B.P / ब्लड प्रेशर :- क्या है ब्लड प्रेशर
हाई
ब्लड-प्रेशर में रोगी की याददाश्त पर असर हो सकता है, जिसे डिमेंशिया कहा
जाता है। इसमें समय के साथ-साथ रोगी के मस्तिष्क में खून की आपूर्ति और कम
हो जाती है। और व्यक्ति की सोचने-समझने की शक्ति घटती जाती है।
नियमित व्यायाम और संतुलित आहार के जरिये नियंत्रित करें उच्च रक्तचापशोध के मुताबिक विश्व के लगभग 26% लोग है इसकी चपेट में।
अमेरिका में 15% लोगों की मौत का कारण हाई ब्ल्ड प्रेशर है।
इस पर नियंत्रण पाने के लिए संतुलित आहार का सेवन है जरूरी।
व्यायाम और योग नियमित करने से सामान्य रहता है रक्तचाप।
आजकल की लाइफस्टाइल का सबसे बुरा असर रक्तचाप पर पड़ा है और इसकी वजह से इसके मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यह बीमारी धीरे-धीरे कब शरीर में अपना घर बना लेता है, इसकी भनक तक नहीं लगती। आजकल लगभग हर घर एक व्यक्ति में इसकी शिकायत देखने को मिल रही है।
क्या है उच्च रक्तचाप
दिल, धमनियों के जरिये पूरे शरीर में खून का संचार करता है। उच्च रक्तचाप का मुख्य कारण धमनियों की दीवारों का अपने सामान्य आकार से मोटा और संकुचित हो जाने से है। इसके कारण ही बॉडी में रक्त संचार अपनी स्वाभाविक गति से नहीं हो पाता और दिल को खून पंप करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। जब रक्त दिल अथवा दिमाग तक सही ढंग से नहीं पहुंच पाता तो दिल का दौरा पड़ने की संभावना बढ़ जाती है। इसी कारण उच्च रक्तचाप वाले व्यक्ति को सलाह दी जाती है कि वो नियमित रूप से अपने डॉक्टर से अपनी जांच करवाए।
उच्च रक्तचाप की चिकित्सा
डायट चार्ट के द्वारा
रक्तचाप को बढ़ाने में खाद्य पदार्थ बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए हमें अपने भोजन में उन पोषक तत्वों को शामिल करना चहिए जो रक्त संचार को नियंत्रण में रखें। अपने आहार में ताजे फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और कम वसा और कोलेस्ट्रॉल वाले डेयरी उत्पाद शामिल करने चाहिए। अपनी डायट में प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा जरूर रखें। रेड मीट, मिठाइयां और शुगरयुक्त पेय पदार्थ का सेवन कम करें।
कैल्शियम और पोटैशियम
नियमित व्यायाम करें
कम नमक खायें
कैफीन को ना
धूम्रपान और एल्कोहल
नाक से खून बहना हो सकता है उच्च रक्तचाप का संकेत :-
सिर चकराना भी सकता है उच्च रक्तचाप का लक्षण।
कम मेहनत में थकान होना है हाई ब्लड प्रेशर का संकेत।
हृदय की धड़कन बढ़ना भी है उच्च रक्तचाप का इशारा।
कुछ लोगों में इससे संबंधित लक्षण दिखाई भी नहीं देते।
उच्च रक्तचाप आधुनिक जीवनशैली में 40 वर्ष की उम्र के आसपास होने वाली आम स्वास्थ्य समस्या बन गई है। सामान्य स्वास्थ्य वाले व्यक्ति का उच्चतम रक्तचाप 120 तथा न्यूनतम 80 होता है। सेहतमंद रहने के लिए रक्तचाप सामान्य रहना बहुत जरूरी है।
दुनिया में बड़ी संख्या में लोग हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से ग्रस्त हैं। उच्च रक्तचाप की समस्या में धमनियों में रक्त का दबाव बढ़ जाता है। दबाव की इस वृद्धि के कारण धमनियों में रक्त प्रवाह सुचारू बनाये रखने के लिये दिल को अधिक काम करने की आवश्यकता पड़ती है। अधिकतर लोग इस समस्या को अनदेखा कर देते हैं। कुछ ही लोग दवाओं का सेवन कर रक्तचाप को सामान्य रखते हैं। अध्ययनों से साफ हुआ है कि उच्च रक्तचाप के 85 फीसदी मरीज समय से अपनी दवाई नहीं लेते।
यदि आप भी उन्हीं में से एक हैं जो रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए फिजीशियन द्वारा दिए गए परामर्श को फॉलो नहीं करते, तो यह शरीर के अंगों जैसे दिल, गुर्दे, मस्तिष्क और आंखों पर असर डाल सकता है। यदि आपको खुद से प्यार हैं, तो रक्तचाप को नियंत्रण में रखें। हो सकता है आपको हाई ब्लड प्रेशर के लक्षणों के बारे में जानकारी न हों। इस लेख के जरिए हम आपको बता रहे हैं उच्च रक्तचाप के सामान्य लक्षणों के बारे में।
शुरुआती लक्षण
उच्च रक्तचाप के प्रारंभिक लक्षण में संबंधित व्यक्ति के सिर के पीछे और गर्दन में दर्द रहने लगता है। कई बार इस तरह की परेशानी को वह नजरअंदाज कर जाता है, जो आगे चलकर गंभीर समस्या बन जाती है।
तनाव होना
यदि आप खुद को ज्यादा तनाव में महसूस कर रहे हैं, तो यह उच्च रक्तचाप का संकेत हो सकता है। ऐसे में व्यक्ति को छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आने लगता है। कई बार वह सही-गलत की भी पहचान भी नहीं कर पाता। किसी भी समस्या से बचने के लिए जरूरी है कि आप जांच करा लें।
सिर चकराना
उच्च रक्तचाप के लक्षणों में सिर चकराना भी आम है। कई बार शरीर में कमजोरी के कारण भी सिर चकराने की परेशानी हो सकती है। ऐसे कोई लक्षण दिखाई दें, तो पहले अपने डॉक्टर से परामर्श कर लें।
थकावट होना
यदि आपको थोड़ा काम करने पर थकान महसूस होती है या जरा सा तेज चलने पर परेशानी होती है या फिर आप सीढि़यां चढ़ने में काफी थक जाते हैं, तब भी आप उच्च रक्तचाप से ग्रस्त हो सकते हैं।
नाक से खून आना
सांस न आना, लंबी सांस आना या सांस लेने में परेशानी होने पर एक बार अपने चिकित्सक से संपर्क करें। ऐसे में व्यक्ति के उच्च रक्तचाप से ग्रस्त होने की प्रबल आशंका होती है। साथ ही यदि नाक से खून आए, तब भी आपको जांच करानी चाहिए।
नींद न आना
आमतौर पर उच्च रक्तचाप के रोगियों के साथ यह समस्या होती है कि उन्हें रात में नींद आने में परेशानी होती है। हालांकि यह परेशानी किसी चिंता के कारण या अनिंद्रा की वजह से भी हो सकती है।
हृदय की धड़कन बढ़ना
यदि आप महसूस करते हैं कि आपके हृदय की धड़कन पहले के मुकाबले तेज हो गई हैं या आपको अपने हृदय क्षेत्र में दर्द महसूस हो रहा है, तो यह उच्च रक्तचाप का भी कारण हो सकता है।
कई बार कुछ लोगों में उच्च रक्तचाप से संबंधित कोई भी लक्षण नजर नहीं आता। उन्हें इस बारे में चेकअप के बाद ही जानकारी होती है। हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण दिखाई न देना किडनी और हार्ट के लिए घातक हो सकता है।
क्या है उच्च रक्तचाप और इससे होने वाले खतरे/ उच्च रक्तचाप / ब्लड प्रेशर से निदान के उपाय:-
उच्च रक्तचाप में हो सकता है किडनी और हार्ट फेल्योर।
अमेरिका में हाई बीपी से ग्रस्त है तीन में से एक वयस्क।
हर वर्ष 90 लाख लोगों की मौत का कारण है उच्च रक्तचाप।
सोते समय सामान्य अवस्था में होता है मनुष्य का रक्तचाप।
उच्च रक्तचाप आधुनिक जीवनशैली में होने वाली गंभीर समस्या है। हाई ब्लड प्रेशर के कारण ही कोरोनरी हार्ट डिजीज, हार्ट फेल्योर, स्ट्रोक, किडनी फेल्योर और कई अन्य तरह की समस्याएं पनप रही हैं।
उच्च रक्तचाप की समस्या होने पर धमनियों में रक्त का दबाव बढ़ जाता है। दबाव वृद्धि के कारण धमनियों में रक्त प्रवाह बनाये रखने के लिये दिल को सामान्य से ज्यादा काम करने की जरूरत पड़ती है। हाई बीपी के कारण आपका हृदय काम करना बंद कर सकता है, जिसे हार्ट फेल्योर कहते हैं। इसके अलावा उच्च रक्तचाप की समस्या में आपकी रक्त धमनियां, किडनी और शरीर के अन्य अंग भी काम करना बंद कर सकते हैं।
रक्तचाप के प्रकार
प्रत्येक व्यक्ति के रक्तचाप में दो माप शामिल होती हैं, पहली सिस्टोलिक और दूसरी डायस्टोलिक। इसे उच्चतम रीडिंग और निम्नतम रीडिंग भी कहा जाता है। किसी भी व्यक्ति का बीपी इस बात पर निर्भर करता है कि मांसपेशियों में संकुचन हो रहा है या धड़कनों के बीच तनाव मुक्तता हो रही है। आराम के समय सामान्य रक्तचाप में उच्चतम रीडिंग यानी सिस्टोलिक 100 से 140 तक और डायस्टोलिक यानी निचली रीडिंग 60 से 90 के बीच होती है। यदि कई दिन तक किसी व्यक्ति का रक्तचाप 90 और 140 से ऊपर बना रहता है, तो इसे उच्च रक्तचाप माना जाता है।
ध्यान रखने वाली बातें
यदि आप सामान्य हैं, तब भी आपको रक्तचाप के प्रति सचेत रहना चाहिए। आपको अपने ब्लड प्रेशर के स्तर के बारे में जानकारी होनी चाहिए। यदि आपका रक्तचाप सामान्य है, तो डॉक्टर से इसे सामान्य बनाए रखने के लिए परामर्श कर सकते हैं। यदि यह सामान्य से ज्यादा है तो समय से लिया गया उपचार शरीर के अंगों को होने वाले किसी भी प्रकार के नुकसान से बचा सकता है।
कब ज्यादा होता है रक्तचाप
उच्च रक्तचाप की समस्या ज्यादा समय तक नहीं रहती। सोने के दौरान इसका स्तर कम हो जाता है और जब आप जागते हैं तो इसका स्तर बढ़ जाता है। उत्तेजित होने, नर्वस होने या एक्टिव होने पर भी रक्तचाप घटता-बढ़ता है। यदि आपके रक्तचाप का स्तर अधिकतर समय नॉर्मल बना रहता है, तो आपको स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। ब्लड प्रेशर बढ़ने के साथ ही इसका खतरा भी बढ़ता जाता है।
ब्लड प्रेशर की समस्या उम्र के साथ बढ़ती है। यदि आपकी हेल्दी लाइफस्टाइल है, तो यह समस्या आपको कुछ समय बाद हो सकती है। जिन लोगों को हाई बीपी की समस्या है, वे कुछ उपायों के जरिए उच्च रक्तचाप की समस्या से निजात पा सकते हैं। इसके लिए आपको डॉक्टर द्वारा दिए गए सुझावों का पालन करना चाहिए और समय से ट्रीटमेंट लेना होगा।
उच्च रक्तचाप / ब्लड प्रेशर से निदान के उपाय:-
ब्लड प्रेशर को मेनटेन रखता है नियमित चेकअप।
उच्च रक्तचाप होने पर नमक का सेवन कम करें।
गुस्सा करने से भी होती है उच्च रक्तचाप की समस्या।
एल्कोहल के सेवन से बढ़ता है ब्लड प्रेशर का लेवल।
भागदौड़ भरी जिंदगी और अनियमित दिनचर्या के बीच उच्च रक्तचाप की समस्या आम हो गई है। दिल को तंदुरुस्त बनाए रखने के लिए रक्तचाप का नियंत्रित रहना बहुत जरूरी है। दिल को स्वस्थ बनाए रखने के लिए जरूरी है कि यदि आपको कोई हृदय संबंधी परेशानी है, तो आप तुरंत डॉक्टरी परामर्श लें।
हृदय स्वास्थ्य के बारे में जानकारी आपको दिल संबंधी बीमारियों से बचाती है। शरीर का सबसे अहम अंग हृदय है, इसलिए इसकी देखभाल जरूरी है। आपकी सेहत आपके हृदय के साथ जुड़ी हुई है। हमारा जीवनचक्र तभी तक चलता है, जब तक हृदय सही प्रकार से काम करता है। हृदय स्वास्थ्य और रक्तचाप एक-दूसरे के पूरक हैं। हाई ब्लड प्रेशर होने पर आपको हृदय संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। इस लेख के जरिए हम आपको बताते हैं उच्च रक्तचाप से निदान पाने के तरीकों के बारे में।
नियमित चेकअप
रक्तचाप
को नियंत्रित रखने और हाई ब्लड प्रेशर से निदान के लिए जरूरी है कि आप
अपने ब्लड प्रेशर की नियमित जांच कराएं। स्वस्थ वयस्क व्यक्ति का
सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर पारा 90 और 120 मिलीमीटर के बीच और सामान्य
डायालोस्टिक रक्तचाप पारा 60 से 80 मिलीमीटर के बीच होता है।
नमक का सेवन कम करें
आपको
अपने आहार में नमक का सेवन कम मात्रा में करना चाहिए। अधिक मात्रा में नमक
का सेवन, हृदय समस्याओं के खतरे को बढ़ाता है। यदि आप समय रहते अपने
खान-पान पर ध्यान देंगे तो आपको भविष्य में किसी भी प्रकार की समस्या नहीं
होगी।
कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखें
आपको
ऐसे आहार का सेवन नहीं करना चाहिए, जिससे कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ सकता
है। कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने से रक्तचाप का स्तर भी बढ़ता है और इसका
असर आपके हृदय पर भी पड़ता है। हृदय को तंदुरुस्त बनाए रखने के लिए मौसमी
फलों और हरी सब्जियों के साथ ही मछली का सेवन करना चाहिए।
गुस्सा कम करें
अक्सर
देखा जाता है कि जो लोग ज्यादा गुस्सा करते हैं, उनका रक्तचाप का स्तर
भी अधिक होता है। गुस्से आपके जीवन पर नकारात्मक असर डालता है और ऐसे
में आप तनाव में भी रहते हैं। तनाव दूर करने और रक्तचाप नियंत्रित करने के
लिए आप मेडिटेशन और योग का सहारा ले सकते हैं।
एल्कोहल से रहें दूर
एल्कोहल से रहें दूर
विशेषज्ञों
के मुताबिक ज्यादा मात्रा में एल्कोहल का सेवन भी आपके ब्लड प्रेशर को
बढ़ाता है। एल्कोहल के सेवन से वजन बढ़ता है, भविष्य में यह आपके दिल के
लिए भी नुकसानदेह हो सकता है। स्वास्थ्य और रहन-सहन पर ध्यान देकर आप
हृदय संबंधी परेशानियों से बच सकते हैं।
नियमित व्यायाम है लाभकारी
नियमित व्यायाम है लाभकारी
नियमित
व्यायाम करना आपकी सेहत के लिए फायदेमंद होता है। साथ ही व्यायाम आपका
उच्च रक्तचाप और हृदय रोग से भी बचाव करता है। प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट
का व्यायाम अवश्य करना चाहिए। यदि आप किसी रोग या समस्या से ग्रस्त हैं तो
डॉक्टर से सलाह लें कि किस तरह का व्यायाम आपके लिए सही रहेगा।
वजन को नियंत्रित करें
सामान्य
से ज्यादा वजन उच्च रक्तचाप का कारण होता है। यदि आपका वजन अधिक है, तो
आपको हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो सकती है। इसलिए जरूरी है कि आप अपने
वजन को नियंत्रित रखें, इससे आपके रक्तचाप का स्तर भी नियंत्रित रहेगा।
उच्च
रक्तचाप आपके शरीर में कई तरह की बीमारियों का कारण बन सकता है। इसलिए आप
कुछ जरूरी बातों का ध्यान रख अपने रक्तचाप को नियंत्रित रखने की कोशिश
करें। ऐसा करने से आप हमेशा सेहतमंद बने रहेंगे।
हाईपरटेंशन के कारण :-
हाईपरटेंशन
को अगर इस युग का इनाम कहें तो ये कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। आजकी भाग
दौड़ वाली ज़िन्दगी में घर हो या बाहर, चिन्ता, परेशानी व गुस्सा हमारे दिल
दिमाग व शरीर के दूसरे भागों को भी प्रभावित करता है। हमारा हृदय हमारे
शरीर में रक्त को प्रवाहित करता है। स्वच्छ रक्त आर्टरी से शरीर के दूसरे
भागों में जाता है और शरीर के दूसरे भागों से दूषित रक्त हृदय में वापस
जाता है। ब्लड प्रेशर खून को पम्प करने की इसी प्रक्रीया को कहते हैं। ब्लड
प्रेशर इसीलिए कोई बीमारी नहीं है बल्कि एक नार्मल प्रक्रिया है। लेकिन जब
किसी कारणवश यह प्रेशर कम या ज़्यादा होता है, तो इसे हाई ब्लड प्रेशर या
लो ब्लड प्रेशर कहते हैं।
आज लोगों में हाईपरटेंशन एक बहुत ही आम समस्या है। यह बिना किसी चेतावनी के होती है इसलिए इसे साइलेंट किलर कहते है।
हाइपरटेंशन के कारण दो प्रकार के है:
आज लोगों में हाईपरटेंशन एक बहुत ही आम समस्या है। यह बिना किसी चेतावनी के होती है इसलिए इसे साइलेंट किलर कहते है।
हाइपरटेंशन के कारण दो प्रकार के है:
शारिरिक खून में कालेस्ट्राल का बढ़ना , मोटापा , आनुवांशिक , अधिक मात्रा में मांसाहारी भोजन करना , अधिक मात्रा में तैलीय भोजन करना , शराब पीना
मानसिक
संवेदनशील लोगों में चिंता व डर से हृदय गति बढ़ जाती है, जिससे कि आगे जाकर ब्लड प्रेशर भी बढ़ जाता है।
अकारण परेशान होना
ज़रूरत से ज्यादा काम
परिवार में या कार्यस्थल में तनाव
खान पान से उपचार
ज़रूरत से ज्यादा काम
परिवार में या कार्यस्थल में तनाव
खान पान से उपचार
हाइपरटेंशन के उपचार के लिए कुछ इस प्रकार के आहार का सेवन किया जा सकता है:
धनिया, गोभी, नारियल का सेवन करें
हाइपरटेंशन में शहद भी फायदेमंद है।
केले, मिठाइयां, आइसक्रीम, अचार, दही बिलकुल ना खाएं।
खाना बनाने में अदरक या लहसुन का प्रयोग कर सकते हैं।
रोज़ व्यायाम करें और भरपूर आराम करें।
हाइपरटेंशन में शहद भी फायदेमंद है।
केले, मिठाइयां, आइसक्रीम, अचार, दही बिलकुल ना खाएं।
खाना बनाने में अदरक या लहसुन का प्रयोग कर सकते हैं।
रोज़ व्यायाम करें और भरपूर आराम करें।
इसके अलावा कुछ और आदतें अपनाकर आपा हाइपरटेंशन जैसी बला को टाल सकते हैं-
मोटापे से दूर रहें। गुस्सा, परेशानी और निगेटिव एनर्जी से दूर रहें। योगा करें।शवासन
योग निद्रा, शशांकासन, पद्मासन, पवन मुक्तासन, कूर्मासन, मकरासन, शीतली
प्राणायाम, ध्यान और दूसरे आसन भी हाइपरटेंशन जैसी बीमारी में लाभदायी होते
है।
उच्च रक्तचाप से बचाव के लिए जरूरी है नियमित व्यायाम :-
उच्च रक्तचाप में राहत देता है नमक का कम सेवन।
एल्कोहल का कम सेवन हाई ब्लड प्रेशर से देता है आराम।
हरी सब्जियों का सेवन आपके शरीर को बनाता है स्वस्थ।
मैथी चूर्ण का नियमित सेवन है उच्च रक्तचाप में फायदेमंद।
आधुनिक जीवनशैली के बीच उच्च रक्तचाप की समस्या आम हो गई है। यह आमतौर पर 40 वर्ष या इससे ज्यादा उम्र में होने वाली समस्या है। हाई ब्लड प्रेशर रोगी के लिए कई प्रकार से हानिकारक हो सकता है, इसलिए जरूरी है कि समय रहते इससे बचाव के उपायों को अपने व्यवहार में शामिल किया जाए।
उच्च
रक्तचाप में धमनियों में रक्त का दबाव बढ़ जाता है। दबाव की इस वृद्धि
के कारण धमनियों में रक्त प्रवाह सुचारू बनाये रखने के लिए दिल को अधिक
काम करने की आवश्यकता पड़ती है। अधिकतर लोग इस समस्या को अनदेखा कर देते
हैं, यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। हाई ब्लड प्रेशर में
हृदय संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। इस लेख के जरिए हम आपको बताते हैं
उच्च रक्तचाप से बचाव के उपयों के बारे नियमित व्यायाम
उच्च
रक्तचाप की परेशानी से बचे रहें, इसके लिए नियमित व्यायाम करना चाहिए।
नियमित 30 मिनट तक किया गया व्यायाम आपको स्वस्थ्य रखता है। और आपका
रक्तचाप भी सामान्य रहता है। यदि व्यायाम के लिए समय न निकाल पाए, तो
प्रतिदिन कम से कम दो किलोमीटर पैदल चलने की कोशिश करें।
नमक का सेवन कम करें
आपको
भोजन में ज्यादा नमक खाने की आदत है, तो यह नुकसानदेह साबित हो सकती है।
ज्यादा नमक खाने से हाई ब्लड प्रेशर होने की आशंका बनी रहती है। यदि आप
नमक ज्यादा खाने की आदत पर तुरंत कंट्रोल नहीं कर पाते, तो धीरे-धीरे इसके
सेवन को कम करने की कोशिश करें।
शराब से रहे दूर
आप
धूम्रपान और शराब का सेवन करते हैं तो यह आदत भी उच्च रक्तचाप की
समस्या के लिए जिम्मेदार होती है। एल्कोहल के सेवन से दूर रहे और
धूम्रपान बंद कर अपने शरीर को स्वस्थ बनाए।
हरी सब्जियों का सेवन
भोजन
में मौसमी और हरी सब्जियों का सेवन शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
हरी सब्जियों से मिलने वाले पोषक तत्वों से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता
बढ़ती है और आप स्वस्थ रहते हैं।
वसा युक्त भोजन से परहेज
वसा
युक्त भोजन शरीर का मोटापा बढ़ाने के साथ ही कई प्रकार के रोगों के पनपने
का कारण होता है। मोटे व्यक्तियों में उच्च रक्तचाप की समस्या आम होती
है।
उच्च रक्तचाप से बचाव के अन्य उपचार
20 ग्राम प्याज के रस में लगभग 10 ग्राम शहद मिलाकर प्रतिदिन पीने से उच्च रक्तचाप के रोगियों को आराम मिलता है।
मैथी दाने का चूर्ण सुबह-शाम ताजे पानी के साथ लेने से उच्च रक्तचाप की समस्या में राहत मिलती है।
आंवला, सर्पगंधा और गिलाय तीनों का रस निकालकर पीना भी उच्च रक्तचाप में फायदेमंद रहता है।
मूली और नींबू का सेवन उच्च रक्तचाप की समस्या से ग्रस्त रोगियों के लिए अच्छा रहता है।
गाजर के एक गिलास जूस में दो से तीन चम्मच शहद मिलाकर पीने से हाई ब्लड प्रेशर सामान्य रहता है।
एक मुठ्ठी किशमिश और सोयाबीन को आहार का हिस्सा बनाकर भी उच्च रक्तचाप से बचा जा सकता है।
आंवला, सर्पगंधा और गिलाय तीनों का रस निकालकर पीना भी उच्च रक्तचाप में फायदेमंद रहता है।
मूली और नींबू का सेवन उच्च रक्तचाप की समस्या से ग्रस्त रोगियों के लिए अच्छा रहता है।
गाजर के एक गिलास जूस में दो से तीन चम्मच शहद मिलाकर पीने से हाई ब्लड प्रेशर सामान्य रहता है।
एक मुठ्ठी किशमिश और सोयाबीन को आहार का हिस्सा बनाकर भी उच्च रक्तचाप से बचा जा सकता है।
इन
सबके अलावा उच्च रक्तचाप के रोगियों को सुबह बिस्तर से उठने के बाद
किसी पार्क या अन्य जगह पर कम से कम दो किलोमीटर की सैर अवश्य करनी
चाहिए। यह उनके लिए बहुत ही फायदेमंद रहती है।
क्यों होता है लो ब्लड प्रेशर :-
जब
किसी के शरीर में रक्त-प्रवाह सामान्य से कम हो जाता है तो उसे निम्न
रक्तचाप या लो ब्लड प्रेशर कहते है। नार्मल ब्लड प्रेशर 120/80 होता है।
थोड़ा बहुत ऊपर-नीचे होने से कोई फर्क नही पड़ता। लेकिन, यदि ब्लड प्रेशर
90 से कम हो जाए तो उसे लो ब्लड प्रेशर कहते हैं।
अक्सर
लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते। जबकि लो ब्लड प्रेशर में शरीर में ब्लड का
दबाव कम होने से आवश्यक अंगों तक पूरा ब्लड नही पहुंच पाता जिससे उनके
कार्यो में बाधा पहुंचती है। ऐसे में दिल, किडनी, फेफड़े और दिमाग आंशिक
रूप से या पूरी तरह से काम करना भी बंद कर सकते हैं। आइए जानें क्या है लो
ब्लड प्रेशर के कारण, लक्षण और उपाय-
क्या हैं लक्षण
लो ब्लड प्रेशर के मरीजों को आमतौर पर चक्कर आना, आंखों के आगे अंधेरा आना, कुछ पल के लिए बेहोशी आना आदि प्रमुख लक्षण हैं।
ऐसे मरीज के हाथ-पैर ठंडे रहते हैं।
हार्ट में मिस्ड बीट्स महसूस की जाती है।
इस तरह के मरीजों के चेकअप में ब्लड प्रेशर में काफी अंतर होता हैं। अगर मरीज लेटा हो, बैठा हो और बाद में खड़ा हो, तो उसके ब्लड प्रेशर में काफी बदलाव आ जाता है।
हार्ट में मिस्ड बीट्स महसूस की जाती है।
इस तरह के मरीजों के चेकअप में ब्लड प्रेशर में काफी अंतर होता हैं। अगर मरीज लेटा हो, बैठा हो और बाद में खड़ा हो, तो उसके ब्लड प्रेशर में काफी बदलाव आ जाता है।
क्यों होता है ब्लड प्रेशर कम क्या है इलाज -
लो ब्लड प्रेशर के पीछे कई कारण हो सकते हैं-
1. दिल की बीमारी- ब्लड प्रेशर कम होना दिल की गंभीर बीमारी से जुड़ा होता है, दिल की बीमारी से हार्ट की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे हार्ट पर्याप्त खून को पम्प नहीं कर पाता और हमारा बीपी लो रहने लगता है। दिल के मरीजों और एनीमिया के शिकार लो बीपी को लेकर सावधान रहें।
2. आर्थोस्टेटिक हाइपर- टेंशन टाइपइसमें मरीज को खड़े होने पर चक्कर आते हैं, क्योंकि उसका ब्लड प्रेशर एकदम से 20 पॉइंट नीचे आ जाता है। यह नर्वस सिस्टम पर आधारित होता है। लेकिन कई बार दवाओं के साइड इफेक्ट से या एलर्जी से भी हो सकती है।
इसके अलावा शरीर के अंदरूनी अंगों से खून बह जाने या खून की कमी से, खाने में पौष्टिकता की कमी या अनियमितता से, लंग या फेफड़ों के अटैक से, हार्ट का वॉल्व खराब हो जाने से लो बीपी हो सकता हैं। अचानक सदमा लगने, कोई भयावह दृश्य देखने या खबर सुनने से भी लो बीपी हो सकता है।
सबसे
पहले लो ब्लड प्रेशर की आशंका होने पर लेटकर और खड़े होकर दोनों तरीको से
बीपी चैक कराए। तुरंत किसी डॉक्टर को दिखाए। अगर किसी दवा से लो ब्लड
प्रेशर हो रहा है तो डॉक्टर से सलाह लेकर दवा की मात्रा कम या पूरी तरह बंद
कर दे।
पोषक तत्वों से भरपूर आहार
लें, अलग-अलग किस्म के फलों, सब्जियों, अनाज, कम फैट वाले मांस और मछली को
भोजन में शामिल करें। कई बार थोड़ा-थोड़ा भोजन करें और खाने में आलू, चावल
और ब्रेड जैसे ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थों का प्रयोग कम कर
दे। स्मोकिंग से परहेज करें, एक्टिव रहें, ज्यादा पसीना निकालने वाले कामों
से बचें, धूप में ज्यादा न घूमें और पर्याप्त मात्रा में नमक खाएं और
ज्यादा टेंशन न करें तो लो बीपी से बचा जा सकता है।
जब ब्लडप्रेशर लो है तो क्या करें
जब ब्लडप्रेशर लो है तो क्या करें
तुरंत बैठ या लेट जाएं, मुट्ठियां भींचें, बांधें, खोलें, पैर हिलायें।
नमक या नमक-चीनी वाला पानी या चाय पीयें। पैरों के नीचे दो तकिए लगाकर लेटें।
जो लोग पहले से हाई बीपी की दवा खा रहे हैं, वे दवा खाना बंद कर दें।
जो लोग पहले से हाई बीपी की दवा खा रहे हैं, वे दवा खाना बंद कर दें।
इन सब के अलावा तुरन्त डॉक्टरी सलाह लें।
खतरनाक हो सकता है हाई ब्लड प्रेशर:-
क्या है हाई ब्लड प्रेशर
हाई ब्लड-प्रेशर सबसे घातक बीमारियों में है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक दुनिया भर में हर साल हाई ब्लड-प्रेशर के चलते 70 लाख मौतें होती हैं। दुनिया का लगभग हर तीसरा व्यक्ति इससे प्रभावित है। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि 2025 तक विश्व में 1.5 बिलियन से ज्यादा लोगों को हाई ब्लड-प्रेशर का शिकार हो सकते हैं। हाई ब्लड-प्रेशर का सीधे तौर पर कोई इलाज नहीं है, बल्कि इसमें जानकारी ही बचाव है। अगर आप अपने खानपान और लाइफस्टाइल पर काबू रखें तो इस पर काबू पाया जा सकता है।
रक्त
द्वारा धमनियों पर डाले गए दबाव को ब्लड-प्रेशर या रक्तचाप कहते हैं। हाई
ब्लड-प्रेशर किसी भी व्यक्ति को किसी भी उम्र में हो सकता है। यह बीमारी
पुरुष व महिला किसी को भी हो सकती है। एक बार अगर आप इस रोग के शिकार हो गए
तो इससे निकल पाना मुश्किल होता है। इसलिए सावधानी बरतना ही इसका सबसे
बड़ा इलाज है।
हाई ब्लड-प्रेशर को ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है। यह अपने साथ अन्य कई बीमारियां लेकर आता है। जिससे शरीर के अन्य हिस्से भी प्रभावित होते हैं।
पढ़े: योगा दिलाए हाई ब्लड प्रेशर में छुटकारा
हाई ब्लड-प्रेशर को ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है। यह अपने साथ अन्य कई बीमारियां लेकर आता है। जिससे शरीर के अन्य हिस्से भी प्रभावित होते हैं।
पढ़े: योगा दिलाए हाई ब्लड प्रेशर में छुटकारा
आंखों पर
हाई
ब्लड-प्रेशर से आंखों की समस्या हो सकती है। रोगी को आंखों की रोशनी कम
होने लगती है उसे धुंधला दिखाई देने लगता है। इसलिए ब्लड प्रेशर की समस्या
में आंखों की नियमित जांच की सलाह दी जाती है।
गुर्दे की समस्या
गुर्दा
हमारे शरीर से दूषित पदार्थों को बाहर निकालता है। हाई ब्लड-प्रेशर के
कारण किडनी की रक्त वाहिकाएं संकरी या मोटी हो सकती है। इससे किडनी अपना
काम ठीक से नहीं कर पाती और खून में दूषित पदार्थ जमा होने लगते हैं।
हार्ट अटैक का खतरा
हाई
ब्लड प्रेशर में सबसे ज्यादा खतरा हृदय को होता है। जब ह्वदय को संकरी या
सख्त हो चुकी रक्त वाहिकाओं के कारण पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलता तो सीने
में दर्द हो सकता है और अगर खून का बहाव रुक जाए तो हार्ट-अटैक भी हो सकता
है।
मस्तिष्क पर असर
घर बैठे ब्लड प्रेशर का इलाज:-
पिएं चुकंदर का जूस
लो ब्लड प्रेशर को सामान्य रखने में चुकंदर का जूस काफी कारगर होता है। जिन्हें लो ब्लड प्रेशर की समस्या है उन्हें रोजाना दो बार चुकंदर का जूस पीना चाहिए। हफ्ते भर में आप अपने ब्लड प्रेशर में सुधार पाएंगे।
जटामानसी
जटामानसी नामक एक आयुर्वेदिक औषधि भी लो ब्लड प्रेशर का निदान करने में मददगार है। जटामानसी का कपूर और दालचीनी के साथ मिश्रण बनाकर सेवन कर सकते हैं। इसके अलावा जटामानसी के अर्क (पानी के साथ उबालकर) को पीने से भी लो ब्लड प्रेशर की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।
एप्सम नमक से नहाएं
एप्सम नमक (मैग्नीशियम सल्फेट) से स्नान लो ब्लड प्रेशर को ठीक करने का सबसे सरलतम इलाज है। इसके लिए पानी में करीब आधा किलो एप्सम नमक मिलाएं और करीब आधा घंटा पानी में बैठें। बेहतर होगा कि सोने के पहले यह स्नान करें।
भोजन में बढ़ाएं पोषक तत्वों की मात्रा
प्रोटीन, विटामिन बी और सी लो ब्लड प्रेशर को ठीक रखने में मददगार साबित होते हैं। ये पोषक तत्व एड्रीनल ग्रंथि से निकलने वाले हार्मोनों के स्राव में वृद्धि कर लो ब्लड प्रेशर को तेजी से सामान्य करते हैं
फल और दूध का सेवन
पैदल चलें और साइकिल चलाएं
लो ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए पैदल चलना, साइकिल चलाना और तैरना जैसी कसरतें फायदेमंद साबित होती हैं। इन सबके अलावा सबसे जरूरी यह है कि व्यक्ति तनाव और काम की अधिकता से बचें।
घर बैठे ब्लड प्रेशर का इलाज:-
भागमभाग और तनाव भरी जिंदगी में लोगों में ब्लड प्रेशर (रक्तचाप) की समस्या पेश आ रही है। जितना घातक हाई ब्लड प्रेशर होता है उतना ही नुकसानदेह लो ब्लड प्रेशर। लो ब्लड प्रेशर की स्थिति वह होती है कि जिसमें रक्तवाहिनियों में खून का दबाव काफी कम हो जाता है। सामान्य रूप से 90/60 एमएम एचजी को लो ब्लड प्रेशर की स्थिति माना जाता है।
क्या हैं लक्षण
क्या हैं लक्षण
सुस्ती
कमजोरी
थकान
लो ब्लड प्रेशर के कारण
पोषक तत्व रहित भोजन
कुपोषण
खून की कमी
पेट व आंतों, किडनी और ब्लैडर में खून का कम पहुंचना
निराशा का भाव लगातार बने रहना
कैसे करें इलाज
पोषक तत्व रहित भोजन
कुपोषण
खून की कमी
पेट व आंतों, किडनी और ब्लैडर में खून का कम पहुंचना
निराशा का भाव लगातार बने रहना
कैसे करें इलाज
पिएं चुकंदर का जूस
लो ब्लड प्रेशर को सामान्य रखने में चुकंदर का जूस काफी कारगर होता है। जिन्हें लो ब्लड प्रेशर की समस्या है उन्हें रोजाना दो बार चुकंदर का जूस पीना चाहिए। हफ्ते भर में आप अपने ब्लड प्रेशर में सुधार पाएंगे।
जटामानसी
जटामानसी नामक एक आयुर्वेदिक औषधि भी लो ब्लड प्रेशर का निदान करने में मददगार है। जटामानसी का कपूर और दालचीनी के साथ मिश्रण बनाकर सेवन कर सकते हैं। इसके अलावा जटामानसी के अर्क (पानी के साथ उबालकर) को पीने से भी लो ब्लड प्रेशर की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।
एप्सम नमक से नहाएं
एप्सम नमक (मैग्नीशियम सल्फेट) से स्नान लो ब्लड प्रेशर को ठीक करने का सबसे सरलतम इलाज है। इसके लिए पानी में करीब आधा किलो एप्सम नमक मिलाएं और करीब आधा घंटा पानी में बैठें। बेहतर होगा कि सोने के पहले यह स्नान करें।
भोजन में बढ़ाएं पोषक तत्वों की मात्रा
प्रोटीन, विटामिन बी और सी लो ब्लड प्रेशर को ठीक रखने में मददगार साबित होते हैं। ये पोषक तत्व एड्रीनल ग्रंथि से निकलने वाले हार्मोनों के स्राव में वृद्धि कर लो ब्लड प्रेशर को तेजी से सामान्य करते हैं
यह भी कारगर है लो ब्लड प्रेशर के निदान में
फल और दूध का सेवन
लो ब्लड प्रेशर को दूर करने के लिए ताजे फलों का सेवन करें। दिन में करीब तीन से चार बार जूस का सेवन करना फायदेमंद रहेगा। जितना संभव हो सके, लो ब्लड प्रेशर के मरीज दूध का सेवन करें।
पैदल चलें और साइकिल चलाएं
लो ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए पैदल चलना, साइकिल चलाना और तैरना जैसी कसरतें फायदेमंद साबित होती हैं। इन सबके अलावा सबसे जरूरी यह है कि व्यक्ति तनाव और काम की अधिकता से बचें।

good aarticle
ReplyDeleteVery nice information
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