कोई पेन किलर लेना पड़ेगा।
7. वातावरण ऐसा तो नहीं
वातावरण में आया अचानक बदलाव, गरमी, तेज हवा, ह्यूमिडिटी भी सिर दर्द के जनक हैं। कभी-कभी सूरज की तेज रोशनी, ग्लेयर, फ्लोरेसेंट लाइटिंग या टेलिविजन स्क्रीन से भी ऐसा हो सकता है। साथ ही बहुत ठंडक होने से भी माइग्रेन होता है। एरोप्लेन में बैठने से या समुद्र में पानी केबहुत नीचे जाने से भी ऐसा हो सकता है। ड्राई व डस्टी, महक वाले या स्टफी कमरे, जिनमें खराब वेंटिलेशन हो भी सिर दर्द के कारण हो सकते हैं, क्योंकि इससे कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैस निकलती है। प्रदूषण, धुंआ व सिगरेट के धुंए से भी सिर दर्द हो सकता है। कई बार तेज चुभने वाली आवाज से भी सिर में भयानक दर्द हो जाता है। इसे ही नॉयस पॉल्यूशन कहते हैं।
क्या करें
ऐसी स्थितियों से दूर रहने की कोशिश करें, आत्मनियंत्रण पर काम करें और नियमित मेडिटेशन करने का अभ्यास बनाएं। जिस कमरे में ज्यादा समय बिताती हैं, उस कमरे को हवादार रखें। रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था रखें। सफाई करते समय मास्क लगाएं, जिससे धूल से परेशानी न हो। बाहर जाते समय गॉगल्स लगाएं या छतरी का इस्तेमाल करें, जिससे तेज धूप से बची रहें। टीवी देखते समय या कंप्यूटर पर काम करते समय बिना नंबर का चश्मा लगाएं, जिससे आंखों पर जोर न पड़े। इन उपायों पर अमल कर देखें, यदि अब भी सिर दर्द है तो तुरंत किसी कुशल चिकित्सक से संपर्क करें।
सर दर्द के कारण
सर दर्द के कारण
कभी न कभी आपको सिरदर्द/सर दर्द का सामना अवश्य करना पड़ा होगा क्योंकि सर दर्द एक ऐसी बीमारी है जिसका शिकार लगभग हर व्यक्ति कभी न कभी जरुर होता है। कुछ लोगों के लिए सर दर्द मामूली होता है और अपना एहसास क्षण भर के लिए करवा कर चला जाता है जबकि कुछ लोगों में यह एक दो घंटे तक रहता है तो कुछ लोगो का सर हमेशा दर्द करता रहता है।
जब आपका सर दर्द होता है तो कुछ भी अच्छा नहीं लगता है और आपका व्यवहार भी बदल जाता है। आप जरा जरा सी बात पर चिडचिड़ाने या गुस्सा करने लगते हैं और आप अँधेरे या शांत कमरे में अकेले रहना चाहते हैं।
सर दर्द होने के पचासों कारण होते हैं। तेज धूप में काफी देर तक बिना टोपी या छाते के रहने से बहुत से लोगों का सर दर्द करने लगता है। यानि शरीर का तापमान बढ़ जाने से (तेज बुखार या तेज धूप से ) या बहुत हीं गर्मी के कारण कई लोगों का सर दर्द करने लगता है।
सर दर्द की शिकार लडकियां/युवतियां एवं महिलाएं सबसे ज्यादा होती हैं। कई लड़कियों का जब मासिक धर्म शुरू होने को होता है तो उनका सर दर्द करने लगता है। वे चिडचिड़ी हो जाती हैं एवं जरा जरा सी बात पर क्रोधित होने लगती हैं। ठीक इसी तरह जब स्त्रियाँ रजोनिवृत्ति की अवस्था में पहुँचती हैं तो वे अक्सर सर दर्द या अन्य मानसिक परेशानियों से परेशान रहती हैं। गर्भावस्था में भी बहुत से महिलाएं सर दर्द की शिकायत करती है।
दुर्गन्ध या बदबू लगने से भी कई लोगों का सर दर्द करने लगता है। जिन लोगों का पेट साफ़ नहीं रहता यानि कि जिन्हें अक्सर कब्ज की शिकायत रहती है उनका सर भी अक्सर दर्द करता रहता है। अपर्याप्त नीद की वजह से भी बहुत से लोग सर दर्द से परेशान रहते हैं।
कई बीमारियाँ, खासकर मानसिक बीमारियाँ भी सर दर्द का कारण बनती है मसलन अवसाद, ब्रेन ट्युमर इत्यादि। अवसाद यूँ तो किसी को भी हो सकता है लेकिन ऐसा देखा गया है कि इसकी शिकार लडकियां/ महिलाएं ज्यादातर होती हैं। ब्रेन ट्युमर किसी को भी हो सकता है जिसमें सर में बहुत हीं तेज पीड़ा होती है। यह पीड़ा मरीज के लिए असहनीय होती है और किसी भी कारण से किसी भी वक्त ब्रेन ट्यूमर का दर्द उठ सकता है। तनाव इस तरह के दर्द का प्रमुख कारण होता है। तनाव अपने आप में सर दर्द का एक प्रमुख कारण है।
बहुत जोर से भूख लगने पर भी या किसी कारण से आपको खाना खाने से वंचित रहना पड़ जाये तो इस हालत में भी सर दर्द उठ सकता है। कई खाद्य पदार्थ भी ऐसे होते हैं जो सर दर्द का कारण बनते हैं या सर दर्द को बढ़ाते हैं।
अगर सर दर्द अपर्याप्त नींद के कारण या बदबू के कारण या ऐसे हीं कुछ अल्पकालिक कारणों से हों तो चिंता की कोई बात नहीं है क्योंकि अगर आप पर्याप्त नींद लेंगे या बदबू से दूर सुगन्धित वातावरण में रहेंगे तो आपका सर दर्द दूर हो जायेगा लेकिन अगर आपको लगातार सर दर्द की शिकायत रहती हो या दर्द असहनीय होता हो तो उसे नजरंदाज न करें और अपनी मर्जी से दवा लेकर ठीक न करते रहे।
अपनी मर्जी से सर दर्द की दवा तभी लें जब सर दर्द काबू के बाहर जा रहा हो और आपके आस पास कोई डॉक्टर उपलब्ध न हों या सर दर्द मामूली कारणों से हुआ हो लेकिन उसके बावजूद सर दर्द वापस आये तो किसी डॉक्टर को दिखलाये बगैर दवा न लें।
मामूली सर दर्द में घरेलू उपचार बहुत हीं कारगर सिद्ध होते है। स्वयं दवा लेने कि बजाये घरेलू नुस्खों को आजमायें।
जिन कारणों से आपको सर दर्द होता हो मसलन सिगरेट का धुंआ लगने से, तेज धूप लगने से, बदबू लगने से, खट्टी चीजे खाने से या बहुत ज्यादा देर भूखे पेट रहने से , तो इन कारकों को दूर करके आप सर दर्द के शिकार होने से बचे रह सकते हैं। अगर दांत दर्द, आँखों में खराबी या किसी अन्य बीमारी की वजह से आपको सर दर्द है तो ऐसी स्थिति में सर दर्द की दवा लेने की बजाये मुख्य रोग का उपचार करवाएं।
दांत दर्द ठीक होते हीं आपका सर दर्द ठीक हो जायेगा; आँखों की दवा लेते हीं या चश्मा पहनते हीं आपका सर दर्द मिट जायेगा।
ऑक्युलर माइग्रेन छीन सकता है आंखों की रोशनी भी
ऑक्युलर माइग्रेन का सही इलाज अभी तक नहीं खोजा जा सका है।
ब्लाइंड स्पॉट और अस्थायी अंधापन भी है इसका सामान्य लक्षण।
बहुत दुर्लभ बीमारी है ऑक्युलर माइग्रेन।
इसे रेटिनल, ऑफथेलमिक या मोनोकुलर माइग्रेन भी कहते हैं।
ऑक्युलर माइग्रेन, माइग्रेन का एक प्रकार है जिसमें पीड़ित को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसके चलते क्षणिक अंधता व तेज दर्द जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
ऑक्युलर माइग्रेन में सिर में बहुत तेज दर्द होता है। इसके चलते कुछ देर के लिए आंखों की रोशनी तक जा सकती है। यह समस्या एक घंटे तक बनी रह सकती है। इसके साथ ही लंबे समय तक सिर में तेज दर्द भी रह सकता है। जानकार इस परिस्थिति को कई बार रेटिनल, ऑफथेलमिक या मोनोकुलर माइग्रेन भी कहते हैं।
यह समस्या काफी दुर्लभ होती है। माइग्रेन से पीडि़त 200 में से करीब एक व्यक्ति को यह समस्या परेशान करती है। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि कई बार ऑक्युलर माइग्रेन के लक्षण किसी अन्य बीमारी के कारण भी सामने आ सकते हैं।
इस बीमारी का निदान करने के लिए डॉक्टर को समान लक्षणों वाली अन्य बीमारियों की भी समीक्षा करनी पड़ती है। इलाज शुरू करने से पहले उसे यह पूरी तरह से सुनिश्चित करना पड़ता है कि रोगी ऑक्युलर माइग्रेन से ही पीडि़त है। इस बात की पुष्टि किए बिना डॉक्टर के लिए किसी भी रोगी का इलाज शुरू कर पाना संभव नहीं होता।
लक्षणआंखों में होने वाली समस्या
इंटरनेशनल हेडएक सोसायटी के मुताबिक इस रोग के निम्न संभावित लक्षण हो सकते हैं।
एक आंख में होने वाली दृष्टिगत समस्या जिसमें रोगी को आंखें चुंधियाने, ब्लाइंट स्पॉट, अस्थायी अंधेपन या आंखों की रोशनी जाना इस प्रकार के माइग्रेन में काफी सामान्य माना जाता है।
सिरदर्द व अन्य लक्षण
ऑक्युलर माइग्रेन की परेशानी होने पर सिरदर्द की समस्या चार घंटे से लेकर तीन दिन तक रह सकती है। इसके साथ ही सिर के एक हिस्से में तेज दर्द (अर्द्धकपाली) या सिर में हल्की या तीव्र पीड़ा भी इसका ही संकेत है। धड़कन में तेजी और शारीरिक गतिविधियां करते समय अधिक परेशानी महसूस करना भी इसका इशारा हो सकता है।
रोशनी या आवाज के प्रति असामान्य संवेदनशीलता
एक महत्वपूर्ण लक्षण यह है कि इस दौरान रोगी की एक आंख की रोशनी जाती है। कई लोग आंखों में रोशनी के चुभने और एक आंख की रोशनी जाने के बीच का अंतर ही नहीं समझ पाते। उन्हें दोनों आंखों में इसका असर महसूस होता है, लेकिन वास्तव में केवल एक ही आंख इससे प्रभावित होती है।
एक सामान्य माइग्रेन जिसमें फ्लैशिंग लाइट और ब्लाइंट स्पॉट नजर आता है, वह अधिक सामान्य समस्या है। यह समस्या माइग्रेन से पीडि़त 20 फीसदी लोगों को प्रभावित करती है। लेकिन, इस मामले में ये लक्षण दोनों आंखों में होते हैं। दोनों आंखों को एक-एक कर ढंककर आप इस बात का पता लगा सकते हैं कि आपको दोनों आंखों में दृष्टिगत समस्या है अथवा एक आंख में।
ऑक्युलर माइग्रेन के कारण
इस बीमारी के कारणों को लेकर जानकार अभी तक पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। हालांकि, फिर भी वे कुछ बातों को इस बीमारी के कारणों के तौर पर देखते हैं-
रेटिना की रक्तवाहिनियों में ऐंठन। यह आपकी आंखों के पीछे एक छोटी सी नस होती है।
रेटिना की कोशिकाओं में होने वाले बदलावों के कारण
वे लोग जिन्हें नियमित रूप से इस प्रकार के माइग्रेन की शिकायत रहती है, उनकी एक आंख की रोशनी स्थायी रूप से भी जा सकती है। विशेषज्ञ अभी इस बात को लेकर भी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं कि आखिर माइग्रेन की दवाओं के प्रयोग से आंखों को पहुंचने वाली क्षति को रोका जा सकता है। हालांकि, इन लक्षणों के बारे में अपने डॉक्टर से बात करना हमेशा फायदेमंद रहेगा।
ऑक्युलर माइग्रेन का निदानइलाज
इस बीमारी का निदान करने के लिए डॉक्टर आपसे लक्षणों के बारे में पूछेगा और फिर आपकी आंखों की जांच करेगा। डॉक्टर इस बात की भी जांच करेगा कि आखिर यह समस्या किसी अन्य बीमारी के कारण तो नहीं है। क्षणिक अंधता आंखों को रक्त का प्रवाह रुकने के कारण पैदा होती है। यह लक्षण आंखों की रक्तवाहिनी में आने वाले किसी अस्थायी रुकावट के कारण भी ऐसा हो सकता है।
ऑक्युलर माइग्रेन को रोकने अथवा इसके इलाज के लिए उपयुक्त इलाज को अभी तक खोजा जा रहा है। इसके लिए डॉक्टर आपको एस्प्रिन या अन्य दवायें दे सकता है।
ऑक्युलर माइग्रेन के वास्तविक कारण और इलाज तलाशने में अभी तक बड़ी कामयाबी नहीं मिली है। लेकिन, फिर भी आप अपनी जीवनशैली को संयमित रख इसके कुछ संभावित खतरों को तो कम कर सकते हैं।
ऑक्युलर माइग्रेन के वास्तविक कारण और इलाज तलाशने में अभी तक बड़ी कामयाबी नहीं मिली है। लेकिन, फिर भी आप अपनी जीवनशैली को संयमित रख इसके कुछ संभावित खतरों को तो कम कर सकते हैं।
अच्छा सोचें और सर दर्द घटायें
सरदर्द, आज की जीवनशैली में होने वाली सबसे आम समस्या है और इसका कारण तनाव से लेकर माइग्रेन तक हो सकता है। तनाव की स्थिति में गर्दन की मांस पेशियों में सिकुड़न हो जाती है।
शायद आपको यह आश्चर्यजनक लगे कि, अपनी प्रतिदिन की दिनचर्या में थोड़ा सा बदलाव लाकर आप सरदर्द से बच सकते हैं। अगर आपके सरदर्द का कारण भी तनाव है, तो तनाव का मुकाबला करना सीखें:
शायद आपको यह आश्चर्यजनक लगे कि, अपनी प्रतिदिन की दिनचर्या में थोड़ा सा बदलाव लाकर आप सरदर्द से बच सकते हैं। अगर आपके सरदर्द का कारण भी तनाव है, तो तनाव का मुकाबला करना सीखें:
पर्याप्त नींद लें:
समय पर सोयें और समय पर जागें, सप्ताहांत में भी उसी समय पर उठें जबकि आप रोज़ उठते हों। नींद में कमी करने की आदत को आज से ही बदल डालें। अगर आपको लम्बे समय से नीदं नहीं आ रही है, तो चिकित्सक से संपर्क करें।
समय का सही प्रयोग:
अपने समय का सही प्रयोग करें, ऐसा करके आप ना केवल अपना काम ठीक प्रकार से कर सकेंगे, बल्कि काम के कारण होने वाले तनाव से भी मुक्ति पा सकेंगे।
सकारात्मक सोच का कमाल:
शायद आपने सरदर्द के लिए बहुत सी दवाइयां ली हों, इस बार थोड़ा सकारात्मक सोच अपना कर देखें।
एक विकल्प यह भी:
ध्यान करें, सरदर्द के लक्षणों से बचने का बहुत आसान उपाय है यह क्यों कि ध्यान की मुद्रा में आप पूरी तरह से तनावमुक्त, रहते हैं। सिर्फ 5 मिनट तक ही ध्यान करें, अंदर की ओर सांस लें और बाहर की ओर सांस छोड़ें।
ध्यान करें, सरदर्द के लक्षणों से बचने का बहुत आसान उपाय है यह क्यों कि ध्यान की मुद्रा में आप पूरी तरह से तनावमुक्त, रहते हैं। सिर्फ 5 मिनट तक ही ध्यान करें, अंदर की ओर सांस लें और बाहर की ओर सांस छोड़ें।
तनावमुक्ति का प्रयास:
काम करने के समय काम करें और आराम करने के समय आराम करें। याद रखें आपका काम जितना महत्वपूर्ण है उतना ही आवश्यक है आपका तनावमुक्त होना।
कुछ बातें:
• स्वस्थ आहार लें क्योंकि जंक फूड में मौजूद नुकसानदायी तत्व आपके पाचन तंत्र को भी प्रभावित कर सकते हैं, जिसके कारण सरदर्द हो सकता है।
• सरदर्द से बचने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करें क्योंकि आपके सरदर्द का कारण निर्जलीकरण भी हो सकता है।
• कुछ देर ताज़ा हवा में टहलें, घर या आफिस के सभी कमरे व दरवाज़े ना बंद रखें।
सरदर्द का कारण हर व्यक्ति में अलग-अलग होता है। लेकिन ज्यादातर स्थितियों में सरदर्द का कारण होता है: तनाव, भूख लगना, पानी की कमी या आंखों पर तनाव। सरदर्द का कारण हर व्यक्ति में अलग-अलग होता है।• सरदर्द से बचने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करें क्योंकि आपके सरदर्द का कारण निर्जलीकरण भी हो सकता है।
• कुछ देर ताज़ा हवा में टहलें, घर या आफिस के सभी कमरे व दरवाज़े ना बंद रखें।
सिर दर्द के प्रकार
बदलती जीवनशैली और गलत खानपान में किसी को भी सिरदर्द होना एक आम बात है। सिरदर्द से तात्पर्य है सिर के एक या एक से अधिक हिस्सों में साथ ही गर्दन के पिछले भाग में हल्के से लेकर तेज़ दर्द का एहसास होना। सिर दर्द के कई कारण होते हैं, हालांकि ज़्यादातर सिरदर्द किसी गंभीर बीमारी की वजह से नहीं होते। वे कभी कभी होते हैं और दवा लेने या जीवनशैली में थोड़ा बदलाव करने से ठीक हो जाते हैं। आमतौर पर सिरदर्द नींद पूरी न होने, दांतों में दर्द होने, थकान होने, गलत दवाई लेने, चश्मे का नंबर बढ़ने, मौसम बदलने पर हो सकता है। सिर दर्द एक प्रकार का नही होता, इसके अनेक प्रकार हैं। आइए हम आप को बताते है
सिर दर्द के प्रकारों के बारें में-
सिर दर्द के प्रकार
1. तनाव से सिर दर्द- तनाव से होने वाला सिरदर्द सामान्य प्रकार का होता है। ये मांसपेशियों में सिकुड़न के कारण होता है। ये सिरदर्द लंबे समय तक तनाव के रहने के कारण होता है। तनाव से पैदा हुआ सिरदर्द अक्सर धीमा और स्थिर होता है। 90 प्रतिशत सिरदर्द इसी कारण होते हैं और आमतौर पर खुद ही ठीक हो जाते हैं। इसके अतिरिक्त रोजाना होने वाला सिरदर्द भावनात्मक तनाव, थकान व शोरगुल से भी हो सकता है। वैसे तो ऐसा दर्द सिर में कहीं भी हो सकता है, परन्तु गर्दन या दोनों कनपटियों में यह दर्द तेज होता है।
2. माइग्रेन से सिरदर्द- माइग्रेन ऐसा सिरदर्द है जो अधिकतर आनुवंशिक होता है। यह सिरदर्द हर किसी में अलग-अलग होता है। माइग्रेन सिर के आधे हिस्से में और बहुत तेज होने वाला सिरदर्द है। इस सिरदर्द में कई बार जी मिचलाना, उल्टी होना, रोशनी के प्रति संवेदनशीलता, दृष्टि-दोष, सुस्ती, बुखार और ठंड भी लगती है। माइग्रेन से कई बार धीरे-धीरे और कई बार तेज होने लगता है। इसका कारण किसी भोज्य पदार्थ से एलर्जी भी हो सकता है।
3. नशीले पदार्थ लेने वालों में सिरदर्द- इस तरह का सिरदर्द अधिकतर उन लोगो को होता है जो नशीले पदार्थों का सेवन करते है। वह नशे के आदि हो जाते है और जब उन्हें नशा नही मिलता है तो उनके सिर में दर्द होने लगता है। यह इसलिए होता है क्योंकि नशीले पदार्थों के सेवन से ऊतकों पर उत्तेजक प्रभाव पड़ता है, जिससे ऊतको का आवरण उत्तेजित होता है। मस्तिष्क में इस तरह की उत्तेजना के कारण सिरदर्द होता है।
4. साइनस सिरदर्द - साइनस सिरदर्द तब होता है जब आपके साइनस में संक्रमण हो जाता है और उसमें जलन होने लगती है। साइनस में सिरदर्द तेज और कई बार लगातार होता रहता है। यह अधिकतर सुबह शुरू होता है। साइनस के कारण सिरदर्द में आंखों में, गाल में और सिर के अगले हिस्से में दबाव और दर्द होता और साथ ही इसमें नीचे झुकने पर दर्द बहुत तेज होता है। इसमें ऊपरी दांत में दर्द, बुखार, ठंड लगना, चेहरे पर सूजन आदि की समस्या भी आ जाती है।
5. कब्ज से सिरदर्द- सिरदर्द उत्पन्न होने का एक अन्य कारण और भी है, जिसे कब्ज से होने वाला सिरदर्द कहते हैं। अधिक कब्ज होने के कारण यह सिरदर्द होता है। पेट में कब्ज बनने के कारण कभी-कभी आंतों की दीवारों में प्लाज्मा आवश्यकता से अधिक नष्ट होने लगते जिसके कारण ब्रेन तक खून पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पाता है, जिससे सिरदर्द उत्पन्न होने लगता है।
सावधानियां
हल्के में न लें माइग्रेन को
माइग्रेन के कारण
जिन लोगों को हाई या लो ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और तनाव जैसी समस्याएं होती हैं उनके माइग्रेन का शिकार होने की संभावना बढ़ जाती है।
एल्कोहल या किसी तरह का संक्रमण और शरीर में विषैले तत्वों का जमाव भी माइग्रेन का कारण हो सकता है।
भावनाओं को दबाने से भी माइग्रेन हो सकता है। इसलिए भावनाओं को दबाने के बजाय उन्हें अपने विश्वस्त लोगों से बांटें।
कभी-कभी आंखों पर अधिक जोर पड़ने से भी सिरदर्द हो जाता है। सिरदर्द कई तरह का होता है इसलिए अगर कोई आम कारण समझ में न आए तो किसी नेत्र विशेषज्ञ से भी मिलना चाहिए। अगर ऐसा हो तो आंखों के कुछ सामान्य व्यायाम से इससे राहत पाई जा सकती है।
सर्दी लगना, वायरस और बुखार भी सिरदर्द के कारण बन जाते हैं। इनके अलावा एक वजह आयरन की कमी भी होती है।
माइग्रेन का कारण आनुवांशिक भी हो सकता है। हार्मोनल असंतुलन की वजह से यह समस्या लड़कों की अपेक्षा लड़कियों में अधिक पाई जाती है।
पर्याप्त नींद न लेना, भूखे पेट रहना और पर्याप्त मात्रा में पानी न पीना जैसे कुछ छोटे-छोटे कारणों से भी आपको माइग्रेन की शिकायत हो सकती है।
माइग्रेन हो तो क्या करें
माइग्रेन होने पर ठंडे पानी की पट्टी सिर पर रखें इससे रक्त धमनियां फैल जाती हैं और अपनी पूर्व स्थिति में आ जाती हैं।
नियमित रुप से व्यायाम, योग और ध्यान करने से आप अपने दिमाग को तनाव से मुक्त कर सकते हैं।
ज्यादा देर तक भूखे नहीं रहें। थोड़ी-थोड़ी देर में कुछ-ना-कुछ खाते रहें।
हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करना बहुत फायदेमंद है। इसके अलावा गाजर व खीरा भी लाभदायक है।
सावधानियां
जहां पर आप काम कर रहें हों या बैठे हो वहां तेज रोशनी (जो आंखों में चुभें), तेज धूप या तेज गंध वाली नहीं होना चाहिए।
माइग्रेन से पीडित लोगों को जंक फूड व डिब्बा बंद पदार्थों से दूर रहना चाहिए।
पनीर, चॉकलेट, चीज, नूडल्स, केले व कुछ प्रकार के नट्स में ऐसे रासायनिक तत्व पाए जाते हैं जो माइग्रेन को बढ़ा सकते हैं।

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