त्वचा की देखभाल » घर पर इलाज
लगभग छह हजार वर्ष पुरानी यह पद्धति एक बार फिर लोगों का विश्वास जीत रही है। इसके इलाज में न अधिक गोलियों की जरूरत होती है और न ही बहुत गंभीर उपचार की। इसके ढेरों नुस्खे तो ऐसे है ‘जिन्हे दादी-नानी के नुस्खे कहकर’ महिलाएं घर पर ही आजमा कर लाभ ले रही है।
घर पर इलाज : कल्याणपुर निवासी 70 वर्षीय रामजानकी अवस्थी बताती है, ”घर में किसी के भी बीमार होने पर मैं आयुर्वेदिक नुस्खे आजमाने की सलाह देती हूं। हमारे घर में मौसम से होने वाले बुखार और जुकाम पर तो कोई डॉक्टर से दवा लेने ही नहीं जाता। हमें पता है कि बदलते मौसम से होने वाला जुकाम या बुखार तीन से चार दिन में सही हो जाता है। इसलिए नमक पानी का गरारा, अदरख, तुलसी, और काली मिर्च की चाय या काढ़ा का सेवन करते है। जुकाम ज्यादा तेज होता है तो सोते वक्त दूध के साथ हल्दी पाउडर लेने से दो या तीन दिन में आराम मिल जाता है। यह ऐसे घरेलू नुस्खे है, जिन्हे वर्षो से आजमाया जा रहा है और यह बहुत ही कारगर है।”
कोई साइड इफेक्ट नहीं : कुरसवां निवासी 65 वर्षीया राजेश्वरी भाटिया कहती है, ”घरेलू नुस्खों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनका कोई साइड इफेक्ट नहीं है और इसमें प्रयोग होने वाली सारी चीजें घर में मौजूद होती है। अगर दांत में दर्द है और आप मेथी के गुनगुने पानी से सिकाई करती है तो इससे भला क्या नुकसान होगा या पैरों में सूजन आने पर गोली गटकने के बजाय नमक पानी से सिकाई कर ली जाए तो बुराई क्या है? इससे न सिर्फ पैसे की बचत होती है, बल्कि बिना नुकसान के फायदा मिलता है।”
काम आई दादी की टिप्स : गर्ल्स में चर्म रोग और बालों के गिरने की परेशानी आम है। साइड इफेक्ट न होने के कारण वे एलोपैथी के बजाय आयुर्वेद के जरिये इन समस्याओं का इलाज कराने पर जोर दे रही है। क्राइस्टचर्च कॉलेज की स्टूडेंट विनती अरोड़ा कहती है, ”मैं काफी समय से गिरते बालों से परेशान थी। मंहगी दवाओं के इलाज से जब आराम नहीं मिला तो दादी का बताया जड़ी-बूटियों वाला नुस्खा आजमाया। इन दिनों मैं भृंगराज, मुलेठी, आंवला, काले तिल से बने चूर्ण का सेवन कर रही हूं। अभी एक माह ही बीता है, लेकिन बहुत फायदा हुआ है।”
हर बीमारी का इलाज संभव : आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. सतीश चंद्र शुक्ला बताते है, ”तनाव, अवसाद, मोटापा आदि बीमारियों के अलावा ऑर्थराइटिस और असाध्य बीमारियों के रोकथाम का इलाज आयुर्वेद से संभव है। बुजुर्गो द्वारा बताए गए सारे नुस्खे आयुर्वेदिक ही होते है। हां, अब थोड़ा बदलाव आया है। नुस्खे के तौर पर आजमाई जाने वाली घरेलू औषधियां हर्बल कंपनियों के उत्पाद के रूप में बाजार में भी मौजूद है।” आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. ओमप्रकाश आनंद कहते है, ”बीमारियां तभी घेरती है, जब शरीर में कैलशियम, आयरन, विटामिन या रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। आयुर्वेद में प्रयोग होने वाली आंवला, सतावरी, मुलेठी, हरितकी, गिलोय, पिपली, गुग्गल, त्रिफला आदि औषधिया शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती हैं। यह औषधियां एंटीबायोटिक दवाओं की तरह काम करती है। साइड इफेक्ट न होने के कारण नई पीढ़ी का विश्वास इन नुस्खों पर एक बार फिर जम रहा है।”
लगभग छह हजार वर्ष पुरानी यह पद्धति एक बार फिर लोगों का विश्वास जीत रही है। इसके इलाज में न अधिक गोलियों की जरूरत होती है और न ही बहुत गंभीर उपचार की। इसके ढेरों नुस्खे तो ऐसे है ‘जिन्हे दादी-नानी के नुस्खे कहकर’ महिलाएं घर पर ही आजमा कर लाभ ले रही है।
घर पर इलाज : कल्याणपुर निवासी 70 वर्षीय रामजानकी अवस्थी बताती है, ”घर में किसी के भी बीमार होने पर मैं आयुर्वेदिक नुस्खे आजमाने की सलाह देती हूं। हमारे घर में मौसम से होने वाले बुखार और जुकाम पर तो कोई डॉक्टर से दवा लेने ही नहीं जाता। हमें पता है कि बदलते मौसम से होने वाला जुकाम या बुखार तीन से चार दिन में सही हो जाता है। इसलिए नमक पानी का गरारा, अदरख, तुलसी, और काली मिर्च की चाय या काढ़ा का सेवन करते है। जुकाम ज्यादा तेज होता है तो सोते वक्त दूध के साथ हल्दी पाउडर लेने से दो या तीन दिन में आराम मिल जाता है। यह ऐसे घरेलू नुस्खे है, जिन्हे वर्षो से आजमाया जा रहा है और यह बहुत ही कारगर है।”
कोई साइड इफेक्ट नहीं : कुरसवां निवासी 65 वर्षीया राजेश्वरी भाटिया कहती है, ”घरेलू नुस्खों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनका कोई साइड इफेक्ट नहीं है और इसमें प्रयोग होने वाली सारी चीजें घर में मौजूद होती है। अगर दांत में दर्द है और आप मेथी के गुनगुने पानी से सिकाई करती है तो इससे भला क्या नुकसान होगा या पैरों में सूजन आने पर गोली गटकने के बजाय नमक पानी से सिकाई कर ली जाए तो बुराई क्या है? इससे न सिर्फ पैसे की बचत होती है, बल्कि बिना नुकसान के फायदा मिलता है।”
काम आई दादी की टिप्स : गर्ल्स में चर्म रोग और बालों के गिरने की परेशानी आम है। साइड इफेक्ट न होने के कारण वे एलोपैथी के बजाय आयुर्वेद के जरिये इन समस्याओं का इलाज कराने पर जोर दे रही है। क्राइस्टचर्च कॉलेज की स्टूडेंट विनती अरोड़ा कहती है, ”मैं काफी समय से गिरते बालों से परेशान थी। मंहगी दवाओं के इलाज से जब आराम नहीं मिला तो दादी का बताया जड़ी-बूटियों वाला नुस्खा आजमाया। इन दिनों मैं भृंगराज, मुलेठी, आंवला, काले तिल से बने चूर्ण का सेवन कर रही हूं। अभी एक माह ही बीता है, लेकिन बहुत फायदा हुआ है।”
हर बीमारी का इलाज संभव : आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. सतीश चंद्र शुक्ला बताते है, ”तनाव, अवसाद, मोटापा आदि बीमारियों के अलावा ऑर्थराइटिस और असाध्य बीमारियों के रोकथाम का इलाज आयुर्वेद से संभव है। बुजुर्गो द्वारा बताए गए सारे नुस्खे आयुर्वेदिक ही होते है। हां, अब थोड़ा बदलाव आया है। नुस्खे के तौर पर आजमाई जाने वाली घरेलू औषधियां हर्बल कंपनियों के उत्पाद के रूप में बाजार में भी मौजूद है।” आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. ओमप्रकाश आनंद कहते है, ”बीमारियां तभी घेरती है, जब शरीर में कैलशियम, आयरन, विटामिन या रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। आयुर्वेद में प्रयोग होने वाली आंवला, सतावरी, मुलेठी, हरितकी, गिलोय, पिपली, गुग्गल, त्रिफला आदि औषधिया शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती हैं। यह औषधियां एंटीबायोटिक दवाओं की तरह काम करती है। साइड इफेक्ट न होने के कारण नई पीढ़ी का विश्वास इन नुस्खों पर एक बार फिर जम रहा है।”

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