migraine माइग्रेन:-
माइग्रेन के लिए वैकल्पिक उपचार
माइग्रेन से बचने के लिए विटामिन बी का सेवन करें।
जंकफूड और चाइनीज भोजन का सेवन करना बंद कर दें।
दर्द होने पर घी और कपूर को मिला कर लगाएं।
अंगूर के रस का सेवन करें।
माइग्रेन एक प्रकार का मस्तिष्क विकार है, जिसमें सिरदर्द होता है। यह प्राय: शाम के समय प्रारंभ होता है। इसमें दर्द 2 से 72 घंटे तक हो सकता है।माइग्रेन के दर्द से बचने के लिए लोग दवा पर ज्यादा निर्भर रहते हैं जो कि ठीक नहीं है। क्या आपने कभी इसके वैकल्पिक उपचार के बारे में सोचा है। ये वैकल्पिक उपचार भी इसके दर्द को कम करने में मददगार साबित होते हैं।
सभी जानते हैं कि माइग्रेन में होने वाला सिरदर्द कितना तकलीफदेह होता है। यह दर्द अचानक ही शुरू होता है और अपने आप ही ठीक भी हो जाता है। हाथों के स्पर्श से मिलने वाला आराम और प्यार किसी भी दवा से ज्यादा असर करता है। कुछ लोग तो इन उपचारों की मदद से ही इस दर्द को काबू में कर लेते हैं। आइए जानें माइग्रेन के वैकल्पिक उपचारों के बारे में-
सिर दर्द होने पर बिस्तर पर लेट कर दर्द वाले हिस्से को बेड के नीचे लटकाएं। सिर के जिस हिस्से में दर्द हो, उस तरफ वाली नाक में सरसों के तेल की कुछ बूंदें डालें, फिर जोर से सांस ऊपर की ओर खीचें। इससे सिर दर्द में राहत मिलेगी।
माइग्रेन के दर्द से बचने के लिए दालचीनी को पानी के साथ बारीक पीस ले और इस लेप माथे पर लेप लगाएं। जब यह लेप सूख जाए तो हटा लें। कुछ ही देर में आपको माइग्रेन के दर्द से राहत मिलेगी।
भूखे रहने पर भी यह दर्द बढ़ सकता है। इसलिए ज्यादा देर तक भूखे न रहें, थोड़ी-थोड़ी देर में कुछ न कुछ खाते रहें। हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन फायदेमंद रहता है। गाजर और खीरा भी फायदेमंद है। मैग्निशियम से भरपूर गज़ा माइग्रेन में फायदेमंद होता है।
दर्द होने पर मछली के तेल की सिर में मालिश करने से काफी आराम मिलता है। मालिश करने से सिकुड़ी हुई धमनियां फैल जाती हैं। मछली का सेवन भी माइग्रेन को कम करता है। इसमें पाया जाने वाला ओमेगा 3 फैटी एसिड दर्द से राहत देता है।
चाइनीज नूडल्स जैसे कई व्यंजनों में अजीनोमोटो का इस्तेमाल होता है जिसे एमएसजी 'मोनो सैचुरेटेड ग्लूमेट' भी कहते हैं। कई बार इसके सेवन से माइग्रेन के मरीजों की दिक्कतें बढ़ जाती हैं।
जब माइग्रेन दर्द आपको सताने लगे तो कपूर को घी में मिला कर सिर पर हल्के हाथों से मालिश करें। इससे दर्द में आराम मिलेगा।
डिब्बाबंद या प्रोसेस्ड डाइट भी माइग्रेन का ट्रिगर हो सकती है। रेडी टू ईट भोजन, कप नूडल्स, जंकफूड आदि में प्रिजर्वेटिव्स, सोडियम का इस्तेमाल अधिक होता है जो माइग्रेन के दर्द को बढ़ा सकता है।
अंगूर के रस का सेवन माइग्रेन के इलाज में सहायक होता है। इसके अलावा गाजर, चुकंदर, पालक, खीरे के रस का सेवन प्रभावी होता है।
इस दर्द में अगर सिर, गर्दन और कंधों की मालिश की जाए तो यह इस दर्द से राहत दिलाने बहुत मददगार साबित हो सकता है। इसके लिए हल्की खुशबू वाले अरोमा तेल का प्रयोग किया जा सकता है।
एक तौलिये को गर्म पानी में डुबाकर, उस गर्म तौलिये से दर्द वाले हिस्सों की मालिश करें। कुछ लोगों को ठंडे पानी से की गई इसी तरह की मालिश से भी आराम मिलता है। इसके लिए आप बर्फ के टुकड़ों का उपयोग भी कर सकते हैं।
रोगी को अपने भोजन में मेथी, बथुआ, अंजीर, आंवला, नींबू, अनार, अमरूद, सेब, संतरा तथा धनिया अधिक लेना चाहिए। इसके अलावा मसालेदार भोजन कम खाना चाहिए।
प्राकृतिक चिकित्सा के द्वारा नाक से भाप देकर रोगी व्यक्ति के माइग्रेन रोग को ठीक किया जा सकता है। नाक से भाप लेने के लिए सबसे पहल एक छोटे से बर्तन में गर्म पानी लेना चाहिए। इसके बाद रोगी को उस बर्तन पर झुककर नाक से भाग लेना चाहिए। इस क्रिया को कुछ दिनों तक करने के फलस्वरूप माइग्रेन रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
इसके अलावा विटामिन बी से भरपूर चीजों का सेवन करें। विटामिन माइग्रेन रोगियों के लिए आवश्यक माना गया है। गाजर का रस और पालक का रस दोनों करीब 300 मिलीटर मात्रा में पीएं। यह इस रोग काफी गुणकारी है।
माइग्रेन के दर्द को बढ़ाने वाले आहार :-
माइग्रेन के कारण असहनीय सिरदर्द हो सकता है।
बीन्स, पनीर, अचार और मिर्ची बढ़ाते हैं इस दर्द को।
जैतून का तेल, सूखा मेवा, एवोकैडो आदि न खायें।
केला, खट्टे फल, कॉफी और शराब का सेवन न करें।
माइग्रेन एक आम बीमारी हो गई है। इसका शिकार लोग एक हफ्ते में या एक या दो बार जरूर होते हैं। कुछ लोगों को तो यह बीमारी सौगात में मिलती है। माइग्रेन का दर्द बड़ा ही तेज होता है जिसमें सिर के एक ही ओर तेज दर्द होने लगता है। यह दर्द कई अन्य बीमारियों की भी न्यौता देता है, जैसे - चक्कर, उल्टी और थकान।

सिर के अंदर की रक्त नलिकाओं के सिकुड़न से मस्तिष्क के कुछ हिस्सों में रक्त संचार कम हो जाता है। इसके कारण दृष्टि दोष या सूनापन का आभास होने लगता है। उसके बाद सिर के बाहर वाली रक्त नलिकाएं फैलने लगती हैं जिससे तीव्र सिरदर्द महसूस होता है। सीरोटोनिन नामक न्यूरोट्रांसमीटर का स्राव माइग्रेन के होने में मुख्य भूमिका निभाता है। मस्तिष्क में मैग्नीशियम की कमी हार्मोंन और मौसम परिवर्तन भी माइग्रेन को प्रभावित करते हैं। कुछ ऐसे खाद्य-पदार्थ हैं जो माइग्रेन के दर्द को बढ़ाते हैं।
बीन्स
बीन्स खाने से माइग्रेन का दर्द बढ़ जाता है। इसके अलावा इटेलियन बीन्स, मटर की फली, टोफू, सोया सॉस आदि माइग्रेन के दर्द को बढ़ा सकते हैं। इसलिए माइग्रेन होने पर इनका सेवन करने से बचना चाहिए।
पनीर
माइग्रेन के दर्द को बढ़ाने में पनीर की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए माइग्रेन होने पर पनीर खाने से बचना चाहिए। चीज केक, पनीर स्लाइस, आदि का सेवन न करें
अचार और मिर्ची
किसी भी प्रकार का अचार माइग्रेन के दर्द को बढ़ा सकता है। मिर्ची तो सिरदर्द को बढ़ाता है। कई बार अनुसंधानकर्ता भी मिर्ची का प्रयोग माइग्रेन के मरीजों में रिसर्च के लिए करते हैं।
जैतून का तेल
माइग्रेन के मरीजों को जैतून के तेल का सेवन नहीं करना चाहिए। ऑलिव ऑयल से माइग्रेन का दर्द बढ़ता है।
सूखा मेवा
सूखे मेवे में सल्फाइट्स नामक तत्व पाया जाता है, जो माइग्रेन के दर्द को बढ़ाता है। इसलिए अखरोट, मूंगफली, बादाम, काजू, किशमिश आदि खाने से बचना चाहिए।
एवोकेडो और आलूबुखारा
लाल आलूबुखारा और एवोकेडो भी माइग्रेन के दर्द को बढ़ाते हैं, इसलिए इनके सेवन से परहेज करना चाहिए।
केला और खट्टे फल
बनाना यानी केला और संतरा जैसे खट्टे फल माइग्रेन के दर्द को बढ़ाते हैं, इसलिए माइग्रेन के मरीजों को इनका सेवन भी नहीं करना चाहिए।
पिज्जा
पिज्जा जैसे फास्ट फूड भी माइग्रेन में हानिकारक हैं, इसलिए माइग्रेन की समस्या होने पर इसे न खायें।
शराब से बचें
शराब का सेवन करने से दिमाग में रक्त का संचार ठीक से नहीं होता है, जिसके कारण मरीज का दर्द बढ़ जाता है। इसलिए शराब का सेवन नहीं करना चाहिए।
इनके अलावा चाकलेट, कॉफी, अंजीर, नींबू, प्याज, चायनीज फूड, हॉट डॉग, सूखी नमकन मछली आदि खाने से भी माइग्रेन का दर्द बढ़ता है।
माइग्रेन होने पर क्या करें :-
4 घंटे से लेकर 72 घंटे तक हो सकता है माइग्रेन का दर्द।
जी मिचलाना, उल्टी आना, फोटोफोबिया आदि होते हैं इसके लक्षण।
एपिसॉडिक और क्रॉनिक इल दो प्रकार का होता है माइग्रेन।
दालचीनी को पीसकर इस लेप को माथे पर लगाने से होता है आराम।
माइग्रेन के दौरान सिर में बहुत तेज दर्द होता है। यह मस्तिष्क में सूजन के कारण होने वाली समस्या है। माइग्रेन होने पर क्या किया जाए यह एक बड़ा और महत्वपूर्ण सवाल है। इस लेख में हम आपको बता रहे हैं कि माइग्रेन होने पर क्या किया जाए।

माइग्रेन एक प्रकार का सिरदर्द है। माइग्रेन के दौरान सिर में पहला हल्का दर्द होता है, जो धीरे-धीरे तेज होता जाता है। यह सिरदर्द चार घंटे से लेकर 72 घंटे तक भी बना रह सकता है। इसमें सिर के पिछले हिस्से में गर्दन के पास से लेकर पूरे सिर में भंयकर दर्द होता है। माइग्रेन किसी भी आयु में हो सकता है। माइग्रेन का प्रुख कारण आजकल की अव्यवस्थित और तनावपूर्ण जिंदगी है। जिसके चलते हम न तो अपने खान-पान पर ध्यान दे पाते हैं और न ही सेहत पर। परिणामस्वरूप जाने अनजाने माइग्रेन जैसे रोगों के शिकार बन जाते हैं।
आज के बदलती जीवनशैली में हर व्यक्ति के जीवन में भागदौड़ और बहुत सारा तनाव है। इस वजह से जीवनशैली में बदलाव आना स्वाभाविक है। और इस बदलाव के कारण हमें कई शारीरिक समस्याओं से भी जूझना पड़ता है। इन्हीं समस्याओं में से एक है माइग्रेन। यह प्राय: शाम के समय शुरू होता है और इसमें सिर में एकतरफा दर्द होता है। इसलिए आम बोलचाल की भाषा में इसे अर्द्धकपाली भी कहा जाता है।
माइग्रेन दो प्रकार का होता है।
1- एपिसॉडिक माइग्रेन (प्रासंगिक माइग्रेन)
2- क्रॉनिक माइग्रेन (दीर्घकालिक माइग्रेन)
माइग्रेन होने पर जीभ का मिचलाना, उल्टी आना, फोटोफोबिया (प्रकाश वृद्धि पर संवेदनशील होना), फोनोफोबिया (ध्वनि वृद्धि में संवेदनशीलता) और शारीरिक गतिविधियों का बढ़ जाना जैसे लक्षण होते हैं। इसमें सेरेब्रल कॉर्टेक्स (मस्तिष्क की बाहरी परत है, जो कि टिशू है) में वृद्धि के कारण उत्तेजना और दर्द होता है। इसके होने के कई कारण होते हैं जैसे - मौसम में बदलाव (विशेषचौर पर मानसून में), अधिक शोर-शराबा, बहुत तेज आवाज, शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव, रोशनी का कम और ज्यादा होना, किसी प्रकार का तनाव, नींद पूरी न होने पर, धूम्रपान करने से माइग्रेन के रोगी प्रभावित होते हैं।
कभी-कभी यह लगभग 4 से लेकर 72 घंटे तक बना रहता है। इसमें सिर के पिछले हिस्से में गर्दन के पास से लेकर पूरे सिर में बहुत भंयकर दर्द होता है। माइग्रेन किसी भी आयु में हो सकता है। यह आजकल की अव्यवस्थित जिंदगी की देन है। जिसमें हम अपने खानपान पर नियमित ध्यान नहीं दे पाते हैं। परिणामस्वरूप जाने-अनजाने माइग्रेन जैसे रोगों के शिकार बन जाते हैं।
माइग्रेन होने पर क्या करें
माइग्रेन होने पर ठंडे पानी की पट्टी सिर पर रखें इससे रक्त धमनियां फैल जाती हैं और अपनी पूर्व स्थिति में आ जाती हैं।
माइग्रेन होने पर अपने दिमाग को तनाव मुक्त करने का प्रयास करें, गहरी सांस लें और मन को सांत करने का प्रयास करें। नियमित रुप से व्यायाम, योग और ध्यान करने से आपको इस समस्या से लड़ने की पूरी शक्ति मिलती है।
ज्यादा देर तक भूखे न रहें। थोड़ी-थोड़ी देर में कुछ ना कुछ खाते रहें। इससे बचने के लिए भोजन समय पर करना बहुत जरूरी होता है।
माइग्रेन होने पर नियमित रुप से, डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं लेनी चाहिये।
माइग्रेन होने पर समान्य तापमान में जाने की कोशिश करें। अधिक ठंड या गर्मी के कारण माइग्रेन हो सकता है। खासतौर पर मौसम के बदलाव से खुद को बचाना चाहिए।
माइग्रेन होने पर आराम करें। इसके लिए रोज कम से कम 6 से 8 घंटे की गहरी नींद लेना बेहद जरूरी होता है।
बर्फ या ठंडे पानी की पट्टी सिर पर रखें। इससे जो रक्त धमनियां फैल गयी हैंए वे फिर से अपनी पूर्व स्थिति पर वापस आ जायेगी।
सिर पर मेहंदी का लेप लगा सकते हैं।
दालचीनी को पीसकर इस लेप को माथे पर लगाने से माइग्रेन के दर्द से तुरंत आराम मिलता है।
दालचीनी को पाउडर बनाकर दिन में चार बार ठंडे पानी के साथ खाने से भी इसमें आराम मिलता है।
माइग्रेन सिर दर्द में अदरक बहुत फायदेमंद है। अदरक के सेवन से मिचली और उल्टी आना बंद हो जाती हैं।
माइग्रेन सिर दर्द होने पर पिसी दालचीनी, अदरक का पाउडर, पिसी काली मिर्च और तुलसी पत्ती को मिलाकर एक मिश्रित पाउडर बना लें और इसे शहद के साथ खाएं। आपको तुरंत फायदा होगा।
माइग्रेन होने पर रात का बहुत भारी भोजन न करें। रोत को केवल हल्का एवं फाइबर युक्त भोजन करें साथ ही सोते समय एक चम्मच त्रिफला तथा आंवले के चूर्ण को गुनगुने पानी से लें। इससे पेट साफ रहेगा और आप काफी आराम महसूस करेंगें।
माइग्रेन सिर दर्द शुरू होते ही जीभ की नोक पर एक चुटकी नमक रख लें और आधा मिनट बाद पानी पी लें सर दर्द गायब हो जायगा।
माइग्रेन में घर पर आराम करें, बाहर न जाएं, और यदि जाना ही पड़े तो जब भी घर से बाहर निकले छाता लें और सूरज की साधी तेज रौशनी से बचें।
माइग्रेन का दर्द अचानक ही शुरू होता है और कई बार खुद-ब-खुद ठीक भी हो जाता है। वैसे तो हाथों के स्पर्श और प्यार से मिलने वाला आराम किसी भी दवा से ज़्यादा असर करता है। इस दर्द में अगर सिर, गर्दन और कंधों की मालिश की जाए तो यह राहत दिलाने बहुत मददगार साबित हो सकता है।
इसके लिए आप हल्की खुश्बू वाले अरोमा तेल का प्रयोग कर सकते हैं। इसके लिए एक तौलिये को गर्म पानी में डुबाकर, उस गर्म तौलिये से दर्द वाले हिस्सों की मालिश करें। कुछ लोगों को ठंडे पानी से की गई मालिश से आराम मिलता है, तो इस बात को जांच लें। इसके लिए आप बर्फ के टुकड़ों का उपयोग कर सकते हैं। इसके अवावा कपूर को घी में मिलाकर सिर पर हल्के हाथों से मालिश करें।
महिलाओं में माइग्रेन के कारणों को जानें :-
माइग्रने के शिकार लोगों में महिलाओं की संख्या ज्यादा है।
यह एक न्यूरोलॉजिकल रोग है।
अनियमित खान-पान व तनाव के कारण यह समस्या हो सकती है।
महिलाओं के जीवन में होने वाले बदलाव इसकी मुख्य वजह हैं।
माइग्रेन की समस्या इन दिनों काफी आम हो चुकी है। इसकी सबसे बड़ी वजह है अनियमित दिनचर्या, खान-पान की गलत आदतें व तनाव लेना। माइग्रेन से ग्रस्त लोगों में पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं की संख्या कहीं ज्यादा है।

माइग्रेन एक प्रकार का मस्तिष्क विकार है, जिसमें सिरदर्द होता है। इस में सिर में एकतरफा दर्द होता है। इसलिए आम बोलचाल की भाषा में इसे अर्द्धकपाली भी कहा जाता है।यह प्राय: शाम के समय शुरू होता है। इसमें दर्द 2 से 72 घंटे तक हो सकता है। माइग्रेन दो प्रकार के होते हैं। पहला एपिसॉडिक माइग्रेन (प्रासंगिक माइग्रेन) दूसरा क्रॉनिक माइग्रेन (दीर्घकालिक माइग्रेन। माइग्रेन के पीछे पर्यावरणीय और आनुवंशिक कारक दोनों होते हैं। करीब दो तिहाई मामले परिवारों में होते हैं। हार्मोन के स्तर में बदलाव भी इसमें भूमिका निभा सकता है। युवावस्था से पहले यह लड़कियों की तुलना में लड़कों को अधिक होता है, लेकिन पुरुषों की तुलना में दो से तीन गुणा अधिक महिलाएं इससे पीडि़त हैं।
यह एक न्यूरोलॉजिकल विकार है। महिला के जीवन चक्र के दौरान बदलता हार्मोनल वातावरण जैसे मासिक धर्म की शुरुआत, मासिक धर्म, गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन, गर्भधारण, रजोनिवृत्ति और हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (एचआरटी) आदि से माइग्रेन की अवधि पर काफी प्रभाव पड़ सकता है। आइए जानें महिलाओं में माइग्रेन के कारणों के बारें में-
मासिक धर्म
मासिक धर्म के दौरान महिलाओं में हार्मोनल परिवर्तन के कारण मूड स्विंग होते हैं जिसकी वजह से माइग्रेन की समस्या हो सकती है। मासिक धर्म से पहले एस्ट्रोजन में बदलाव से कुछ महिलाओं में माइग्रेन की शुरुआत होती है। माइग्रेन का हमला मासिक धर्म के चक्र से दो दिन पहले और तीन दिन बाद के बीच में होता हैं। इसमें महिलाओं को अवसाद, चिड़चिड़ापन, थकान, भूख में बदलाव आना, सूजन, पीठ में दर्द, स्तनों की कोमलता या उबकाई की शिकायत रहती है।
गर्भधारण
गर्भधारण के दौरान ज्यादातर महिलाओं में माइग्रेन के लक्षणों में सुधार या कमी देखी जाती है। बाकी महिलाओं में माइग्रेन की स्थिति में कोई बदलाव नहीं होता या स्थिति और बिगड़ जाती है। जिन महिलाओं में गर्भधारण के दौरान माइग्रेन होता है, उनमें से अधिकतर को माइग्रेन के दौरान प्रभामंडल दिखाई देता है। गर्भधारण के दौरान माइग्रेन में कमी आए तो माइग्रेन प्रसव के बाद की अवधि में फिर से होता है। यह खासकर उन महिलाओं को होता है, जो मासिक धर्म से जुडे़ माइग्रेन या एस्ट्रोजन में बदलाव से जुड़े माइग्रेन से पीडित होती हैं। माइग्रेन प्रसव के 3 से 6 दिन बाद होता है। हल्के से मध्यम दर्द के इलाज में आराम, बायोफीडबैक और विश्राम चिकित्सा पद्घति अपनाई जाती है। एसिटामिनोफेन का इस्तेमाल किया जा सकता है।
रजोनिवृत्ति
गर्भधारण की तरह ही रजोनिवृत्ति के माइग्रेन पर असर के बारे में भी बताया नहीं जा सकता। माइग्रेन से पीडित दो तिहाई महिलाओं में रजोनिवृत्ति में माइग्रेन की स्थिति बिगड़ सकती है या सुधर सकती है। कुछ महिलाओं में रजोनिवृत्ति के बाद माइग्रेन शुरू भी हो सकता है। एस्ट्रोजन के अनियमित या कम स्रव से उत्पन्न रजोनिवृत्ति के लक्षणों से पीडित महिलाओं को एचआरटी से लाभ मिल सकता है।
गर्भनिरोधक गोलियां
गर्भनिरोधक गोलियां खाने का माइग्रेन पर अस्थायी असर होता है। गर्भनिरोधक गोलियां खाना शुरू करने से महिलाओं में माइग्रेन नए सिरे से हो सकता है, पहले से मौजूद माइग्रेन का दर्द और बढ़ सकता है या इसकी आवृत्ति या इसके होने के लक्षण बदल सकते हैं। माइग्रेन से पीडित खास तौर पर उन महिलाओं में इस्कीमिक दौरों का खतरा अधिक हो सकता है, जो गर्भनिरोधक गोलियां खाती हैं, बहुत धूम्रपान करती हैं या जिन्हें माइग्रेन के दौरान चमकीली रोशनी दिखाई देती है।
महिलाओं में माइग्रेन पैदा करने वाले इन कारणों को जानने के बाद आप माइग्रेन के दर्द से बचने में सफल हो सकती है।
माइग्रेन के लिए वैकल्पिक उपचार
माइग्रेन से बचने के लिए विटामिन बी का सेवन करें।
जंकफूड और चाइनीज भोजन का सेवन करना बंद कर दें।
दर्द होने पर घी और कपूर को मिला कर लगाएं।
अंगूर के रस का सेवन करें।
माइग्रेन एक प्रकार का मस्तिष्क विकार है, जिसमें सिरदर्द होता है। यह प्राय: शाम के समय प्रारंभ होता है। इसमें दर्द 2 से 72 घंटे तक हो सकता है।माइग्रेन के दर्द से बचने के लिए लोग दवा पर ज्यादा निर्भर रहते हैं जो कि ठीक नहीं है। क्या आपने कभी इसके वैकल्पिक उपचार के बारे में सोचा है। ये वैकल्पिक उपचार भी इसके दर्द को कम करने में मददगार साबित होते हैं।
सभी जानते हैं कि माइग्रेन में होने वाला सिरदर्द कितना तकलीफदेह होता है। यह दर्द अचानक ही शुरू होता है और अपने आप ही ठीक भी हो जाता है। हाथों के स्पर्श से मिलने वाला आराम और प्यार किसी भी दवा से ज्यादा असर करता है। कुछ लोग तो इन उपचारों की मदद से ही इस दर्द को काबू में कर लेते हैं। आइए जानें माइग्रेन के वैकल्पिक उपचारों के बारे में-
सिर दर्द होने पर बिस्तर पर लेट कर दर्द वाले हिस्से को बेड के नीचे लटकाएं। सिर के जिस हिस्से में दर्द हो, उस तरफ वाली नाक में सरसों के तेल की कुछ बूंदें डालें, फिर जोर से सांस ऊपर की ओर खीचें। इससे सिर दर्द में राहत मिलेगी।
माइग्रेन के दर्द से बचने के लिए दालचीनी को पानी के साथ बारीक पीस ले और इस लेप माथे पर लेप लगाएं। जब यह लेप सूख जाए तो हटा लें। कुछ ही देर में आपको माइग्रेन के दर्द से राहत मिलेगी।
भूखे रहने पर भी यह दर्द बढ़ सकता है। इसलिए ज्यादा देर तक भूखे न रहें, थोड़ी-थोड़ी देर में कुछ न कुछ खाते रहें। हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन फायदेमंद रहता है। गाजर और खीरा भी फायदेमंद है। मैग्निशियम से भरपूर गज़ा माइग्रेन में फायदेमंद होता है।
दर्द होने पर मछली के तेल की सिर में मालिश करने से काफी आराम मिलता है। मालिश करने से सिकुड़ी हुई धमनियां फैल जाती हैं। मछली का सेवन भी माइग्रेन को कम करता है। इसमें पाया जाने वाला ओमेगा 3 फैटी एसिड दर्द से राहत देता है।
चाइनीज नूडल्स जैसे कई व्यंजनों में अजीनोमोटो का इस्तेमाल होता है जिसे एमएसजी 'मोनो सैचुरेटेड ग्लूमेट' भी कहते हैं। कई बार इसके सेवन से माइग्रेन के मरीजों की दिक्कतें बढ़ जाती हैं।
जब माइग्रेन दर्द आपको सताने लगे तो कपूर को घी में मिला कर सिर पर हल्के हाथों से मालिश करें। इससे दर्द में आराम मिलेगा।
डिब्बाबंद या प्रोसेस्ड डाइट भी माइग्रेन का ट्रिगर हो सकती है। रेडी टू ईट भोजन, कप नूडल्स, जंकफूड आदि में प्रिजर्वेटिव्स, सोडियम का इस्तेमाल अधिक होता है जो माइग्रेन के दर्द को बढ़ा सकता है।
अंगूर के रस का सेवन माइग्रेन के इलाज में सहायक होता है। इसके अलावा गाजर, चुकंदर, पालक, खीरे के रस का सेवन प्रभावी होता है।
इस दर्द में अगर सिर, गर्दन और कंधों की मालिश की जाए तो यह इस दर्द से राहत दिलाने बहुत मददगार साबित हो सकता है। इसके लिए हल्की खुशबू वाले अरोमा तेल का प्रयोग किया जा सकता है।
एक तौलिये को गर्म पानी में डुबाकर, उस गर्म तौलिये से दर्द वाले हिस्सों की मालिश करें। कुछ लोगों को ठंडे पानी से की गई इसी तरह की मालिश से भी आराम मिलता है। इसके लिए आप बर्फ के टुकड़ों का उपयोग भी कर सकते हैं।
रोगी को अपने भोजन में मेथी, बथुआ, अंजीर, आंवला, नींबू, अनार, अमरूद, सेब, संतरा तथा धनिया अधिक लेना चाहिए। इसके अलावा मसालेदार भोजन कम खाना चाहिए।
प्राकृतिक चिकित्सा के द्वारा नाक से भाप देकर रोगी व्यक्ति के माइग्रेन रोग को ठीक किया जा सकता है। नाक से भाप लेने के लिए सबसे पहल एक छोटे से बर्तन में गर्म पानी लेना चाहिए। इसके बाद रोगी को उस बर्तन पर झुककर नाक से भाग लेना चाहिए। इस क्रिया को कुछ दिनों तक करने के फलस्वरूप माइग्रेन रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
इसके अलावा विटामिन बी से भरपूर चीजों का सेवन करें। विटामिन माइग्रेन रोगियों के लिए आवश्यक माना गया है। गाजर का रस और पालक का रस दोनों करीब 300 मिलीटर मात्रा में पीएं। यह इस रोग काफी गुणकारी है।
माइग्रेन के दर्द को बढ़ाने वाले आहार :-
माइग्रेन के कारण असहनीय सिरदर्द हो सकता है।
बीन्स, पनीर, अचार और मिर्ची बढ़ाते हैं इस दर्द को।
जैतून का तेल, सूखा मेवा, एवोकैडो आदि न खायें।
केला, खट्टे फल, कॉफी और शराब का सेवन न करें।
माइग्रेन एक आम बीमारी हो गई है। इसका शिकार लोग एक हफ्ते में या एक या दो बार जरूर होते हैं। कुछ लोगों को तो यह बीमारी सौगात में मिलती है। माइग्रेन का दर्द बड़ा ही तेज होता है जिसमें सिर के एक ही ओर तेज दर्द होने लगता है। यह दर्द कई अन्य बीमारियों की भी न्यौता देता है, जैसे - चक्कर, उल्टी और थकान।
सिर के अंदर की रक्त नलिकाओं के सिकुड़न से मस्तिष्क के कुछ हिस्सों में रक्त संचार कम हो जाता है। इसके कारण दृष्टि दोष या सूनापन का आभास होने लगता है। उसके बाद सिर के बाहर वाली रक्त नलिकाएं फैलने लगती हैं जिससे तीव्र सिरदर्द महसूस होता है। सीरोटोनिन नामक न्यूरोट्रांसमीटर का स्राव माइग्रेन के होने में मुख्य भूमिका निभाता है। मस्तिष्क में मैग्नीशियम की कमी हार्मोंन और मौसम परिवर्तन भी माइग्रेन को प्रभावित करते हैं। कुछ ऐसे खाद्य-पदार्थ हैं जो माइग्रेन के दर्द को बढ़ाते हैं।
बीन्स
बीन्स खाने से माइग्रेन का दर्द बढ़ जाता है। इसके अलावा इटेलियन बीन्स, मटर की फली, टोफू, सोया सॉस आदि माइग्रेन के दर्द को बढ़ा सकते हैं। इसलिए माइग्रेन होने पर इनका सेवन करने से बचना चाहिए।
पनीर
माइग्रेन के दर्द को बढ़ाने में पनीर की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए माइग्रेन होने पर पनीर खाने से बचना चाहिए। चीज केक, पनीर स्लाइस, आदि का सेवन न करें
अचार और मिर्ची
किसी भी प्रकार का अचार माइग्रेन के दर्द को बढ़ा सकता है। मिर्ची तो सिरदर्द को बढ़ाता है। कई बार अनुसंधानकर्ता भी मिर्ची का प्रयोग माइग्रेन के मरीजों में रिसर्च के लिए करते हैं।
जैतून का तेल
माइग्रेन के मरीजों को जैतून के तेल का सेवन नहीं करना चाहिए। ऑलिव ऑयल से माइग्रेन का दर्द बढ़ता है।
सूखा मेवा
सूखे मेवे में सल्फाइट्स नामक तत्व पाया जाता है, जो माइग्रेन के दर्द को बढ़ाता है। इसलिए अखरोट, मूंगफली, बादाम, काजू, किशमिश आदि खाने से बचना चाहिए।
एवोकेडो और आलूबुखारा
लाल आलूबुखारा और एवोकेडो भी माइग्रेन के दर्द को बढ़ाते हैं, इसलिए इनके सेवन से परहेज करना चाहिए।
केला और खट्टे फल
बनाना यानी केला और संतरा जैसे खट्टे फल माइग्रेन के दर्द को बढ़ाते हैं, इसलिए माइग्रेन के मरीजों को इनका सेवन भी नहीं करना चाहिए।
पिज्जा
पिज्जा जैसे फास्ट फूड भी माइग्रेन में हानिकारक हैं, इसलिए माइग्रेन की समस्या होने पर इसे न खायें।
शराब से बचें
शराब का सेवन करने से दिमाग में रक्त का संचार ठीक से नहीं होता है, जिसके कारण मरीज का दर्द बढ़ जाता है। इसलिए शराब का सेवन नहीं करना चाहिए।
इनके अलावा चाकलेट, कॉफी, अंजीर, नींबू, प्याज, चायनीज फूड, हॉट डॉग, सूखी नमकन मछली आदि खाने से भी माइग्रेन का दर्द बढ़ता है।
माइग्रेन होने पर क्या करें :-
4 घंटे से लेकर 72 घंटे तक हो सकता है माइग्रेन का दर्द।
जी मिचलाना, उल्टी आना, फोटोफोबिया आदि होते हैं इसके लक्षण।
एपिसॉडिक और क्रॉनिक इल दो प्रकार का होता है माइग्रेन।
दालचीनी को पीसकर इस लेप को माथे पर लगाने से होता है आराम।
माइग्रेन के दौरान सिर में बहुत तेज दर्द होता है। यह मस्तिष्क में सूजन के कारण होने वाली समस्या है। माइग्रेन होने पर क्या किया जाए यह एक बड़ा और महत्वपूर्ण सवाल है। इस लेख में हम आपको बता रहे हैं कि माइग्रेन होने पर क्या किया जाए।
माइग्रेन एक प्रकार का सिरदर्द है। माइग्रेन के दौरान सिर में पहला हल्का दर्द होता है, जो धीरे-धीरे तेज होता जाता है। यह सिरदर्द चार घंटे से लेकर 72 घंटे तक भी बना रह सकता है। इसमें सिर के पिछले हिस्से में गर्दन के पास से लेकर पूरे सिर में भंयकर दर्द होता है। माइग्रेन किसी भी आयु में हो सकता है। माइग्रेन का प्रुख कारण आजकल की अव्यवस्थित और तनावपूर्ण जिंदगी है। जिसके चलते हम न तो अपने खान-पान पर ध्यान दे पाते हैं और न ही सेहत पर। परिणामस्वरूप जाने अनजाने माइग्रेन जैसे रोगों के शिकार बन जाते हैं।
आज के बदलती जीवनशैली में हर व्यक्ति के जीवन में भागदौड़ और बहुत सारा तनाव है। इस वजह से जीवनशैली में बदलाव आना स्वाभाविक है। और इस बदलाव के कारण हमें कई शारीरिक समस्याओं से भी जूझना पड़ता है। इन्हीं समस्याओं में से एक है माइग्रेन। यह प्राय: शाम के समय शुरू होता है और इसमें सिर में एकतरफा दर्द होता है। इसलिए आम बोलचाल की भाषा में इसे अर्द्धकपाली भी कहा जाता है।
माइग्रेन दो प्रकार का होता है।
1- एपिसॉडिक माइग्रेन (प्रासंगिक माइग्रेन)
2- क्रॉनिक माइग्रेन (दीर्घकालिक माइग्रेन)
माइग्रेन होने पर जीभ का मिचलाना, उल्टी आना, फोटोफोबिया (प्रकाश वृद्धि पर संवेदनशील होना), फोनोफोबिया (ध्वनि वृद्धि में संवेदनशीलता) और शारीरिक गतिविधियों का बढ़ जाना जैसे लक्षण होते हैं। इसमें सेरेब्रल कॉर्टेक्स (मस्तिष्क की बाहरी परत है, जो कि टिशू है) में वृद्धि के कारण उत्तेजना और दर्द होता है। इसके होने के कई कारण होते हैं जैसे - मौसम में बदलाव (विशेषचौर पर मानसून में), अधिक शोर-शराबा, बहुत तेज आवाज, शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव, रोशनी का कम और ज्यादा होना, किसी प्रकार का तनाव, नींद पूरी न होने पर, धूम्रपान करने से माइग्रेन के रोगी प्रभावित होते हैं।
कभी-कभी यह लगभग 4 से लेकर 72 घंटे तक बना रहता है। इसमें सिर के पिछले हिस्से में गर्दन के पास से लेकर पूरे सिर में बहुत भंयकर दर्द होता है। माइग्रेन किसी भी आयु में हो सकता है। यह आजकल की अव्यवस्थित जिंदगी की देन है। जिसमें हम अपने खानपान पर नियमित ध्यान नहीं दे पाते हैं। परिणामस्वरूप जाने-अनजाने माइग्रेन जैसे रोगों के शिकार बन जाते हैं।
माइग्रेन होने पर क्या करें
माइग्रेन होने पर ठंडे पानी की पट्टी सिर पर रखें इससे रक्त धमनियां फैल जाती हैं और अपनी पूर्व स्थिति में आ जाती हैं।
माइग्रेन होने पर अपने दिमाग को तनाव मुक्त करने का प्रयास करें, गहरी सांस लें और मन को सांत करने का प्रयास करें। नियमित रुप से व्यायाम, योग और ध्यान करने से आपको इस समस्या से लड़ने की पूरी शक्ति मिलती है।
ज्यादा देर तक भूखे न रहें। थोड़ी-थोड़ी देर में कुछ ना कुछ खाते रहें। इससे बचने के लिए भोजन समय पर करना बहुत जरूरी होता है।
माइग्रेन होने पर नियमित रुप से, डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं लेनी चाहिये।
माइग्रेन होने पर समान्य तापमान में जाने की कोशिश करें। अधिक ठंड या गर्मी के कारण माइग्रेन हो सकता है। खासतौर पर मौसम के बदलाव से खुद को बचाना चाहिए।
माइग्रेन होने पर आराम करें। इसके लिए रोज कम से कम 6 से 8 घंटे की गहरी नींद लेना बेहद जरूरी होता है।
बर्फ या ठंडे पानी की पट्टी सिर पर रखें। इससे जो रक्त धमनियां फैल गयी हैंए वे फिर से अपनी पूर्व स्थिति पर वापस आ जायेगी।
सिर पर मेहंदी का लेप लगा सकते हैं।
दालचीनी को पीसकर इस लेप को माथे पर लगाने से माइग्रेन के दर्द से तुरंत आराम मिलता है।
दालचीनी को पाउडर बनाकर दिन में चार बार ठंडे पानी के साथ खाने से भी इसमें आराम मिलता है।
माइग्रेन सिर दर्द में अदरक बहुत फायदेमंद है। अदरक के सेवन से मिचली और उल्टी आना बंद हो जाती हैं।
माइग्रेन सिर दर्द होने पर पिसी दालचीनी, अदरक का पाउडर, पिसी काली मिर्च और तुलसी पत्ती को मिलाकर एक मिश्रित पाउडर बना लें और इसे शहद के साथ खाएं। आपको तुरंत फायदा होगा।
माइग्रेन होने पर रात का बहुत भारी भोजन न करें। रोत को केवल हल्का एवं फाइबर युक्त भोजन करें साथ ही सोते समय एक चम्मच त्रिफला तथा आंवले के चूर्ण को गुनगुने पानी से लें। इससे पेट साफ रहेगा और आप काफी आराम महसूस करेंगें।
माइग्रेन सिर दर्द शुरू होते ही जीभ की नोक पर एक चुटकी नमक रख लें और आधा मिनट बाद पानी पी लें सर दर्द गायब हो जायगा।
माइग्रेन में घर पर आराम करें, बाहर न जाएं, और यदि जाना ही पड़े तो जब भी घर से बाहर निकले छाता लें और सूरज की साधी तेज रौशनी से बचें।
माइग्रेन का दर्द अचानक ही शुरू होता है और कई बार खुद-ब-खुद ठीक भी हो जाता है। वैसे तो हाथों के स्पर्श और प्यार से मिलने वाला आराम किसी भी दवा से ज़्यादा असर करता है। इस दर्द में अगर सिर, गर्दन और कंधों की मालिश की जाए तो यह राहत दिलाने बहुत मददगार साबित हो सकता है।
इसके लिए आप हल्की खुश्बू वाले अरोमा तेल का प्रयोग कर सकते हैं। इसके लिए एक तौलिये को गर्म पानी में डुबाकर, उस गर्म तौलिये से दर्द वाले हिस्सों की मालिश करें। कुछ लोगों को ठंडे पानी से की गई मालिश से आराम मिलता है, तो इस बात को जांच लें। इसके लिए आप बर्फ के टुकड़ों का उपयोग कर सकते हैं। इसके अवावा कपूर को घी में मिलाकर सिर पर हल्के हाथों से मालिश करें।
महिलाओं में माइग्रेन के कारणों को जानें :-
माइग्रने के शिकार लोगों में महिलाओं की संख्या ज्यादा है।
यह एक न्यूरोलॉजिकल रोग है।
अनियमित खान-पान व तनाव के कारण यह समस्या हो सकती है।
महिलाओं के जीवन में होने वाले बदलाव इसकी मुख्य वजह हैं।
माइग्रेन की समस्या इन दिनों काफी आम हो चुकी है। इसकी सबसे बड़ी वजह है अनियमित दिनचर्या, खान-पान की गलत आदतें व तनाव लेना। माइग्रेन से ग्रस्त लोगों में पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं की संख्या कहीं ज्यादा है।
माइग्रेन एक प्रकार का मस्तिष्क विकार है, जिसमें सिरदर्द होता है। इस में सिर में एकतरफा दर्द होता है। इसलिए आम बोलचाल की भाषा में इसे अर्द्धकपाली भी कहा जाता है।यह प्राय: शाम के समय शुरू होता है। इसमें दर्द 2 से 72 घंटे तक हो सकता है। माइग्रेन दो प्रकार के होते हैं। पहला एपिसॉडिक माइग्रेन (प्रासंगिक माइग्रेन) दूसरा क्रॉनिक माइग्रेन (दीर्घकालिक माइग्रेन। माइग्रेन के पीछे पर्यावरणीय और आनुवंशिक कारक दोनों होते हैं। करीब दो तिहाई मामले परिवारों में होते हैं। हार्मोन के स्तर में बदलाव भी इसमें भूमिका निभा सकता है। युवावस्था से पहले यह लड़कियों की तुलना में लड़कों को अधिक होता है, लेकिन पुरुषों की तुलना में दो से तीन गुणा अधिक महिलाएं इससे पीडि़त हैं।
यह एक न्यूरोलॉजिकल विकार है। महिला के जीवन चक्र के दौरान बदलता हार्मोनल वातावरण जैसे मासिक धर्म की शुरुआत, मासिक धर्म, गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन, गर्भधारण, रजोनिवृत्ति और हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (एचआरटी) आदि से माइग्रेन की अवधि पर काफी प्रभाव पड़ सकता है। आइए जानें महिलाओं में माइग्रेन के कारणों के बारें में-
मासिक धर्म
मासिक धर्म के दौरान महिलाओं में हार्मोनल परिवर्तन के कारण मूड स्विंग होते हैं जिसकी वजह से माइग्रेन की समस्या हो सकती है। मासिक धर्म से पहले एस्ट्रोजन में बदलाव से कुछ महिलाओं में माइग्रेन की शुरुआत होती है। माइग्रेन का हमला मासिक धर्म के चक्र से दो दिन पहले और तीन दिन बाद के बीच में होता हैं। इसमें महिलाओं को अवसाद, चिड़चिड़ापन, थकान, भूख में बदलाव आना, सूजन, पीठ में दर्द, स्तनों की कोमलता या उबकाई की शिकायत रहती है।
गर्भधारण
गर्भधारण के दौरान ज्यादातर महिलाओं में माइग्रेन के लक्षणों में सुधार या कमी देखी जाती है। बाकी महिलाओं में माइग्रेन की स्थिति में कोई बदलाव नहीं होता या स्थिति और बिगड़ जाती है। जिन महिलाओं में गर्भधारण के दौरान माइग्रेन होता है, उनमें से अधिकतर को माइग्रेन के दौरान प्रभामंडल दिखाई देता है। गर्भधारण के दौरान माइग्रेन में कमी आए तो माइग्रेन प्रसव के बाद की अवधि में फिर से होता है। यह खासकर उन महिलाओं को होता है, जो मासिक धर्म से जुडे़ माइग्रेन या एस्ट्रोजन में बदलाव से जुड़े माइग्रेन से पीडित होती हैं। माइग्रेन प्रसव के 3 से 6 दिन बाद होता है। हल्के से मध्यम दर्द के इलाज में आराम, बायोफीडबैक और विश्राम चिकित्सा पद्घति अपनाई जाती है। एसिटामिनोफेन का इस्तेमाल किया जा सकता है।
रजोनिवृत्ति
गर्भधारण की तरह ही रजोनिवृत्ति के माइग्रेन पर असर के बारे में भी बताया नहीं जा सकता। माइग्रेन से पीडित दो तिहाई महिलाओं में रजोनिवृत्ति में माइग्रेन की स्थिति बिगड़ सकती है या सुधर सकती है। कुछ महिलाओं में रजोनिवृत्ति के बाद माइग्रेन शुरू भी हो सकता है। एस्ट्रोजन के अनियमित या कम स्रव से उत्पन्न रजोनिवृत्ति के लक्षणों से पीडित महिलाओं को एचआरटी से लाभ मिल सकता है।
गर्भनिरोधक गोलियां
गर्भनिरोधक गोलियां खाने का माइग्रेन पर अस्थायी असर होता है। गर्भनिरोधक गोलियां खाना शुरू करने से महिलाओं में माइग्रेन नए सिरे से हो सकता है, पहले से मौजूद माइग्रेन का दर्द और बढ़ सकता है या इसकी आवृत्ति या इसके होने के लक्षण बदल सकते हैं। माइग्रेन से पीडित खास तौर पर उन महिलाओं में इस्कीमिक दौरों का खतरा अधिक हो सकता है, जो गर्भनिरोधक गोलियां खाती हैं, बहुत धूम्रपान करती हैं या जिन्हें माइग्रेन के दौरान चमकीली रोशनी दिखाई देती है।
महिलाओं में माइग्रेन पैदा करने वाले इन कारणों को जानने के बाद आप माइग्रेन के दर्द से बचने में सफल हो सकती है।

Very useful post. Consider natural treatment for migraine headache. It treats both causes and symptoms of migraine. It is both safe and effective.
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